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COAL

Introduction In modern times, coal is a very well-known thing. There are two kinds of coal, such as char-coal and mineral coal Char-coal is obtained from burnt wood. We get char-coal when we burn wood. In the summer season...

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IRON

Introduction Use of iron was unknown to the Indians until four thousand years back, when the rise of Indus Valley Civilization was at its zenith. People of Indus Valley Civilization were passing through the period of copper and...

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WATER

Introduction Water is known to everyone in this world. It is a vital necessity for plants and animals and for men too. It is vital necessity for any living being. Without water nobody can keep in life. So we say ‘water is...

Prerak Prasang

भगवान बुद्ध को प्यास

भगवान बुद्ध को प्यास लगी थी। आनंद पास के पहाड़ी झरने पर पानी लेने गए। किंतु देखा कि झरने से अभी-अभी बैलगाड़ियाँ गुज़री हैं और सारा जल गंदला हो गया है। वे वापस लौट आए और भगवान से वोले- “मैं पीछे छूट गई नदी पर जल लेने जाता हूँ, इस...

Prerak Prasang

महर्षि कणाद

वर्षा ऋतु का आगमन निकट देखकर एक दिन महर्षि कणाद ने सोचा कि होम कार्य और रसोईघर के लिए अभी से समिधा और सूखा ईंधन एकत्र कर लेना चाहिए। वे शिष्यों को लेकर वन की ओर निकल पड़े। सबके हाथों में कुल्हाड़ियाँ और रस्सियाँ थीं। संध्या होते...

Prerak Prasang

ऋषिकुमार सत्यकाम

तपोवन के वृक्षों की चोटी पर नवीन प्रसन्नता से प्रभात जागा। विद्याभ्यास में लीन तापस-बालक  उस पावन प्रातःबेला  में सुस्निग्ध ओस की बूँदों के समान निर्विकार लगते थे। परम श्रद्धालु भाव से वे सब एक अति वृद्ध वट वृक्ष की...

Prerak Prasang

भगवान महावीर

सकडाल-पुत्र कुम्हार का काम करता था। उसके मिट्टी के बर्तनों का व्यापार भी अच्छा चलता या। गोशालक का अनुयायी होने के कारण वह भाग्यवादी था। उसकी मान्यता थी कि जो कुछ होता है, नियतिवश होता है; मानव के कृतित्व जैसा कुछ नहीं है। एक बार...

Prerak Prasang

महर्षि दयानंद

जाह्नवी का सुरम्य तट। ब्राह्म मुहूर्त की बेला और कंपायमान- करने वाले पौष मास के दिवस। पवनदेव मानव-दंतावली से ‘दंत- वीणोपदेशाचार्य’ की शिक्षा-दीक्षा लेने में निरत थे। प्रकृति शीत में बेहोश मालूम होती थी। वहीं सरिता के...

Prerak Prasang

बुद्धदेव और उनके शिष्य

बुद्धदेव ने अपने शिष्यों से कहा- “मैं तुम्हें एक प्रदेश में किसी विशेष कठिन काम के लिए भेजना चाहता हूँ। अगर उस देश के निवासियों ने तुम्हारी बात न सुनी तो तुम क्या करोगे?” “भगवन् ! हम समझेंगे कि वे लोग बड़े अच्छे हैं। उन्होंने...

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