भारतवर्ष के संविधान की एक बहुत बड़ी विशेषता यह है कि यह धर्म – निरपेक्ष राज्य है। अंग्रेजी में इस राज्य-पद्धति को ‘सेकुलर गवर्नमेण्ट’ कहते हैं। जब संविधान में धर्म-निरपेक्षता का निश्चय हुआ, तब बहुत से लोगों ने इसका विरोध...
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जगद्गुरु भारत
वर्ष 1954 में भारत के प्रधानमंत्री और लोकनायक पंडित जवाहरलाल नेहरू ने विदेशों में जाकर पंचशील के उस महान और पवित्र संदेश का प्रचार किया, जिसका आधार प्राचीन भारत की आध्यात्मिक और नैतिक संस्कृति है। वे जहाँ जाते, वहीं की जनता उनका...
हमारा महान संविधान
अत्यंत प्राचीन काल में एक बहुश्रुत भारतीय कथा के अनुसार जब देश में अराजकता थी, मत्स्य-न्याय का बोलबाला था, बड़ा छोटे पर अत्याचार करता था, किसी की कोई सम्पत्ति या परिवार तक सुरक्षित न था, जनता के विचार- शील लोगों ने इस भय व...
26 जनवरी
31 दिसंबर 1926 का दिन था और रात के 12 बजे थे। पंजाब की सख्त सर्दी थी, लोग ठिठुर रहे थे, पर रावी के पुण्य तट पर एक शानदार पंडाल में इस महान् देश के महान् नेता और सभी प्रान्तों के माननीय प्रति निधि हर्षविभोर होकर पंडित जवाहरलाल...
श्री जगन्नाथदास ‘रत्नाकर’
आधुनिक काल के ब्रजभाषा के कवियों में श्रीयुत् ‘रत्नाकर’ का महत्त्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने अपने काव्य में ब्रजभाषा की सभी विशेषताओं को मौलिक रूप में ग्रहण किया है। यद्यपि उन्होंने अपने काव्य की रचना उस समय की थी जब...
श्रीमती महादेवी वर्मा
महादेवी जी का जन्म संवत् 1964 में संयुक्त प्रांत के फर्रुखाबाद नामक स्थान पर हुआ था। वर्तमान युग में हिंदी काव्य की रचना करने वाली महिलाओं में उनका सर्वप्रमुख स्थान है। साहित्य-रचना के साथ-साथ वह चित्रकारिता में भी रुचि...
श्री रामधारीसिंह ‘दिनकर’
बिहार के प्रसिद्ध कवि श्रीयुत् रामधारीसिंह ‘दिनकर’ का जन्म संवत् 1965 में हुआ था। उन्होंने हिंदी साहित्य का गंभीर अध्ययन किया है। उन्होंने काव्य, आलोचना, निबंध तथा कला-साहित्य के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का अच्छा परिचय दिया...
श्री सुमित्रानंदन पंत
कविवर सुमित्रानंदन पंत का जन्म संवत् 1657 में अल्मोड़ा के कौसानी नामक स्थान में हुआ था। वह अपने छात्र जीवन में ही काव्य रचना करने लगे थे। तब से उन्होंने काव्य के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का अनेक रूपों में परिचय दिया है। उन्होंने...
श्री सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
कविवर ‘निराला’ का जन्म संवत् 1956 में बंगाल प्रदेश के मेदिनीपुर नामक स्थान में हुआ था। इस प्रदेश की संस्कृति का उनके जीवन पर प्रारंभ से ही विशेष प्रभाव रहा है। इस कारण उनकी काव्य रचनाओं पर भी इसका अनिवार्य रूप से प्रभाव पड़ा है।...
श्री जयशंकर प्रसाद
आधुनिक युग के कवियों में श्रीयुत् जयशंकर प्रसाद का महत्त्वपूर्ण स्थान है। उनका जन्म काशी में संवत् 1946 में एक प्रसिद्ध वैश्य परिवार में हुआ था। उनके पिता बाबू देवीप्रसाद काशी के एक प्रतिष्ठित व्यापारी थे। प्रसाद जी साहित्य की ओर...

