सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ – लेखक परिचय
सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का जन्म सन् 1961 में पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर जिले के महिषादल गाँव में हुआ था। उनके बचपन का नाम सूर्य कुमार था। निराला की विधिवत स्कूली शिक्षा नवीं कक्षा तक ही हुई। उन्होंने भारत की प्रकृति और संस्कृति के विभिन्न रूपों का चित्रण अपनी कविताओं में किया है। उन्होंने बच्चों के लिए अनेक कहानियाँ भी लिखी हैं, जैसे- रामायण, महाभारत, महाराणा प्रताप, भक्त ध्रुव, प्रह्लाद की कहानियाँ आदि।
कंजूस और सोना
एक आदमी था, जिसके पास काफी जमींदारी थी, मगर दुनिया की किसी दूसरी चीज से सोने की उसे अधिक चाह थी। इसलिए पास जितनी जमीन थी, कुल उसने बेच डाली और उसे कई सोने के टुकड़ों में बदला। सोने के इन टुकड़ों को गलाकर उसने बड़ा गोला बनाया और उसे बड़ी हिफाजत से जमीन में गाड़ दिया। उस गोले की उसे जितनी परवाह थी, उतनी न बीवी की थी, न बच्चे की, न खुद अपनी जान की। हर सुबह वह उस गोले को देखने के लिए जाता था और यह मालूम करने के लिए कि किसी ने उसमें हाथ नहीं लगाया! वह देर तक नजर गड़ाए उसे देखा करता था।
कंजूस की इस आदत पर किसी दूसरे की निगाह गई। जिस जगह वह सोना गड़ा था, धीरे-धीरे वह ढूँढ़ निकाली गई। आखिर में एक रात किसी ने वह सोना निकाल लिया।
दूसरे रोज सुबह को कंजूस अपनी आदत के अनुसार सोना देखने के लिए गया, मगर जब उसे वह गोला दिखाई न पड़ा, तब वह गम और गुस्से में जामे से बाहर हो गया।
उसके एक पड़ोसी ने उससे पूछा, “इतना मन क्यों मारे हुए हो? असल में तुम्हारे पास कोई पूँजी नहीं थी, फिर कैसे वह तुम्हारे हाथ से चली गई? तुम सिर्फ एक शौक ताजा किए हुए थे कि तुम्हारे पास पूँजी थी। तुम अब भी
खयाल में लिए रह सकते हो कि वह माल तुम्हारे पास है। सोने के उस पीले गोले की जगह उतना ही बड़ा पत्थर का एक टुकड़ा रख दो और सोचते रहो कि वह गोला अब भी मौजूद है। पत्थर का वह टुकड़ा तुम्हारे लिए सोने का गोला ही होगा, क्योंकि उस सोने से तुमने सोने वाला काम नहीं लिया। अब तक वह गोला तुम्हारे काम नहीं आया। उससे आँखें सेंकने के सिवा काम लेने की कभी तुमने सोची ही नहीं।”
यदि आदमी धन का सदुपयोग न करे, तो उस धन की कोई कीमत नहीं।
-सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
कंजूस और सोना – शब्दार्थ
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Word (Hindi) |
Meaning in Hindi |
Meaning in English |
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कंजूस |
कृपण, धन खर्च न करने वाला |
Miser |
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जमींदारी |
भूमि का स्वामित्व, जागीर |
Landed property / Estate |
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गलाकर |
पिघलाकर |
By melting |
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हिफाजत |
सुरक्षा, रक्षा |
Protection / Safety |
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परवाह |
चिंता, फिक्र |
Care / Concern |
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निगाह |
दृष्टि, नजर |
Sight / Glance / Eye |
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गम |
दुख, शोक |
Grief / Sorrow |
