Hamara Aditya (Vartalap) – NCERT Class IX R3 Reva Hindi Book, The Best Solutions, Nirman Samiti

हमारा आदित्य

(कक्षा में अध्यापक का आगमन और सभी विद्यार्थियों द्वारा अभिवादन)

सभी विद्यार्थी : सुप्रभात अध्यापक जी!

अध्यापक : सुप्रभात बच्चो ! सूर्य को तो आप प्रतिदिन देखते होंगे पर क्या आपको पता है कि सूर्य तक पहुँचना कितना कठिन है? तो आज हम कक्षा में सूरज के बारे में कुछ अलग तरह की बातचीत करेंगे।

वाणी : अध्यापक जी! मैंने सुना है कि सूर्य सात घोड़ों के रथ पर आकाश में यात्रा करने वाला एक राजा है।

गौरव : हाँ, मैंने भी कुछ ऐसा ही सुना है

राहुल : नहीं, सूर्य तो आग का एक गोला है !

सुमन : अध्यापक जी! सूरज एक ग्रह है।

रवि : नहीं, यह तो एक तारा है।

अध्यापक : उत्तम! सूर्य एक तारा है। यह बहुत अधिक गरम भी है, इसलिए इसे लोग आग का गोला भी कहते हैं।

सभी विद्यार्थी : (आश्चर्य से) जी अध्यापक जी, यह बहुत गरम होगा!

ज्योति : सूरज पृथ्वी से बहुत दूर है, फिर भी कितनी गरमी देता है!

भास्कर : मुझे गरमी के मौसम में सूर्य बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता।

सुमन : मुझे भी। पर सर्दियों में तो धूप से उठने का मन ही नहीं करता। मेरी नानी तो पूरे दिन धूप में रहती हैं। उन्हें बहुत सर्दी लगती है न, इसलिए !

अध्यापक : सूर्य इतना गरम क्यों है? क्या आप सबने कभी यह सोचा है?

दिनेश : सूर्य पर हमेशा आग जलती रहती है, इसलिए।

रवि : अगर ऐसा है तो वहाँ आग किसने जलाई होगी?

धरा : आप दोनों ठीक नहीं सोच रहे हैं। सूर्य पर गरमी आग के जलने से नहीं होती बल्कि सूर्य ऐसी गैसों से बना है जो बहुत गरम होती हैं। मुझे मेरी मौसी ने एक बार बताया था।

अध्यापक : सही कहा ! सूर्य मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम नाम की गैसों का एक विशाल गोला है।

साहिल : कितने बड़े नाम हैं! बोलने में भी कठिनाई हो रही है। हाई… ड्रजन..हेलम…. (कुछ विद्यार्थी हँसते हैं)

रवि : तो क्या हम चाँद की तरह सूर्य पर भी जा सकते हैं? (अध्यापक की ओर अचरज से देखते हुए)

सुमन : वहाँ कैसे जाएँगे? जो जाएगा, वह जल नहीं जाएगा!

दिनेश : सूर्य तो बहुत गरम होगा, बहुत अधिक ! तभी तो वह चमकता रहता है। (आँखें बड़ी करके कहते हुए)

अध्यापक : हाँ, सूर्य तक पहुँचना आसान नहीं है। वह चंद्रमा की तरह हमारी पृथ्वी से पास नहीं है बल्कि बहुत दूर है। उसके भीतर हर समय आग जल रही है। वह कभी बुझती ही नहीं। जैसे चंद्रमा के रहस्य हैं, ठीक उसी प्रकार सूर्य के भी रहस्य हैं। इन्हीं रहस्यों का उद्घाटन करने के लिए हमारे वैज्ञानिकों ने आदित्य- एल 1 का निर्माण किया है।

कुछ विद्यार्थी : (एक साथ कौतूहल से) आदित्य- एल 1!

भास्कर : यह क्या है अध्यापक जी?

