# Avinash Solutions > The World of Hindi ## Posts - [भय - आचार्य रामचंद्र शुक्ल](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/bhay-by-acharya-ramcgandra-shukla-the-best-explanation/): https://youtu.be/qa2xMtgLY6g इच्छित बिंदु पर क्लिक करें।  आचार्य रामचंद्र शुक्ल का परिचय आचार्य रामचंद्र शुक्ल का परिचय हिंदी साहित्य के ‘सूरज’ माने जाने वाले आचार्य रामचंद्र शुक्ल का परिचय संक्षेप में नीचे दिया गया है। वे एक प्रखर आलोचक, निबंधकार और इतिहासकार थे। आचार्य रामचंद्र शुक्ल – संक्षिप्त परिचय जन्म  – 4 अक्टूबर, 1884 ई. जन्म स्थान – अगोना गाँव, जिला- बस्ती (उत्तर प्रदेश) मृत्यु  – 2 फरवरी, 1941 ई. युग   – शुक्ल युग (छायावाद के समकालीन) मुख्य विधाएँ – आलोचना, निबंध, इतिहास, संपादन जीवन परिचय (Life Journey) आचार्य शुक्ल के पिता का नाम पंडित चंद्रबली शुक्ल था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा […] - [गुंडा - जयशंकर प्रसाद](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/gunda-by-jayshankar-prasad-the-best-explanation/): https://youtu.be/znKXizcCEAM इच्छित बिंदु पर क्लिक करें।  गुंडा गुंडा पचास वर्ष से ऊपर था। तब भी युवकों से अधिक बलिष्ठ और दृढ़ था। चमड़े पर झुर्रियाँ नहीं पड़ी थीं। वर्षा की झड़ी में, पूस की रात की छाया में, कड़कती हुई जेठ की धूप में, नंगे शरीर घूमने में वह सुख मानता था। उसकी चढ़ी मूँछें बिच्छू के डंक की तरह, देखने वालों को आँखों में चुभेती थीं। उसका साँवला रंग साँप की तरह चिकना और चमकीला था। उसकी नागपुरी घोती का लाल रेशमी किनारा दूर से भी ध्यान आकर्षित करता। कमर में बनारसी सेल्हे का फेंटा, जिसमें सीप की मूठ […] - [बाबर की ममता - देवेंद्रनाथ शर्मा](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/babur-ki-mamtaby-devendranath-sharma-the-best-explanation/): https://youtu.be/bjE9CJEimm4 इच्छित बिंदु पर क्लिक करें।  देवेंद्रनाथ शर्मा जीवन परिचय जन्म – डॉ. देवेंद्रनाथ शर्मा का जन्म 1918 ई. में बिहार के छपरा जिले के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। शिक्षा – उनकी प्रारंभिक शिक्षा गाँव में हुई, जिसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की। वे संस्कृत और हिंदी के प्रकांड विद्वान थे। कार्यक्षेत्र – उन्होंने अपना अधिकांश जीवन अध्यापन (Teaching) में बिताया। वे पटना विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के अध्यक्ष और बाद में पटना विश्वविद्यालय तथा संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा के कुलपति (Vice-Chancellor) भी रहे। साहित्यिक विशेषताएँ डॉ. देवेंद्रनाथ शर्मा एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी साहित्यकार थे। उनकी रचनाओं […] - [संप्रेषण के प्रकार](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/sampreshan-ke-prakaar/): https://youtu.be/EbQPb3jjlIo संप्रेषण के प्रकार इच्छित बिंदु पर क्लिक करें।  