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भूदान यज्ञ

18 अप्रैल, 1951 का दिन था, जब द्वितीय महायुद्ध के प्रथम सत्याग्रही आचार्य विनोबा भावे ने अपने भूदान यज्ञ का आरंभ किया था। इसके उपरांत उन्होंने हैदराबाद राज्य, मध्य प्रदेश, मध्यभारत, विंध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार के ग्रामों...

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द्वितीय पंचवर्षीय योजना

प्रथम पंचवर्षीय योजना के निर्माण के समय ही यह स्पष्ट कर दिया गया था कि आर्थिक विकास के लिए यह तो पहला कदम है। इसके बाद दूसरी और दूसरी के बाद तीसरी योजना बनेगी और इस तरह हम आर्थिक विकास के मार्ग पर चलते जाएँगे। उस योजना को बनाते...

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भारत की औद्योगिक नीति

किसी देश की औद्योगिक नीति वहाँ की परिस्थिति से, आवश्यकताओं और आर्थिक व राजनैतिक विचारधाराओं से निर्धारित होती हैं। जब भारत विदेशी शासन के अंतर्गत हुआ तो उसकी नीति भारतीय हितों की अपेक्षा ब्रिटिश हितों को देखकर निर्धारित की जाने...

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बेकारी की विकट पहेली

करीब सात-आठ वर्ष पूर्व जब आचार्य विनोबा भावे प्रथम योजना आयोग के सदस्यों से मिले थे, तब उन्होंने योजना की एक बड़ी भारी त्रुटि यह बतलाई थी कि “इसमें सब को काम मिलने की गारंटी नहीं की गई है। किसी भी राष्ट्रीय योजना की पहली...

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जमींदारी उन्मूलन

“जमींदारी गाड़ी के पाँचवें पहिये के समान है— अर्थात् केवल निरर्थक ही नहीं, बस अड़ंगा लगाने वाला और जमीन पर अनावश्यक बोझ” – पंडित जवाहरलाल नेहरू जमींदारी प्रथा का जन्म भूमि व्यवस्था संबंधी सुधारों में योजना आयोग...

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नागरिक के अधिकार व कर्त्तव्य

मानव एक सामाजिक प्राणी है। मानव और समाज का पारस्परिक संबंध अत्यंत प्राचीन काल से चला आ रहा है। दोनों को एक दूसरे से पृथक् नहीं किया जा सकता। मानव के बिना समाज नहीं है और समाज के बिना मानव का जीवन दुर्लभ है, इस प्रकार की बातें हम...

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प्रथम पंचवर्षीय योजना

किसी समय पंचवर्षीय योजना का शब्द सर्वथा अपरिचित व नया रहा होगा, किंतु आज तो इस शब्द को सभी जानते हैं। आज कोई शिक्षित भारतीय ऐसा न होगा, जो इस शब्द से अपरिचित हो। सबसे पहले आर्थिक क्षेत्र में रूस ने इस शब्द का आविष्कार किया।...

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भारत का महान् उज्ज्वल भविष्य

एक प्राचीन उक्ति है कि देवता भी भारत में जन्म लेने के लिए तरसते थे। वस्तुतः हमारी भारत-भूमि इतनी सुंदर और इतनी संपन्न है कि इसकी तुलना विश्व के किसी अन्य भाग से नहीं हो सकती। भारत जैसी सुजलां सुफलां मलयजशीतलां शस्यश्यामलां...

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राज्यों का पुनर्गठन

स्वाधीनता प्राप्ति से पहले हमारे देश की तीन बड़ी राजनैतिक समस्याएँ थीं। पहली और सबसे बड़ी समस्या यह थी कि हमारा देश पराधीन था। देश को स्वाधीन करना आसान काम नहीं था। हमें अंग्रेजों के शक्तिशाली प्रबल शासन का मुकाबला करना था।...

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स्वतंत्र भारत के दस वर्ष (1957)

एक विद्वान का कथन है कि “देश की उन्नति उस समय रुक जाती है जबकि वह पराधीनता के पाश में जकड़ दिया गया हो और उसकी उन्नति उस समय से प्रारंभ हो जाती है जब उसमें स्वातन्त्र्य – भावना का उदय हो गया हो। स्वतंत्र होने के बाद...

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