एक दिन सियेटल (अमरीका) में अखबार बेचने वाले एक छह वर्ष के बालक ने मेरे पास आकर पूछा क्या आप अख़बार खरीदेंगे?” मैंने उत्तर दिया- “नहीं, मुझे अख़बार नहीं चाहिए।” “केवल एक सेंट ज्यादा नहीं।” बड़े करुण स्वर में वह बोला। और तब मैंने...
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स्वामी श्रद्धानंद
घटना 30 मार्च सन् 1916 की है। स्वामीजी महाराज महात्मा गांधी द्वारा प्रवर्तित रोल्ट एक्ट के विरुद्ध सत्याग्रह आंदोलन का दिल्ली में नेतृत्व कर रहे थे। 30 मार्च को दिल्ली में पूर्ण हड़ताल थी। दिल्ली नगर का एक चक्कर लगाकर वे मध्याह्न...
स्वामी श्रद्धानंद को ज्ञान की प्राप्ति
14 श्रावण संवत् 1936 को क्रांति के अग्रदूत, महर्षि दयानंद बरेली पधारे। मुंशीराम के पिता श्री नानकचंद्रजी को आदेश मिला कि पंडित दयानंद सरस्वती के व्याख्यानों में कोई उपद्रव न हो ऐसा प्रबंध करें। प्रबंध के लिए वे स्वयं सभा में गए...
स्वामी विवेकानंदजी मिस्र के काहिरा शहर में
मिस्र के काहिरा शहर में एक बार स्वामी विवेकानंद रास्ता भूल गए और भटकते-भटकते वेश्याओं के गंदे मोहल्ले में जा निकले। दुसंयोग यों रहा कि वेश्याओं ने ग्राहक समझकर उनका भी आह्वान किमा। स्वामीजी निस्संकोच उनके पास गए। किंतु उन तक...
स्वामी विवेकानंदजी के कपड़े
कापाय-वस्त्र, सिर पर पगड़ी, हाथों में डंडा और कंधों पर चादर डाले, स्वामी विवेकानंद शिकागो (अमेरिका) की सड़कों से गुजर रहे थे। उनकी यह वेशभूषा अमेरिका निवासियों के लिए कौतूहल की वस्तु थी। पीछे-पीछे चलने वाली एक महिला ने अपने साथ...
स्वामी विवेकानंदजी का क्रोध
पूर्वी बंगाल के कुछ जिलों में दुर्भिक्ष पड़ा था। स्वामी विवेकानंद पीड़ितों के लिए अन्न-धन एकत्र कर रहे थे। जब वे ढाका में थे, तब उनसे कुछ वेदांती पंडित शास्त्रार्थ करने आए। स्वामीजी ने उन्हें बड़े आदर से बैठाया ओर अकाल की चर्चा...
स्वामी विवेकानंद जी के विचार
सन् 1896 में कलकत्ते में भयंकर प्लेग फैला हुआ था। शायद हो कोई ऐसा घर बचा था जिसमें रोग का प्रवेश न हुआ हो। स्वामी विवेकानंद, उनके कई शिष्य तथा गुरुभाई स्वयं रोगियों की सेवा-सुश्रूषा करते रहे, स्वयं अपने हाथों से नगर की गलियाँ और...
स्वामी विवेकानंद के एक पत्र का अंश
इस जगत् में अगर मैं किसी से प्यार करता हूँ, तो वह है मेरी माँ। मेरी माँ जिसने अपनी तमाम सांसारिक यंत्रणाओं के बीच भी मेरे प्रति स्नेहमयी – ममतामयी बनी रहकर मुझे संपूर्ण मानव- जाति को प्यार करना सिखाया। उसका सारा जीवन कष्टमय...
स्वामी विवेकानंद का साहस
एक बार मैं काशी में किसी जगह जा रहा था। उस जगह एक तरफ भारी जलाशय और दूसरी तरफ ऊँची दीवार थी। उस स्थान पर बहुत-से बंदर रहते थे। काशी के बंदर बड़े दुष्ट होते हैं। अब उनके मन में यह विकार पैदा हुआ कि मुझे उस रास्ते पर से न जाने दें।...
स्वामी रामानंद
एक यवन राजा, स्वामी रामानंद के पास कई दिन आता रहा- वह बड़ी उलझन में था कि प्रायश्चित्त से मनः शुद्धि कैसे हो जाती है! स्वामीजी एक दिन उसे नदी के किनारे ले गए, जिसका पानी सड़ गया था। राजा को पानी दिखाते हुए स्वामीजी बोले- “राजन्...

