Latest Posts

Prerak Prasang

बापू का क्रोध

एक बार एक अमेरिकन स्त्री ने बापू से पूछा – “आपको क्रोध प्राता है या नहीं?” बापू ने हँसकर जवाब दिया- “बा से पूछो।” बा को बापू के क्रोध का कैसा अनुभव था, वह इस घटना में पढ़िए : बापू भिवानी गए थे। साथ में बा भी थीं। बापू का...

Prerak Prasang

बहलूल

एक बार बरसात ज्यादा हुई। सारे कब्रिस्तान की मिट्टी कट कर बह गई, मुर्दों की हड्डी और खोपड़ियाँ नंगी नजर आने लगीं। बहलूल कुछ खोपड़ियाँ सामने रखे उनमें कुछ तलाश कर रहे थे। संयोग से बादशाह की सवारी भी उधर आ निकली। बहलूल को यह अजीब...

Prerak Prasang

महर्षि देवेन्द्र ठाकुर

ज्ञान का सूर्य जिनके हृदय में चमक रहा हो, वे वाद और वितंडा में पड़ना पसंद नहीं करते। पहाड़ की चोटी पर खड़े मनुष्य को नीचे के सभी पेड़-पौधे एक-से ही नजर आते हैं। ब्राह्म समाज के प्रसिद्ध उपदेशक प्रतापचन्द्र मजूमदार एक दिन महर्षि...

Prerak Prasang

दयानंदजी को मुक्ति प्राप्ति

प्रयाग में गंगा तट पर एक महात्मा रहते थे। वे वयोवृद्ध थे। जब कभी महर्षि दयानंदजी उन्हें मिलते, तो वे महर्षिजी को ‘बच्चा’ कहकर संबोधन करते थे। एक दिन उस वृद्ध संत ने महर्षिजी को कहा – “बच्चा, अगर आप पहले के ही निवृत्ति-मार्ग...

Prerak Prasang

त्जेकुंग

एक बार त्जेकुंग ने महात्मा कन्फ्यूयिशस से पूछा – “सुचारु राज्य संचालन के लिए किन-किन वस्तुओं की आवश्यकता है?” कन्फ्यूशियस ने उत्तर दिया, “पर्याप्त अन्न, पर्याप्त फ़ौज और राजा के प्रति प्रजा में विश्वास ! त्जेकुंग ने पूछा...

Prerak Prasang

दीनबंधु एंड्रूज

स्वर्गीय दीनबंधु एंड्रूज बड़े ही उदारमना थे। गरीबों की सेवा ही वे सबसे बड़ा धर्म मानते थे। एक बार शिमला जाने के लिए उनके मित्र ने उन्हें डेढ़ सौ रुपये दिए। एंड्रूज स्टेशन पर पहुँचे ही थे कि एक प्रवासी भारतीय से भेंट हो गई। उसने...

Prerak Prasang

डायोजिनीज

यूनान का एक प्रसिद्ध तत्त्ववेत्ता डायोजिनीज, जोकि सुकरात का चेला था, अपना जीवन एक माँद में ही बिता लेता था। वह अपने रहने के लिए घर बनाना आवश्यक नहीं समझता था। एक बार किसी युवक ने उसे देर तक एक पत्थर की मूर्ति से भीख माँगते देखा।...

Prerak Prasang

निवेदिता का धर्म प्रचार

स्वामी विवेकानंद की प्रेरणा से अनेक कर्मवीर भारतीय वेदांत के प्रचार के लिए अमेरिका जाते थे। एक दिन एक संन्यासी सिस्टर निवेदिता के पास आए तथा अमेरिका में वेदांत प्रचार की प्रणालियों पर जिज्ञासा की। निवेदिता ने एक क्षण सोचा फिर...

Prerak Prasang

गांधीजी की अहिंसा

एक दिन गांधीजी ने यरवदा जेल में अपने एक साथी से कहा- आज रात मुझे बड़ी देर तक नींद नहीं आई। में सोने के लिए गया, तो कमरे की पिछली ओर की जाली से कुछ अवाज आ रही थी। मुड़कर देखा, तो साँप का जैसा सिर दिखाई पड़ा।” “वार्डर बाहर सो रहा...

Prerak Prasang

गांधीजी की सेवा

जाड़े के दिन थे। गांधीजी सेवाग्राम स्थित अपने आश्रम की गोशाला में पहुँचे। गायों की पीठ पर हाथ फेरा, बछड़ों को प्यार से सहलाया और तभी उनकी नज़र वहीं खड़े एक गरीब लड़के पर पड़ी। बापू उसके पास आए – “तू रात में यहीं सोता है?”...

You cannot copy content of this page