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Sahityik Nibandh

प्रेमचंद की उपन्यास धारा पर एक कघु निबंध  

हिंदी में कथा-साहित्य का नवयुग मुंशी प्रेमचंद से प्रारंभ होता है। मुंशी प्रेमचंद पहले उपन्यासकार हैं जिन्होंने तिलस्म और अय्यारी को छोड़कर समाज की समस्याओं को अपनाया। आपने उपन्यास साहित्य के अभाव को पहिचाना और अपने भरसक प्रयत्नों...

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प्रेमचंद की कहानियाँ – एक लघु निबंध  

मुंशी प्रेमचंद ने हिंदी में बहुत सी कहानियाँ लिखी हैं और इन कहानियों में समाज, राष्ट्र और व्यक्ति के अनेकों अंगों को स्पष्ट किया है, जीवन की अनेक समस्याओं पर प्रकाश डाला है। प्रेमचंद ने अपनी कहानियों में पूर्व और पश्चिम दोनों की...

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प्रसाद और उनके नाटक – एक लघु निबंध  

प्राचीन प्रचलित सब प्रणालियों के बंधनों को नवीनता के विस्फोट से एक-दम उड़ाते हुए बाबू जयशंकर ‘प्रसाद’ जी नाटकीय क्षेत्र में आए। प्राचीनता को नष्ट करने का तात्पर्य यह कदापि नहीं है कि उन्होंने भारतीय संस्कृति का अपने नाटकों में...

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भारतेंदु और उनके नाटकों पर एक विचार ……  

आधुनिक हिंदी साहित्य का जन्मदाता हम भारतेंदु बाबू हरिश्चंद्र को मानते हैं। भारतेंदु जी ने प्रथम हिंदी गद्य और पद्य की भाषा का परिमार्जन किया, दूसरे नवीन विचारधारा का वह साहित्य हिंदी को प्रदान किया जो रीति कालीन प्रवृत्तियों से...

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सेवा सदन उपन्यास के बारे में जानें ……..  

‘सेवासदन’ मुंशी प्रेमचंद जी के प्रारंभिक उपन्यासों में से है। इसमें एक वेश्या का चरित्र चित्रण उपन्यासकार ने कलात्मक ढंग से किया है। प्रेमचंद ने अपने उपन्यासों में समाज सुधार पर विशेष बल दिया है। अपने इसी आदर्श को सम्मुख रखते हुए...

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प्रेमाश्रम उपन्यास के बारे में जानें ………  

‘प्रेमाश्रम’ सेवासदन के पश्चात् मुंशी प्रेमचंद जी का दूसरा उपन्यास है। ‘प्रेमाश्रम’ में उपन्यासकार ने किसी एक चरित्र का निर्माण नहीं किया वरन् अनेकों चरित्रों का निर्माण किया है। प्रेमचंद जी चरित्र चित्रण-कला में इतने प्रवीण थे...

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रंगभूमि उपन्यास के बारे में जानें …….  

रंगभूमि मुंशी प्रेमचंद का चौथा उपन्यास है। इस उपन्यास में भारत के अंदर कल-कारखानों का उदय और ग्रामीण उद्योगों का पतन दिखलाया है। शहर और ग्रामों की यह समस्या उस समय पश्चिमीय देशों में समाप्त हो चुकी थी और पूर्वी देशों में चल रही...

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सूर और उनका साहित्य

“सूर सूर तुलसी ससी उड़ुगन केशवदास” यह पंक्ति हिंदी पढ़ी-लिखी जनता में बहुत प्रचलित है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने सूर पर गोस्वामी तुलसीदास को प्रधानता दी है, परंतु इसमें कुछ संदेह नहीं कि यह दोनों ही कवि हिंदी साहित्य के प्राण हैं।...

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तुलसी साहित्य की सर्वांगीणता पर एक लघु निबंध

प्राचीन काल में जब गद्य का उदय नहीं हुआ था तो कविता का नाम ही साहित्य था। हिंदी साहित्य के प्राचीन इतिहास पर दृष्टि डालने से पता चलता है कि साहित्य का अर्थ था ‘कविता’ जिसे समय-समय पर डिंगल’, ‘अवधी’ और ‘ब्रजभाषा’ में विविध शैलियों...

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कबीर साहित्य का अध्ययन

संत कबीर का प्रादुर्भाव जिस काल में हुआ, उस समय देश के वातावरण में एक भारी उथल-पुथल थी। विभिन्न मत-मतांतरों और धर्मों का प्रचार इधर-उधर उनके धर्मानुयायी कर रहे थे। मुसलमान अपना राज्य स्थापित कर चुके थे और हिंदू तथा मुसलमान धर्मों...

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