नीचे वेगवती और निर्मल यमुना बह रही थी ऊपर से चट्टानी तट उसपर झुका हुआ था। चारों ओर वन- निविड़, निर्झर – विदीर्ण पर्वत घिरे थे। गुरु गोविंदसिंह चट्टान पर बैठे, धर्मग्रंथों के स्वाध्याय में लीन थे। तभी अपने ऐश्वर्य का अभिमानी...
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किशोरलाल मशरूवाला के विचार
किशोरलाल मशरूवाला गांधीजी से कहते थे – “मैं आपका अनुयायी नहीं हूँ, आपके साथ-साथ चलने का प्रयत्न करता हूँ। आपने जिस सत्य को पहचाना है, लोगों को समझाते हैं, उसे समझने की मैं भी कोशिश करता हूँ। क्योंकि मैं भी सत्य की शोध में...
गुरुदेव और अभय
एक दिन गुरुदेव प्रातः टहलने निकल पड़े। साथ में उनका प्रिय शिष्य अभय भी चल दिया। मार्ग में यत्र-तत्र काँटे व कंकड़ पड़े थे; किंतु दोनों निश्चिन्त भाव से नंगे पाँव चले जा रहे थे। गुरुदेव जब कुछ परिश्रांत हुए तो एक ऊँचे टीले पर चढ़े...
काका कालेलकर की अर्जी
अंग्रेजी शासन का एक दिलचस्प किस्सा सुना था। एक सरकारी संस्था के लिए सरकार ने एक मकान बनवा दिया। बड़े जिलाधीश द्वारा मकान का उद्घाटन हुआ। अच्छे-अच्छे भाषण हुए। अंत में संस्था के संचालक ने जिलाधीश के हाथ में एक अर्जी दे दी। संचालक...
काका कालेलकर और मौन
जब मैं हिमालय में था, तब मेरे पड़ोस की एक कुटिया में रहने वाला एक साधक ब्रह्मचारी मुझसे हमेशा कहता था – “तुम्हें मौन का महत्त्व अब तक जँचा नहीं है : सच्चे साधकों को कभी भी मौन का भंग नहीं करना चाहिए।” इस संबंध में हम दोनों...
दादा धर्माधिकारी
एक बार आदिवासियों के एक गाँव में जाने का प्रसंग आया। मेरे लिए पास की एक झोंपड़ी में एक खाट डाल रखी थी। मैंने उसे देखकर पूछा – “यह जगह तुम्हें कैसे मिली?” उस भोले आदिवासी ने हकीकत कह दी, “मैं इसमें सुअर रखता हूँ। मेरे पास और...
ईसा मसीह और जेकस
जेकस जितना धनी था, उतना ही अनाचारी भी था। जब वह टैक्स वसूली के लिए निकलता, तो नगर निवासी उसकी अमानुषिक यातनाओं के भय से जंगलों में जा छिपते। उसके स्वामित्व में कई शराबखाने भी थे, जहाँ रात-दिन दुराचार के दावानल सुलगते रहते। एक दिन...
आचार्य बान्केई
जैन आचार्य बान्केई के प्रवचनों को सुनने श्रद्धालुओं और जिज्ञासुओं का उमड़ता देखकर अन्य संप्रदाय के एक पुजारी को बड़ी ईर्ष्या अनुभव होती थी। एक दिन वह बान्केई को शास्त्रार्थ के लिए ललकारने की ठानकर मंदिर में आ पहुँचा और बान्केई से...
Purpose of Indian Rites संस्कारों का प्रयोजन
संस्कारों का भारतवर्ष में अपना महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है। चिरकाल से उनकी व्यावहारिक उपयोगिता और उद्देश्य रहा है, यद्यपि आज उनकी सत्ता एवं महत्ता पर प्रश्नवाची चिह्न और निरुद्देश्यता का कलंक लग गया है क्योकि आज के इस वैज्ञानिक एवं...
What is Rites in Indian Context संस्कार क्या है?
भारतवर्ष में संस्कार केवल हिंदू धर्म के ही नहीं, अपितु अन्य धर्म एवं संप्रदायों के महत्त्वपूर्ण अंग रहे हैं और आज भी इस वैज्ञानिक विषम युग में जबकि सभ्यता के विकास के नाम पर बुद्धि का दिवाला निकाल दिया गया है उस समय भी वे अपने...

