Class VIII, Amrai, Kya Kare Meenu (Story) – Usha Mahajan, ICSE Board, The Best Solutions

कुछ करके सीखिए

भारतीय महिलाओं ने विभिन्न क्षेत्रों में अपना और देश का नाम रोशन किया है। ये किन क्षेत्रों से संबंधित हैं, बताइए-

कार्यक्षेत्र – पहली महिला बचेंद्री पाल पर्वतारोहण (Mountaineering) के क्षेत्र से संबंधित हैं, जबकि दूसरी महिला किरण बेदी प्रशासनिक सेवा (IPS) और लोक सेवा के क्षेत्र से संबंधित हैं।

ऐतिहासिक उपलब्धि – बचेंद्री पाल माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुँचने वाली पहली भारतीय महिला हैं, जिन्होंने 1984 में यह गौरव हासिल किया।

प्रथम महिला अधिकारी – किरण बेदी भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में शामिल होने वाली भारत की पहली महिला अधिकारी हैं, जिन्होंने पुलिस बल में महिलाओं के लिए रास्ते खोले।

समाज सेवा और सुधार – किरण बेदी को जेल सुधारों (विशेषकर तिहाड़ जेल) के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘रेमन मैग्सेसे पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है।

महिला सशक्तिकरण – ये दोनों ही महिलाएँ अपने-अपने क्षेत्रों में बाधाओं को तोड़कर देश की लाखों लड़कियों के लिए प्रेरणा और महिला सशक्तीकरण का प्रतीक बनी हैं।

क्या करे मीनू‘ – पाठ का सारांश

उषा महाजन द्वारा रचित कहानी ‘क्या करे मीनू’ बाल श्रम (Child Labour), बच्चों के अधिकारों और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित एक मर्मस्पर्शी कहानी है। यह कहानी समाज के दो अलग-अलग वर्गों के बच्चों के बीच के भावनात्मक जुड़ाव और बड़ों की संकीर्ण मानसिकता को दर्शाती है।

  1. बाल श्रम और वैचारिक मतभेद

कहानी की शुरुआत श्रीमती सहगल और उनकी भतीजी गरिमा के बीच बहस से होती है। गरिमा, मीनू नाम की एक छोटी बच्ची को घर के काम में लगा देख अपनी बुआ (श्रीमती सहगल) को टोकती है कि यह ‘चाइल्ड लेबर’ है और मीनू के पढ़ने के दिन हैं। श्रीमती सहगल अपनी दलील देती हैं कि मीनू दिल्ली की गलियों में भटकने से बेहतर यहाँ सुरक्षित है। गरिमा के जाने के बाद भी श्रीमती सहगल का मन विचलित रहता है, लेकिन वे अपनी सुविधा और घर के काम के बोझ के आगे मीनू के अधिकारों को नजरअंदाज कर देती हैं।

  1. मीनू और पिंकी की दोस्ती

श्रीमती सहगल की पोती पिंकी और मीनू, दोनों हमउम्र हैं। बड़ों की पाबंदियों के बावजूद दोनों छुप-छुपकर बातें करती हैं और खेलती हैं। पिंकी मीनू को अपनी स्कूल की किताबें, वर्कबुक और ड्राइंग बुक दिखाकर स्कूल के मज़े बताती है। मीनू के मन में भी स्कूल जाने की दबी हुई इच्छा जागने लगती है। एक दिन पिंकी की माँ रोहिणी उन्हें देख लेती है और पिंकी को डाँटने के साथ मीनू को फटकार लगाती है कि वह पिंकी को बिगाड़ रही है।

  1. मीनू की विदाई और बदलाव

जब मीनू की काकी उसे लेने आती है, तो मीनू रोने लगती है। श्रीमती सहगल उसे कुछ दिनों के लिए गाँव भेज देती हैं। गाँव जाने से पहले मीनू और पिंकी कमरे में अकेले मिलते हैं। मीनू के जाने के बाद पिंकी उदास हो जाती है। कई दिनों तक मीनू के वापस न आने पर जब पता किया जाता है, तो एक चौंकाने वाली बात सामने आती है। मीनू की काकी ने उसे गाँव वापस भेज दिया है क्योंकि मीनू अब साफ़-सफाई और पढ़ने की जिद करने लगी थी।

