घर का दीपक बार रे मनुवा, मन का दीपक बार। ज्योति अंदर की जो जागे, मिटे जगत अँधियार, घर का दीपक बार रे मनुवा, मन का दीपक बार। ये तन ही तेरा मंदिर है, देवता भी तेरे अंदर है, अर्पण कर...
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हे भगवान Oh God Show me the correct path A Poem
तुझ-सा तू ही है भगवान। नहीं कोई तेरे समान। एक सूर्य ही नहीं सहस्रों, मिलकर भी न तेरे सम हों, शत-शत वसुधा, नभ, नक्षत्र भी, पा न सके तेरा परिमाण, तुझ-सा तू ही है भगवान। नहीं कोई तेरे...
हे विद्या Oh Education Be my companion The best Poem
हे विद्या तुम बनो सारथी मेरे इस जीवन रथ के। मन ने मुझे बहुत भरमाया, उल्टी-सीधी राह चलाया, दास बनाया जिन विषयों का, उनमें ही रह गया उलझ के, हे विद्या तुम बनो सारथी मेरे इस जीवन रथ के। विद्या से दुविधा कट जाए...
गुरु दिवस पर एक शानदार भाषण
गुरु हैं ब्रह्मा गुरु हरि हैं, गुरु की महिमा सर्वोपरि है। गुरु हरें सारे तिमिर तम, तव वंदन हे नाथ करें हम। सचमुच, हम सबके जीवन में गुरु का स्थान अद्वितीय है। आज हम जिस उन्नत, विकसित और सुख-सुविधाओं से भरी दुनिया में हैं, वह गुरु...
Champa Kaale Kaale Akshar Nahin Chinahati By Trilochan The Best Explanation
पाठ का उद्देश्य पढ़ाई-लिखाई के कुछ नुक़सानों को भी समझ सकेंगे। चंपा की बोली में परिवार के प्रेम को जानेंगे। शहरों को परिवार बिखराव का कारण माना गया है। मासूमियत का मूर्त रूप देख सकेंगे। कविता लेखन की नई शैली से रू-ब-रू होंगे।...
Khul Gayi Naav, Agyeya kii Kavita Ka Saar
खुल गयी नाव उद्देश्य प्रिय से विदा होने की पीड़ा के वर्णन को प्रतीकों के माध्यम से जान सकेंगे। जीवन में ऐसे व्यक्ति की अहमियत का बोध होगा जिसके बिना पूरी दुनिया खाली लगने लगती है। भावनात्मक संबंधों का गहरा ज्ञान होगा। पृष्ठभूमि...
आषाढ़ का एक दिन, संपूर्ण अध्ययन, मोहन राकेश
प्रस्तावना 1958 में प्रकाशित मोहन राकेश द्वारा लिखित नाटक ‘आषाढ़ का एक दिन’ हिंदी रंगमंच में सबसे अधिक खेले जाने वाले नाटकों की श्रेणी में आता है। कुछ विद्वानों के मतानुसार हिंदी नाटक के विकास में इसे एक मील का पत्थर माना जाता...
Hiroshima Kavita ka Best Explanation, Agyeya
पाठ का उद्देश्य आप द्वितीय विश्वयुद्ध के बारे में जान सकेंगे। मानवता की बर्बरता का अनुभव कर सकेंगे। शिक्षितों का विकसित नहीं विकृत रूप देख सकेंगे। कविता लेखन की नई शैली से परिचित होंगे। मानवता के वास्तविक स्वरूप को समझ सकेंगे।...
नदी के द्वीप, अज्ञेय
नदी के द्वीप अज्ञेय की सर्वश्रेष्ठ कविताओं में से ‘नदी के द्वीप’ एक है। इस कविता में कवि अज्ञेय नदी को समष्टि का और द्वीप को व्यष्टि का प्रतीक मानकर रेखांकित करता है कि संसार में प्रत्येक व्यक्ति का अस्तित्व एवं...
सच्चिदानंद हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ की सोन मछली कविता
सोन मछली पाठ परिचय प्रस्तुत कविता अज्ञेय विरचित ‘अरी ओ करुणा प्रभामय’ नामक काव्य संकलन से ली गई है। इसका प्रकाशन सन् 1959 में हुआ था। यहाँ मछली मानव की जिजीविषा अर्थात् जीने की प्रबल इच्छा का प्रतीक बन कर आई है। कवि...