अध्यापक : आदित्य तुम ही तो हो। (मुस्कुराते हुए)

भास्कर : मैं कुछ समझा नहीं, अध्यापक जी।

अध्यापक : समझाता हूँ। आदित्य का अर्थ है— सूर्य। क्या आपको पता है, इसका एक अन्य नाम ‘भास्कर’ भी है। इसी तरह इस कक्षा में दो और आदित्य हैं। क्या आप लोग बता सकते हैं, मैं किनकी बात कर रहा हूँ?

राहुल : जी ‘दिनेश’ और ‘रवि’।

अध्यापक : बहुत अच्छा! आइए, आज हम लोग आदित्य- एल 1 से मिलते हैं।

वाणी : अध्यापक जी! क्या यह चंद्रयान के प्रकार का ही तो नहीं है?

अध्यापक : हाँ, आदित्य- एल 1 चंद्रयान के प्रकार का ही एक यान है। इसका कार्य सूर्य के बारे में जानकारी जुटाना है, जैसे- यह किस समय कैसा होता है, इसके भीतर जलने वाली आग का ताप कितना है, इस ताप का प्रभाव आस-पास कैसा होता है या इसका प्रभाव हमारी पृथ्वी पर भी पड़ता है अथवा नहीं…।

पूर्वा : क्या यह सूर्य पर पहुँच गया है?

अध्यापक : सूर्य पर तो नहीं किंतु सूर्य से पर्याप्त दूरी पर रुककर इसने सूर्य के कुछ अद्भुत चित्र भेजे हैं जिन्हें यदि आप लोग देखेंगे तो देखते ही रह जाएँगे।

सुमन : अध्यापक जी, फिर भी यह सूर्य के पर्याप्त पास पहुँचकर चित्र कैसे भेज रहा है? उसकी इतनी गरमी से जल नहीं रहा?

अध्यापक : नहीं, सूर्य से आदित्य- एल 1 को कोई हानि नहीं पहुँच सकती क्योंकि यह एक सुरक्षित दूरी पर स्थित है और वह अपने स्थान से समय-समय पर उसके विभिन्न चित्र लेता रहता है।

भास्कर : यह तो एक अनन्य प्रकार का यंत्र है जो अपने को जलने भी नहीं दे रहा और इतने गरम सूर्य के चित्र भी ले रहा है!

ज्योति : आदित्य- एल 1 में ‘एल 1’ का क्या अर्थ है?

अध्यापक : एल 1 का अर्थ है-लगरांज 1…।

रवि : अध्यापक जी ! लगरांज 1 क्या होता है?

अध्यापक : एल 1 अर्थात् लगरांज 1 बिंदु अंतरिक्ष का एक विशिष्ट स्थान होता है जो सूर्य और पृथ्वी के केंद्रों को जोड़ने वाली रेखा पर होता है। इस बिंदु पर सूर्य और पृथ्वी की आकर्षण शक्तियाँ इस प्रकार संतुलित होती हैं कि इस स्थान पर प्रक्षिप्त कोई भी वस्तु पृथ्वी के साथ-साथ ही सूर्य की परिक्रमा करती जाती है। हमारे वैज्ञानिकों ने आदित्य अंतरिक्ष यान को इसी बिंदु पर प्रक्षिप्त कर दिया है जहाँ से वह सूर्य के चारों ओर घूमता हुआ सूर्य के चित्र खींचता रहता है।

दीपक : अध्यापक जी, यह तो आपने बहुत ही रोचक बात बताई परंतु इस ‘लगरांज’ शब्द का क्या अर्थ है?

अध्यापक : वास्तव में ‘लगरांज’ 18वीं सदी में इटली के एक गणितज्ञ थे जिन्होंने इस विशिष्ट बिंदु के विषय में बताया था। इसीलिए इस बिंदु को उनके नाम से जाना जाता है। उन्होंने इस प्रकार के चार और बिंदुओं का पता लगाया था, इसलिए इन पाँच बिंदुओं को एल 1, 2, 3, 4, 5 – इन पाँच नामों से जाना जाता है।

सुमन : अच्छा, अब मैं समझ गई कि क्यों ‘आदित्य’ के नाम के अंत में एल 1 लगाया गया है। पर यह अंतरिक्ष यान अंतरिक्ष में कब भेजा गया था?

