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‘जाड़े की ऋतु’ पर एक शानदार निबंध  

संकेत बिंदु – (1) ऋतु की पहचान (2) जाड़े से बचाव के उपाय (3) सर्दी का यौवन रूप (4) स्वास्थ्य को दृष्टि सर्वोत्तम (5) विभिन्न पर्वो का काल। तापमान की अत्यधिक कमी, हृदय कँपाने वाला तीक्ष्ण शीत, वायु का सन्नाटा, शिशिर शर्वरी...

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‘शरत् ऋतु’ पर एक शानदार निबंध  

संकेत बिंदु – (1) शरत् का आगमन (2) प्रसाद और कालिदास द्वारा वर्णन (3) रामचरितमानस में शरत् वर्णन (4) आयुर्वेद और भारतीय पर्वों की दृष्टि से महत्त्व (5) वैज्ञानिक दृष्टि से महत्त्व | भारत में शरत् वसंत के ही समान सुहावनी ऋतु...

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‘वर्षा ऋतु में उमड़ते-उफनते नदी नाले’ पर एक निबंध

संकेत बिंदु – (1) नदी-नालों का उमड़ना (2) वर्षा के अभाव में नदी-नाले (3) नदी-नालों से नुकसान (4) बाढ़ के कारण (5) बिमारियों में वृद्धि। नदी नालों का पूरी तरह से भर जाने पर जल का बाहर निकलकर चारों और फैल जाना ‘उमड़ना‘ है...

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वर्षा का वह दिन / वर्षा का एक दिन / वर्षा में भीगने का अनुभव

संकेत बिंदु – (1) ग्रीष्मावकाश की घोषणा (2) वर्षा ऋतु का प्रारंभ (3) भीगने का आनंद (4) वर्षा से बचाव के उपाय (5) भीगने का अद्भुत अनुभव। 21 अप्रैल का आनंदपूर्ण दिन। दो मास के ग्रीष्मावकाश की घोषणा का दिन। सहपाठियों, मित्रों...

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‘वर्षा ऋतु’ पर एक शानदार निबंध

संकेत बिंदु – (1) वर्षा ऋतु का परिचय (2) वर्षा ऋतु के अनेक रूप (3) सावन के मन-भावन रूप (4) वर्षा ऋतु में हिमपात का मनमोहक दृश्य (5) वर्षा से हानियाँ | भास्कर की क्रोधाग्नि से त्राण पाकर धरा शांत और शीतल हुई। उसको झुलसे हुए...

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’ ग्रीष्म ऋतु की दोपहर’ पर एक शानदार निबंध  

संकेत बिंदु – (1) भगवान भास्कर के कोप का रूप (2) अग्नि में घी का काम (3) जीवन की प्रगति अवरुद्ध होना (4) प्राणियों और प्रकृति के लिए पीड़ादायिनी (5) पृथ्वी, प्राणी और प्रकृति के लिए लाभदायक। ग्रीष्म ऋतु की दोपहर भगवान्...

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‘ग्रीष्म ऋतु’ पर एक शानदार निबंध

संकेत बिंदु – (1) ग्रीष्म का आगमन (2) लंबे और आलस भरे दिन (3) ग्रीष्म का प्रकोप (4) गर्मी से बचने के उपाय (5) ग्रीप्म के लाभ | ‘सूर्य भगवान् की अविश्राम तप्त किरणें, सन्नाटा मारते हुए लू की झपट, तेज-पुरित उष्ण निदाघ...

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‘वसंत ऋतु’ एक पर शानदार निबंध

संकेत बिंदु – (1) वसंत का अर्थ (2) प्रकृति की विचित्र देन (3) स्वास्थ्यप्रद ऋतु (4) वसंत के मेले और उत्सव (5) जीवन के विभिन्न रंगों का त्योहार। वसंत की व्याख्या है, ‘वसन्त्यस्मिन् सुखानि।’ अर्थात् जिस ऋतु में प्राणियों को...

Sahityik Nibandh

निराला का दार्शनिक प्रकृतिवाद- एक लघु निबंध

‘निराला’ के साहित्य में स्पष्ट अद्वैतवाद की झलक है। ‘परिमल’ में अद्वैतवाद का स्पष्टीकरण हमें कई कविताओं में प्रस्फुटित होता हुआ दिखाई देता है। ‘जागरण’ कविता में आत्मा की चरम सत्ता में स्थिति को सच माना है। मानव आत्मा को माया जनित...

Sahityik Nibandh

मैथिलीशरण ‘गुप्त’ और उनका साहित्य- एल लघु निबंध

मैथिलीशरण गुप्त वर्तमान हिंदी के उन कवियों में से हैं जिन्होंने संवत् 1923 से कविता क्षेत्र में पदार्पण किया और आज तक बराबर अपने स्थान को सुदृढ़ ही बनाते चले आ रहे हैं। प्रबंध और मुक्तक दोनों ही प्रकार की रचनाएँ ‘गुप्त’ जी ने...

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