  1. संदेह और सच्चाई का उद्घाटन

श्रीमती सहगल को डर लगता है कि कहीं मीनू घर से कुछ कीमती सामान तो नहीं ले गई। वे पिंकी के कमरे की तलाशी लेती हैं और देखती हैं कि पिंकी की फोटो वाला फ्रेम गायब है। पूछने पर पिंकी बताती है कि वह फ्रेम उसने मीनू को उपहार में दिया था।

  1. कहानी का मार्मिक अंत

जब श्रीमती सहगल पिंकी से पूछती हैं कि उसने फोटो क्यों दी, तो पिंकी रुआँसी होकर अपना दराज खोलती है। पिंकी की हथेली पर वही घटिया से गुलाबी प्लास्टिक के ‘हेयर क्लिप’ थे, जो श्रीमती सहगल ने पहले ही दिन मीनू के बालों से उतरवाए थे। मीनू ने बदले में अपनी सबसे कीमती वस्तु पिंकी को दे दी थी। यह देखकर श्रीमती सहगल की आँखें खुल जाती हैं और उन्हें बच्चों की निश्छल दोस्ती और मासूमियत का अहसास होता है।

कहानी का संदेश (Moral of the Story) –

यह कहानी हमें सिखाती है कि –

बच्चों का दिल भेदभाव नहीं जानता; उनके लिए दोस्ती और भावनाएँ सबसे ऊपर हैं।

बाल श्रम न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह एक बच्चे के सपनों और उसके विकास को कुचल देता है।

अमीरी-गरीबी की खाई बड़ों ने बनाई है, जबकि बच्चे प्यार और बराबरी के हकदार हैं।

मौखिक (बोध प्रश्न)

प्रश्न 1 – गरिमा ने आते ही सबसे पहले किस बात पर ध्यान दिया?

उत्तर – गरिमा ने आते ही सबसे पहले इस बात पर ध्यान दिया कि श्रीमती सहगल ने एक छोटी बच्ची मीनू को घर के काम में लगा रखा है। उसने तुरंत इसे ‘चाइल्ड लेबर’ अर्थात् बाल श्रम कहकर अपनी बुआ को टोका।

प्रश्न 2 – गरिमा बार-बार विरोध क्यों जता रही थी?

उत्तर – गरिमा बार-बार विरोध इसलिए जता रही थी क्योंकि वह बच्चों के अधिकारों और उनकी शिक्षा के प्रति जागरूक थी। उसका मानना था कि मीनू के ये दिन काम करने के नहीं बल्कि स्कूल जाने और पढ़ने-लिखने के हैं।

 

मौखिक (बोध प्रश्न)

प्रश्न  – पिंकी किसे अपनी कॉपी-किताब दिखा रही थी?

उत्तर – पिंकी अपने कमरे में मीनू को अपनी स्कूल की कॉपी-किताबें, वर्कबुक और ड्राइंग बुक दिखा रही थी।

प्रश्न  – रोहिणी ने किसे फटकार लगाई?

उत्तर – रोहिणी ने मीनू को जोर से फटकार लगाई और उसे तुरंत अपना काम करने के लिए कमरे से बाहर जाने को कहा। उसने अपनी बेटी पिंकी के कान भी उमेठे।

 

मौखिक (बोध प्रश्न)

प्रश्न  – मीनू किस बात से खुश थी?

उत्तर – मीनू इस बात से बहुत खुश थी कि वह कुछ दिनों के लिए अपनी काकी के साथ अपने गाँव जा रही थी। वह अपने चचेरे भाई-बहनों से मिलने के लिए बहुत उत्साहित थी।

प्रश्न – मीनू किससे मिलकर अपने घर जाना चाहती थी?

