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संयुक्त राष्ट्रसंघ

आदि काल से जब इस धरती पर मानव ने जन्म लिया था, उसमें दो परस्पर विरोधी भावनाएँ एक साथ पनपती रही हैं। प्रेम, दया, शांति की भावना मानव में स्वाभाविक है। इसी भावना के कारण माँ बालक को प्यार करती है, दुलार करती है। पति-पत्नी व परिवार...

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विश्व विनाश के कगार पर

मनुष्य का विकास पशुओं से हुआ है, यह सिद्धांत सत्य हो या न हो, पर इसकी पुष्टि मनुष्य के स्वभाव से अवश्य की जा सकती है। वह सदा से प्रकृति से और अपने समीपवर्ती मानव से संघर्ष करता आया है। संघर्ष, झगड़ा और युद्ध उसके स्वभाव का अंग बन...

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सहकारी पद्धति

“मेरा यह दृढ़ विश्वास है कि जब तक हम सहकारी खेती का ढंग नहीं अपनाएँगे, तब तक हमें खेती का पूरा लाभ प्राप्त नहीं हो सकता। क्या यह बात विवेकपूर्ण नहीं प्रतीत होती कि गाँव की जमीन को, जिस किसी भी तरह सौ टुकड़ों में बाँटकर खेती...

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सामुदायिक योजना

“इस समय शक्ति का केंद्र नई दिल्ली है, कलकत्ता है, बंबई है या बड़े शहरों में है। मैं इसे भारत के सात लाख गाँवों में बाँट दूँगा, तब इन सात लाख इकाइयों में स्वतः सहयोग होगा। और उस सहयोग से वास्तविक स्वतंत्रता पैदा होगी, एक नई...

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साहित्य और समाज अथवा साहित्य समाज का दर्पण

आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी ने लिखा है ‘ज्ञान राशि के संचित कोश का नाम साहित्य है।’ इसी प्रकार ऐसा मानव-समुदाय समाज कहलाता है, जो समान परंपराओं और विचारों का पालन करता हो । साहित्य के शब्दार्थ में सहित होने का भाव...

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परिश्रम का महत्त्व एवं आवश्यकता

विधाता ने विश्व में दो प्रकार के जीव उत्पन्न किए हैं। एक पशु-पक्षी और दूसरे सरे मनुष्य दान हैं। दोनों में विवेक बुद्धि की मात्रा का अंतर है। पशु-पक्षियों में तात्कालिक बुद्धि होती है। जबकि मानव अपने बीते हुए कल के अनुभव से भविष्य...

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औद्योगीकरण – लाभ पक्ष एवं हानि पक्ष

औद्योगीकरण शब्द उद्योग से बना है, इसका तात्पर्य है देश में विभिन्न प्रकार के उद्योगों का विकास । यद्यपि घरेलू अथवा कुटीर उद्योग भिन्न हैं फिर भी व्यापक अर्थ में देंखे तो वे भी औद्योगीकरण के अंतर्गत आते हैं। अंतर यह है कि कुटीर...

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आत्मनिर्भरता अथवा स्वावलंबन की उपयोगिता एवं आवश्यकता

आत्मनिभर्रता से तात्पर्य है – अपने ऊपर निर्भर रहना। जब मनुष्य अपने कार्य स्वयं करता है तो वह आत्मनिर्भर कहलाता है। वैसे मनुष्य सामाजिक प्राणी है। बहुत से कार्य वह दूसरों के सहारे करता है। किंतु अपने व्यक्तिगत कार्यों का...

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अनुभव सबसे अच्छा शिक्षक है।

मनुष्य सामाजिक प्राणी है। वह अकेला नहीं रह सकता। उसे परिवार, मित्र, दुकानदार, डॉक्टर आदि सभी की आवश्कता होती है। जैसे-जैसे वह दूसरों के संपर्क में आता है, उसके जीवन का अनुभव-क्षेत्र बढ़ता जाता है। अपने अनुभव हमारे मस्तिष्क पर...

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नए दशमिक सिक्के व नाप-तोल

: 15 : नए दशमिक सिक्के व नाप-तोल अज्ञात काल से भारत में रुपये, आने, पाई आदि सिक्कों ; तोला, माशा, छटाँक, सेर और मनों आदि का प्रयोग होता रहा है। इसलिए जब यह निर्णय किया गया कि पहली अप्रैल 1957 से इस क्रम को बदल दिया जाए, इन...

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