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जामे से बाहर होना |
अत्यंत क्रोधित होना, आपे से बाहर होना |
To lose one’s temper / To be enraged |
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पूँजी |
धन, संपत्ति, दौलत |
Capital / Wealth / Asset |
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शौक |
चाव, रुचि, लगन |
Interest / Fondness (here: obsession) |
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आँखें सेंकना |
केवल देखकर संतोष कर लेना |
To merely look at something for satisfaction |
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सदुपयोग |
सही या उचित इस्तेमाल |
Proper use / Right utilization |
कंजूस और सोना से मिलने वाली सीखें
धन के सदुपयोग का महत्त्व – धन का असली मूल्य उसे केवल इकट्ठा करके रखने में नहीं, बल्कि उसका सही उपयोग करने में है।
बिना उपयोग का धन पत्थर के समान है – यदि धन आपके, आपके परिवार या दूसरों की भलाई के लिए कभी काम नहीं आता, तो उसकी कीमत एक बेकार पत्थर के टुकड़े से ज्यादा कुछ नहीं है।
अत्यधिक मोह दुख का कारण है – भौतिक वस्तुओं या धन से बहुत ज्यादा लगाव इंसान को हमेशा चिंता में रखता है और अंततः उनके छिन जाने पर गहरा दुख देता है।
धन जीवन का साधन है, लक्ष्य नहीं – धन जीवन को बेहतर और सुखमय बनाने का एक साधन होना चाहिए, न कि जीवन का एकमात्र लक्ष्य। कंजूस ने उस सोने के लिए अपनी पत्नी, बच्चों और खुद की अनदेखी की, जो उसके किसी काम नहीं आया।
बातचीत के लिए
- कंजूस को सबसे अधिक परवाह सोने की थी। आप सबसे अधिक किसकी परवाह करते हैं और क्यों?
उत्तर – मैं सबसे अधिक अपने परिवार और माता-पिता की परवाह करता हूँ, क्योंकि वे हमेशा मेरे सुख-दुख में साथ देते हैं और मुझे सही रास्ता दिखाते हैं।
- आप कंजूस की जगह होते तो सोने का क्या करते?
उत्तर – अगर मैं कंजूस की जगह होता, तो उस सोने का उपयोग अपने परिवार की जरूरतें पूरी करने, बच्चों की पढ़ाई और कुछ पैसे भविष्य के लिए बचाने में करता।
- क्या धन को जमा करना सही है? अपने उत्तर का कारण भी बताइए।
उत्तर – धन को भविष्य की सुरक्षा के लिए जमा करना सही है, लेकिन सिर्फ जमा करके रखना और जरूरत पड़ने पर भी खर्च न करना गलत है। धन का उपयोग जीवन को बेहतर बनाने के लिए होना चाहिए।
- यदि आपको 100 रुपये मिलें, तो उनका ‘सदुपयोग’ करने के लिए आप क्या-क्या करेंगे?
उत्तर – मैं 100 रुपये में से 50 रुपये की अपनी पढ़ाई के लिए कोई किताब या पेन खरीदूँगा और बचे हुए 50 रुपये अपनी गुल्लक में बचाकर रखूँगा।
- कंजूस सोना खरीदकर प्रसन्न था। क्या धन से प्रसन्नता’ खरीदी जा सकती है? आप ऐसा क्यों मानते हैं?
उत्तर – नहीं, धन से सच्ची प्रसन्नता नहीं खरीदी जा सकती। धन से हम सिर्फ जरूरत की चीजें खरीद सकते हैं, लेकिन सच्चा सुख परिवार के प्यार, शांति और अच्छे दोस्तों से मिलता है, जो पैसों से नहीं मिलते।
मेरी समझ से
नीचे दिए गए प्रश्नों का सबसे उपयुक्त उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए
- कंजूस ने सोने से कुछ क्यों नहीं खरीदा?
(क) उसे खरीदारी करना अच्छा नहीं लगता था।
(ख) वह सोने को खो देना नहीं चाहता था।
(ग) बाजार में उसकी मनपसंद चीजें नहीं थीं।
(घ) उसे प्रतिदिन सोना देखने की आदत थी।
उत्तर – (ख) वह सोने को खो देना नहीं चाहता था। ★
- कहानी के अनुसार धन का महत्त्व कब होता है?
