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दया- भाव

एक बार संत एकनाथ जी काशी से रामेश्वरम् की यात्रा कर रहे थे। उस समय गर्मी का दिन था। आस-पास पानी मिलना मुश्किल था। उन्होंने देखा कि एक गधा प्यास से तड़प रहा था। उसे देखकर उन्हें दया आई और अपनी कमंडलु का पानी, जिसे वे रामेश्वरम्...

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‘मलूकदास’

किसी गाँव में एक संत आए। रात्रिकाल में कुछ ग्रामीण उनके निकट सत्संगलाभ करने के लिए इकट्ठे हुए। महात्मा ने सत्संग में कहा कि भगवान सबके रक्षक हैं। उनका नाम विश्वम्भर है। वे ही सबका भरण-पोषण करते हैं। श्रोताओं में से एक ने शंका...

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मन को शुद्ध करो

एक बार श्री समर्थ रामदास जी भिक्षा माँगते हुए एक घर के सामने खड़े हुए और उन्होंने आवाज लगाई ‘जय-जय श्री रघुवीर समर्थ। घर की स्त्री बाहर आई। उनकी झोली में भिक्षा डालती हुई वह बोली- “महाराज, कोई उपदेश कीजिए।” स्वामी जी बोले ‘आज...

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विचार में समझौता नहीं

विनोबा जी के आश्रम में एक बार एक राजनीतिक नेता आए थे, जो विनोबा के परम मित्र थे। वे चुनाव में खड़े होनेवाले ये किंतु उनके और विनोबा के विचार में बहुत मतभेद था। उनके साथ चर्चा करते हुए विनोबा ने कहा “आपके प्रति मुझे बहुत प्रेम है...

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सच्चे श्रोता

सप्त सरोवर स्थित स्वामी सत्यमित्रानंद जी महाराज के पंडाल में संत सम्मेलन हो रहा या। पंडाल गैरिक वस्त्रधारी साधुओं से भरा था। मंच पर भी दर्जनों महात्मागण विराजमान ये। सबसे आगे ही परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के वयोवृद्ध आत्मनिष्ठ संत...

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धन्यवाद के अधिकारी

एक बार संत एकनाथ गोदावरी से स्नान करके लौट रहे थे। गली में एक मुसलमान रहता या जो हिंदू साधुओं को बड़ा तंग किया करता था। उसने एकनाथ जी पर कुल्ला कर दिया। वे चुपचाप रहे और पुनः स्नान करने को चले गए। स्नान करने के पश्चात् उसने पुनः...

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सच्चा परिव्राजक

एक बार गौतम बुद्ध के शिष्य वाणिक ने उनसे सुरापरान्त नामक प्रान्त में धर्म-प्रचार की आज्ञा माँगी। वाणिक से बुद्ध ने पूछा  “अच्छा सुरापरान्त ! लोग कठोर वचनों का प्रयोग करेंगे तो तुम्हें कैसा लगेगा?” दिया। “मै समझूँगा कि वे भले...

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समय का दुरुपयोग कब?

विनोबा के असली दाँत टूट चुके थे, नकली दाँत लगाए थे। वे रोज अपने हाथ से दाँतों को धोते थे। उसमें पंद्रह मिनट सहज ही लग जाते थे। एक बार जानकी देवी ने विनोबा से कहा “आपके पंद्रह मूल्यवान मिनट दाँत घोने में लगते हैं। यह ठीक नहीं है...

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नयी तालीम

विनोबा जी के आश्रम में एक लड़का था जिसको बीड़ी पीने की लत पड़ गई थी। आश्रम में बीड़ी पी नहीं सकते, तम्बाकू खा नहीं सकते और दूसरे व्यसन भी नहीं कर सकते, इस नियम की उसे जानकारी थी फिर भी वह चुपचाप बीड़ी पीता रहता था। एक दिन एक...

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भिक्षा का प्रताप

एक बार समर्थ गुरु रामदास जी घर के द्वार पर खड़े होकर ‘जय-जय श्री रघुवीर समर्थ’ का उद्घोष किया। गृहिणी का अपने पति से कुछ देर पूर्व कुछ कहा-सुनी हुई थी, जिससे वह गुस्से में थी। बाहर आकर चिल्लाकर बोली “तुम लोगों को भीख माँगने के...

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