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Hindi Sahitya

यशोधरा – चयनित अंश – व्याख्या सहित, मैथिलीशरण गुप्त

यशोधरा – चयनित अंश सिद्धि हेतु स्वामी गए, यह गौरव की बात,पर चोरी-चोरी गए, यही बड़ा व्याघात,सखि, वे मुझसे कह कर जाते,कह, तो क्या मुझको वे अपनी पथ-बाधा ही पाते?मुझको बहुत उन्होंने माना,फिर भी क्या पूरा पहचाना?मैंने मुख्य उसी को...

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‘पंथ होने दो अपरिचित’ महादेवी वर्मा

पंथ होने दो अपरिचित पंथ होने दो अपरिचित प्राण रहने दो अकेला !घेर ले छाया अमा बन,आज कज्जल-अश्रुओं में रिमझिम ले यह घिरा घन,और होंगे नयन सूखे,तिल बुझे औ’ पलक रूखे,आर्द्र चितवन में यहाँशत विद्युतों में दीप खेला!अन्य होंगे चरण...

Hindi Sahitya

‘सब बुझे दीपक जला लूँ’ महादेवी वर्मा

सब बुझे दीपक जला लूँ सब बुझे दीपक जला लूँघिर रहा तम आज दीपक-रागिनी अपनी जगा लूँ!क्षितिज कारा तोड़ कर अबगा उठी उन्मत्त आँधी,अब घटाओं में न रुकतीलास-तन्मय तड़ित् बाँधी,धूलि की इस वीण पर मैं तार हर तृण का मिला लूँ!भीत तारक मूँदते...

Hindi Sahitya

‘चिर सजग आँखें उनींदी’ महादेवी वर्मा

चिर सजग आँखें उनींदी चिर सजग आँखें उनींदी आज कैसा व्यस्त बाना!जाग तुझको दूर जाना!अचल हिमगिरि के हृदय में आज चाहे कम्प हो ले,या प्रलय के आँसुओं में मौन अलसित व्योम रो ले,आज पी आलोक को डोले तिमिर की घोर छाया,जागकर विद्युत-शिखाओं...

Hindi Vyakaran

‘र’ के विभिन्न रूप

‘र’ के विभिन्न रूप‘र’ एक व्यंजन वर्ण है। उच्चारण की दृष्टि से यह लुंठित व्यंजन ध्वनि है।हिंदी भाषा में ‘र’ के विभिन्न रूपों का प्रयोग होता है। कहीं पर ‘र’ का प्रयोग स्वर रहित होता है तो कहीं पर स्वर सहित।जिसमें ‘अ’ की ध्वनि हो वह...

Hindi Vyakaran

सघोष (Voice/Voiced) और अघोष Voiceless/Devoiced व्यंजन

सघोष (Voice/Voiced) और अघोष Voiceless/Devoiced व्यंजन     श्वास नलिका के ऊपरी भाग में ध्वनि उत्पन्न करने वाला प्रधान अवयव होता है जिसे ध्वनि यंत्र या स्वरयंत्र कहते हैं। इसे आसानी से समझने के लिए कुछ पुरुषों के गले में जो उभरी...

Hindi Vyakaran

अल्पप्राण Un-aspirate और महाप्राण Aspirate Dhwaniya

अल्पप्राण Un-aspirate और महाप्राण Aspirateश्वास (प्राण/वायु) की मात्रा के आधार पर वर्ण-भेदउच्चारण में वायुप्रक्षेप (मुख से निकलने वाली हवा) की दृष्टि से व्यंजनों के दो भेद हैं-(1) अल्पप्राण(2) महाप्राणअल्पप्राण (अल्पप्राण को...

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‘मैं नीर भरी दुख की बदली’ महादेवी वर्मा

मैं नीर भरी दुख की बदली मैं नीर भरी दुख की बदली!स्पंदन में चिर निस्पंद बसा,क्रंदन में आहत विश्व हँसा, नयनों में दीपक से जलतेपलकों में निर्झरिणी मचली!मेरा पग पग संगीत भरा,श्वासों से स्वप्न – पराग झरा,नभ के नव रंग बुनते...

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‘यह मंदिर का दीप’ महादेवी वर्मा

यह मंदिर का दीपयह मंदिर का दीप इसे नीरव जलने दो!रजत शंख-घड़ियाल स्वर्ण वंशी-वीणा-स्वर,गए आरती वेला को शत-शत लय से भर,जब था कल कंठों का मेला,विहँसे उपल तिमिर था खेला,अब मंदिर में इष्ट अकेला,इसे अजिर का शून्य गलाने को गलने दो!चरणों...

Meri Rachnayen

अमावट

किसी कारण से घर के मुख्य सदस्यों को गाँव जाना था। शायद गाँव में कुछ बात हो गई थी। तय यह हुआ कि छह सदस्यों के परिवार में माता-पिता और इकलौती बहन ही जाएँगे और शेष तीन भाई घर पर ही रहेंगे। ऐसे में घर के सबसे छोटे बेटे को रोना आ गया।...

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