अध्यापक : आदित्य- एल 1 का प्रक्षेपण 2 सितंबर 2023 को हमारे देश के अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने किया था। लगरांज बिंदु पर स्थित यह अंतरिक्ष यान लगभग 5 वर्ष तक सूर्य के चारों ओर घूमता हुआ उसके विभिन्न चित्र खींचता रहेगा जिसका अध्ययन करके हमारे वैज्ञानिक सूर्य के रहस्यों का पता लगाएँगे।

दीपक : बहुत अच्छा अध्यापक जी, इतनी मनोरंजक बातें सुनकर मुझे बहुत कौतूहल हो रहा है कि सूर्य कैसा दिखता होगा। आदित्य-एल 1 ने जो चित्र खींचे हैं, वे बहुत अच्छे होंगे। मैंने आज तक सूर्य का चित्र नहीं देखा।

अन्य विद्यार्थी : हमने भी नहीं देखा।

रफ़त : चाँद का देखा है … पृथ्वी का देखा है… चंद्रयान का देखा है… अपने बचपन का चित्र देखा है पर सूरज का तो मैंने कभी नहीं देखा।

दिनेश : मैंने तो अपने माता-पिता के बचपन के चित्र भी देखे हैं पर सूर्य का भी चित्र होता है, मुझे तो पता ही नहीं था। पिताजी ने सूर्य की ओर देखने के लिए मना किया है।

अध्यापक : (अध्यापक कक्षा में टैब / मोबाइल पर भिन्न-भिन्न समय पर लिए गए सूर्य के ग्यारह रंगों वाले चित्र दिखाते हैं।

सिल्विया : ये तो सचमुच बहुत अद्भुत चित्र हैं। आदित्य यान इतने अच्छे चित्र लेता है, यह एक चमत्कार-सा लगता है। अध्यापक जी, चित्र लेने के अतिरिक्त आदित्य- एल 1 और क्या-क्या करेगा?

अध्यापक : बहुत अच्छा प्रश्न पूछा। सूर्य पर गैसों की टकराहट से बहुत विशाल विस्फोट होते हैं। इनसे बहुत सारी ऊर्जा निकलती है। जैसे धरती पर आँधियाँ आती रहती हैं, वैसे ही सूर्य की ऊर्जा से भी आती रहती हैं। सूर्य पर आने वाली आँधियों और उससे पृथ्वी पर पड़ने वाले प्रभावों के विषय में आदित्य- एल 1 में लगे उपकरणों द्वारा हमें जानकारी मिलेगी।

कुछ विद्यार्थी : यह तो सचमुच बहुत अच्छा यंत्र है। (कक्षा में बातचीत होने लगती है।)

दीपक : अध्यापक जी, मुझे तो ये सब अद्भुत बातें जानकर बहुत आनंद आ रहा है। मैं तो बड़ा होकर अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनूँगा और दूर-दूर के तारों के विषय में पढुँगा और वहाँ अंतरिक्ष यान भेजूँगा।

सुमन : अध्यापक जी, मैं भी बड़ी होकर अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनूँगी। मुझे आज के पाठ में बहुत आनंद आया। मैं तो ऐसा अंतरिक्ष यान बनाऊँगी जिसमें बैठकर मैं एल 1 बिंदु से सूर्य को स्वयं जाकर देख सकूँ।

अन्य विद्यार्थी : हम भी ऐसा ही अंतरिक्ष यान बनाएँगे!

अध्यापक : आप सब लोग बड़े मेधावी हैं। आप बहुत अच्छे वैज्ञानिक बनेंगे, मुझे पूरा विश्वास है। पर बच्चो, अपने अंतरिक्ष यान में मुझे ले जाना मत भूलना।

 

हमारा आदित्य – शब्दार्थ 

क्र. सं.

