Latest Posts

Lets see Essays

सिनेमा और समाज 50 साल पहले

किसी समय बहुत थोड़े से बड़े-बड़े शहरों में सिनेमा की अंग्रेजी तस्वीरें दिखाई जाती थीं और सिर्फ अंग्रेजी पढ़े-लिखे संपन्न व्यक्ति या कालेज के विद्यार्थी उन्हें देखा करते थे, परंतु आज सिनेमा समस्त भारतीय जीवन में इतना अधिक प्रवेश...

Lets see Essays

विद्यार्थी और राजनीति

प्राचीन शास्त्रकारों ने हमारे जीवन को चार भागों में बाँटा है – ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास। ब्रह्मचर्य आश्रम विद्याध्ययन के लिए है। गृहस्थ आश्रम सांसारिक जीवन-यात्रा के लिए है और वानप्रस्थ या संन्यास समाज के...

Blog

सह-शिक्षा

सह-शिक्षा का अर्थ है एक कक्षा में, एक कमरे में छात्रों और छात्राओं की एक साथ पढ़ाई। भारत में इसका सदा विरोध किया जाता था और यह व्यवस्था थी कि बालक और बालिकाओं के गुरुकुल अलग-अलग और एक-दूसरे से दूर हों। यूरोप में भी सह-शिक्षा का...

Lets see Essays

भारत की सामाजिक समस्याएँ

मनुष्य के जन्म के साथ विभिन्न समस्याएँ भी उत्पन्न होती हैं। प्रारंभ में समस्याएँ व्यक्तिगत होती हैं बाद में वे सामाजिक समस्या के रूप में विकसित हो जाती हैं। मानव कभी भी अपने आप में पूर्ण नहीं होता। किसी न किसी प्रकार का अभाव...

Lets see Essays

मद्यनिषेध एक सामाजिक आवश्यकता

‘मद्यनिषेध’ शब्द में ‘निषेध’ जुड़ा है जिसका अर्थ मना करना, प्रतिबंध लगाना अथवा वर्जित करना है। मद्यनिषेध से तात्पर्य है, मदिरापान को कानूनी तौर पर मना करना। आज मद्य शब्द मदिरा या शराब तक ही सीमित नहीं है...

Lets see Essays

शक्तियों का ध्रुवीकरण और भारत

मानव-सृष्टि परिवर्तित होती रहती है, इससे संबंधित सभी वस्तुएँ, धारणाएँ भी बदलती हैं। नब्बे के दशक तक विश्व मुख्यतः दो भागों में विभक्त था। एक भाग के राष्ट्र अमेरिका को महाशक्ति मानते थे तथा उसकी विचारधारा और कार्यों का समर्थन करते...

Lets see Essays

नए कानून व हिंदू नारी

कुटुम्ब व विवाह की प्रथा मानव को शांति, उन्नति और आनंद देने तथा समाज के भली-भाँति विकास के लिए बनाई गई थी। वैदिक शास्त्रों में विवाह को आध्यात्मिक स्वरूप दिया गया है और विवाह एक पवित्र धार्मिक बंधन माना गया है। समाज के दो महान...

Lets see Essays

नारी जागरण व उसकी दिशा

आज की भारतीय नारी एक ओर सती सीता, सावित्री और दमयंती के आदर्श चरित्र पढ़ती है, दूसरी ओर वह नए समाज और नई दुनिया को देखती है, जिसमें समाज और युग उससे कुछ ऐसी चीज माँगता प्रतीत होता है, जिसकी शायद सीता, सावित्री या दमयंती से कभी...

Lets see Essays

लोकतंत्र

आज के युग में लोकतंत्र सर्वोत्तम शासन पद्धति स्वीकार की जाती है, पर आज से कुछ समय पहले ऐसा न था। प्राचीन भारत और प्राचीन यूनान भले ही लोकतंत्र के उदाहरण पाए जाते होंगे, लेकिन उसके बाद लोकतंत्र का सिद्धांत प्रचलित न रहा। साधारणतः...

Lets see Essays

भारतीय संस्कृति

किसी देश की संस्कृति उसकी संपूर्ण मानसिक निधि, उसकी विचारधारा और दृष्टिकोण को प्रकट करती है। यह किसी एक व्यक्ति के पुरुषार्थं का फल नहीं होता, अपितु असंख्य ज्ञात और अज्ञात व्यक्तियों के निरंतर प्रयत्न का परिणाम होती है। संस्कृति...

You cannot copy content of this page