(क) जब उसे जमीन में गाड़ दिया जाए।
(ख) जब वह बहुत पुराना हो जाए।
(ग) जब उसका सदुपयोग किया जाए।
(घ) जब वह सोने में बदल दिया जाए।
उत्तर – (ग) जब उसका सदुपयोग किया जाए। ★
- कहानी के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सटीक है?
(क) धन को किसी उपाय से सुरक्षित रखना सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण है।
(ख) धन का मूल्य उसके उपयोग में है, केवल उसके पास होने में नहीं।
(ग) अपना सारा धन समाज की भलाई के लिए दान कर देना चाहिए।
(घ) सोने से बेहतर भूमि है क्योंकि उसका उपयोग किया जा सकता है।
उत्तर – (ख) धन का मूल्य उसके उपयोग में है, केवल उसके पास होने में नहीं। ★
- “उस गोले की उसे जितनी परवाह थी, उतनी न बीवी की थी, न बच्चे की, न खुद अपनी जान की।” इस वाक्य से कंजूस के व्यक्तित्व के बारे में क्या पता चलता है?
(क) वह अपने परिवार से दूर रहता था।
(ख) उसे सबसे अधिक लगाव सोने से था।
(ग) उसकी पत्नी और बच्चे भी उतने ही कंजूस थे।
(घ) उसके लिए सोने से भी अधिक कीमती उसका परिवार था।
उत्तर – (ख) उसे सबसे अधिक लगाव सोने से था। ★
- “यदि आदमी धन का सदुपयोग न करे, तो उस धन की कोई कीमत नहीं।” इस कहानी के अनुसार धन का ‘सदुपयोग’ करने का सही अर्थ क्या है?
(क) धन को सुरक्षित और गोपनीय स्थान पर रखना।
(ख) धन से वे काम लेना जो जीवन को सार्थक बनाएँ।
(ग) धन को प्रतिदिन देखकर मानसिक शांति प्राप्त करना।
(घ) धन को केवल आपातकाल के लिए बचाकर रखना।
उत्तर – (ख) धन से वे काम लेना जो जीवन को सार्थक बनाएँ। ★
सोचिए और लिखिए
- कंजूस के पास सोने का गोला कैसे आया?
उत्तर – कंजूस ने अपनी सारी जमीन बेच दी और उससे मिले पैसों से सोने के टुकड़े खरीदे। फिर उन टुकड़ों को गलाकर उसने सोने का गोला बनाया।
- कंजूस ने सोने का कोई उपयोग क्यों नहीं किया?
उत्तर – कंजूस ने सोने का कोई उपयोग नहीं किया क्योंकि कंजूस को सोना खर्च होने का डर था। उसे केवल सोने को अपने पास रखने और उसे रोज देखने में ही खुशी मिलती थी।
- पड़ोसी ने कंजूस को पत्थर का टुकड़ा रखने की सलाह क्यों दी?
उत्तर – पड़ोसी ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि कंजूस के लिए वह सोना भी किसी काम का नहीं था। वह केवल उसे देखता था। बिना उपयोग के सोना और पत्थर दोनों बराबर हैं।
- क्या कंजूस को अपने परिवार से प्यार था? कहानी से यह कैसे पता चलता है?