कठिन शब्द (Hindi Word)

अर्थ (Hindi Meaning)

अंग्रेज़ी अर्थ (English Meaning)

1.

अभिवादन

स्वागत / नमस्कार

Greeting / Salutation

2.

आश्चर्य

हैरानी / अचरज

Surprise / Astonishment

3.

विशाल

बहुत बड़ा

Huge / Massive

4.

रहस्य

छुपी हुई बात / भेद

Mystery / Secret

5.

उद्घाटन

पर्दा उठाना / रहस्य खोलना

Unveiling / Revealing

6.

कौतूहल

जानने की प्रबल इच्छा

Curiosity / Inquisitiveness

7.

अद्भुत

अनोखा / आश्चर्यजनक

Wonderful / Amazing

8.

पर्याप्त

काफी / जितनी ज़रूरत हो

Sufficient / Adequate

9.

अनन्य

जिसके समान दूसरा न हो / अनोखा

Unique / Exclusive

10.

विशिष्ट

विशेष / खास

Specific / Special

11.

संतुलित

जिसमें बराबर का संतुलन हो

Balanced

12.

प्रक्षिप्त

फेंका गया / स्थापित किया गया (प्रोजेक्ट किया गया)

Projected / Launched

13.

प्रक्षेपण

अंतरिक्ष में भेजने की क्रिया

Launch

14.

अनुसंधान

खोज / शोध

Research

15.

संगठन

संस्था

Organization

16.

विस्फोट

ज़ोर का धमाका

Explosion

17.

ऊर्जा

शक्ति / ताप

Energy

18.

उपकरण

यंत्र / मशीन के पुर्जे

Equipments / Instruments

19.

मेधावी

बुद्धिमान / होनहार

Brilliant / Intelligent

 

हमारा आदित्य – महत्त्वपूर्ण सीख

सूर्य की वास्तविकता – विद्यार्थी जान पाएँगे कि सूर्य आग का गोला या ग्रह नहीं, बल्कि एक तारा है।

सूर्य की संरचना – उन्हें समझ आएगा कि सूर्य मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम जैसी अत्यंत गर्म गैसों का विशाल गोला है।

आदित्य-एल 1 (Aditya-L1) मिशन की जानकारी – विद्यार्थी इसरो (ISRO) द्वारा 2 सितंबर 2023 को प्रक्षेपित किए गए आदित्य-एल 1 मिशन के उद्देश्य और कार्यप्रणाली से परिचित होंगे।

‘एल 1’ (L1) बिंदु की वैज्ञानिक समझ – उन्हें समझ में आएगा कि एल 1 (लगरांज 1) वह विशिष्ट बिंदु है जहाँ सूर्य और पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण संतुलित होता है, और यह नाम इतालवी गणितज्ञ लगरांज के नाम पर रखा गया है।

पर्यायवाची शब्दों का ज्ञान – विद्यार्थी सीखेंगे कि आदित्य, भास्कर, दिनेश और रवि सभी सूर्य के पर्यायवाची (समानार्थी) नाम हैं।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास – पाठ बच्चों में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि जगाएगा और उन्हें वैज्ञानिक बनने के लिए प्रेरित करेगा।

सौर आँधियों का ज्ञान – विद्यार्थी यह जानेंगे कि सूर्य पर गैसों के विस्फोट से सौर आँधियाँ उठती हैं और आदित्य-एल 1 इन आँधियों का पृथ्वी पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करेगा।

 

बातचीत के लिए

  1. अगर एक दिन के लिए धरती तक सूर्य का प्रकाश और ऊष्मा न पहुँचे, तो क्या होगा?

