किसी समय बहुत थोड़े से बड़े-बड़े शहरों में सिनेमा की अंग्रेजी तस्वीरें दिखाई जाती थीं और सिर्फ अंग्रेजी पढ़े-लिखे संपन्न व्यक्ति या कालेज के विद्यार्थी उन्हें देखा करते थे, परंतु आज सिनेमा समस्त भारतीय जीवन में इतना अधिक प्रवेश...
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विद्यार्थी और राजनीति
प्राचीन शास्त्रकारों ने हमारे जीवन को चार भागों में बाँटा है – ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास। ब्रह्मचर्य आश्रम विद्याध्ययन के लिए है। गृहस्थ आश्रम सांसारिक जीवन-यात्रा के लिए है और वानप्रस्थ या संन्यास समाज के...
सह-शिक्षा
सह-शिक्षा का अर्थ है एक कक्षा में, एक कमरे में छात्रों और छात्राओं की एक साथ पढ़ाई। भारत में इसका सदा विरोध किया जाता था और यह व्यवस्था थी कि बालक और बालिकाओं के गुरुकुल अलग-अलग और एक-दूसरे से दूर हों। यूरोप में भी सह-शिक्षा का...
भारत की सामाजिक समस्याएँ
मनुष्य के जन्म के साथ विभिन्न समस्याएँ भी उत्पन्न होती हैं। प्रारंभ में समस्याएँ व्यक्तिगत होती हैं बाद में वे सामाजिक समस्या के रूप में विकसित हो जाती हैं। मानव कभी भी अपने आप में पूर्ण नहीं होता। किसी न किसी प्रकार का अभाव...
मद्यनिषेध एक सामाजिक आवश्यकता
‘मद्यनिषेध’ शब्द में ‘निषेध’ जुड़ा है जिसका अर्थ मना करना, प्रतिबंध लगाना अथवा वर्जित करना है। मद्यनिषेध से तात्पर्य है, मदिरापान को कानूनी तौर पर मना करना। आज मद्य शब्द मदिरा या शराब तक ही सीमित नहीं है...
शक्तियों का ध्रुवीकरण और भारत
मानव-सृष्टि परिवर्तित होती रहती है, इससे संबंधित सभी वस्तुएँ, धारणाएँ भी बदलती हैं। नब्बे के दशक तक विश्व मुख्यतः दो भागों में विभक्त था। एक भाग के राष्ट्र अमेरिका को महाशक्ति मानते थे तथा उसकी विचारधारा और कार्यों का समर्थन करते...
नए कानून व हिंदू नारी
कुटुम्ब व विवाह की प्रथा मानव को शांति, उन्नति और आनंद देने तथा समाज के भली-भाँति विकास के लिए बनाई गई थी। वैदिक शास्त्रों में विवाह को आध्यात्मिक स्वरूप दिया गया है और विवाह एक पवित्र धार्मिक बंधन माना गया है। समाज के दो महान...
नारी जागरण व उसकी दिशा
आज की भारतीय नारी एक ओर सती सीता, सावित्री और दमयंती के आदर्श चरित्र पढ़ती है, दूसरी ओर वह नए समाज और नई दुनिया को देखती है, जिसमें समाज और युग उससे कुछ ऐसी चीज माँगता प्रतीत होता है, जिसकी शायद सीता, सावित्री या दमयंती से कभी...
लोकतंत्र
आज के युग में लोकतंत्र सर्वोत्तम शासन पद्धति स्वीकार की जाती है, पर आज से कुछ समय पहले ऐसा न था। प्राचीन भारत और प्राचीन यूनान भले ही लोकतंत्र के उदाहरण पाए जाते होंगे, लेकिन उसके बाद लोकतंत्र का सिद्धांत प्रचलित न रहा। साधारणतः...
भारतीय संस्कृति
किसी देश की संस्कृति उसकी संपूर्ण मानसिक निधि, उसकी विचारधारा और दृष्टिकोण को प्रकट करती है। यह किसी एक व्यक्ति के पुरुषार्थं का फल नहीं होता, अपितु असंख्य ज्ञात और अज्ञात व्यक्तियों के निरंतर प्रयत्न का परिणाम होती है। संस्कृति...