उत्तर – नहीं, कंजूस को अपने परिवार से ज्यादा प्यार नहीं था। कहानी में साफ लिखा है कि उसे अपनी बीवी और बच्चों से ज्यादा परवाह उस सोने के गोले की थी।
भाषा की ओर
आपके शब्द
- नीचे दिए गए रेखांकित शब्दों को आपकी भाषा में क्या कहते हैं? लिखिए-
पाठ से शब्द आपकी भाषा में शब्द इसके लिए कोई अन्य शब्द
(क) किसी ने उसमें हाथ नहीं लगाया। हाथ हस्त
(ख) एक रात किसी ने वह सोना निकाल लिया। राति रात्रि
(ग) पत्थर का एक टुकड़ा रख दो। पथर प्रस्तर
(घ) जमीन में गाड़ दिया। जमी भूमि
(ङ) वह सोना गड़ा था। सुना स्वर्ण
समान अर्थ वाले शब्द
- नीचे दिए गए शब्दों के लिए कहानी में किन शब्दों का प्रयोग किया गया है? कहानी से ढूँढ़कर लिखिए-
शब्द पाठ में से शब्द
क्रोध गुस्सा
चिंता परवाह
प्रतिदिन रोज़
धरती जमीन
दुख गम
सुरक्षा हिफाज़त
मिलते-जुलते अर्थ
- अब नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित शब्दों के लिए कोई अन्य शब्द लिखिए-
एक आदमी (इंसान / व्यक्ति) था।
निया की किसी दूसरी चीज (वस्तु) से सोने की उसे अधिक चाह (इच्छा / लालसा) थी।
उस गोले की उसे जितनी परवाह थी, उतनी न बीवी (पत्नी) की थी, न बच्चे की, न खुद अपनी जान (प्राण) की।
एक और अनेक
- नीचे दिए गए रेखांकित शब्दों का वचन बदलकर वाक्य फिर से लिखिए-
उदाहरण- वह देर तक नजर गड़ाए उसे देखा करता था।
वह देर तक नजरें गड़ाए उसे देखा करता था।
(क) अब तक वह गोला तुम्हारे काम नहीं आया।
अब तक वे गोले तुम्हारे काम नहीं आए।
(ख) कंजूस की इस आदत पर किसी दूसरे की निगाह गई।
कंजूस की इन आदतों पर किसी दूसरे की निगाहें गईं।
(ग) वह देर तक नजर गड़ाए उसे देखा करता था।
वह देर तक नजरें गड़ाए उन्हें देखा करते थे।
(घ) उसके पड़ोसी ने उससे पूछा।
उसके पड़ोसियों ने उससे पूछा।
(ङ) धीरे-धीरे वह ढूँढ़ निकाली गई।
धीरे-धीरे वे ढूँढ़ निकाली गईं।
भविष्य की अभिव्यक्ति
नीचे दिए गए वाक्यों पर ध्यान दीजिए-
“वह उस गोले को देखने के लिए जाता था।” (भूतकाल)
“वह उस गोले को देखने के लिए जाएगा।” (भविष्यत् काल)
- अब नीचे दिए गए वाक्यों को भविष्यत् काल में बदलकर लिखिए-
(क) वह गोला तुम्हारे काम नहीं आया।
वह गोला तुम्हारे काम नहीं आएगा।
(ख) वह देर तक नजर गड़ाए उसे देखा करता था।
वह देर तक नजर गड़ाए उसे देखा करेगा।
(ग) तुम्हारे पास कोई पूँजी नहीं थी।
तुम्हारे पास कोई पूँजी नहीं होगी।
(घ) धीरे-धीरे वह ढूँढ़ निकाली गई।
धीरे-धीरे वह ढूँढ़ निकाली जाएगी।
(ङ) किसी ने वह सोना निकाल लिया।
कोई वह सोना निकाल लेगा।
फिर से लिखें
- नीचे कोष्ठक में दिए गए शब्दों का प्रयोग करके वाक्यों को बदलकर लिखिए-
उदाहरण- एक आदमी था। (औरत) एक औरत थी।
(क) तुम्हारे पास पूँजी थी। (रुपया-पैसा) → तुम्हारे पास रुपया-पैसा था।
(ख) उस धन की कोई कीमत नहीं। (मूल्य) → उस धन का कोई मूल्य नहीं।
(ग) कंजूस की इस आदत पर किसी दूसरे की निगाह गई। (ध्यान) → कंजूस की इस आदत पर किसी दूसरे का ध्यान गया।
(घ) जिस जगह वह सोना गड़ा था, धीरे-धीरे वह ढूँढ़ निकाली गई। (स्थान पर) → जिस स्थान पर वह सोना गड़ा था, धीरे-धीरे वह ढूँढ़ निकाली गई।
