अंबरीष एक प्रजापालक और हरिभक्त राजा थे। उनकी रानी भी उन्हीं की भाँति वैष्णव विचारों की पति-परायण नारी थी। राजा नियमित रूप से यज्ञ आदि किया करते थे और एकादशी के दिन निर्जला व्रत रखकर द्वादशी को ब्राह्मणों को गायेँ दान किया करते...
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कृष्ण ने मगरमच्छ को क्यों मारा? व गजेंद्र मोक्ष
एक बार हू-हू नाम का एक गंधर्व स्त्रियों के साथ वन-विहार के लिए निकला। त्रिकूट पर्वत के मध्य ऋतुमान उद्यान में एक सुंदर सरोवर देखकर उसने अपना विमान नीचे उतारा और साथ आई स्त्रियों के साथ सरोवर के जल में कीड़ा करने लगा। उसी समय देवल...
आखिर समुद्र मंथन क्यों हुआ था?
महर्षि दुर्वासा के शाप से देवता तेजहीन हो गए तो असुर और दैत्यों ने उन पर मनमाने अत्याचार करने आरंभ कर दिए। निर्बल और तेजहीन देवता भगवान विष्णु की शरण में पहुँचे। उन्होंने श्रीहरि से प्रार्थना की, “प्रभु, हम पर कृपा कीजिए और किसी...
दधीचि ने अस्थि दान क्यों किया?
एक बार देवराज इंद्र के मन में अभिमान पैदा हो गया जिसके फलस्वरूप उसने देवगुरु बृहस्पति का अपमान कर दिया। उसके आचरण से क्षुब्ध होकर देवगुरु इंद्रपुरी छोड़कर अपने आश्रम में चले गए। बाद में जब इंद्र को अपनी भूल का आभास हुआ तो वह बहुत...
अजामिल कौन था? नारायण नाम की महिमाअजामिल कौन था?
अजामिल के पिता एक धर्मपरायण व्यक्ति थे। वह शास्त्रों के अनुसार विधिवत भगवान विष्णु, अग्नि और सूर्य देवता की पूजा किया करते थे। कुमार अवस्था तक अजामिल भी अपने माता-पिता का आज्ञाकारी पुत्र रहा, किंतु फिर जब वह यौवनावस्था में प्रवेश...
ମହାକବି କାଳିଦାସ
‘ଆଷାଢ଼ସ୍ୟ ପ୍ରଥମ ଦିବସେ’ – ରାମଗିରିର ତୁଙ୍ଗ ଶୈଳଶୃଙ୍ଗ ଉପରେ ପ୍ରୀତି ସ୍କି ଗ୍ଧ, ଜନପଦବଧୂଲୋଚନ ପୀୟମାନ ଶ୍ୟାମଳ ଛଳଛଳ ଚଳନବଘନମାଳା ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟରେ ଏକ ବିରହୀ ତରୁଣର କରୁଣ କାତର ନିବେଦନ ଭିତରେ କିଏ ସେହି ଚିନ୍ମୟ ହୃଦୟବାନ୍ ପରମକାରୁଣିକ ପୁରୁଷ? ମନ୍ଦାକିନୀର ଶୀତଳ ଶୀକରଧୌତ...
ଗଣକ ଗର୍ଗ
ଖ୍ରୀଷ୍ଟଜନ୍ମର ଚଉଦ ଶହ ବର୍ଷ ପୂର୍ବେ – ସେହିଦିନଠାରୁ ଆଜି ଭିତରେ ପ୍ରାୟ ସାଢେ ତିନିହଜାର ବର୍ଷ ଅତୀତ ହୋଇଗଲାଣି – ସରସ୍ଵତୀତଟନିକଟସ୍ଥ ସେହି ବୃଦ୍ଧ ଓ ଉର୍ଦ୍ଧ୍ୱରେତା ମହର୍ଷି ଗର୍ଗ, ଜ୍ୟୋତିଷୀ ଗର୍ଗ, ଗଣିତାଚାର୍ଯ୍ୟ ଗର୍ଗ, ଭାରତୀୟ ଫଳିତ ଓ ଗଣିତ ଜ୍ୟୋତିଷଶାସ୍ତ୍ରର ଜନକ...
ପ୍ରଜ୍ଞାପାରମିତ ନାଗାର୍ଜୁନ
ଯେଉଁମାନଙ୍କର ଜୀବନୀ ସ୍ଵୀୟ କୀର୍ତ୍ତି-ସୌଧର ସୌକର୍ଯ୍ୟରେ ସମାହିତ – ଯେଉଁମାନଙ୍କର ଆତ୍ମଚରିତ ଅମରକୃତିର ଦୀପ୍ତି ମଧ୍ୟରେ ବିଲୀୟମାନ – ସେହି ଅପୂର୍ବକର୍ମା, ତ୍ୟାଗଧର୍ମୀ ମହର୍ଷିମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ ଅନ୍ୟତମ ଜ୍ଞାନ-ପାରଙ୍ଗମ ପ୍ରଜ୍ଞାବାନ୍ ନାଗାର୍ଜୁନ। ଧାରାବଦ୍ଧ ଇତିହାସ ନ...
ସୁମେଧସ ପତଞ୍ଜଳି
ଭାରତୀୟ ସଂସ୍କୃତିରେ ଏକ ମହତ୍ତ୍ଵପୂର୍ଣ୍ଣ ଯୁଗର ଦୀପସ୍ତମ୍ଭ ପତଞ୍ଜଳି। ଆଜି ଆମ୍ଭେମାନେ ଯେଉଁ ପତଞ୍ଜଳିଙ୍କର ପରିଚୟ ପାଉଁ, ଏ ଧରାଧାମରେ ତାଙ୍କର ଆବିର୍ଭାବ ହେବାର ବହୁ ଶତାବ୍ଦୀ ପୂର୍ବରୁ ସେହି ନାମରେ ଆଉ ଜଣେ ମନୀଷୀ ଜନ୍ମଗ୍ରହଣ କରିଥିଲେ। ଏ ଅଧ୍ୟାୟର ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟ ଯୋଗସୂତ୍ରକାର...
ଚକ୍ରବର୍ତୀ ଖାରବେଳ
ସମଗ୍ର ଭାରତକୁ ଯଦି ଏକଦା କୌଣସି ଏକକ ଭାରତୀୟ ଜାତି ତାହାର ଏକଚ୍ଛତ୍ର ଶାସନତଳେ ଅଭିବୃଦ୍ଧି ହେବାର ସୁଯୋଗ ଦେଇଥାଏ, ଦିନେ ଯଦି କୌଣସି ଭାରତୀୟ ଜାତି ଏକାକୀ ବୈଦେଶିକ ଶତ୍ରୁର ସମଗ୍ର ଓ ଉଗ୍ର ବିରୋଧ କରି ବିଜୟ ଲାଭ କରିପାରିଥାଏ, ଅତୀତ ଇତିହାସର ପୃଷ୍ଠପଟରେ ଯଦି ମହାଭାରତର...

