एक बार बुद्धदेव पाटलिपुत्र गए। राजा बिम्बिसार और नगरवासियों ने अपनी क्षमतानुसार उन्हें कीमती हीरे-मोती के हार भेंट किए। बुद्धदेव ने उन सबको अनमने ढंग से एक हाथ से स्वीकार कर लिया। इतने में 70-80 वर्ष की एक बुढ़िया लाठी टेकते...
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ममत्व की जड़ें बड़ी गहरी होती हैं
राजा भर्तृहरि बारह वर्ष के बाद अपने जन्म-स्थान गए। वहाँ किसी ने उन्हें पहचाना नहीं। रात में एक दुकान के सामने बैठे रहे। ठंड के मारे रात भर दुकान के चौबारे में पड़ी अधजली लकड़ियों को जलाजलाकर तापते रहे। सबेरा हुआ। दुकानदार ने जैसे...
खुदी को मिटा दो – मुक्त हो जाओगे
एक सेठ था। वह रुपये कर्ज पर देने का व्यापार करता था। किसी गरजमंद शख्स ने उससे कई बार कई मदों में रुपये बतौर कर्ज लिए थे। जानते ही हो, कर्ज खाज के घाव जैसा होता है। वह बढ़ता गया, बढ़ता गया। काफी दिनों के बाद सेठ ने अपने रुपये की...
शरीर सराय की तरह है
एक फकीर ऋषिकेश में गंगा किनारे नंगे बदन बैठा था। उनकी जाँघ में एक जबर्दस्त फोड़ा हो गया था। उसमें कीड़े रेंग रहे थे। फकीर उसको निहारकर अत्यंत खुश हो रहा था। कोई आदमी बगल में खड़े होकर वह देख रहा था। जब कीड़े जख्म से नीचे गिर जाते...
करुणा
एक बार बुद्धदेव कहीं जा रहे थे। रास्ते में एक चरवाहा अपनी भेड़-बकरियों के झुंड को लिए जा रहा था। उसमें से एक बकरी लंगड़ाकर चल रही थी। बुद्धदेव ने देखा तो बड़े दुखी हुए। उन्होंने चरवाहे से पूछा “तुझे कहाँ जाना है?” उसने...
जगत् को अंदर से छोड़कर पकड़े रहो !
किसी राज्य का राजा मर गया था। उसकी गद्दी के लिए लोगों के बीच झगड़ा मचा हुआ था। कोई एक को राजा बनाना चाहता या तो कोई दूसरे को। अंत में कुछ समझदार लोगों के कहने पर निश्चय हुआ कि राजमहल के फाटक के भीतर कल सुबह जो आदमी सबसे पहले...
मन से भगवान का चिंतन करो।
एक मुसलमान सबेरे उठकर मस्जिद में बाँग दे रहा था- “अल्लाह, बिस्मिल्लाह, रसूलल्लाह……… ।” वह उस वक्त मन में सोच रहा था कि दस-बीस हजार रुपए होते तो लड़की का ब्याह हो जाता। मस्जिद के निकट से एक सिद्ध फकीर गुजर रहा...
सच्चा पतिव्रत-धर्म
एक ‘शांडिली’ नाम की औरत अपने पति कौशिक ब्राह्मण की अनन्य प्रेमी थी। उसका पति बड़ा दुराचारी था उसके सारे शरीर में कुष्ट हो गया था। वह भारी वेश्यागामी भी था। उसने अपनी पत्नी को कहा कि मुझे अमुक वेश्या के घर पहुँचा दो पत्नी उसको...
ज्ञानी और अज्ञानी मैं फर्क
एक राजा था। उसने अपने गुरु महाराज को राजसी ठाट-बाट के साथ आलीशान बंगले में ठहराया था। गुरु महाराज की राजा से भी बड़ी मान-प्रतिष्ठा थी, चूँकि वे राजा के गुरु थे। एक दिन राजा के मन में ख्याल आया कि गुरु महाराज भी तो मेरी ही तरह...
मालिक और मौत को सदा याद रखो
एक बार एक व्यक्ति संत एकनाथ जी के पास आया और बोला, “महाराज, आपका जीवन कितना आनंदमय है जो आप निश्चिंत होकर सिर्फ भगवान का भजन कर रहे हैं। इधर हमलोग रात-दिन गृहस्थी के पछड़े में पड़कर तबाह हो सोते हैं। महाराज, कोई ऐसा उपाय बताइए कि...