उत्तर – अगर एक दिन के लिए धरती तक सूर्य का प्रकाश और ऊष्मा न पहुँचे, तो धरती पर चारों ओर घना अँधेरा और बहुत अधिक ठंड हो जाएगी। पेड़-पौधे अपना भोजन नहीं बना पाएँगे और जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो जाएगा।

  1. पाठ में हमने पढ़ा कि सूर्य एक तारा है। आकाश में अनगिनत तारों के बीच यह तारा हमारी धरती के लिए विशेष क्यों है?

उत्तर – सूर्य हमारी धरती के सबसे करीब का तारा है। इसी से पृथ्वी को प्रकाश और गर्मी मिलती है, जिसके कारण ही धरती पर जीवन संभव है।

  1. भारत में मनाए जाने वाले ऐसे त्योहारों और मेलों के बारे में बताइए जिनका संबंध सूर्य एवं चंद्रमा से है।

उत्तर – सूर्य से जुड़े त्योहार – मकर संक्रांति, पोंगल, छठ पूजा और बैसाखी।

चंद्रमा से जुड़े त्योहार – ईद, करवा चौथ, शरद पूर्णिमा और करवा चौथ।

 

मेरी समझ से

नीचे दिए गए प्रश्नों का सबसे उपयुक्त उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा () बनाइए।

  1. आदित्य- एल 1 ने इनमें से कौन-सा कार्य किया है?

(क) सूर्य की सतह पर उतरा है।

(ख) पृथ्वी जैसे किसी अन्य ग्रह की खोज की है।

(ग) सूर्य के ग्यारह रंगों के आकर्षक चित्र भेजे हैं।

(घ) ग्रहों और नक्षत्रों के प्रभाव का अध्ययन किया है।

उत्तर – (ग) सूर्य के ग्यारह रंगों के आकर्षक चित्र भेजे हैं।

  1. हमारे देश के लिए 2 सितंबर 2023 का दिन विशेष क्यों है?

(क) इसरो की स्थापना की गई थी।

(ख) गगनयान का सफल प्रक्षेपण किया गया था।

(ग) चंद्रयान-3 का सफल प्रक्षेपण किया गया था।

(घ) आदित्य- एल 1 का सफल प्रक्षेपण किया गया था।

उत्तर – (घ) आदित्य- एल 1 का सफल प्रक्षेपण किया गया था।

  1. दिनेश के पिताजी ने सूर्य की ओर देखने के लिए मना क्यों किया?

(क) इससे मन में घबराहट बढ़ सकती है।

(ख) इससे आँखों को नुकसान हो सकता है।

(ग) इससे एकाएक बहुत पसीना आ सकता है।

(घ) इससे चेहरे की चमक फीकी पड़ सकती है।

उत्तर – (ख) इससे आँखों को नुकसान हो सकता है।

  1. 18वीं सदी में इटली के एक महान गणितज्ञ ‘लगरांज’ की एक बड़ी उपलब्धि क्या थी?

(क) पृथ्वी से सूर्य के बीच की सही दूरी बताई थी।

(ख) सूर्य के बारे में कई सटीक जानकारियाँ दी थीं।

(ग) हाइड्रोजन और हीलियम गैसों के बारे में बताया था।

(घ) सूर्य और पृथ्वी के केंद्रों को जोड़ने वाली रेखा खोजी थी।

उत्तर – (घ) सूर्य और पृथ्वी के केंद्रों को जोड़ने वाली रेखा खोजी थी।

  1. सूर्य पर गैसों की टकराहट का क्या परिणाम होता है?

(क) समुद्र में ऊँची-ऊँची लहरें उठती हैं।

(ख) पूरा आकाश बादलों से भर जाता है।

(ग) धरती पर धूल भरी तेज आँधियाँ चलती हैं।

(घ) इस विशाल विस्फोट से बहुत सारी ऊर्जा निकलती है।

उत्तर – (घ) इस विशाल विस्फोट से बहुत सारी ऊर्जा निकलती है।

 

सोचिए और लिखिए

  1. सूर्य को आग का गोला क्यों कहा जाता है?