उत्तर – मीनू पिंकी से मिलकर ही अपने घर जाना चाहती थी। वह अपनी इस छोटी दोस्त को बिना बताए या बिना मिले नहीं जाना चाहती थी।

 

शब्दार्थ (Word Meaning)

1 – बेचैन – व्याकुल / परेशान – Restless / Anxious

2 – चाइल्ड लेबर – बाल श्रम – Child Labour

3 – दलील – तर्क – Argument / Logic

4 – अधिकार – हक – Right

5 – सज्जन – भला मानस / अच्छा व्यक्ति – Gentleman / Noble person

6 – कामगार – कर्मचारी / मज़दूर – Worker / Employee

7 – आदर्शवाद – उच्च सिद्धांतों वाली सोच – Idealism

8 – यूटोपिया – काल्पनिक सुखद संसार – Utopia (An imaginary perfect world)

9 – सिद्धांत – नियम / आदर्श – Principle / Theory

10 – व्यवहार – आचरण / अमल – Behavior / Practice

11 – ओहदा – पद / रुतबा – Rank / Status

12 – कार्यरत – काम में लगा हुआ – Employed / Working

13 – साक्षर – पढ़ा-लिखा – Literate

14 – प्राणी – जीव / सदस्य – Living being / Soul

15 – नानी याद आना – बहुत कठिनाई होना – To be in a great fix

16 – उमेठना – मरोड़ना (कान मरोड़ना) – To twist

17 – रुआँसी – रोने जैसी सूरत – On the verge of tears

18 – फटकार – डाँट – Scolding / Rebuke

19 – सरपट – बहुत तेज़ दौड़ना – At full gallop / Very fast

20 – सिसकना – सुबक-सुबक कर रोना – Sobbing

21 – घुड़की – डाँट-डपट – Threat / Rebuff

22 – पगार – वेतन / तनख्वाह – Salary / Wages

23 – स्तब्ध – हैरान / जड़वत – Stunned / Petrified

24 – कौंधना – अचानक विचार आना – Flashed (like lightning)

25 – सलामत – सुरक्षित – Safe / Intact

26 – संशय – शक / दुविधा – Doubt / Hesitation

27 – विस्मित – चकित – Amazed

28 – विस्फारित – पूरी तरह खुली हुई (आँखें) – Wide open / Dilated

29 – घटिया – कम स्तर का / सस्ती – Inferior / Cheap quality

30 – उपहार (गिफ़्ट) – भेंट – Gift / Present

लिखित

  1. एक वाक्य में उत्तर लिखिए-

क. मीनू किसके घर में काम करती थी?

उत्तर – मीनू श्रीमती सहगल के घर में काम करती थी।

ख. इस कहानी का मुख्य पात्र कौन है?

 

उत्तर – इस कहानी की मुख्य पात्र मीनू है।

ग. रोहिणी का व्यवहार मीनू के प्रति कैसा था?

उत्तर – रोहिणी का व्यवहार मीनू के प्रति कठोर और उपेक्षापूर्ण था।

घ. यह कहानी किस समस्या को दरशाती है?

उत्तर – यह कहानी बाल श्रम (Child Labour) और बच्चों के शिक्षा के अधिकार के हनन की समस्या को दर्शाती है।

ङ मीनू घर जाते हुए पिंकी को क्या उपहार देकर गई?

उत्तर – मीनू पिंकी को अपने दो गुलाबी प्लास्टिक के हेयर क्लिप उपहार में देकर गई।

 

  1. विस्तार से प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

क. मीनू कौन थी और वह क्या करती थी?

उत्तर – मीनू एक छोटी गरीब बच्ची थी जिसे उसकी काकी ने श्रीमती सहगल के घर नौकरानी के रूप में रखा था। वह घर के छोटे-मोटे काम निपटाती थी और श्रीमती सहगल के परिवार की देखभाल में मदद करती थी।

ख. गरिमा की किन बातों का श्रीमती सहगल के पास कोई जवाब नहीं था?

उत्तर – गरिमा ने जब बच्चों के अधिकारों और शिक्षा की बात की, और यह सुझाव दिया कि मीनू को काम पर रखने के बजाय उसकी काकी को रखा जाना चाहिए था और मीनू को स्कूल भेजा जाना चाहिए था, तब श्रीमती सहगल निरुत्तर हो गईं।

ग. मीनू के न लौटने पर श्रीमती सहगल को क्या शक हुआ?

उत्तर – श्रीमती सहगल को यह शक हुआ कि कहीं मीनू की काकी ने उसे अधिक पैसों के लालच में किसी और घर तो नहीं रखवा दिया, या फिर मीनू घर का कोई कीमती सामान जैसे – घड़ियाँ, अँगूठियाँ आदि तो साथ नहीं ले गई।

घ. मीनू की काकी श्रीमती सहगल के परिवार से क्यों नाराज़ थी?