(ङ) एक रात किसी ने वह सोना निकाल लिया। (धातु) → एक रात किसी ने वह धातु निकाल ली।
मेरे वाक्य
नीचे दिए गए वाक्य को ध्यान से पढ़िए-
“यदि आदमी धन का सदुपयोग न करे, तो उस धन की कोई कीमत नहीं।”
- अब ‘यदि’ और ‘तो’ वाले कुछ अन्य वाक्य लिखिए-
(क) यदि वर्षा हुई तो फसल अच्छी होगी।
(ख) यदि तुम मेहनत करोगे तो परीक्षा में पास हो जाओगे।
(ग) यदि तुम सच बोलोगे तो सब तुम पर विश्वास करेंगे।
(घ) यदि पेड़-पौधे लगाओगे तो पर्यावरण शुद्ध रहेगा।
(ङ) यदि हम समय बचाएँगे तो समय हमें बचाएगा।
कहानी से मुहावरे
“वह देर तक नजर गड़ाए उसे देखा करता था।”
‘नजर गड़ाना’ का अर्थ है— ध्यान से देखना, टकटकी लगाकर देखना।
(क) कहानी में निम्नलिखित मुहावरों वाले वाक्यों को रेखांकित कीजिए और इनके प्रयोग समझिए।
हाथ लगाना – छूना, स्पर्श करना
मन मारना – उदास होना, इच्छा को दबाना
जामे से बाहर होना – आपे से बाहर होना, अत्यंत क्रोध करना
ताजा करना – स्मरण करना, याद करना, फिर चित्त में लाना
हाथ से निकल जाना – अपने अधिकार में न रहना, वश में न रह जाना
ख्याल करना – सोचना, याद करना
आँख सेंकना – दर्शन का सुख उठाना, सुंदर रूप देखना
निगाह पड़ना – दिखाई पड़ना, दिखाई देना
(ख) इन मुहावरों का प्रयोग करते हुए अपने वाक्य बनाइए।
- हाथ लगाना (छूना, स्पर्श करना)
वाक्य: माँ ने सभी बच्चों को सख्त हिदायत दी थी कि बिना हाथ धोए कोई भी भोजन को हाथ न लगाए।
- मन मारना (उदास होना, इच्छा को दबाना)
वाक्य: परीक्षा नज़दीक होने के कारण रोहन को दोस्तों के साथ फिल्म देखने जाने का विचार छोड़कर मन मारना पड़ा।
- जामे से बाहर होना (आपे से बाहर होना, अत्यंत क्रोध करना)
वाक्य: जब सेठ जी ने नौकर को तिजोरी से पैसे चुराते हुए रंगे हाथों पकड़ा, तो वे गुस्से से जामे से बाहर हो गए।
- ताजा करना (स्मरण करना, याद करना, फिर चित्त में लाना)
वाक्य: सालों बाद स्कूल के दोस्तों से मिलकर राहुल ने अपने बचपन की पुरानी यादें ताजा कर लीं।
- हाथ से निकल जाना (अपने अधिकार में न रहना, वश में न रह जाना)
वाक्य: समय पर सही फैसला न लेने के कारण, अच्छी नौकरी का वह सुनहरा अवसर रमेश के हाथ से निकल गया।
- आँख सेंकना (दर्शन का सुख उठाना, सुंदर रूप देखना)
वाक्य: कंजूस आदमी पैसों का कोई उपयोग नहीं करता था, वह तो बस अपने सोने को देखकर आँखें सेंकता रहता था।
- निगाह पड़ना (दिखाई पड़ना, दिखाई देना)
वाक्य: मेले में घूमते समय अचानक मेरी निगाह बचपन के एक पुराने दोस्त पर पड़ी।
(ग) इन मुहावरों के भाव से मिलते-जुलते अपनी भाषा के मुहावरों को लिखिए।
यह छात्रों के लिए गृहकार्य है।
पाठ से आगे
अनुमान और कल्पना
- कहानी में कंजूस और पड़ोसी का कोई नाम नहीं है। यदि आप उन्हें कोई नाम देना चाहें, तो क्या नाम देंगे और क्यों?
उत्तर – कंजूस का नाम मैं ‘करोड़ीमल’ देना चाहूँगा क्योंकि उसे पैसे प्यारे थे और पड़ोसी का नाम ‘समझदार सिंह’ देना चाहूँगा क्योंकि उसने सही सलाह दी।
- पड़ोसी ने कंजूस को सलाह दी लेकिन क्या कंजूस ने वह सलाह मानी होगी? आपको ऐसा क्यों लगता है?