संप्रेषण के प्रकार संप्रेषण के प्रकार संप्रेषण (Communication) को मुख्य रूप से सूचनाओं के आदान-प्रदान के तरीके और संगठन की संरचना के आधार पर तीन वर्गों में विभाजित किया गया है। माध्यम के आधार पर (Based on Channel) (क) शाब्दिक संप्रेषण (Verbal Communication) (ख) अशाब्दिक संप्रेषण (Non-Verbal Communication) संबंधों/औपचारिकता के आधार पर (Based on Formality) (क) औपचारिक संप्रेषण (Formal Communication) (ख) अनौपचारिक संप्रेषण (Informal Communication) संख्या के आधार पर (Based on Number of People) माध्यम के आधार पर (Based on Channel) माध्यम के आधार पर (Based on Channel) (क) शाब्दिक संप्रेषण […] - [संप्रेषण की प्रक्रिया](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/sampreshanka-ki-prakriya/): https://youtu.be/AmfBlYt-Bic संप्रेषण की प्रक्रिया इच्छित बिंदु पर क्लिक करें।  संप्रेषण की प्रक्रिया प्रेषक से प्राप्तकर्ता तक संदेश पहुँचने की प्रक्रिया को ही संप्रेषण कहते हैं। इस प्रकार संप्रेषण के तीन हिस्से होते हैं – प्रेषक, संदेश, प्राप्तकर्ता। पत्र इसका सबसे उत्तम उदाहरण है। आप अपने भाई को पत्र लिखते हैं। आप प्रेषक हुए। आप पत्र में कुछ लिखते हैं। यह संदेश हुआ। यह पत्र आपके भाई तक पहुँचता है। भाई उस पत्र को पढ़ता है। आपका भाई प्राप्तकर्ता है। इस प्रकार संप्रेषण पूरा होता है। सात तत्त्व संप्रेषण प्रक्रिया में अधिकतम नौ तत्त्व और मुख्य रूप से सात तत्त्व शामिल […] - [संप्रेषण का प्रयोजन](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/sampreshanka-prayojan/): https://youtu.be/0QfzVVW1tzs संप्रेषण का प्रयोजन इच्छित बिंदु पर क्लिक करें।  ‘प्रयोजन’ शब्द का अर्थ ‘प्रयोजन’ शब्द का अर्थ बहुत सरल और गहरा है। इसके मुख्य अर्थ हैं- उद्देश्य (Aim/Purpose) – किसी कार्य को करने के पीछे का मुख्य लक्ष्य। कारण (Reason) – वह वजह जिसकी वजह से कोई काम किया जाता है। मतलब (Motive) – काम करने का इरादा।   संप्रेषण का प्रयोजन संप्रेषण का प्रयोजन संप्रेषण (Communication) का अर्थ केवल सूचनाओं का आदान-प्रदान करना नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई महत्त्वपूर्ण उद्देश्य या प्रयोजन होते हैं। चूँकि, मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। वह अकेला नहीं रह सकता। वह संप्रेषण के […] - [सफल संप्रेषण के सिद्धांत](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/safal-sampreshan-ke-siddhant/): https://youtu.be/oO_g7s0xYEI सफल संप्रेषण के सिद्धांत इच्छित बिंदु पर क्लिक करें।  सफल संप्रेषण के सिद्धांत सफल संप्रेषण का अर्थ केवल सूचनाओं का आदान-प्रदान करना नहीं है, बल्कि संदेश के मूल या केंद्रीय भाव और इरादों को सही रूप में समझना और समझाना है। जब भेजने वाला (Sender) और प्राप्त करने वाला (Receiver) दोनों संदेश के मूल अर्थ ही को समझते हैं, तो उसे ‘सफल संप्रेषण’ कहा जाता है। सफल संप्रेषण की मुख्य विशेषताएँ – द्वि-मार्गी प्रक्रिया (Two-way Process) – सफल संवाद में बोलना और सुनना दोनों शामिल हैं। यह तभी पूरा होता है जब प्राप्तकर्ता प्रतिक्रिया (Feedback) देता है। सक्रिय श्रवण […] - [संप्रेषण की अवधारणा (Concept)](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/sampreshan-ki-avadharana-the-best-explanation/): https://youtu.be/pvrizkD-UqQ संप्रेषण की अवधारणा (Concept) इच्छित बिंदु पर क्लिक करें।  