गरमी के दिन थे, कृष्ण यमुना के तट पर ग्वाल-बालों के साथ गाएँ चरा रहे थे। गाएँ इधर-उधर छिटकी हुई, बड़ी तन्मयता के साथ घास चर रही थीं। ग्वाल-बाल इधर-उधर खेल रहे थे। धूप बड़ी तेज थी। कुछ ग्वाल-बालों और गायों को प्यास लगी। वे यमुना...
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कृष्ण के मुख में ब्रह्मांड
नंद और यशोदा दोनों बड़े भाग्यशाली थे, जिनकी गोद में बैठकर श्रीकृष्ण अपनी बाल- लीलाएँ करते थे। उनके भाग्य की ठीक-ठीक प्रशंसा शारदा भी नहीं कर सकतीं। धर्मग्रंथों से पता चलता है कि नंद अपने पूर्वजन्म में एक वसु थे। यशोदा धरा थीं...
भक्त ध्रुव क्यों हुआ अमर?
स्वयंभू मनु के पुत्र उत्तानपाद की दो रानियाँ थीं-सुरुचि और सुनीति। उत्तानपाद की सुरुचि में आसक्ति अधिक थी। फिर भी सुनीति बुरा नहीं मानती थी। वह अपने कर्तव्य का पालन बड़ी ही श्रद्धा और प्रेम के साथ करती थी। वह उदार और धार्मिक...

