एक राजा जिस साधु-संत से मिलता, उनसे तीन प्रश्न पूछता। पहला- कौन व्यक्ति श्रेष्ठ है? दूसरा- कौन सा समय श्रेष्ठ है? और तीसरा- कौन सा कार्य श्रेष्ठ है? सब लोग उन प्रश्नों के अलग-अलग उत्तर देते, किंतु राजा को उनके जवाब से संतुष्टि...
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सब कर्मों का फल है
एक बार देवर्षि नारद अपने शिष्य तुम्बुरु के साथ कही जा रहे थे गर्मियों के दिन थे एक प्याऊ से उन्होंने पानी पिया और पीपल के पेड़ की छाया में जा बैठे इतने में एक कसाई वहाँ से 25-30 बकरों को लेकर गुजरा उसमें से एक बकरा एक दुकान पर...
असंभव कुछ भी नहीं है-
असंभव कुछ भी नहीं है- यह वाक्य है फ्रांस के नेपोलियन बोनापार्ट का, जो एक गरीब कुटुंब में जन्मा था, परंतु प्रबल पुरुषार्थ और दृढ़ संकल्प के कारण एक सैनिक की नौकरी में से फ्रांस का शहंशाह बन गया। ऐसी ही संकल्पशक्ति का दूसरा उदाहरण...
स्वर्ग और नरक
एक युवक था। वह बंदूक और तलवार चलाना सीख रहा था। इसलिए वह यदा-कदा जंगल जाकर खरगोश, लोमड़ी और पक्षियों आदि का शिकार करता। शिकार करते-करते उसे यह घमंड हो गया कि उसके जैसा निशानेबाज़ कोई नहीं है और न उसके जैसा कोई तलवार चलाने वाला।...
गाली के बदले प्यार
कर्णवास का एक पंडित महर्षि दयानंद सरस्वती को प्रतिदिन गालियाँ दिया करता था, पर महर्षि शांत भाव से उन्हें सुनते रहते और उसे कुछ भी उत्तर न देते। एक दिन जब वह गाली देने नहीं आया तब महर्षि ने लोगों से उसके न आने का कारण पूछा। लोगों...
कर्तव्य
विश्वविजित होने का स्वप्न देखने वाले सिकंदर और उनके गुरु अरस्तू एक बार घने जंगल में कहीं जा रहे थे। रास्ते में उफनता हुआ एक बरसाती नाला पड़ा। अरस्तू और सिकंदर इस बात पर एकमत न हो सके कि पहले कौन नाला पार करे। उस पर वह रास्ता...
विवेक
यूनान के प्रसिद्ध दार्शनिक सुकरात एक बार अपने शिष्यों के साथ चर्चा में मग्न थे। उसी समय एक ज्योतिष घूमता- घामता पहुँचा, जो कि चेहरा देखकर व्यक्ति के चरित्र के बारे में बताने का दावा करता था। सुकरात व उनके शिष्यों के समक्ष यही...
सच्चा देशभक्त
महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के काटलुक गाँव में एक प्राईमरी स्कूल था। कक्षा चल रही थी। अध्यापक ने बच्चों से एक प्रश्न किया यदि तुम्हें रास्ते में एक हीरा मिल जाए तो तुम उसका क्या करोगे? मैं इसे बेच कर कार खरीदूँगा एक बालक ने कहा।...
दूध और खून
एक बार नानकदेव “लालो बढ़ई” के घर गए। उस गाँव में एक धनाढ्य व्यक्ति रहता था जिसका नाम “मालिक भागो” था। उस दिन उसके घर भोज था। गाँव के सारे लोग वहाँ खाने गए थे। सबके खा चुकने के बाद उसने अपने नौकरों से पूछा “गाँव के सभी लोग खा चुके...
सज्जन और दुर्जन
एक बार नानकदेव एक गाँव में गए। साथ में उनके शिष्य मरदाना भी थे। उस गाँव के लोग नास्तिक विचारधारा के थे। उन्होंने नानकदेव का काफी तिरस्कार किया और उन्हें ढोंगी की संज्ञा दी। तब भी नानकदेव शांत रहे। दूसरे दिन जब वे वहाँ से जाने लगे...