उत्तर – सूर्य अत्यंत गरम गैसों, जैसे – हाइड्रोजन और हीलियम से बना है, जिसमें हर समय विशाल विस्फोट होते रहते हैं और बहुत अधिक गर्मी निकलती है। इसलिए इसे आग का गोला कहा जाता है।

  1. “सूर्य पर गैसों की टकराहट से बहुत विशाल विस्फोट होते हैं।” इन विस्फोटों का क्या परिणाम होता है?

उत्तर – इन विस्फोटों से अत्यधिक ऊर्जा निकलती है, जिससे सूर्य पर भयंकर सौर आँधियाँ आती हैं।

  1. आदित्य- एल 1 के द्वारा भेजे गए सूर्य के सुंदर, रंगीन चित्रों से वैज्ञानिकों को क्या लाभ हुआ है?

उत्तर – इन चित्रों से वैज्ञानिकों को सूर्य के रहस्यों, उसके तापमान, उठने वाली आँधियों और उनके पृथ्वी पर पड़ने वाले प्रभावों को समझने में मदद मिली है।

  1. यदि आप बड़े होकर अंतरिक्ष वैज्ञानिक बने तो कौन-कौन से कार्य करना चाहेंगे?

उत्तर – यदि मैं बड़ा होकर अंतरिक्ष वैज्ञानिक बना तो मैं नए ग्रहों और तारों की खोज करूँगा और ब्रह्मांड के अनोखे रहस्यों को सुलझाने के लिए नए अंतरिक्ष यान बनाऊँगा।

 

मिलान करें

निम्नलिखित पंक्तियों को उनके भावों से जोड़िए-

पंक्तियाँ               स्तंभ-दो

लगरांज — इटली के एक महान गणितज्ञ

आदित्य- एल 1 — सूर्य पर आने वाली आँधियों और उससे पृथ्वी पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन

र्य — हाइड्रोजन और हीलियम नामक गैसों का एक विशाल गोला

आदित्य के अन्य नाम — भास्कर, दिनेश, सूरज, रवि आदि

भाषा की ओर

उच्चारण की बात

  1. नीचे दोनों वर्णों से बने कुछ शब्द दिए गए हैं। उन्हीं के आगे बने रिक्त स्थानों में अपने शब्द भरिए-

‘ड’ के प्रयोग वाले शब्द-

सड़क, कड़वा, मकड़ी, पेड़, घड़ा, लकड़ी

‘ढ़’ के प्रयोग वाले शब्द-

पढ़ना, चढ़ाई, काढ़ा, बूढ़ा, सीढ़ी, पढ़ाई

 

  1. आइए, नीचे दिए गए वाक्यों में ही, भी, तक, तो, मात्र आदि का प्रयोग करके अर्थ को मिले बल पर विचार करें-

(क) बहुत ही अच्छा प्रश्न पूछा।

(ख) मुझे तो ये सब अद्भुत बातें जानकर बहुत आनंद आ रहा है।

(ग) आदित्य- एल 1 ने सूर्य के कुछ अद्भुत चित्र भेजे हैं, उन्हें यदि आप लोग देखेंगे तो देखते ही रह जाएँगे।

(घ) हमें मात्र यह पाठ पढ़ना ही नहीं है बल्कि इसे अच्छी तरह समझना भी है।

(ङ) पत्र लिखना तो दूर तुमने मुझे फोन तक नहीं किया।

 

  1. निम्नलिखित वाक्यों में उचित विराम चिह्न लगाइए-

(.) (!) (?) (1)

(क) यह अंतरिक्ष यान अंतरिक्ष में कब भेजा गया था ?

(ख) क्या तुम्हें बोलने में भी कठिनाई हो रही है ?