संप्रेषण की अवधारणा (Concept) संप्रेषण (Communication) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके बिना मानव समाज की कल्पना करना असंभव है। सरल शब्दों में, दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच सूचनाओं, विचारों, भावनाओं या संदेशों का आदान-प्रदान ही संप्रेषण है। 1. संप्रेषण का अर्थ एवं व्युत्पत्ति व्युत्पत्ति – संप्रेषण को अंग्रेजी में ‘Communication’ कहते हैं, जिसकी उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द ‘Communis’ से हुई है। इसका अर्थ है— ‘साझा करना‘ (To share) । परिभाषा – जब एक व्यक्ति अपने विचारों या सूचनाओं को दूसरे व्यक्ति तक इस प्रकार पहुँचाता है […] - [उद्यम करो उद्यम....](https://avinashsolutions.com/meri-rachnayen/ydyam-karo-udyam-r-likhie-ek-kavita/): छात्र चाहे कक्षा में आए सदा-सदा प्रथम शिक्षक ने फिर दी सलाह उद्यम करो उद्यम! युवा चाहे माया आए विपुल अधिक अधिकतम अभिभावकों ने दी सलाह उद्यम करो उद्यम! रोगी चाहे नीरोगी काया स्वास्थ्य हो उसका उत्तम चिकित्सकों ने दी सलाह उद्यम करो उद्यम! दंपति चाहे कटे विपत्ति बनें संबंध मधुरतम शुभचिंतकों ने दी सलाह उद्यम करो उद्यम! सब सुख संभव इस उद्यम से सभी गुण फीके इस शीर्ष क्रम से मानव साफल्य की यह है कुंजी मानव साकल्य की यह है पूँजी दुआ, दया और भाग्य-सौभाग्य उद्यम से पहले न आए।   उद्यम सभी सुखों की जननी कहती यही […] - [भाई लगेगा से मेरे भैया हैं तक....](https://avinashsolutions.com/meri-rachnayen/bhai-lagega-se-bhaiya-tak-the-best-motivational-story-avinash-ran/): “वे मेरे बड़े भैया हैं!”, एक सुंदर और प्यारी-सी युवती कैमरामेन और सुरक्षाबलों से यह कहते हुए मंच तक पहुँचने का प्रयास कर रही थी। ज्वाइंट सेक्रेटरी के विदाई समारोह में विशेष रूप से आमंत्रित सेक्शन ऑफ़िसर अविनाश ने जब उस युवती को देखा तो अपने पास आने दिया। उस युवती (बहन) को अपने पास बुलाने और उस युवती को अविनाश के पास आने में जितनी देर लगी उतने में ही आज का सम्मानित सेक्शन ऑफिसर अविनाश उन पलों में खो गया जब वह मामूली-सा फेरी वाला हुआ करता था। फेरी करने के लिए जिस थोक विक्रेता के पास से […] - [ऐसा भी होता है...](https://avinashsolutions.com/meri-rachnayen/%e0%a4%90%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88/): “हमको आपको भइया नहीं कहना चाहिए था!”, एक साँवली किंतु लावण्य से भरी महिला ने मुझसे आकर कहा। मैं कुछ समझ पाता और अपनी प्रतिक्रिया दे पाता इससे पहले ही वह चली गई क्योंकि पीछे से उसके दो बच्चे उसे लगातार पुकार रहे थे। हाँ, मुझे इतना तो याद आया कि अभी कुछ देर पहले ही रसमलाई के काउंटर पर उसने मुझसे थोड़ी जगह माँगी थी। सच कहूँ तो पार्टियों में मुझे सिलेक्टेड खाद्य वस्तुएँ ही खाने की इच्छा रहती है और रसमलाई उनमें से एक थी। हालाँकि, उस वक्त तो भीड़ में मैं रसमलाई नहीं ले पाया था इसलिए […] - [तेरे लिए ...... हृदय का एक गीत](https://avinashsolutions.com/meri-rachnayen/marriage-anniversary-song-in-hindi/): मैंने देखे ए ए ए ए ऐ मैंने देखे जीवन के रंग तेरे संग मैंने देखे ए ए ए ए ऐ मैंने देखे जीवन के रंग तेरे संग मैंने सीखे ए ए ए ए ऐ मैंने सीखे जीने के ढंग   तेरे संग मैंने सीखे ए ए ए ए ऐ मैंने सीखे जीने के ढंग   तेरे संग अब तो खुद को अधूरा मानूँ तेरे बिन तेरे बिन तो कटेगा न इक भी दिन तेरे संग से ही चलती हैं साँसें मेरी रूह बनकर रहती है तू जिस्म में मेरी। मैंने जिया है जीवन तेरे संग मैंने सीखे ए ए […] - [आत्म सम्मान....](https://avinashsolutions.com/meri-rachnayen/aatm-samman-se-judu-kavita-a-poem-about-self-respect/): भावना सम्मान की जब, खुद के प्रति जागती है, तब ही मनुज के कर्म में, निरंतर शुचिता ताकती है।   