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Prerak Prasang

खड़ी बोली और गद्य का विकास (लघु निबंध)

हिंदी साहित्य के इतिहासज्ञों ने जो काल विभाजन किया है उसके आधार पर हिंदी साहित्य में गद्य-युग का प्रारंभ संवत् 1900 से होता है। यह अंग्रेजी शासन काल था, इसलिए जब अन्य देशों में युग परिवर्तन हुआ और पद्य का स्थान गद्य ने लिया तो...

Sahityik Nibandh

हिंदी साहित्य में रहस्यवाद (लघु निबंध)

भारतीय चिंतन में रहस्यवाद कोई नई वस्तु नहीं है। यह सत्य है कि हिंदी साहित्य में इसका प्रादुर्भाव कबीर और जायसी के साहित्य द्वारा ही सर्वप्रथम आया परंतु धार्मिक क्षेत्र में इसका पूरा-पूरा ब्यौरा हमें मिलता है। ऋग्वेद के ‘नासिदेय...

Sahityik Nibandh

हिंदी में निर्गुण-साहित्य धारा (लघु निबंध)

भारत में संपूर्ण रूप से मुसलमान शासन सत्ता स्थापित हो जाने पर हिंदू गौरव और वीरता के लिए बहुत कम स्थान रह गया था। स्थान-स्थान पर देव मंदिर गिराए जा रहे थे, और उनके स्थान पर मस्जिदें बन रही थीं। मुसलमान पूरी तरह भारत भूमि में बसते...

Sahityik Nibandh

हिंदी में राम-साहित्य धारा (लघु निबंध)

संवत् 1073 के आस-पास स्वामी रामानुजाचार्य ने विशिष्टाद्वैतवाद का वह रूप जनता के सम्मुख रखा जिसके अनुसार चिदचिद्विष्ट ब्रह्म के ही अंश जगत् के सब प्राणी हैं और यह सब उसी में लय हो जाते हैं। इसलिए इन जीवों को अपने उद्धार के लिए...

Sahityik Nibandh

वीरगाथा काल का साहित्य (लघु निबंध)

हिंदी साहित्य के इतिहास-पंडितों ने भाषा के इतिहास को चार भागों में विभाजित किया है। वीरगाथा-काल, भक्ति-काल, रीतिकाल तथा आधुनिक काल। इस प्रकार वीरगाथा-काल का स्थान इन चार कालों में ऐतिहासिक दृष्टिकोण में सर्वप्रथम आता है। इस काल...

Sahityik Nibandh

हिंदी में कृष्ण-साहित्य धारा (लघु निबंध)

15वीं और16 वीं शताब्दी में वैष्णव धर्म का प्रचार भारत में बड़े जोर के साथ हुआ और उस समय के प्रचारकों में श्री वल्लभाचार्य का नाम विशेष उल्लेखनीय है। यह वेद शास्त्र में पारंगत और धुरंधर विद्वान थे। शंकराचार्य के मायावाद ने भक्ति...

Sahityik Nibandh

हिंदी साहित्य में सूफी-साहित्य धारा (लघु निबंध)

पंद्रहवीं शताब्दी के अंतिम भाग से लेकर सत्रहवीं शताब्दी के अंत तक हिंदी साहित्य में निर्गुण तथा सगुण दोनों ही धाराओं का प्रचार समान रूप से चलता हुआ दृष्टिगोचर होता है। निर्गुण भक्ति के क्षेत्र में जहाँ संत साहित्य का प्रसार दिखाई...

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तेनजिंग नार्वे

भारत : प्रथम भारतीय एवरेस्ट विजेता जन्म : 1914 मृत्यु : 1986 तेनजिंग नार्वे विश्व के सबसे ऊँचे पर्वतशिखर माउंट एवरेस्ट पर पहुँचने वाले सर्वप्रथम व्यक्ति थे। उनकी इस महान विजययात्रा में सर एडमंड हिलेरी उनके सहयोगी थे। तेनजिंग...

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जार्ज वाशिंगटन

अमेरिकाः राष्ट्रपति जन्म : 1732 मृत्यु : 1799 जार्ज वाशिंगटन (George Washington) संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रथम राष्ट्रपति होने की अपेक्षा अमेरिका के महा सेनानी के रूप में अधिक याद किए जाते हैं। उन्होंने अमेरिका की स्वाधीनता के...

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महारानी विक्टोरिया

इंग्लैंड : महान शासिका जन्म : 1819 मृत्यु : 1901 महारानी विक्टोरिया ब्रिटिश इतिहास की अत्यंत गौरवशाली शासिका थीं। मेलबोर्न में राजनीतिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद 1837 में वे सिंहासन पर बैठीं। और 63 वर्ष तक एकछत्र राज्य किया। वे...

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