Hamare Padosi (Anudit Kahani) – Dr. Devika Rangachari, Bhasha Mani, Class VIII, The Best Solution

पाठ का सारांश

‘हमारे पड़ोसी’ कहानी डॉ. देविका रंगाचारी द्वारा लिखित एक बहुत ही रोचक और शिक्षाप्रद कहानी है। यह कहानी बच्चों के मन में शिक्षकों के प्रति डर और बाद में विकसित होने वाले मधुर संबंधों को दर्शाती है।

कहानी की शुरुआत और भय का माहौल

कहानी की शुरुआत दो जुड़वाँ भाई-बहन, रवि और लेखिका से होती है। वे अपने बगल वाले खाली मकान में खेलते थे, जिसे वे ‘भूतहा’ मानते थे। एक दिन उस मकान में नए किरायेदार रहने आए। बच्चों को तब गहरा झटका लगा जब उन्हें पता चला कि उनके नए पड़ोसी और कोई नहीं, बल्कि उनके स्कूल के सबसे कठोर गणित के अध्यापक शंकर साहब हैं। शंकर साहब स्कूल में ‘आतंक’ का पर्याय थे, जिनसे बच्चे बहुत डरते थे।

दैनिक संघर्ष और तनाव

शंकर साहब के पड़ोसी बनने से बच्चों की मुसीबत बढ़ गई। अब उन्हें बस-स्टॉप पर उनके साथ खड़ा होना पड़ता था, जहाँ वे अक्सर बच्चों की पढ़ाई और कम अंकों को लेकर उन्हें डाँटते और गुर्राते थे। बच्चे उनके डर से घर के बाहर सीढ़ियों पर बैठकर पढ़ने का नाटक करने लगे ताकि सर को लगे कि वे पढ़ रहे हैं।

त्रिको (कुत्ता) और पहली मुलाकात

एक दिन एक प्यारा सा काला कुत्ता रवि के पीछे-पीछे उनके घर तक आ गया। बाद में पता चला कि वह कुत्ता शंकर साहब का है, जिसका नाम उन्होंने ‘त्रिको’ (त्रिकोणमिति के आधार पर) रखा था। बच्चे पहले तो डर गए और उन्हें लगा कि शंकर साहब अपने कुत्ते को भी मारते होंगे, क्योंकि कुत्ता उदास दिखता था।

गणित का कठिन टेस्ट और निराशा

एक दिन शंकर साहब ने कक्षा में बहुत कठिन टेस्ट लिया, जिसमें रवि और लेखिका समेत पूरी कक्षा फेल हो गई। शंकर साहब बच्चों के प्रदर्शन से बहुत नाराज थे। रवि, जो खुद को गणित में अच्छा समझता था, बहुत दुखी रहने लगा।

हृदय परिवर्तन और सुखद अंत

शाम को जब रवि और लेखिका ने पड़ोस के बगीचे से हँसने की आवाज़ सुनी, तो उन्होंने झाँककर देखा। वे यह देखकर हैरान रह गए कि कठोर दिखने वाले शंकर साहब ज़मीन पर लेटकर अपने कुत्ते ‘त्रिको’ के साथ फ्रिसबी (Frisbee) खेल रहे थे और ज़ोर-ज़ोर से हँस रहे थे।

बच्चों को देख शंकर साहब ने उन्हें भी साथ खेलने के लिए बुलाया। खेल-खेल में बच्चों का डर खत्म हो गया। शंकर साहब ने उनसे मित्रतापूर्ण व्यवहार किया और अंत में उन्हें गणित के कठिन समीकरणों (Equations) को हल करने में मदद करने का प्रस्ताव दिया। कहानी के अंत में बच्चे खुशी-खुशी अपनी किताबें लेकर शंकर साहब के घर की ओर भागते हैं।

कठिन शब्दार्थ

1 बगीचा – उपवन, फुलवारी Garden

 2 धुंधले – जो साफ़ न हो Hazy / Blurred

 3 बक्से – सामान रखने की पेटी Boxes / Trunks

 4 सामान – वस्तुएँ Luggage / Belongings

 5 नुक्कड़ – कोने वाली जगह Corner (of a street)