भान उसको हो यह जाता, क्या हैं उसके जीवन उद्देश्य, समर्थ करता है वह खुद को, अपने कर्म और पौरुष बल से, पूजती संसार है उसको, करबद्ध अंत:करण के तल से।   कितनी सरल-सी बात है यह, वंचित अनगिनत है इस तथ्य से, अमरता का आधार स्तम्भ यह, उफ! अपरिचित इस मुक्त रहस्य से।   सुनो पाठकों सुनो श्रोताओं, भटकने के भरमार खड़े हैं, ध्यान करो तुम केवल इतना, बीज सफलता के अंतर्मन में पड़े हैं। अविनाश रंजन गुप्ता - [दिल की बात...](https://avinashsolutions.com/meri-rachnayen/dil-kii-baat-by-avinash-ranjan-gupta-lost-in-love/): देख, मुझसे यह न कहना अब कि,हम बस दोस्त बनकर रह सकते हैं।मेरी आँखों के सामनेतू किसी और की हो जाए,यह दर्द भला हम कैसेसह सकते हैं?क्या मेरी आँखों की नमी की वजह,तू कभी समझ न पाएगी?मेरी ज़िंदगी में जो तेरी कमी होगी,क्या तू जान न पाएगी?मेरी हसरतें जो सिर्फ तेरे लिए थीं,उन्हें अब दफ़न करना ज़रूरी हो गया है।एक हसीन मोड़ देकर इस दास्ताँ को,यहीं ख़त्म करना ज़रूरी हो गया है।किस्मत कभी हमें मिलाएगी,तो हम भी नज़रें मिलाएँगे।दोस्त बनकर मिलेंगेसबकी नज़रों में भले ही,पर तेरी नज़रों मेंहम अधूरे आशिक़ ही कहलाएँगे।मुस्कान ओढ़ लेंगे हम भी,दर्द को दिल में छुपाकर,तुम्हारी […] - [उसका अंतर्मन](https://avinashsolutions.com/meri-rachnayen/uska-antarman-the-bes-poem-in-hindi-a-heart-touching-poem/): उसके रूप-लावण्य पर मैं मोहित न हुआ, मैं सम्मोहित हुआ उसके अंतस की पवित्रता से। अंग-प्रत्यंगों में भले थी स्निग्धता की न्यूनता, पर था प्राचुर्य आत्मीयता का उसके धवल चरित्र में। भ्रातृ और पितृ सम सम्मान देने वाली उस शुचि में, स्वयं को देखा मैंने— जैसे सवित्री में सत्यवान ने। उससे पाणिग्रहण की अतीव अभिलाषा है मेरी, ईश्वर! बस इतनी सी मनःकामना पूर्ण हो मेरी। वंश-वृद्धि के पथ पर मैं जनक, वह जननी बने, यौवन से जरावस्था की यात्रा हम संग करें। कल-कवलित के क्रम में भी दोनों संग रहें। पुनर्जन्म यदि सत्य कथा है तो भी यही मनाऊँ, योनि […] - [सुनो – ज़रा मुझे सुनो](https://avinashsolutions.com/meri-rachnayen/suno-zara-mujhe-suno-a-heart-touching-poem-on-father-son-relation/): न जाने कितनी चीज़ें हैं, न जाने कितने अवसर, जो छीन लेती है हमसे, कीमती नियति अक्सर। हे तनयद्वय! मेरे आत्मज! अधिकार है मेरा केवल तुम पर, सुनो, समझो और विचार करो, क्यों आए हो तुम इस धरा पर? कालों से काल-कवलित हुए हैं सब, पर क्यों हुआ ऐसा, विचारणीय है अब। संधान करो इस सत्य का, विधि के इस गूढ़ रहस्य का। निष्कर्ष तुम्हारा भी वही होगा, जो सदा से मेरा रहा है, “जो केवल खुद के लिए जीता है, वह सचमुच मृत्यु को ही वरता है।” यही जीवन की क्षणभंगुरता है।   यही मानव की विफलता है। यही […] - [लाल पान की बेगम - फणीश्वरनाथ रेणु](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/lal-paan-ki-begham-phanishwarnath-renu-the-best-explanation/): https://youtu.be/ePZV2mWTayg इच्छित बिंदु पर क्लिक करें।  