उत्तर – शायद नहीं। कंजूस लोग पैसों के मोह में इतने अंधे होते हैं कि वे आसानी से अपनी आदत नहीं बदलते। उसे बस अपना सोना खोने का ही दुख रहा होगा।
- यदि आप कंजूस के पड़ोसी होते, तो उसे क्या सलाह देते?
उत्तर – मैं भी उसे यही समझाता कि धन का काम जीवन को सुखी बनाना है। मैं उससे कहता कि अब जो होना था हो गया, कम से कम अब बचे हुए जीवन को अपने परिवार के साथ खुशी से जियो।
- क्या आपने कभी कोई ऐसी वस्तु देखी है जिसे किसी ने केवल दिखावे के लिए रखा है, उपयोग के लिए नहीं? उस वस्तु के बारे में बताइए।
उत्तर – हाँ, मेरे एक दोस्त के घर में एक बहुत ही महँगी और सुंदर काँच की चाय का सेट अलमारी में रखा है। वे उसका उपयोग कभी चाय पीने के लिए नहीं करते, बस शो-पीस की तरह सजाकर रखते हैं।
सृजन
- यदि सोना निकालने वाले को पकड़ लिया जाता और सोना वापस मिल जाता, तो कंजूस अब क्या करता? आगे की कहानी कल्पना से बढ़ाइए।
उत्तर – यदि सोना निकालने वाले चोर को पकड़ लिया जाता और कंजूस को उसका सोना वापस मिल जाता, तो कहानी कुछ इस प्रकार आगे बढ़ती:
सोना वापस मिलते ही कंजूस की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहता। वह दौड़कर उस सोने के पीले गोले को सीने से लगा लेता और बच्चों की तरह रोने लगता। लेकिन, इस चोरी की घटना ने उसे अंदर तक हिला दिया था।
उस रात जब वह सोने गया, तो उसे नींद नहीं आई। उसके कानों में बार-बार अपने पड़ोसी की बात गूँज रही थी— “बिना उपयोग के यह सोना एक पत्थर के टुकड़े के समान है।” साथ ही, उसे यह भी डर सताने लगा कि अगर किसी ने फिर से इसे चुरा लिया, तो क्या होगा?
अगली सुबह उठकर कंजूस ने एक बड़ा और जीवन बदलने वाला फैसला लिया। उसने उस सोने के गोले को वापस ज़मीन में नहीं गाड़ा। इसके बजाय, वह बाज़ार गया और उस सोने का कुछ हिस्सा बेचकर अपनी बेची हुई ज़मीन का एक बड़ा हिस्सा वापस खरीद लिया ताकि वह फिर से खेती कर सके। उसने अपने परिवार के लिए नए कपड़े, अच्छा भोजन और घर में सुख-सुविधा का सामान भी खरीदा।
जब उसके परिवार वालों ने यह अचानक आया बदलाव देखा, तो उनकी आँखों में खुशी के आँसू आ गए। घर में पहली बार असली हँसी-खुशी का माहौल था। कंजूस को अब यह गहराई से समझ आ गया था कि धन को ज़मीन में गाड़कर रखने से सिर्फ चिंता और डर मिलता है, लेकिन अपनों की खुशी के लिए उसका सदुपयोग करने से सच्चा सुख मिलता है।
अब वह हर सुबह किसी अँधेरे गड्ढे में रखे सोने को नहीं देखता था, बल्कि अपने बच्चों के मुस्कुराते चेहरों को देखकर संतुष्ट होता था। उसने सीख लिया था कि धन जीवन जीने का साधन है, जीवन का लक्ष्य नहीं।
- मान लीजिए कि जिस व्यक्ति ने सोना निकाल लिया था, उसने कंजूस को एक पत्र लिखा है। उसने पत्र में बताया है कि उसने सोना क्यों निकाल लिया। अपनी कल्पना से वह पत्र लिखिए।
उत्तर – नमस्ते कंजूस भाई,
मैंने तुम्हारा वह सोना निकाल लिया है। मैं कोई चोर नहीं हूँ, लेकिन जब मैंने देखा कि तुम उस सोने का कोई उपयोग नहीं कर रहे हो और अपनी पत्नी-बच्चों को भी कष्ट में रखा है, तो मुझे बहुत अजीब लगा। मैंने यह सोना बेचकर गाँव में एक स्कूल और अस्पताल बनवाने का फैसला किया है। कम से कम तुम्हारा सोना अब किसी अच्छे काम तो आएगा। तुम चाहो तो अब उस गड्ढे में पत्थर पर पीला रंग लगाकर रख लो और उसे देखकर खुश रह सकते हो।
तुम्हारा शुभचिंतक!