 6 बगल – पास वाला, सटा हुआ Adjacent / Next to

 7 बाड़ – घेरा Fence

 8 सीढ़ियों – सोपान, जीना Stairs / Steps

 9 कठोर – सख्त Harsh / Rigid

 10 व्यक्तित्व – पहचान, गुण Personality

 11 स्वभाविक – प्राकृतिक Natural

 12 चंचलता – चपलता Playfulness / Fidgetiness

 13 सज्जन – भला आदमी Gentleman

 14 निर्देश – आज्ञा, हिदायत Instruction / Direction

 15 आतंक – बहुत अधिक डर Terror / Dread

 16 कड़ी निगाह – सख्त नज़र Stern gaze

 17 मजबूर – विवश Forced / Compelled

 18 सहानुभूति – हमदर्दी Empathy / Sympathy

 19 विकटता – गंभीरता, मुश्किल Severity / Gravity

 20 संकट – मुसीबत Crisis / Danger

 21 गड़बड़ – गलती Mess / Error

 22 आश्चर्य – अचंभित होना Surprise / Astonishment

 23 डपटकर – डाँटकर Scoldingly / Sharply

 24 नाराज़गी – गुस्सा Annoyance / Displeasure

 25 पीड़ादायक – दुख देने वाला Painful / Distressing

 26 अप्रिय – जो अच्छा न लगे Unpleasant

 27 गुर्राते – गुस्से में बोलना Growling

 28 क्रोध – गुस्सा Anger / Wrath

 29 आदर्श – मिसाल Idol / Role model

 30 अपराध-भाव – गलती का एहसास Guilt

 31 फटकार – डाँट Rebuke / Scolding

 32 जिज्ञासावश – जानने की इच्छा से Out of curiosity

 33 हड़बड़ा – घबरा जाना Flustered / Panicked

 34 मुद्रा – हाव-भाव Pose / Expression

 35 दिखावा – ढोंग Pretense / Show-off

 36 झाँक – छिपकर देखना Peeking

 37 खोज – तलाश Search / Discovery

 38 स्तब्ध – हैरान रह जाना Stunned / Petrified

 39 चीख – ज़ोर से चिल्लाना Scream / Shouts

 40 रपटते – फिसलना Slipping

 41 रवाना – प्रस्थान करना Depart / Set off

 42 बर्बाद – नष्ट करना Waste / Ruin

 43 तर्क – दलील Argument / Logic

 44 निर्णय – फैसला Decision

 45 खेद – पछतावा Regret / Remorse

 46 सहलाने – प्यार से हाथ फेरना Stroking / Petting

 47 गायब – ओझल होना Disappear / Vanish

 48 मलीं – रगड़ना (आँखें) Rubbed

 49 प्रसन्न – खुश करना To please / Cheerful

 50 आविष्कार – नई रचना करना Invention

 51 हिलाया – झकझोरा Shook

 52 दोहराया – फिर से कहना Repeated

 53 गरज – ज़ोर से बोलना Thundered / Roared

 54 शर्त – बाजी लगाना Bet

 55 निरीक्षण – जाँच-पड़ताल Inspection

 56 विशेषज्ञ – जानकार Expert

 57 समीकरण – बराबरी का सवाल Equations

 58 त्रिकोणमिति – गणित की एक शाखा Trigonometry

 59 मुसीबत – आफत Trouble

 60 अग्नि-परीक्षा – कठिन परीक्षा Ordeal / Acid test

 61 तर्ज – आधार पर Style / Basis

 62 हल – समाधान Solution / To solve

 63 प्रशिक्षक – सिखाने वाला Instructor / Trainer

 64 जड़वत – मूर्ति की तरह स्थिर Statuesque / Motionless

 65 अविश्वासपूर्वक – यकीन न होना Disbelievingly

 66 चश्माधारी – चश्मा पहनने वाला Spectacled

 67 सज्जन – भला आदमी Gentleman

 68 स्थिति – हालात Situation / Condition

 69 क्षण – पल Moment

 70 उचित – सही Proper / Appropriate

 71 उत्साह – जोश Enthusiasm / Zeal

 72 उदासी – दुख Sadness / Gloom

 73 भयानक – डरावना Terrible / Dreadful

 74 दिलचस्प – मज़ेदार Interesting

 75 दर्शक – देखने वाले Spectators / Viewers

 76 स्वप्न – सपना Dream

 77 अपेक्षा – तुलना में Comparison / Expectation

 78 बदला – प्रतिशोध Revenge

 79 अनकहे – जो न कहा गया हो Unspoken

 80 फिसलते – रपटते हुए Sliding

 