(ग) वाह ! हमें इस पाठ को पढ़ने में बहुत आनंद आया ।

(घ) धरा , वसुधा , पृथ्वी आदि धरती के ही अन्य नाम हैं ।

 

शब्द पहचान

  1. नीचे दिए गए पाठ के अंश से दो-दो संज्ञा (नाम वाले शब्द), सर्वनाम (संज्ञा के स्थान पर आने वाले शब्द), विशेषण (संज्ञा और सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द) और क्रिया (कार्य के होने या करने का बोध कराने वाले शब्द) शब्द छाँटकर लिखिए-

बहुत अच्छा प्रश्न पूछा। सूर्य पर गैसों की टकराहट से बहुत विशाल विस्फोट होते हैं। इनसे बहुत सारी ऊर्जा निकलती है। जैसे धरती पर आँधियाँ आती रहती हैं, वैसे ही सूर्य की ऊर्जा से भी आती रहती हैं। सूर्य पर आने वाली आँधियों और उससे पृथ्वी पर पड़ने वाले प्रभावों के विषय में आदित्य- एल 1 में लगे उपकरणों द्वारा हमें जानकारी मिलेगी।

संज्ञा – सूर्य, धरती (विस्फोट, ऊर्जा, आदित्य-एल 1)

सर्वनाम – इनसे, हमें

विशेषण – अच्छा, विशाल (बहुत, सारी)

क्रिया – पूछा, निकलती है (होते हैं, मिलेगी)

 

पाठ से आगे

अनुमान और कल्पना

  1. कल्पना कीजिए कि आप वैज्ञानिक बन गए हैं और आपको सूर्य के रहस्य जानने के लिए भेजा जा रहा है, तब आप

(क) सूर्य की गर्मी से बचने के लिए किस तरह की व्यवस्था करेंगे?

उत्तर – मैं एक विशेष प्रकार की ऊष्मारोधी (Heat-resistant) धातु से बना कवच और यान बनाऊँगा जो पिघलेगा नहीं।

(ख) सूर्य से जुड़े कौन-से रहस्यों को खोजने का प्रयास करेंगे?

उत्तर – मैं यह खोजने का प्रयास करूँगा कि सूर्य के अंदर की ऊर्जा धरती पर बिजली की तरह इस्तेमाल की जा सकती है या नहीं।

(ग) क्या सूर्य से एक न एक दिन हाइड्रोजन और हीलियम गैसें समाप्त हो जाएँगी? ऐसी स्थिति में हमारी धरती का क्या होगा?

उत्तर – करोड़ों वर्षों बाद जब सूर्य की गैसें समाप्त हो जाएँगी, तो सूर्य बुझ जाएगा। इसके बिना पृथ्वी पर अत्यधिक ठंड हो जाएगी और जीवन समाप्त हो जाएगा।

 

सृजन

यदि आपको विद्यालय में आदित्य- एल 1 के वैज्ञानिकों से मिलने का एक अवसर मिलता है तो आप उनसे कौन-से प्रश्न पूछना चाहेंगे?

उदाहरण – आपसे मिलकर मुझे और मेरे साथियों को बहुत अच्छा लग रहा है। क्या आप हमें बताएँगे कि वैज्ञानिक बनने के लिए क्या-क्या करना पड़ता है?

(क) आदित्य-एल 1 को बनाने में कितने साल का समय लगा?

(ख) अंतरिक्ष में यान को अपना रास्ता कैसे पता चलता है?

(ग) आदित्य-एल 1 को पिघलने से बचाने के लिए किस खास धातु का प्रयोग किया गया है?

(घ) क्या हम भविष्य में इंसान को भी सूर्य के करीब भेज सकेंगे?

 

आदित्य- एल 1 और सूर्य की भेंट

यहाँ पर आदित्य- एल 1 और सूर्य के बीच बातचीत हो रही है। आप इस बातचीत को अपनी कल्पना से आगे बढ़ाइए—

सूर्य : अरे, आप कौन हैं? आपको पहले कभी नहीं देखा!

आदित्य-एल 1 : मैं आदित्य-एल 1 हूँ। मैं आपको जानने और समझने आया हूँ।

सूर्य: अच्छा! पर तुम इतनी दूर से मेरी भयंकर गर्मी और आँधियों से कैसे बचे हुए हो?

