Latest Posts

Lets see Essays

साहित्य और समाज अथवा साहित्य समाज का दर्पण

आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी ने लिखा है ‘ज्ञान राशि के संचित कोश का नाम साहित्य है।’ इसी प्रकार ऐसा मानव-समुदाय समाज कहलाता है, जो समान परंपराओं और विचारों का पालन करता हो। साहित्य के शब्दार्थ में सहित होने का भाव...

Lets see Essays

परिश्रम का महत्त्व

विधाता ने विश्व में दो प्रकार के जीव उत्पन्न किए हैं। एक पशु-पक्षी और दूसरे मनुष्य हैं। दोनों में विवेक बुद्धि की मात्रा का अंतर है। पशु-पक्षियों में तात्कालिक बुद्धि होती है। जबकि मानव अपने बीते हुए कल के अनुभव से भविष्य का...

Lets see Essays

करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान

विद्या अभ्यास से प्राप्त होती है। जन्म से ही कोई व्यक्ति किसी कार्य में पारंगत नहीं होता, अभ्यास द्वारा कालांतर में चतुर तथा लब्ध प्रतिष्ठ हो जाता है। अभ्यास के द्वारा जड़ बुद्धि वाले व्यक्ति सुजान अर्थात् बुद्धिमान बन जाते हैं।...

You cannot copy content of this page