मौखिक – 1. उच्चारण कीजिए –

धुँधले, काँच, झाँका, घंटों, अंदर, काँप, तुरंत, कंधा, शंकर, आतंक, पसंद, संकट, फँस, लंबे, पाँच, निकलूँगी, पंद्रह, जाँच, पूँछ, आँखें, माँ, कॉपियाँ, झाँकने, होऊँ

ट्रक, मज़े, खज़ाने, तरफ़, जबरदस्ती, स्तब्ध, अविश्वासपूर्वक, सज्जन, निर्देश, दिक्कत, विकटता, फ़ायदा, स्टॉप, आश्चर्य, नज़र, फ़िक्र, नुक्कड़, नाराज़गी, पीड़ादायक, गुज़ारते, अप्रिय, अंदाज़, बर्बाद, स्वास्थ्य, व्यायाम-शिक्षक, सीढ़ियों, निर्णय, शुरू, गणित, समीकरण, आविष्कार, ज़रूर, अग्नि परीक्षा, चीज़, विशेषज्ञ, फ़ेल, जिज्ञासावश, स्वप्न, दिलचस्प, दर्शक, अपेक्षा, त्रिकोणमिति

धुँधले – Dhundh-lay

पाँच – Paanch

काँच – Kaanch

निकलूँगी – Nik-loon-gi

झाँका – Jhaan-ka

पंद्रह – Pan-drah

घंटों – Ghan-ton

जाँच – Jaanch

अंदर – An-dar

पूँछ – Poonchh

काँप – Kaanp

आँखें – Aan-khayn

तुरंत – Tu-rant

माँ – Maa

कंधा – Kan-dha

कॉपियाँ – Co-pi-yaan

शंकर – Shan-kar

झाँकने – Jhaan-ka-nay

आतंक – Aa-tank

होऊँ – Ho-oon

पसंद – Pa-sand

संकट – San-kat

लंबे – Lam-bay

फँस – Fans

ट्रक – Truck

नाराज़गी – Naa-raaz-gi

मज़े – Ma-zay

पीड़ादायक – Pee-daa-daa-yak

खज़ाने – Kha-zaa-nay

गुज़ारते – Gu-zaar-tay

तरफ़ – Ta-raf

अप्रिय – Ap-ri-ya

जबरदस्ती – Ja-bar-das-ti

अंदाज़ – An-daaz

स्तब्ध – Stabd-ha

बर्बाद – Bar-baad

अविश्वासपूर्वक – Avish-waas-poor-vak

स्वास्थ्य – Swaasth-ya

सज्जन – Saj-jan

व्यायाम-शिक्षक – Vyaa-yaam Shik-shak

निर्देश – Nir-daysh

सीढ़ियों – Seed-hi-yon

दिक्कत – Dik-kat

निर्णय – Nir-nay

विकटता – Vi-kat-ta

शुरू – Shu-ru

फ़ायदा – Faa-yi-da

गणित – Ga-nit

स्टॉप – Stop

समीकरण – Sa-mee-ka-ran

आश्चर्य – Aash-char-ya

आविष्कार – Aa-vish-kaar

नज़र – Na-zar ज़रूर – Za-roor

फ़िक्र – Fikr अग्नि

परीक्षा – Agni Pa-reek-sha

नुक्कड़ – Nuk-kad

विशेषज्ञ – Vi-shay-shag-ya

फ़ेल – Fail

जिज्ञासावश – Jig-yaa-saa-vash

स्वप्न – Swap-na

दिलचस्प – Dil-chasp

दर्शक – Dar-shak

त्रिकोणमिति – Tri-kon-mi-ti

 

  1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर बताइए-

(क) प्रदीप ने अपने मित्रों के दुख में शामिल होते हुए किस बात की शंका प्रकट की?

उत्तर – प्रदीप ने शंका प्रकट की कि अब रवि और लेखिका का बस-स्टॉप भी वही होगा जहाँ शंकर साहब होंगे, और यदि वे कोई भी गड़बड़ करेंगे, तो शंकर साहब तुरंत उनके घर वालों से शिकायत कर देंगे।

(ख) बस स्टॉप पर शंकर साहब के साथ बिताए समय को बच्चों ने पीड़ादायक क्यों कहा है?