उत्तर – काकी इसलिए नाराज़ थी क्योंकि मीनू वहाँ से ‘बिगड़’ कर लौटी थी। वह अब साफ़-सफाई और पिंकी की तरह स्कूल जाने की ज़िद करने लगी थी, जिससे काकी को लगा कि वह अब काम के लायक नहीं रही।

ङ. ‘चाइल्ड लेबर’ यानी ‘बाल मजदूरी’ से आप क्या समझते हैं?

उत्तर – 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से मज़दूरी या घरेलू काम करवाना ‘बाल मजदूरी’ कहलाता है। यह एक सामाजिक अभिशाप है जो बच्चों से उनका बचपन, खेल-कूद और शिक्षा का अधिकार छीन लेता है।

 

  1. ‘हाँ’ या ‘नहीं’ में उत्तर दीजिए-

क. गरिमा ने श्रीमती सहगल को बच्चों के अधिकारों के बारे में बताया। (हाँ)

ख. रोहिणी ने मीनू की शिक्षा की ज़िम्मेदारी उठा ली। (नहीं)

ग. पिंकी मीनू को अपनी कॉपी-किताबें दिखाती रहती थी। (हाँ)

घ. मीनू स्कूल जाना चाहती थी। (हाँ)

ङ. श्रीमती सहगल ने मीनू को वापस काम पर बुला लिया। (नहीं)

 

  1. सही विकल्प/ वाक्यांश से वाक्य पूरे कीजिए-

क. जब से _______ तब से श्रीमती सहगल बेचैन रहने लगी थीं।

मीनू काम छोड़कर चली गई थी

गरिमा ने बाल शोषण की बात की थी

उनकी तबीयत खराब हुई थी

उनकी भतीजी गरिमा मिलने आई थी

ख. बच्चों का मूल अधिकार है ________

काम करना

ज़िद करना

शिक्षा पाना

खेलना-कूदना

ग. काकी _________ हैरान रह गई थी।

मीनू को रोता देखकर

मीनू को पढ़ते देखकर

पगार कम मिलने पर

रोहिणी का व्यवहार देखकर

घ. जाते समय मीनू ने पिंकी को ___________ उपहार में दिए।

फ़ोटो फ्रेम

फ्रॉक

किताब

हेयर – क्लिप

भाषा-बोध (Language Skills)

  1. इन संज्ञा शब्दों के लिए पाठ में आए विशेषण शब्द चुनकर लिखिए-

उदास, नाचनेवाली, सजावटी, गुलाबी, रुआँसी, विस्फारित

रुआँसी पिंकी

उदास चेहरा

सजावटी सामान

नाचनेवाली गुड़िया

विस्फारित आँखें

गुलाबी हेयर क्लिप

 

  1. पाठ में कुछ अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग हुआ है। उनकी सूची बनाइए।

1 – ओ गॉड (Oh God) – हे भगवान

2 – चाइल्ड लेबर (Child Labour) – बाल श्रम

3 – यूटोपिया (Utopia) – काल्पनिक सुखद संसार

4 – वर्कबुक (Workbook) – अभ्यास पुस्तिका

5 – कर्सिव राइटिंग (Cursive Writing) – घुमावदार लिखावट

6 – मैथ्स (Maths) – गणित

7 – ड्रॉइंग बुक (Drawing Book) – चित्रकला पुस्तिका

8 – स्क्रैप बुक (Scrap Book) – कतरन पुस्तिका

9 – टिफ़िन टाइम (Tiffin Time) – मध्यावकाश / खाने का समय

10 – स्कूल बैग (School Bag) – बस्ता

11 – बर्थडे (Birthday) – जन्मदिन

12 – गिफ़्ट (Gift) – उपहार

13 – एलबम (Album) – छायाचित्र संग्रह

14 – प्लास्टिक बैग (Plastic Bag) – प्लास्टिक की थैली

15 – फ़ोन (Phone) – दूरभाष

16 – फ्रेम (Frame) – ढांचा (चित्र का)

17 – शेल्फ़ (Shelf) – ताक / खाना

18 – पेन (Pen) – कलम

19 – पेंसिल (Pencil) – पेंसिल

20 – क्रिस्टल (Crystal) – बिल्लौर / स्फटिक

21 – स्टडी टेबल (Study Table) – पढ़ने की मेज़

22 – हेयर क्लिप (Hair Clip) – बालों का चिमटा

 

