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राष्ट्रीय एकता में विद्यार्थियों की भूमिका / राष्ट्रीय एकता और आज का छात्र/ छात्र और राष्ट्रीय एकता – – एक शानदार निबंध

संकेत बिंदु – (1) भारत की अखंडता (2) एकता भारतीय संस्कृति का आधार (3) विद्यार्थियों का दायित्व (4) देश की एकता धर्म से ऊपर (5) उपसंहार। भारत देश में अनेक भाषाएँ, अनेक परिधान, अनेक धर्म और अनेक विचार होने के बाद भी देश अखंड...

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शिक्षा – एक शानदार निबंध

संकेत बिंदु – (1) शिक्षा के बारे में विद्वानों के विचार (2) मनुष्य का सर्वांगीण विकास (3) मानव जीवन के लिए शिक्षा का उद्देश्य (4) शिक्षा प्राप्ति के लिए अनिवार्य गुण (5) समाज व विद्यार्थी की प्रगति में सहायक। ‘शिक्षा’ शब्द...

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शिक्षा का महत्त्व – एक शानदार निबंध  

संकेत बिंदु – (1) व्यक्तित्व निर्माण में सहायक (2) नैतिक, मानसिक और शारीरिक दृष्टियों से स्वावलंबी बनाना (3) मानव जीवन के प्रमुख सोपान (4) काम और मोक्ष प्राप्ति में महत्त्वपूर्ण (5) जीवन को सही ढंग से जीने की योग्यता...

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व्यावसायिक शिक्षा या धंधामूलक शिक्षा – एक शानदार निबंध

संकेत बिंदु – (1) शिक्षा और व्यवसाय जीविका के दो पहिए (2) बाबू बनना मात्र उद्देश्य (3) व्यावसायिक शिक्षा का उद्देश्य (4) शिक्षा को व्यवसाय परक और व्यावहारिक बनाना (5) व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की स्वीकृति। शिक्षा और व्यवसाय...

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सह – शिक्षा Co-Education – एक शानदार निबंध

संकेत बिंदु – (1) युवक-युवतियों का एक साथ पढ़ना (2) सह शिक्षा के लाभ (3) प्राथमिक शिक्षा में अध्यापिका की भूमिका (4) सहशिक्षा के दुर्गुण (5) पाश्चात्य संस्कृति की ओर अग्रसर। विद्यालय के एक ही कक्ष में एक ही श्रेणी में बालक...

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प्रौढ़ शिक्षा / राष्ट्रीय साक्षरता का प्रश्न – एक शानदार निबंध

संकेत बिंदु – (1) प्रौढ़ शिक्षा का अर्थ (2) अंग्रेजी शासन में साक्षरता की कमी (3) प्रौढ़ शिक्षा का प्रारंभ (4) प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रमों की असफलताओं के कारण (5) लोगों में राजनीतिक चेतना। तीस वर्ष से पचास वर्ष की अवस्था (वय)...

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एक शानदार निबंधनैतिक शिक्षा मॉरल एजुकेशन – एक शानदार निबंध

संकेत बिंदु – (1) नीतियुक्त आचरण या व्यवहार (2) नैतिक आचरण सबसे श्रेष्ठ (3) नैतिक शिक्षा के आधार (4) नैतिक शिक्षा के अभाव का परिणाम (5) उपसंहार। नीतियुक्त आचरण या व्यवहार जीवन को सरलता से सफलतापूर्वक तय करने का मार्ग है।...

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कहानी की रूपरेखा- पर एक लघु निबंध  

मुंशी प्रेमचंद के शब्दों में ‘आख्यायिका केवल घटना है।’ आंशिक रूप में यह सत्य भी है और जिस दृष्टिकोण से मुंशी प्रेमचंद ने कहानियाँ लिखी हैं वहाँ यह पूर्ण रूप से सत्य थी। परंतु आज बहुत सी कहानियों में हमें घटना मिलती ही नहीं, केवल...

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समालोचना और साहित्य का संबंध – एक लघु निबंध

समालोचक साहित्यकार का पथ प्रदर्शक होता है और आलोचना-साहित्य का निर्धारित मार्ग। आलोचना के विषय में पहले एक बात समझ लेनी चाहिए कि इस विषय पर लेखनी उठाने का साहस केवल विषय के पंडितों को ही करना चाहिए अन्यथा वह आलोचना पथ भ्रष्ट करने...

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काव्य में रस और अलंकार का स्थान – एक लघु निबंध  

साहित्य के आचार्यों में काव्य के विषय में दो प्रधान विचारधारा मिलती हैं। एक चमत्कारवादी विचारधारा और दूसरी रसवादी विचारधारा रीति-काल में विशेष रूप से जिस धारा का जोर रहा वह अलंकारवादी विचारधारा है। शेष सभी कालों में रसवादी धारा...

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