परियोजना
- पोस्टर- सोना या पत्थर?
समूह में मिलकर एक ‘पोस्टर’ बनाएँ। आधा पोस्टर सोने के गोले से भरा हो, आधा पत्थर से। बीच में यह प्रश्न लिखें— ‘क्या अंतर है?” फिर सब अपने-अपने विचार 1-1 पंक्ति में पोस्टर पर लिखें/लिखकर चिपका दें। यह पोस्टर कक्षा की दीवार पर लटकाया जा सकता है।
- साक्षात्कार ‘आज का कंजूस’
एक सदस्य ‘आज के जमाने का कंजूस’ बनेगा जिसके पास लाखों रुपये हैं मगर वह उन्हें खर्च नहीं करता। बाकी सदस्य उसका साक्षात्कार लेंगे और प्रश्न पूछेंगे, जैसे- “आप पैसा क्यों नहीं खर्च करते? उसके रोचक उत्तर सुनकर उसे समझाएँगे कि पैसा बिना उपयोग के व्यर्थ है।
- ‘पत्थर बनाम सोना’
दो समूह बनाएँ, एक समूह कंजूस के पक्ष में तर्क देगा, जैसे- “कंजूस सही था, क्योंकि सोना कभी भी काम आ सकता था, वह सुरक्षित था।” दूसरा समूह कंजूस के विरोध में तर्क देगा जैसे- “पड़ोसी सही था, क्योंकि बिना उपयोग का धन बेकार है।” अन्य समूह इसे सुनकर अपना निर्णय देंगे।
- नाट्य प्रस्तुति
समूह के 4-5 सदस्य मिलकर इस कहानी पर 2 मिनट का एक लघु नाटक बनाएँ। एक कंजूस बनेगा, एक सोना निकालने वाला, एक पड़ोसी और दो-तीन लोग गोला बनाने और गाड़ने के दृश्य में सहायता करेंगे।
छात्र इसे शिक्षक की सहायता से पूरा करें
आज की पहेली
नीचे दी गई पहेली में पाठ से जुड़े शब्द ढूँढ़कर लिखिए-
- कहानी का मुख्य पात्र जिसके पास बहुत जमीन थी। (3 अक्षर)
कंजूस
- सोने को गलाकर कंजूस ने जो आकार दिया था। (2 अक्षर)
गोला
- वह व्यक्ति जिसने कंजूस को सलाह दी। (3 अक्षर)
पड़ोसी
- वह बहुमूल्य धातु जिसे कंजूस ने जमीन में गाड़ा था। (2 अक्षर)
सोना
- कंजूस की संपत्ति जिसे उसने बेच दिया था। (3 अक्षर)
जमीन
खोजबीन
- पुस्तकालय से सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की अन्य रचनाएँ पुस्तकालय और अन्य स्रोतों से खोजकर पढ़िए।
- नीचे दी गई एनसीईआरटी की आधिकारिक यू-ट्यूब इंटरनेट कड़ियों (लिंक्स) का प्रयोग करके आप इस पाठ के बारे में और अधिक जान-समझ सकते हैं तथा कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की कविताओं का आनंद ले सकते हैं-
https – //www.youtube.com/watch?v=w28KpRF4Awe
https – //www.youtube.com/watch?v=xY8Yo-HDdio
https – //www.youtube.com/watch?v=BwA05AtwDFo

