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एकतंत्र और प्रजातंत्र शासन

संभवतः शासन व्यवस्था का सबसे प्राचीनतम रूप एकतंत्र शासन ही है। पहले पहल राज्य संचालन का यह ढंग राजा में देवी शक्ति का आरोप करके किया गया था। संस्कृत-शास्त्रों में राजा को पृथ्वी पर ईश्वर का प्रतिनिधि माना है। प्रारंभ में अराजकता...

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अंग्रेजी शासन काल की भारत को देन

अंग्रेज भारत में व्यापारी बनकर आए, ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना की, धीरे-धीरे अपना आधिपत्य बढ़ाया और सन् 1857 के पश्चात् समस्त भारत के शासक बन बैठे। अंग्रेजी शासन काल में भारत की आर्थिक दशा बिगड़ी, यहाँ की संपत्ति अनेकों रास्तों...

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गांधीवाद और साम्यवाद – एक लघु निबंध

आज का युग वादों का युग है, जिसमें गांधीवाद, प्रजातंत्रवाद, साम्यवाद, मार्क्सवाद, पूँजीवाद, कम्यूनिज्मवाद, एकतंत्रवाद इत्यादि धाराओं में संसार की शासन व्यवस्थाएँ चल रही हैं। जिस प्रकार संसार के प्राचीन इतिहास में धार्मिक संघर्षों...

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संस्कृति और सभ्यता में आखिर क्या संबंध है?

संस्कृति, उसका निर्माण तथा सभ्यता ‘संस्कृति’ शब्द से हम चिरपरिचित हैं, किंतु उसके स्वरूप से हमें पूर्ण परिचय नहीं है। संस्कृति क्या है? और उसका निर्माण कैसे होता है? आदि प्रश्नों पर विचार करते हुए हम कह सकते हैं कि...

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जब आवे संतोष धन, सब धन धूरि समान

संकेत बिंदु – (1) सूक्तिकार का मत (2) सुख की जननी संतोष (3) अत्यधिक धन दुख का कारण (4) संतोष साम्राज्य से भी बढ़कर (5) संतोष का फल मीठा और लाभदायक। सूक्तिकार संतोष को ही परम धन मानकर इस विचार को प्रकट करता है कि इस धन के...

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पर उपदेश कुशल बहुतेरे – का विशेष अर्थ अभी जानें

संकेत बिंदु – (1) भारत ऋषि, मुनि और तपस्वियों का देश (2) गाँधी जी का दृष्टांत (3) दूसरों को उपदेश देने की अपेक्षा उस पर अमल (4) उपदेश मानव मन की सहज अनुभूति (5) उपसंहार। हमारा देश भारत ऋषियों, तपस्वियों, मनीषियों, गुरुओं और...

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जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी प्यारी हैं

संकेत बिंदु – (1) संसार में सर्वोच्च पर (2) जननी का मातृत्व रूप संसार की सबसे बड़ी साधना (3) मनुष्य पर अनेक उपकार (4) पद्म पुराण के अनुसार स्वर्ग की विशेषताएँ (5) उपसंहार। लंका की समृद्धि और सौंदर्य को देखकर लक्ष्मण ने श्री...

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जहाँ चाह वहाँ राह – ऐसा क्यों कहा जाता है?

संकेत बिंदु – (1) मानव की अनंत इच्छाएँ (2) चाह जीवन के उत्कर्ष का द्वार (3) महान संकल्प ही महान फल का जनक (4) महापुरुषों व विद्वानों की चाह (5) उपसंहार। ऐसा मनोवेग जो मनुष्य को कोई ऐसी वस्तु प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता...

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कल करे सो आज कर, आज करे सो अब

संकेत बिंदु – (1) सूक्ति का अर्थ (2) गाँधी जी के शब्दों में (3) समय पर किए गए कार्य का महत्त्व (4) कबीर का कथन प्रासंगिक (5) उपसंहार। ‘कल’ अर्थात् आज के बाद या भविष्य में आने वाला कोई अनिश्चित दिन या समय। ‘आज’ अर्थात् जो...

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कर्म ही पूजा है

संकेत बिंदु – (1) कर्म ही पूजा का अर्थ (2) कर्म का संबंध सभी प्राणियों से (3) कर्म सिद्धि और अमरतत्त्व का द्वार (4) मानव जीवन का लक्ष्य-मोक्ष प्राप्ति (5) कर्म ईश्वर का रूप। जल, अक्षत, फल, गंध, पुष्प, धूप, दीप तथा नैवैद्य...

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