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Prerak Prasang

रविशंकर महाराज के पिता की मृत्यु  

कष्ट का अनुभव किए बिना काम करने की कला मेरे पिताजी में थी। पंद्रह-बीस मील पैदल चलना उनके लिए साधारण बात थी। उनकी मृत्यु की घटना भी मेरे मन में हू-ब-हू चित्रित है। वे ईवरनपुर स्कूल में अध्यापक थे। वहीं उन्हें प्लेग की गिल्टी निकल...

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रविशंकर महाराज का ज्ञान

रविशंकर महाराज एक शाम को किसी स्टेशन पर उतरे, तो एक परिचित लड़के से अचानक उनकी मुलाकात हो गई। लड़के के पास लगभग पांच सेर वजन की दो गठरियाँ थीं और वह प्लेटफॉर्म पर खड़ा ‘कुली, कुली !’ चिल्ला रहा था। रविशंकर महाराज ने कहा –...

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मुनि नागसेन

एक बार राजा मिलिन्द ने नागसेन से पूछा – “भंते, संसार में क्या ऐसे भी लोग हैं, जो मरणोपरांत जन्म नहीं लेते?” “हाँ महाराज ! जो अपने कर्मों की इसी संसार में नि:सृत कर देते हैं, वे पुनः जन्म नहीं लेते।” “भंते, उपमा देकर स्पष्ट...

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माघ कवि

संस्कृत के महाकवि माघ एक दिन घर बैठे अपने काव्य का नवम सर्ग लिख रहे थे, तभी अवंतिका से एक दरिद्र ब्राह्मण ने आकर अपनी कन्या के विवाह के लिए उनसे आर्थिक सहायता की याचना की। कविवर स्वयं आर्थिक कष्ट में थे। फिर भी उन्होंने चारों ओर...

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महाप्रभु चैतन्य की इच्छा

आरती की पावन बेला थी। रव और शंखनाद से भगवान जगन्नाथ का मंदिर गुंजरित था। नित्य की भाँति महाप्रभु चैतन्य गरुड़ स्तंभ के समीप खड़े थे। भक्त जनों की भीड़ घने वन जैसी निविड़ थी। एक उड़िया स्त्री बहुत उचकने के बाद भी भगवान का दर्शन...

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महात्मा सुकरात का ज्ञान

जब मुकरात जेल में विष का प्याला पीकर मरने को ही थे, एक शिष्य ने पूछा – “प्रभो, आपको नहलाकर, कफन ओढ़ाकर फिर कहाँ दफन करें?” सुकरात यह सुनकर मुस्कराए, बोले- “शिष्यो, अगर तुम मुझे पा सको, तो जहाँ भी चाहो दफना दो। लेकिन सोचता...

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महात्मा गांधी और मोतीलालजी

पूना – अस्पताल में महात्माजी का ‘आपरेशन’ हुआ था। स्वर्गीय मोतीलालजी उनसे मिलने गए और बातों-बातों में अपने लाडले बेटे की करतूतों का बयान करने लगे – “जवाहरलाल से एक-दो बातें आपको कहनी ही होंगी। एक तो यह कि वह चना-चबेना...

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महर्षिजी की शिक्षा

एक घोर वेश्यागामी युवक को उसके हितैषी मित्र महर्षिजी के पास लाए कि इसे सत्पथ पर ले आइए। महर्षिजी ने वेश्यावृत्ति से होने वाले आत्मिक, शारीरिक और सामाजिक पतन का चित्र उसके सामने खींचा। फिर उन्होंने पूछा – “युवको, भला यह तो...

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बापू का अनशन

आजादी मिलने के बाद, कुछ कांग्रेस कार्यकर्ता दिल्ली नगर में बापू का सौंपा हुआ कोई काम कर रहे थे। उन दिनों सारे भारत में ही हिन्दू-मुसलमान एक-दूसरे के खून के प्यासे थे। एक दिन शाम को किसी कार्यकर्ता ने बापू को एक बड़ी दर्दनाक सूचना...

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बापू और कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी

एक व्यक्ति गांधीजी के परम भक्त थे। बहुत से अनुयायियों की अपेक्षा उनके अत्यंत समीप भी थे। वे विवाहित थे; पर एक अविवाहित युवती से प्रेम करने लगे थे। बातों ही बातों में बापू ने कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी से उनके संबंध में सारी बातें...

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