लाल पान की बेगम – फणीश्वरनाथ रेणु लाल पान की बेगम – फणीश्वरनाथ रेणु ‘क्यों बिरजू की माँ, नाच देखने नहीं जाएगी क्या?’ बिरजू की माँ शकरकंद उबाल कर बैठी मन-ही-मन कुढ़ रही थी अपने आँगन में। सात साल का लड़का बिरजू शकरकंद के बदले तमाचे खाकर आँगन में लोट-पोट कर सारी देह में मिट्टी मल रहा था। चंपिया के सिर भी चुड़ैल मँडरा रही है… आधे-आँगन धूप रहते जो गई है सहुआइन की दुकान छोवा-गुड़ लाने, सो अभी तक नहीं लौटी, दीया-बाती की बेला हो गई। आए आज लौटके ज़रा! बागड़ बकरे की […] - [टेपचू - उदय प्रकाश](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/tepchu-by-uday-prakash-the-best-explanation-saransh-bhav-prashnottar/): https://youtu.be/qny6mxfr3fE इच्छित बिंदु पर क्लिक करें।  उदय प्रकाश का जीवन परिचय उदय प्रकाश का जीवन परिचय उदय प्रकाश समकालीन हिंदी साहित्य के सबसे चर्चित, लोकप्रिय और प्रभावशाली कथाकारों में से एक हैं। उन्होंने कहानी, कविता, उपन्यास, निबंध और वृत्तचित्र (documentaries) के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्हें हिंदी साहित्य में ‘जादुई यथार्थवाद’ (Magical Realism) को एक नई भारतीय पहचान देने का श्रेय दिया जाता है। जन्म और शिक्षा – उदय प्रकाश का जन्म 1 जनवरी, 1952 को मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के सीतापुर नामक गाँव में हुआ था। उन्होंने सागर विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में एम.ए. किया। […] - [जाह्नवी - जैनेन्द्र कुमार](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/jahnavi-by-jainendra-kumar-ka-vistrit-adhyyan-the-best-explanation/): https://youtu.be/o0hYXc2mdWw इच्छित बिंदु पर क्लिक करें।  जाह्नवी – जैनेन्द्र कुमार जाह्नवी – जैनेन्द्र कुमार आज तीसरा रोज़ है। तीसरा नहीं, चौथा रोज़ है। वह इतवार की छुट्टी का दिन था। सबेरे उठा और कमरे से बाहर की ओर झाँका तो देखता हूँ, मुहल्ले के एक मकान की छत पर काँव-काँव करते हुए कौओं से घिरी हुई एक लड़की खड़ी है। खड़ी-खड़ी बुला रही है, “कौओ आओ, कौओ आओ।” कौए बहुत काफ़ी आ चुके हैं, पर और भी आते-जाते हैं। वे छत की मुँडेर पर बैठ अधीरता से पंख हिला-हिलाकर बेहद शोर मचा रहे हैं। फिर भी उन कौओं की संख्या से लड़की […] - [दिल्ली में एक मौत - कमलेश्वर](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/dilli-me-ek-mout-by-kamleshar-the-best-explanation/): https://youtu.be/cBsO5RQH-xs इच्छित बिंदु पर क्लिक करें।  कमलेश्वर – लेखक परिचय कमलेश्वर – लेखक परिचय कमलेश्वर का जीवन परिचय (1932–2007) कमलेश्वर आधुनिक हिंदी साहित्य के अत्यंत प्रभावशाली और बहुआयामी रचनाकार थे। वे ‘नई कहानी’ आंदोलन के स्तंभों में से एक माने जाते हैं। उन्होंने न केवल कहानियों और उपन्यासों के माध्यम से साहित्य को समृद्ध किया, बल्कि पत्रकारिता, पटकथा लेखन और दूरदर्शन के क्षेत्र में भी अमूल्य योगदान दिया। जन्म और शिक्षा – कमलेश्वर का जन्म 6 जनवरी, 1932 को उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा मैनपुरी में हुई और उच्च शिक्षा के लिए वे प्रयागराज […] - [सिक्का बदल गया - कृष्णा सोबती](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/sikka-badal-gaya-by-krishna-sobati-the-best-explanation/): https://youtu.be/y_i7ME9eHzk इच्छित बिंदु पर क्लिक करें।  