  1. रेखांकित कारक के नाम पर सही का निशान लगाइए-

क. कभी-कभी गिलहरियों के बच्चे पेड़ से गिर पड़ते।

  • कर्ता
  • अधिकरण
  • करण
  • अपादान

ख. उसके प्रत्येक अंश से मैं परिचित हो गया।

  • कर्ता
  • कर्म
  • करण
  • अपादान

ग. देहरादून में मुझे एक विशेष लाभ मिला था।

  • कर्ता
  • संबंध
  • करण
  • अधिकरण

 

  1. निम्नलिखित शब्दों के विलोम लिखिए – (Word Power)

सवाल X जवाब

अधिकार X अनाधिकार

उपेक्षा X अपेक्षा

सज्जन X दुर्जन

साक्षर X निरक्षर

निराशा X आशा

 

  1. नीचे दिए गए अपठित गद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

स्वामी विवेकानंद और उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस बैठे थे। विवेकानंद ने अपने मन की बात कही, “मेरे मन में तपस्या की चाहत जगी है लेकिन मैं तपस्या हिमालय की शांत कंदराओं में करना चाहता हूँ। वहाँ तपस्या न विघ्न-बाधाएँ आएँगी और न ही कभी मेरी एकाग्रता भंग होगी। गुरु जी, अभी मेरे जीवन की शुरुआत है। मैं गलत फ़ैसले भी ले सकता हूँ इसलिए आपसे मार्गदर्शन चाहता हूँ।” विवेकानंद की इस बात पर परमहंस बोले, “यदि मेरा मार्गदर्शन चाहते हो तो वह मैं अवश्य दूँगा। मैं यह कहूँगा कि हमारे क्षेत्र के लोग भूख से तड़प रहे हैं, रोगों से ग्रस्त हैं। चारों ओर अशिक्षा एवं अज्ञान का अँधेरा छाया हुआ है। यहाँ लोग रोते-चिल्लाते रहें और तुम हिमालय की किसी गुफा में तपस्या में, समाधि में लीन रहो, क्या इसे तुम्हारी आत्मा स्वीकार करेगी?” रामकृष्ण परमहंस के इन शब्दों ने स्वामी विवेकानंद की आत्मा को झकझोर डाला। उनकी दृष्टि ही बदल गई। उन्होंने उसी समय संकल्प किया कि वह अपना जीवन गरीबों की सेवा एवं शिक्षा का प्रचार कर अज्ञान को दूर करने में लगाएँगे। वह परमहंस का आशीर्वाद लेकर चले आए। आजीवन वह मानव-सेवा के कार्य में लगे रहे।

क. विवेकानंद के मन में क्या बात आई?

उत्तर – उनके मन में हिमालय की शांत गुफाओं में जाकर तपस्या करने की चाहत जगी।

ख. विवेकानंद ने हिमालय की शांत कंदराओं को तपस्या के लिए क्यों चुना?

उत्तर – ताकि वहाँ कोई विघ्न-बाधा न आए और उनकी एकाग्रता भंग न हो।

ग. विवेकानंद ने मार्गदर्शन लेने को उचित क्यों माना?

उत्तर – क्योंकि वे अपने जीवन की शुरुआत में थे और उन्हें डर था कि वे गलत फैसला न ले लें।

घ. आत्मा को झकझोर डालना‘ का क्या अर्थ है?

उत्तर – मन को गहराई तक प्रभावित करना या आंतरिक चेतना को जगा देना।

 

जीवन कौशल एवं मूल्य (Life Skills and Values)

सभी के जीवन में साक्षरता का महत्त्व है तथा अपने अधिकारों की रक्षा करने के लिए सक्रिय बनने की आवश्यकता है। बालश्रम रोकने के लिए समाज को कैसे जागरूक किया जा सकता है? आपको इसके लिए कौन-कौन से माध्यम उपयोगी लगते हैं? बताइए।

