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Prerak Prasang

साबरमती में बाढ़

सन् 1923 की बरसात में साबरमती में बाढ़ आई थी। नदी का पानी तेजी से चढ़ता था रहा था। आश्रमवासियों की जान खतरे में थी। अहमदाबाद से सरदार पटेल ने ख़बर भेजी कि आश्रम तुरंत खाली करके सभी लोग शहर में आ जाएँ, सवारियाँ भेजी जा रही हैं।...

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साघु स्वामी

आज सवेरे मैंने एक बच्चे को लट्टू से खेलते देखा। लट्टू कुछ देर तक गोल-गोल घूमता रहा और फिर गिर गया, जैसे मर चुका हो। मैं अपने आपसे बोला- “क्या आदमी का जीवन लट्टू जैसा ही नहीं है? जिसे हम क्रियाशीलता या काम कहते हैं, क्या प्रायः वह...

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संत दादू दयाल

दादू दयाल तब भी संत नहीं बने थे। एक दिन वे दुकान पर बैठे हिसाब लिखने में मग्न थे। उनके गुरु आकर द्वार पर खड़े हो गए; किंतु दादू को इसकी सुध तक न हुई। बाहर मूसलाधार पानी बरस रहा था। अचानक ही दादू की नज़र बाहर की ओर गई। द्वार पर...

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संत अब्दुल्ला

एक बार संत अब्दुल्ला कपड़ा खरीदने के लिए अपने पुत्र के साथ बाज़ार गए। दुकानदार ने कपड़ा दिखाया। उन्होंने कीमत में कुछ कमी चाही, लेकिन वह न माना। दुकानदार का पड़ोसी उन्हें जानता था, कहने लगा- “जानते हो ये कौन हैं? अब्दुल्ला हैं।”...

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श्री सखाराम देउस्कर की स्वामीजी से मुलाकात

पिछली सदी के विख्यात लेखक तथा पत्रकार श्री सखाराम देउस्कर एक बार अपने दो मित्रों के साथ स्वामी विवेकानंदजी से मिलने गए। बातचीत के दौरान स्वामीजी को पता चला कि उनमें से एक सज्जन पंजाब के निवासी हैं। उन दिनों पंजाब में अकाल पड़ा...

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शेख सादी

शेख सादी सफर करते हुए एक गाँव से गुजरे। गाँव वाले सबके सब जाहिल थे। उनके पीरसाहब भी जाहिल थे। शेख सादी को गाँव वालों ने हाथोंहाथ लिया और बड़ी खातिर की पीर साहब यह देखकर घबराए और डरे कि कहीं शेख सादी उनकी गद्दी पर कब्जा न कर लें।...

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रामकृष्ण परमहंस की शिक्षा

श्री रामकृष्ण परमहंस ने एक बार एक किस्सा सुनाया। एक योगी अपने गुरु के पास गया और कहने लगा- “मैंने चौदह वर्ष जंगल में रहकर योगाभ्यास किया। फलस्वरूप मैंने पानी के ऊपर चलने की दैवी शक्ति पा ली है— मेरी योग साधना सफल हुई।” गुरु ने...

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रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने जब सईसों को राखी बाँधी।

कविश्री रवीन्द्रनाथ ठाकुर सांप्रदायिक एकता के कट्टर समर्थक कलकत्ते थे। परंतु दुर्भाग्यवश जिन दिनों साम्प्रदायिक तनातनी फैली हुई थी, उन्हीं दिनों ‘रक्षा बंधन’ का पर्व आ गया। वे साथियों के साथ गंगा स्नान करने गए। लौटते समय सबको...

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रवीन्द्रनाथ की भिक्षा

बात सन् 1936 की है। कविवर रवीन्द्रनाथ का स्वास्थ्य ठीक नहीं था और डॉक्टरों ने उन्हें पूर्ण आराम करने की सलाह दी थी; फिर भी कविवर अपना कार्य प्रतिदिन के नियमानुसार करते जाते थे। अंत में, शांतिनिकेतन के कुछ लोगों ने बापू को तार...

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रविशंकर महाराज

काठियावाड़ में रविशंकर महाराज ने ठाकुरों से शराब नहीं पीने की प्रतिज्ञाएँ करवाई तो एक ठाकुर ने कहा- “मैंने दारू छोड़ने की प्रतिज्ञा तो की है; मगर दारू ने मेरे रग-रग को पकड़ रखा है।” महाराज ने कहा- मुझे अभी काम है। कल आ जाना...

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