संकेत बिंदु – (1) चरित्र की श्रेष्ठता (2) सच्चरित्रता के लक्षण (3) सच्चरित्रता का निर्माण (4) इतिहास में चरित्रवान महापुरुषों की गाथाएँ (5) आचर ही सबसे बड़ा धर्म। चरित्र की श्रेष्ठता का नाम ‘सच्चरित्रता’ है। श्रेष्ठ और...
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सुसंगति से सुख उपजे, कुसंगति सुख जाय/सत्संगति
संकेत बिंदु – (1) सत्संगति का अर्थ (2) मानव-जीवन पर प्रभाव (3) संगति के रूप (4) अच्छी संगति से मानव का उद्धार (5) सत्संगति से मानव जीवन के पाप समाप्त। सज्जनों के साथ उठना-बैठना सत्संगति है। साधु-महात्माओं या धर्मनिष्ठ...
समय किसी की प्रतीक्षा नहीं करता / समय का सदुपयोग
संकेत बिंदु – (1) बिना विलंब और यथा-समय कर्म (2) समय की उपेक्षा करने वाले दुखी (3) प्रकृति, समय के सदुपयोग की गुरु (4) प्रत्येक कार्य के समय निश्चित (5) गाँधीजी और नेहरू जी प्रेरणा स्रोत। अपने कर्तव्य कर्म को बिना विलंब यथा...
समाज सेवा
संकेत बिंदु – (1) मनुष्य के उदात्त गुणों को जगाना (2) समाज सेवा के विविध रूप (3) महापुरुषों द्वारा समाज सेवा (4) ईश्वर भक्ति से उच्च एवं श्रेष्ठतर (5) समाज सेवा का व्यापक क्षेत्र। धन-संपत्ति, शारीरिक सुख और मान प्रतिष्ठा...
स्वावलंबन (आत्म-निर्भरता)
संकेत बिंदु – (1) स्वावलंबन का अर्थ (2) स्वावलंबन के उदाहरण (3) मानवीय गुणों को स्थापित करना (4) आत्मनिर्भरता, स्वावलंबियों की आराध्य देवी (5) स्वावलंबी मनुष्य समाज तथा राष्ट्र का जीवन। स्वावलंबन का अर्थ है आत्म-निर्भरता...
जीवन – प्रवाह / मनुष्य का प्रवाहमान जीवन / यात्रा अपने भीतर की
संकेत बिंदु – (1) जीवन की शैली और गति (2) अशांत मन के साथ समझौता (3) अतृप्ति और भूख का गुण विकास हेतु (4) असुरक्षा की भावना (5) उपसंहार। जीवन की एक शैली है। जीवन की एक अपनी गति है – रफ्तार है। जीवन स्वयं एक प्रवाह है...
अनुशासन और जीवन
संकेत बिंदु – (1) जीवन का महत्त्वपूर्ण पहलू (2) जीवन में सद्व्यवहार की भावना (3) अनुशासन के बिना जीवन (4) प्रकृति के अन्य जीवों में अनुशासन (5) उपसंहार। जीवन का यदि कोई महत्त्वपूर्ण पहलू है, तो वह अनुशासन है। अनुशासन के...
अधजल गगरी छलकत जाए
संकेत बिंदु – (1) सूक्ति का अर्थ (2) अल्पज्ञ और अज्ञानी अपने ज्ञान का प्रदर्शन बढ़-चढ़कर (3) आज का हिंदी साहित्य सूक्ति का पर्याय (4) संसद, मेडिकल और धर्म की अथजल गगरी (5) उपसंहार। आधी भरी गगरी का जल छलकन ही नहीं, शोर भी...
अपने लिए जिए तो क्या जिए
संकेत बिंदु – (1) सूक्ति का तात्पर्य (2) गाँधी जी, सुभाष जी और इंदिरा जी के विचार (3) महापुरुषों, नेताओं और गुरुओं के जीवन-निष्कर्ष (4) परोपकार जीवन की सार्थकता (5) उपसंहार। सूक्ति का तात्पर्य है कि केवल आत्म-हित जीवन...
अहिंसा परमो धर्मः
संकेत बिंदु – (1) अहिंसा धर्म का मूल (2) परम का अर्थ (3) ऋग्वेद की दृष्टि में अहिंसा (4) व्यक्ति के जीवन में अहं का महत्त्व (5) उपसंहार। ‘अहिंसा परमो धर्मः’ शास्त्रीय वचन है। यह योग शास्त्र के पाँच यमों में से एक है।...