उत्तर – बच्चों ने इसे पीड़ादायक कहा क्योंकि उस समय शंकर साहब उनसे उनके स्कूल के अंकों के बारे में सवाल पूछते थे और कम अंक आने पर अप्रिय अंदाज़ में गुर्राते या डाँटते थे।

(ग) रवि की बहन ने शंकर साहब को प्रभावित करने के लिए क्या किया?

उत्तर – रवि की बहन ने एक मोटी सी किताब उठाई और घर के बाहर की सीढ़ियों पर बैठकर पढ़ाई में डूबने का दिखावा किया, ताकि शंकर साहब उसे पढ़ते हुए देखकर प्रभावित हो सकें।

(घ) रवि को किस बात की चिंता खाए जा रही थी?

उत्तर – गणित के कठिन टेस्ट में फेल होने के बाद रवि को यह चिंता खाए जा रही थी कि वह कहीं वार्षिक परीक्षा में भी फेल न हो जाए, क्योंकि वह खुद को गणित का विशेषज्ञ मानता था।

 

 

लिखित

  1. सही उत्तर पर सही का निशान लगाइए-

(क) रवि अविश्वासपूर्वक क्या देख रहा था?

उत्तर – (i) लंबे, पतले, चश्माधारी सज्जन को

(ख) रवि के साथ आए कुत्ते को इन दोनों ने कहाँ देखा था?

उत्तर – (iv) गलियों में घूमते

(ग) बच्चे बाड़ पार करके पुराने खेल के मैदान की तरफ़ क्या देखने भागे?

उत्तर – (ii) ज़ोर-ज़ोर से हँसते हुए शंकर साहब को

  1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

(क) बच्चों के सामने कौन सी विकट स्थिति उत्पन्न हो गई थी?

उत्तर – बच्चों के स्कूल के सबसे डरावने गणित के अध्यापक, शंकर साहब, उनके ठीक बगल वाले मकान में रहने आ गए थे। यही उनके लिए विकट स्थिति थी।

(ख) बच्चे बस स्टॉप पर जाने में देर क्यों कर रहे थे?

उत्तर – बच्चे बस स्टॉप जाने में जान-बूझकर देर कर रहे थे ताकि उन्हें बस आने तक शंकर साहब के साथ न खड़ा होना पड़े और वे उनकी डाँट या सवालों से बच सकें।

(ग) रवि ने ऐसा क्या देखा कि उसे कहना पड़ा- ‘भगवान बचाओ’। उसने ऐसा क्यों कहा?

उत्तर – रवि ने देखा कि शंकर साहब सड़क पार करके सीधे उनकी ओर ही आ रहे हैं। उसने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि उसे लगा कि शंकर साहब उन्हें कुत्ते के साथ खेलते देख फिर से डाँटने आ रहे हैं।

(घ) माधुरी ने ऐसा क्यों कहा कि ‘तुम दोनों ने उन्हें नाराज़ कर दिया होगा’?

उत्तर – टेस्ट बहुत कठिन था और पूरी कक्षा फेल हो गई थी। माधुरी को लगा कि शंकर साहब ने पिछले दिन की किसी बात के कारण रवि और उसकी बहन से बदला लेने के लिए जान-बूझकर इतना कठिन पेपर बनाया है।

(ङ) ऐसा क्या था जिसे देखकर रवि की बहन को लगा कि वह स्वप्न देख रही है?

उत्तर – स्कूल में हमेशा कठोर और गुस्से में रहने वाले शंकर साहब को घास पर लेटकर अपने कुत्ते के साथ फ्रिसबी खिलौने से खेलते और ज़ोर-ज़ोर से हँसते देखकर लेखिका को लगा कि वह स्वप्न देख रही है।

 

जीवन मूल्यपरक प्रश्न

गुरु और शिष्य के बीच कैसा संबंध होना चाहिए?