आदित्य- एल 1 : मुझे भारत (इसरो) के वैज्ञानिकों ने बहुत खास तकनीक से बनाया है। मैं आपसे एक सुरक्षित दूरी (एल 1 बिंदु) पर रहकर आपका अध्ययन करूँगा।

सूर्य : यह जानकर बहुत खुशी हुई! कहो, पृथ्वी के लोग कैसे हैं?

आदित्य- एल 1 : वे सभी आपको बहुत मानते हैं। मैं आपकी सुंदर तस्वीरें उन्हें भेजूँगा ताकि वे आपको और बेहतर जान सकें।

 

परियोजना

यह पाठ संवाद शैली में लिखा गया है। आप अभिनय के साथ इसे कक्षा में प्रस्तुत कीजिए। इस संवाद में आप अपनी कल्पना से बदलाव भी कर सकते हैं और कोई नया पात्र भी जोड़ सकते हैं। इसमें आप अपने शिक्षक की भी सहायता ले सकते हैं।

छात्र इसे अपने स्तर पर करें।

खोजबीन

  1. हमारी पृथ्वी, सूर्य, चंद्रमा आदि की आयु के बारे में वैज्ञानिकों का क्या मानना है? क्या इनकी भी आयु निश्चित है या ये कभी नष्ट नहीं होंगे? पुस्तकालय अथवा अन्य स्रोतों से इनका पता लगाइए। आप इसमें अपने विज्ञान, भूगोल शिक्षक या अभिभावक की सहायता ले सकते हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार, सूर्य और पृथ्वी की आयु लगभग 4.5 से 5 अरब वर्ष हो चुकी है। ब्रह्मांड में कोई भी चीज़ अमर नहीं है। अरबों साल बाद जब सूर्य की हाइड्रोजन गैस खत्म हो जाएगी, तो यह भी नष्ट होकर एक ‘सफेद बौने तारे’ (White Dwarf) में बदल जाएगा।

  1. नीचे दी गई एनसीईआरटी की आधिकारिक यू-ट्यूब इंटरनेट कड़ियों (लिंक्स) का प्रयोग करके आप इस पाठ के बारे में और अधिक जान समझ सकते हैं।

(i) हमारा आदित्य – वीडियो, सीआईईटी-

https://www.youtube.com/watch?v=IKgkhYBVB9Y&t=1s

(ii) हमारा आदित्य — पी. एम., ई- विद्या चैनल की प्रस्तुति

 

शब्द-संपदा

शब्द       अर्थ        आपकी भाषा में शब्द

अभिवादन – आदर के साथ प्रणाम या नमस्कार

उत्तम – अच्छा, श्रेष्ठ

आश्चर्य – हैरानी, अचरज

धरा – पृथ्वी, धरती

विशाल – बहुत बड़ा

कठिनाई – मुश्किल, दिक्कत, बाधा

रहस्य – छिपी हुई बात, भेद

उद्घाटन – किसी बात को सामने लाना या प्रकट करना

कौतूहल – कुछ नया जानने की तीव्र इच्छा, उत्सुकता

पर्याप्त – जितनी जरूरत हो, आवश्यकता के अनुरूप

अद्भुत – अनोखा, निराला

अनन्य – जिसके जैसा कोई दूसरा न हो, एकमात्र, अद्वितीय

विशिष्ट – विशेष, सबसे अलग

संतुलित – बराबर, न कम न ज्यादा

प्रक्षिप्त – अंतरिक्ष में सही स्थान पर स्थापित करना, जोड़ा हुआ

परिक्रमा – चारों ओर चक्कर लगाना

प्रक्षेपण – रॉकेट अथवा यान को अंतरिक्ष में छोड़ना / भेजना

प्रत्यक्ष – जो ठीक आँखों के सामने हो, साक्षात्

उपकरण – यंत्र, साधन, औजार

मेधावी – बहुत बुद्धिमान या होनहार

 

 

 

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