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Sahityik Nibandh

‘गढ़कुंडार’ पर एक दृष्टि वृंदावनलाल वर्मा जी का उपन्यास

वृंदावनलाल वर्मा जी के उपन्यासों में गढ़कुंडार ने विशेष प्रसिद्धि प्राप्त की है, गढ़कुंडार में चौहदवीं शताब्दी के अंदर बुंदेलखंड में होने वाली राजनीतिक क्रांतियों का विवरण दिया हुआ है। वीरत्व के दुरुपयोग में किस प्रकार जुझौत के...

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कंकाल उपन्यास के बारे में जानें ………  

कंकाल उपन्यास के बारे में जानें ………   1919 ई० में जयशंकर ‘प्रसाद’ ने ‘कंकाल’ की रचना की। ‘कंकाल’ उपन्यास में मानव-मंगल की कामना से प्रेरित होकर सामाजिक कुचक्रों से ग्रस्त कंकाल-मानव को ‘प्रसाद’ जी ने अपनी...

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गोदान उपन्यास के बारे में जानें ………  

प्रेमचंद जी की सब रचनाओं को जब हम क्रम से पढ़ते हैं तो हमें उनका जीवन तथा साहित्य सतत् परिवर्तनशील दिखलाई देता है। उसका आशावादी दृष्टिकोण धीरे-धीरे ठेस खाकर यथार्थवाद की ओर बढ़ा है और जीवन के अंत तक पहुँचकर वह स्पष्ट रूप से...

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सूरसागर के बारे में जानें ……

“सूर-सागर” महाकवि सूरदास की प्रधान रचना है। सूर के जीवन की महानता और उनके काव्य का मूल्यांकन इसी महान् ग्रंथ द्वारा किया जा सकता है। ‘सूर-सागर’ का जो रूप इस समय उपलब्ध है उसे देखने से ज्ञात होता है कि ‘सूरसागर’ की कथा कुछ बिखरे...

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बिहारी सतसई के बारे में जानें ………  

हिंदी साहित्य के ग्रंथों में ‘बिहारी सतसई’ अपना विशेष स्थान रखती है। ग्रंथ की सर्वप्रियता न धर्म के कारण है और न किसी अन्य प्रभाव के ही कारण। इसे सर्वप्रिय बनाने वाली है कवि-कला, कवि का साहित्य और काव्य का साहित्यिक सौंदर्य। इस...

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साकेत के बारे में जानें ……….

‘साकेत’ बाबू मैथिलीशरण गुप्त का वह अमर काव्य है कि जिसमें उन्होंने एक ऐसे पात्र का चरित्र चित्रण किया है जिसके प्रति आज तक हिंदी साहित्य सर्वदा ही उदासीन रहा। यों ‘साकेत’ में रामायण की पूरी ही कथा आ जाती है परंतु उर्मिला का...

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कामायनी के बारे में जानें ……

‘कामायनी’ हिंदी-साहित्य के वर्तमान युग की एक सुंदरतम देन है। कवि ‘प्रसाद’ ने हिंदी-साहित्य को कामायनी देकर क्या कुछ नहीं दिया? ‘कामायनी’ की कथा कवि ने वैदिक उपाख्यान से ली है। इस काव्य का नायक आदि पुरुष मनु है और ग्रंथ में यह...

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सेवा सदन उपन्यास के बारे में जानें ……..  

‘सेवासदन’ मुंशी प्रेमचंद जी के प्रारंभिक उपन्यासों में से है। इसमें एक वेश्या का चरित्र चित्रण उपन्यासकार ने कलात्मक ढंग से किया है। प्रेमचंद ने अपने उपन्यासों में समाज सुधार पर विशेष बल दिया है। अपने इसी आदर्श को सम्मुख रखते हुए...

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हिंदी में समालोचना-साहित्य (लघु निबंध)

यों तो समालोचनाएँ अपने पुरातन ढंग पर बहुत दिन से हिंदी साहित्य में चलती आ रही थीं, परंतु आज के युग में समालोचना ने जो रूप धारण कर लिया है उसकी प्रथम झलक हमें भारतेंदु युग में मिलती है। प्रारंभिक समालोचनाएँ पुस्तकाकार रूप में न...

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रामचरितमानस के बारे में जानें …..

प्राचीन भाषाओं में कालिदास कृत ‘रघुवंश’, ‘वाल्मीकीय रामायण’ होमर-कृत ‘ ईलियड’, वर्जित-कृत ‘ईनियड’, फिरदौसी-कृत ‘शाहनामा’ और आधुनिक भाषाओं में मिल्टन का ‘पैराडाइज़ लॉस्ट’ दाँते का, ‘डिवाइन कॉमेडी,’ माइकेल मधुसूदन दत्त का ‘मेघनाद...

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