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Prerak Prasang

दया और समता

महाभारत काल की घटना है। पांडव अज्ञातवास में थे। यक्ष के तालाब से जल लेने गए अर्जुन, भीम आदि चार भाई यक्ष के प्रश्नों के जवाब न देने के कारण उसके शाप से मूर्च्छित हो गए थे। सबसे अंत में युधिष्ठिर जल लेने गए। यक्ष ने उनसे भी जल...

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राम एक मिस्ट्री हैं

अमेरिका में एक सुंदर युवती ने स्वामी रामतीर्थ से कुछ बातें करने के लिए अलग समय माँगा। स्वामी जी ने उसको दूसरे दिन सुबह मिलने को कहा। वह युवती स्वामी रामतीर्थ से मिलने के लिए उनके निवासस्थान पर गई। उसने स्वामी जी से कहा “मैं एक...

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बाबा फरीद का ज्ञान

एक बार एक व्यक्ति ने बाबा फरीद से प्रश्न किया “महाराज, हमने सुना है कि जब प्रभु ईसा को शूली दी जा रही थी तो उनके चेहरे से प्रसन्नता की आभा टपक रही थी और उन्हें शूली दिए जाने का जरा भी दुख न था। उसके विपरीत उन्होंने भगवान से...

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अभ्यास का फल

इंग्लैंड में एक बहुत बड़ा संगीतकार था जिसकी प्रसिद्धि केवल यूरोप में ही नहीं बल्कि अमेरिका तक फैली हुई थी। वह साल में एक बार अपनी कला का प्रदर्शन केवल आधे घंटे के लिए किया करता था। वर्षभर लोग बड़ी बेताबी से उस तारीख का इंतजार...

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मानव-प्रेम

एक बार आचार्य रामानुज के गुरु गोष्ठीपूर्ण ने उनसे कहा “वत्स ! आज मैं तुम्हें एक अलौकिक मंत्र दूँगा। इस मंत्र का माहात्म्य बहुत कम लोग जानते हैं। तुम एक शक्तिमान आधार हो, यह जानकर ही यह मंत्र मैंने तुम्हें दिया है। मंत्र –...

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अपने स्वभाव के धर्म का पालन

एक बार संत एकनाथ जी गोदावरी में स्नान कर रहे थे। इतने में उन्होंने देखा कि सामने से एक बिच्छू पानी में बहा जा रहा था। उनको उस पर दया आ गईं। उन्होंने उसे अपने हाथ से पकड़कर पानी से बाहर कर दिया। परंतु बिच्छू तो बिच्छू ही ठहरा।...

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बुराई से अच्छाई का रास्ता

हजरत ईसा के सामने लोगों ने एक धोबी को पेश किया और शिकायत की कि वह बड़ा ही दुष्ट है, तमाम आदमियों को तंग कर रखा है हज़रत की जुबान से निकला कि वह शाम तक मर जाएगा। धोबी कपड़े धोने चला गया। उसकी लड़की उसका भोजन लेकर घाट पर गई। उसी...

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मन की परीक्षा

एक बार श्री समर्थ रामदास जी सतारा जाने के कम में बीच में देहेगाँव में रुके। साथ में उनके शिष्य दत्तूबुवा भी थे श्री समर्थ को उस समय भूख लगी। दत्तूबुवा ने कहा “आप यहीं बैठे, मैं कुछ खाने की व्यवस्था कर लाता हूँ। रास्ते में...

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क्रोध अस्पृश्यता है

एक बार बुद्धदेव अपने शिष्यों सहित सभा में विराजमान थे। शिष्यगण उन्हें काफी देर से मौन देखकर चिंतित ये कि कहीं वे अस्वस्थ तो नहीं है। एक शिष्य ने अधीर होकर पूछा ‘आप आज इस प्रकार मौन क्यों हैं? क्या हमसे कोई अपराध हुआ है?” फिर भी...

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फकीरों की दुनिया

एक अवधूत महात्मा छह दिनों के भूखे थे श्मशान में पिंडदान के आटे को इकट्ठा करके उन्होंने चार टिक्कड़ बनाए थे और उन्हें चिता की आग पर रखा था। उनकी दशा देखकर पार्वती ने महादेव से कहा ‘आर्य, आप कैसे निष्ठुर है भला ! कहते हैं कि विश्व...

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