भारत : रामभक्ति शाखा के प्रतिनिधि कवि जन्म संवत् 1589 मृत्यु संवत् 1680 भक्तिकाल के अग्रगण्य रामभक्त कवि श्री तुलसीदास ने एक ऐसे भक्ति- साहित्य की रचना की थी, जिसने समग्र हिन्दू समाज को भाव विभोर कर दिया था। आज भी तुलसी के दोहे...
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सिकंदर महान
मेसिडोनिया (यूनान) ‘विश्वविजेता’ जन्म : 356 ई.पू. मृत्यु : 323 ई.पू. विश्व के इतिहास में सिकंदर महान का चरित्र अद्भुत एवं अतुलनीय है। केवल 10 वर्ष की अवधि में इस अपूर्व योद्धा ने अपने छोटे से राज्य का विस्तार कर एक...
कपिलदेव
भारत : विश्वविख्यात आलराउंडर जन्म : 1956 भरतीय क्रिकेट टीम को सन् 1983 में एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट शृंखला में विश्वविजेता बनाने का श्रेय कपिलदेव को है। विश्वकप में उनके द्वारा बनाये गये 175 रनों की ऐतिहासिक पारी क्रिकेट...
जवाहरलाल नेहरू
भारत : भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जन्म 1889 मृत्यु 1964 धनिक भारत के निर्माता एवं विश्व शांति के अग्रदूत के रूप में आ पं. जवाहरलाल नेहरू का नाम सदैव इतिहास में अमर रहेगा। अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उन्होंने दुनिया के देशों को शांति का...
होमर
यूनान आदि कवि एवं लेखक जन्म-मृत्यु : 9वीं सदी ई.पू. होमर (Homer) एक विवादास्पद व्यक्ति माने जाते हैं और उनकी रचनाएँ। उनसे भी ज्यादा विवादास्पद हैं क्योंकि उन दोनों की प्रामाणिकता संदिग्ध है, परंतु इससे उनकी महान साहित्यिक...
मत कर रे गर्व – गुमान….
जब आपकी प्रवृत्ति प्रभुप्रेरित होती है तो वह भक्ति बन जाती है और जब वासनाप्रेरित होती है तो बंधन बन जाती है। नारदजी पुरुषार्थ करके काम पर विजय पाने में थोड़ा सफल हो गए और आए शिवजी के पास और बोले “जैसे आप कामविजयी हैं, ऐसे हम भी...
विश्वास से प्रभुप्राप्ति
प्राचीन काल की एक घटना है। एक बार एक किशोर ग्वाला अपनी गायों को चराने के लिए नदी के किनारे-किनारे उस जंगल में ले गया जहाँ हरी-भरी घास उगी थीं। नदी के तट पर बरगद का एक विशाल वृक्ष था, जिसकी घनी एवं शीतल छाया में अनेक राहगीर अपनी...
भगवान के लिए ही रोएँ
हरिबाबा से एक भक्त ने कहा, “महाराज ! यह अभागा, पापी मन रुपये पैसों के लिए तो रोता-पिटता है लेकिन भगवान अपना आत्मा है, फिर भी आज तक नहीं मिले इसके लिए रोता नहीं है। क्या करें?” हरिबाबा: “रोना नहीं आता तो झूठमूठ में ही रो लें।”...
स्वामी रामतीर्थ की संयमनिष्ठा
स्वामी रामतीर्थ की ख्याति अमेरिका में दिनोंदिन बढ़ती जा रही थी। लोग उन्हें ‘जिन्दा मसीहा’ कहते थे और वैसा ही आदर-सम्मान भी देते थे। कई चर्चा, क्लबों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में व्याख्यान देने के लिए उन्हें बुलाया जाता...
सुकरात
यूनान : सत्यवादी दार्शनिक जन्म : 470 ई. पू. मृत्यु : 400 ई. पू. शीर्षस्थ यूनानी दार्शनिक सुकरात (Socrates) का आविर्भाव उस समय हुआ था जब वास्तव में यूनान का कोई दर्शन ही नहीं था। सुकरात के साथ ही यूनान का दर्शन निर्मित हुआ तथा...

