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Sahityik Nibandh

द्विवेदी युग की हिंदी कविता

द्विवेदी युग से पूर्व हिंदी में भारतेंदु-युग की स्थिति थी। उस युग के काव्य की रचना अधिकतर ब्रजभाषा में हुई है और उस समय के कवियों ने अपनी कविताओं में रीति काल की परंपराओं का पालन करते हुए नवीन सामाजिक और राष्ट्रीय जाग्रति को भी...

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भारतेंदु – युग की हिंदी – कविता

आधुनिक हिंदी कविता का प्रारंभ कविवर भारतेंदु हरिश्चंद्र की कविताओं से होता है। उन्होंने स्वयं उत्कृष्ट काव्य की रचना करने के अतिरिक्त अपने युग के अन्य कवियों को भी नवीन विषयों पर कविता लिखने की प्रेरणा प्रदान की। इसी कारण उनके...

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रीति काल के आचार्य

हिंदी साहित्य में रीति काल की स्थिति सम्वत् 1700 से 1900 तक रही है। इस अवधि में काव्य लिखने के अतिरिक्त कुछ कवियों ने उसके स्वरूप और रचना प्रणाली आदि के विषय में भी विचार उपस्थित किए है। रीति काल के आचार्यों से हमारा तात्पर्य...

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रीतिकालीन हिंदी काव्य

रीति काल में हिंदी काव्य की रचना मुख्य रूप से शृंगार रस को लेकर ही हुई है। इस युग के कवियों ने कृष्ण-भक्ति का सहारा लेकर श्रीकृष्ण का राधा तथा अन्य गोपियों से प्रेम संबंध दिखाया है। उन्होंने अपने काव्य की रचना मुक्तक काव्य के रूप...

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भक्ति काल की कृष्ण-भक्ति-धारा

जिस प्रकार रामानुजाचार्य से प्रभावित होकर उनके अनुयायी स्वामी रामानंद ने राम-भक्ति का प्रचार किया था उसा प्रकार निम्बार्काचार्य, मध्वाचार्य और विष्णु स्वामी के प्रदशों को सम्मुख रख कर चैतन्य महाप्रभु तथा वल्लभाचार्य ने कृष्ण...

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भक्ति काल को राम-भक्ति-धारा

सगुण भक्ति से हमारा तात्पर्य ईश्वर के साकार रूप की उपासना से है। इस दृष्टि से भक्ति काल में श्री राम और श्रीकृष्ण की भक्ति की गई है। भक्ति के इन दोनों पक्षों को हिंदी साहित्य में ‘राम-भक्ति शाखा’ तथा ‘कृष्ण...

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भक्ति काल की निर्गुण-भक्ति-धारा

भक्ति काल में निर्गुण भक्ति और सगुण भक्ति के रूप में ईश्वर की उपासना की दो प्रणालियाँ प्राप्त होती है। इनमें से निर्गुण भक्ति में ईश्वर के निराकार स्वरूप की भक्ति की गई है और सगुण भक्ति में ईश्वर के अवतार रूप की उपासना हुई है।...

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हिंदी का वीरगाथाकालीन काव्य

हिंदी साहित्य का प्रारंभ सम्वत् 1050 से माना जाता है। तब से लेकर अब तक उसका अनेक रूपों में विकास हुआ है। मुख्य-मुख्य साहित्यिक प्रवृत्तियों के आधार पर उसे वीरगाथा काल, भक्ति काल, रीति काल और आधुनिक काल में विभाजित किया गया है।...

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हिंदी – कविता का विकास

मन की रागात्मक चेतना का स्पर्श करने के कारण कविता सदैव व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित करती रही है। हिंदी साहित्य का प्रारंभ भी कविता से ही हुआ है। विषय प्रसार की दृष्टि से हम उसे साधारणतः चार युगों में विभक्त कर सकते हैं। इन युगों के...

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साहित्य और समाज

साहित्य अनादि है और मानव सदा से ही उसके अध्ययन के लिए उत्सुकता का अनुभव करता आया है। सफल साहित्य में मानव कल्याण की भावना का निश्चित रूप से समावेश होता है। साहित्य को आकर्षक बनाने के लिए लेखक उसे विभिन्न रूपों में उपस्थित करते...

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