उत्तर – गुरु और शिष्य के बीच सम्मान, विश्वास और अपनत्व का संबंध होना चाहिए। गुरु को केवल अनुशासन और पढ़ाई तक सीमित न रहकर शिष्य की समस्याओं को मित्रवत् समझना चाहिए, और शिष्य को गुरु का सम्मान करते हुए उनसे सीखने के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए।

भाषा ज्ञान

  1. सही उत्तर पर लगाइए

(क) ‘सीढ़ी’ शब्द का बहुवचन – (iii) सीढ़ियाँ

(ख) सही वर्तनी – (iv) अविश्वासपूर्वक

(ग) ‘विशेष रूप से जानने वाला’ – (ii) विशेषज्ञ

 

  1. दोहराएँ – संज्ञा के स्थान पर प्रयोग किए जाने वाले शब्दों को सर्वनाम कहते हैं।

पाठ के आधार पर रिक्त स्थानों में सर्वनाम लिखकर वाक्य पूरे कीजिए-

(क) हम आपके बगल के मकान में ही रहते हैं, सर।

(ख) हाँ वही ही हैं, रवि ने धीरे से कहा।

(ग) रवि और मैं खिड़की से बाहर झाँक रहे थे।

(घ) तुम लोग क्या कर रहे हो… वे शुरू हो गए।

(ङ) मुझे लगा जैसे मैं कोई स्वप्न देख रही होऊँ।

 

  1. जानें- भाषा के लिखित रूप में विशेष स्थानों पर कब और कितना रुकना है और किस भाव से अपनी बात कहनी है। इसका संकेत करने वाले चिह्नों को विराम चिह्न कहते हैं।

हिंदी के प्रमुख विराम चिह्न इस प्रकार हैं-

पूर्ण विराम – (।)

प्रश्नवाचक चिह्न – (?)

अर्ध-विराम – (;)

अल्प विराम – (,)

विस्मयवाचक – (!)

योजक चिह्न – (-)

कोष्ठक – ( ())

त्रुटिपूरक चिह्न – (^)

निर्देशक चिह्न – (-)

उद्धरण चिह्न दोहरा – (” “)

इकहरा उदाहरण चिह्न – (”)

लाघव चिह्न – (॰)

निम्नलिखित पंक्तियों में उचित विराम-चिह्न लगाइए-

“तुम लोग आजकल बिलकुल नहीं पढ़ते हो,” उन्होंने क्रोध में एक दिन कहा, “या तो टी.वी. देखते रहते हो या फिर समय बर्बाद करते रहते हो। इस बारे में कुछ करना पड़ेगा।” करना तो मुझे ही पड़ा। “आज मैं बाहर नहीं निकलूँगी,” मैंने शाम को रवि से कह ही दिया।

  1. निम्नलिखित शब्दों के बहुवचन रूप लिखिए-

(क) बगीचा – बगीचे

(ख) खजाना – खजाने

(ग) कंधा – कंधे

(घ) दरवाज़ा – दरवाज़े

(ङ) कुत्ता – कुत्ते

(च) आवाज़ – आवाज़ें

(छ) बात – बातें

(ज) सड़क – सड़कें

(झ) आँख – आँखें

(ञ) मुसीबत – मुसीबतें

 

  1. निम्नलिखित द्वित्व व्यंजनों से बने तीन-तीन शब्द लिखिए-

(क) त्त – कुत्ता, पत्ता, गत्ता

(ख) ट्ट – पट्टा, लट्टू, खट्टा

(ग) ज्ज – सज्जन, लज्जा, छज्जा

(घ) न्न – प्रसन्न, अन्न, भिन्न

(ङ) म्म – हिम्मत, सम्मान, चम्मच

 

  1. रिक्त स्थानों में ‘कि’ अथवा ‘की’ लिखकर वाक्य पूरे कीजिए-

(क) उस हरी घास से हम खज़ाने की खोज करते थे।

(ख) हम खिड़की से झाँकते थे और सोचते थे कि यह घर अंदर से कैसा होगा।

(ग) मैं बाहर की सीढ़ियों पर किताब लेकर बैठ गई।

(घ) प्रदीप ने कहा कि तुम्हारा तो बस स्टॉप भी एक ही होगा।

(ङ) हम खेल के मैदान की तरफ़ दौड़े।

(च) मैं सोच रहा था कि मेरा कुत्ता कहाँ चला गया।

रोचक क्रियाकलाप

  1. ‘त्रिको’ यदि बोल सकता तो बच्चों को अपने मालिक के बारे में जो बताता उसे अनुच्छेद के रूप में लिखिए।

