“हमको आपको भइया नहीं कहना चाहिए था!”, एक साँवली किंतु लावण्य से भरी महिला ने मुझसे आकर कहा। मैं कुछ समझ पाता और अपनी प्रतिक्रिया दे पाता इससे पहले ही वह चली गई क्योंकि पीछे से उसके दो बच्चे उसे लगातार पुकार रहे थे। हाँ, मुझे इतना...
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तेरे लिए …… हृदय का एक गीत
मैंने देखे ए ए ए ए ऐ मैंने देखे जीवन के रंग तेरे संग मैंने देखे ए ए ए ए ऐ मैंने देखे जीवन के रंग तेरे संग मैंने सीखे ए ए ए ए ऐ मैंने सीखे जीने के ढंग तेरे संग मैंने सीखे ए ए ए ए ऐ मैंने सीखे जीने के ढंग तेरे संग अब...
आत्म सम्मान….
भावना सम्मान की जब, खुद के प्रति जागती है, तब ही मनुज के कर्म में, निरंतर शुचिता ताकती है। भान उसको हो यह जाता, क्या हैं उसके जीवन उद्देश्य, समर्थ करता है वह खुद को, अपने कर्म और पौरुष बल से, पूजती संसार है उसको, करबद्ध...
दिल की बात…
देख, मुझसे यह न कहना अब कि,हम बस दोस्त बनकर रह सकते हैं।मेरी आँखों के सामनेतू किसी और की हो जाए,यह दर्द भला हम कैसेसह सकते हैं?क्या मेरी आँखों की नमी की वजह,तू कभी समझ न पाएगी?मेरी ज़िंदगी में जो तेरी कमी होगी,क्या तू जान न पाएगी...
उसका अंतर्मन
उसके रूप-लावण्य पर मैं मोहित न हुआ, मैं सम्मोहित हुआ उसके अंतस की पवित्रता से। अंग-प्रत्यंगों में भले थी स्निग्धता की न्यूनता, पर था प्राचुर्य आत्मीयता का उसके धवल चरित्र में। भ्रातृ और पितृ सम सम्मान देने वाली उस शुचि में, स्वयं...
सुनो – ज़रा मुझे सुनो
न जाने कितनी चीज़ें हैं, न जाने कितने अवसर, जो छीन लेती है हमसे, कीमती नियति अक्सर। हे तनयद्वय! मेरे आत्मज! अधिकार है मेरा केवल तुम पर, सुनो, समझो और विचार करो, क्यों आए हो तुम इस धरा पर? कालों से काल-कवलित हुए हैं सब, पर क्यों...
लाल पान की बेगम – फणीश्वरनाथ रेणु
इच्छित बिंदु पर क्लिक करें। लाल पान की बेगम - फणीश्वरनाथ रेणु लाल पान की बेगम – फणीश्वरनाथ रेणु‘क्यों बिरजू की माँ, नाच देखने नहीं जाएगी क्या?’बिरजू की माँ शकरकंद उबाल कर बैठी मन-ही-मन कुढ़ रही थी अपने आँगन में। सात साल का...
टेपचू – उदय प्रकाश
इच्छित बिंदु पर क्लिक करें। उदय प्रकाश का जीवन परिचय उदय प्रकाश का जीवन परिचयउदय प्रकाश समकालीन हिंदी साहित्य के सबसे चर्चित, लोकप्रिय और प्रभावशाली कथाकारों में से एक हैं। उन्होंने कहानी, कविता, उपन्यास, निबंध और वृत्तचित्र...
जाह्नवी – जैनेन्द्र कुमार
इच्छित बिंदु पर क्लिक करें। जाह्नवी - जैनेन्द्र कुमार जाह्नवी – जैनेन्द्र कुमार आज तीसरा रोज़ है। तीसरा नहीं, चौथा रोज़ है। वह इतवार की छुट्टी का दिन था। सबेरे उठा और कमरे से बाहर की ओर झाँका तो देखता हूँ, मुहल्ले के एक...
दिल्ली में एक मौत – कमलेश्वर
इच्छित बिंदु पर क्लिक करें। कमलेश्वर - लेखक परिचय कमलेश्वर – लेखक परिचयकमलेश्वर का जीवन परिचय (1932–2007)कमलेश्वर आधुनिक हिंदी साहित्य के अत्यंत प्रभावशाली और बहुआयामी रचनाकार थे। वे ‘नई कहानी’ आंदोलन के...