साक्षरता मनुष्य को जागरूक बनाकर शोषण से बचाती है। बाल श्रम रोकने के लिए समाज में शिक्षा के प्रति चेतना जगाना अनिवार्य है। इसके लिए नुक्कड़ नाटक, सोशल मीडिया अभियान, और पोस्टर प्रदर्शनी जैसे माध्यम अत्यंत उपयोगी हैं। साथ ही, अभिभावकों को सरकारी योजनाओं और बच्चों के अधिकारों की जानकारी देकर उन्हें जागरूक किया जा सकता है। सामूहिक प्रयास और कड़े कानून ही बच्चों को मजदूरी से निकाल कर स्कूल तक पहुँचा सकते हैं।

रचनात्मक गतिविधियाँ (Creative Activities)

अपने मुख से (Oral Expression)

मीनू पढ़ना चाहती थी पर उसकी काकी उसे वापस गाँव भेज देती हैं। यदि आपको उसकी मदद करने का अवसर मिले तो आप किस तरह उसकी सहायता करेंगे?

यदि मुझे मीनू की सहायता करने का अवसर मिले, तो मैं सबसे पहले उसके परिवार और काकी को शिक्षा के महत्त्व के बारे में समझाऊँगा। मैं उसे पास के किसी सरकारी स्कूल में दाखिला दिलाने में मदद करूँगा जहाँ शिक्षा मुफ्त है। साथ ही, मैं उसे अपनी पुरानी किताबें और स्टेशनरी दूँगा और समय निकालकर उसे स्वयं पढ़ाऊँगा ताकि वह अपने सपनों को पूरा कर सके।

 

अपनी कलम से (Creative Writing)

बचपन हम सभी की स्मृतियों में हमेशा बसा रहता है। अपने बचपन के किसी ऐसे प्रसंग के बारे में लिखिए, जिसे आप कभी भूल नहीं सकते।

मुझे याद है जब मैंने पहली बार बारिश में कागज़ की नाव चलाई थी। वह छोटी सी नाव और उसे पानी में बहते देखने की खुशी आज भी मेरे मन में ताज़ा है।

‘बाल मज़दूरी’ या ‘बाल-शोषण’ पर अपने विचार लिखिए।

बाल मज़दूरी पर विचार – बाल मज़दूरी बचपन और सपनों की हत्या है। हर बच्चे का हाथ औज़ार नहीं, किताब थामने के लिए बना है। समाज को जागरूक होकर इन मासूमों को शिक्षा का अधिकार दिलाना चाहिए।

 

अपनी कल्पना से (From my Imagination)

यदि विद्यालय में एक नाटक का आयोजन हो, जिसमें बालश्रम के मुद्दे पर ध्यान केंद्रित किया जाए। आप नाटक में कौन-सा किरदार निभाएँगे और नाटक के माध्यम से कौन-से संदेश को साझा करने का प्रयास करेंगे?

यदि विद्यालय में बालश्रम पर आधारित नाटक हो, तो मैं एक शिक्षक या जागरूक छात्र का किरदार निभाना चाहूँगा। इस पात्र के माध्यम से मैं यह संदेश दूँगा कि शिक्षा ही गरीबी और शोषण की बेड़ियों को तोड़ने का एकमात्र सशक्त हथियार है। मैं समाज को यह समझाने का प्रयास करूँगा कि बच्चों के हाथों में औज़ार थमाना उनके भविष्य के साथ अन्याय है; असली प्रगति उन्हें स्कूल भेजने में ही है।

 

परियोजना कार्य (Project Work)

‘बचाएँ बचपन’ शीर्षक के अंतर्गत इस कविता को अपने सहपाठियों के साथ आगे बढ़ाइए-

आओ बढ़ाएँ कदम बचपन को थामें

आओ बचाएँ बचपन फैलाकर बाँहें

कोमल नन्हे कदम बहक न जाएँ

बचाकर बचपन घर आँगन महकाएँ।

आओ बढ़ाएँ कदम बचपन को थामें,

आओ बचाएँ बचपन फैलाकर बाँहें।

कोमल नन्हे कदम बहक न जाएँ,

बचाकर बचपन घर आँगन महकाएँ।

छीनें न इनसे इनके प्यारे खेल,

मजबूरी का न हो इन पर मेल।

पढ़-लिखकर जब ये आगे बढ़ेंगे,

तभी देश की नई तकदीर लिखेंगे।

आओ मिलकर एक कसम हम खाएँ,

हर बच्चे को अब स्कूल पहुँचाएँ।

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