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Prerak Prasang

मुल्ला नसरुद्दीन का भाषण

एक बार शहर के लोगों ने मुल्ला नसरुद्दीन को किसी विषय पर भाषण देने के लिए आमंत्रित किया। मुल्ला जब बोलने के लिए मंच पर गया तो उसने देखा कि वहाँ उसे सुनने के लिए आए लोग उत्साह में नहीं दिख रहे थे। मुल्ला ने उनसे पूछा “क्या आप लोग...

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पटाचारा का दुख

श्रावस्ती के नगरसेठ की पुत्री थी। किशोरवय होने पर वह अपने घरेलू नौकर के प्रेम में पड़ गई। जब उसके माता-पिता उसके विवाह के लिए उपयुक्त वर खोज रहे थे तब वह नौकर के साथ भाग गई। दोनों अपरिपक्व पति-पत्नी एक छोटे से नगर में जा बसे कुछ...

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गाँधी जी का रुमाल

हरिजन प्रवास के समय एक बार गाँधी जी का रुमाल काम की भीड़ में पिछले पड़ाव पर छूट गया। शायद किसी ने धोकर सुखा दिया था। चलते समय उसे उठाना भूल गया। गाँधी जी को उसकी ज़रूरत पड़ी तो उन्होंने महादेव भाई से कहा, “मेरी रुमाल लाओ!” महादेव...

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मेरे लिए भोजन से जरूरी सत्य की प्राप्ति

फीनिक्स आश्रम में एक दिन एक बालक को एक शिलिंग (सिक्का) कहीं पड़ा हुआ मिला। सब विद्यार्थी सोचने लगे कि उसका क्या उपयोग किया जाए? तभी एक और विद्यार्थी को चौथाई शिलिंग का एक सिक्का और मिला। बहुमत खाने की चीजें मँगाने के पक्ष में था।...

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दिल न टूट

बाबा फरीद एक उच्च कोटि के फकीर हो गए हैं। उनके लिए एक बुढ़िया जलेबी का प्रसाद ले गई। बाबा उस दिन व्रत में थे। उन्होंने उसकी जलेबी लौटा दी बुढ़िया फूट-फूटकर रो पड़ी। अपने बच्चे का हाथ थाम, जलेबी लिए रोती-रोती वह घर लौटने लगी। बाबा...

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मुझे तो असली तत्त्व का ज्ञान दे दो।

एक बार किसी भक्त ने भक्ति की। उसकी दृढ़ भावना थी कि भगवान साकार रूप में दर्शन दें और मैं उनसे बातचीत कर सकूँ। भक्ति करते-करते उसके समक्ष एक बार भगवान साकार रूप लेकर आ गए और बोलेः “वरं ब्रूयात्। “वर माँग। भक्तः “वरदान क्या माँगें...

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मत कर रे गरव गुमान गुलाबी रंग उड़ी जावेलो

बुद्ध के जमाने में एक विश्व सुंदरी हुई थी। उसका नाम भी था विश्वसुंदरी और वास्तव में वह विश्वसुंदरी थी। बहुत गर्विष्ठ। बड़े-बड़े राजा, महाराजा, उसकी मुलाकात के लिए लालायित रहते थे। वह किसी को दाद नहीं देती थी। 16- 17 साल की उसकी...

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शिक्षा का महत्व

एक बार महाराष्ट्र के विख्यात संत गाडगे जी महाराज कहीं जा रहे थे। रास्ते में उन्होंने देखा कि एक वृद्ध सज्जन अपने हाथ में चिट्ठी लिए हुए घूम रहे थे और सबसे उसे पढ़ने का निवेदन कर रहे थे। मगर लोग अपने-अपने कार्यों में इस तरह व्यस्त...

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एक-एक चीज़ राष्ट्र की संपत्ति है।

गांधीजी जेल में बंद थे। वहाँ की बदइंतजामी से क्षुब्ध होकर कर उन्होंने अनशन शुरू कर दिया। एक दिन वह तख्त पर बैठे-बैठे लोगों से बातें कर रहे थे। पास में अंगीठी पर पानी गर्म हो रहा था। पानी जब खौलने लगा तब पतीले को नीचे उतारा गया।...

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सत्शिष्य

भगवान बुद्ध ने एक बार घोषणा की कि “अब महानिर्वाण का समय नजदीक आ रहा है। धर्मसंघ के जो सेनापति हैं, कोषाध्यक्ष हैं, प्रचार मंत्री हैं, व्यवस्थापक हैं तथा अन्य सब भिक्षुक बैठे हैं उन सबमें से जो मेरा पट्टशिष्य होना चाहता हो, जिसको...

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