“नमस्ते दोस्तों! मेरा नाम त्रिको है। तुम लोग मुझे गलियों में घूमते देख सोचते होगे कि मैं कितना बेचारा हूँ और मेरे मालिक, शंकर साहब, बहुत निर्दयी हैं। लेकिन सच तो यह है कि वे दिल के बहुत साफ हैं। हाँ, स्कूल में वे थोड़े सख्त और डरावने जरूर लगते हैं, क्योंकि वे चाहते हैं कि उनके छात्र भविष्य में सफल हों। पर घर आने के बाद, वे मेरे सबसे अच्छे दोस्त बन जाते हैं। वे मेरे साथ घंटों घास पर लेटकर फ्रिसबी खेलते हैं और बच्चों की तरह खिलखिलाकर हँसते हैं। उन्होंने मेरा नाम ‘त्रिको’ भी अपने पसंदीदा विषय ‘त्रिकोणमिति’ (Trigonometry) के नाम पर रखा है, जो यह दिखाता है कि वे अपने काम और मुझसे कितना प्यार करते हैं। वे मुझे कभी नहीं मारते, बल्कि वे तो अकेलेपन से डरते हैं और मुझमें अपना साथी ढूँढते हैं। अगली बार जब तुम उन्हें देखो, तो डरना मत; बस उनकी आँखों में छिपी उस मुस्कान को पहचानना जो वे केवल मेरे साथ साझा करते हैं।”

  1. शंकर साहब के घर से लौटकर भाई-बहन के बीच में जो बात हुई होगी उसे संवाद के रूप में लिखिए।

उत्तर – स्थान – रवि और लेखिका के घर का कमरा।

पात्र – रवि और उसकी बहन।

लेखिका – (उत्साहित होकर) रवि! क्या तुमने आज जो देखा उस पर तुम्हें यकीन हो रहा है?

रवि – (हैरानी से सिर हिलाते हुए) बिल्कुल नहीं! मुझे तो अभी भी लग रहा है कि मैं स्कूल के किसी ब्लैकबोर्ड के सामने खड़ा हूँ और सर मुझे डाँटने वाले हैं। पर वो… वो हँसते हुए शंकर सर… वो अद्भुत था!

लेखिका – और तुमने देखा, त्रिको कितना खुश था? हम बेकार में ही डर रहे थे कि सर उसे मारते होंगे। वे तो उसे ‘त्रिकोणमिति’ की तर्ज पर प्यार से बुला रहे थे।

रवि – हाँ, और सबसे अच्छी बात तो यह है कि उन्होंने हमें डाँटने के बजाय अपने साथ खेलने के लिए बुलाया। मुझे तो लगा था कि वे हमारे फेल होने पर हमें घर से ही भगा देंगे।

लेखिका – सच में! और अब तो वे हमें गणित के समीकरण (Equations) भी समझाने वाले हैं। अब मुझे गणित से उतना डर नहीं लग रहा जितना पहले लगता था।

रवि – मुझे भी। आखिर हमारे पड़ोसी इतने बुरे भी नहीं हैं जितना हम सोच रहे थे। चलो, जल्दी से अपनी किताबें निकालते हैं, सर हमारा इंतज़ार कर रहे होंगे!

लेखिका – हाँ, चलो! अब गणित का होमवर्क ‘सड़ा हुआ’ नहीं, बल्कि ‘दिलचस्प’ होने वाला है।

  1. इस पाठ में बहुत से संवाद हैं। किसी एक अंश को लेकर उसका नाटक के रूप में अभिनय कीजिए।

उत्तर – छात्र इसे शिक्षक की सहायता से करें।

गृहकार्य

जानें- ‘ड़’ और ‘ढ़’ हिंदी की ध्वनियाँ हैं। संस्कृत में इनका प्रयोग नहीं किया जाता। ध्यान रखें इन ध्वनियों से कोई शब्द शुरू नहीं होता।

  • ‘ड़’ और ‘ढ़’ के प्रयोगवाले चार-चार शब्द लिखिए।
  • ‘ड़’ वाले शब्द – सड़क, लड़का, पहाड़, पकड़।
  • ‘ढ़’ वाले शब्द – सीढ़ी, पढ़ना, चढ़ना, बढ़ना।

 

 

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