कृष्णा सोबती – परिचय कृष्णा सोबती – परिचय कृष्णा सोबती का जन्म 18 फरवरी 1925 को गुजरात के उस हिस्से में हुआ था जो भारत विभाजन के पश्चात् पाकिस्तान में चला गया। तदुपरांत इन्होंने दिल्ली को अपनी कर्मस्थली बनाई और मृत्यु-पर्यंत दिल्ली में ही रहीं। लगभग 93 वर्ष की अवस्था में 25 जनवरी, 2019 को इनका निधन हुआ। इन्होंने कहानी, उपन्यास, संस्मरण और यात्रा-वृत्तांत जैसी विभिन्न साहित्यिक विधाओं पर अपनी लेखनी चलाई। साहित्यिक योगदान के लिए 2017 में इन्हें हिंदी साहित्य के सर्वोच्च सम्मान ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। इनकी प्रमुख कृतियाँ निम्न […] - [माँ - मुंशी प्रेमचंद](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/maa-kahani-by-premchand-the-best-explanation/): https://youtu.be/IhZ6XqQjtjI इच्छित बिंदु पर क्लिक करें।  माँ – प्रेमचंद माँ 1आज बंदी छूटकर घर आ रहा है। करुणा ने एक दिन पहले ही घर लीप-पोत रखा था। इन तीन वर्षों में उसने कठिन तपस्या करके जो दस-पाँच रूपये जमा कर रखे थे, वह सब पति के सत्कार और स्वागत की तैयारियों में खर्च कर दिए। पति के लिए धोतियों का नया जोड़ा लाई थी, नए कुरते बनवाए थे, बच्चे के लिए नए कोट और टोपी की आयोजना की थी। बार-बार बच्चे को गले लगाती ओर प्रसन्न होती। अगर इस बच्चे ने सूर्य की भाँति उदय होकर उसके अँधेरे जीवन को […] - [कलगी बाजरे की - सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय'](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/kalgi-baajre-ki-ka-the-best-explanation-kavita-ka-vistrit-adhyyan/): https://youtu.be/MeYaisehUjg इच्छित बिंदु पर क्लिक करें।  कविता परिचय कविता परिचय  ‘कलगी बाजरे की‘ कविता प्रयोगवाद के प्रवर्तक सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय‘ द्वारा रचित एक युगांतकारी रचना है। इस कविता में कवि ने पारंपरिक और घिसे-पिटे उपमानों (जैसे चाँद, चंपा, कमल) को त्यागकर नवीन प्रतीकों को अपनाने पर बल दिया है। कवि का मानना है कि पुराने उपमान ‘मैले‘ हो गए हैं और अपनी सार्थकता खो चुके हैं। वे अपनी प्रेयसी की तुलना ‘हरी घास‘ और ‘बाजरे की कलगी‘ से करते हुए प्रेम की सहजता, नवीनता और ग्रामीण यथार्थ को प्रतिष्ठित करते हैं। यह कविता शिल्प के स्तर पर बौद्धिकता और […] - [सम्राज्ञी का नैवेद्य-दान - सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय'](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/samragyi-ka-naivaidya-daan-kavita-ka-vistrit-adhyyan/): https://youtu.be/ipxM-pgcZO8 इच्छित बिंदु पर क्लिक करें।  कविता परिचय कविता परिचय यह कविता हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ द्वारा रचित है। इस कविता में कवि एक अकेले, स्नेह से भरे दीपक के माध्यम से व्यक्ति की महत्ता और उसके सामाजिक दायित्व को दर्शाते हैं। कवि का संदेश है कि व्यक्ति (दीप) भले ही अपनी विशिष्टता, गर्व और आत्मविश्वास (मदमाता) से परिपूर्ण हो, लेकिन उसकी सार्थकता और पूर्णता समाज (पंक्ति) से जुड़ने में ही है। यह दीप अकेला कविता का केंद्रीय भाव यह है कि व्यक्ति अपनी मौलिकता और सामर्थ्य में चाहे कितना भी महान क्यों न हो, […] - [यह दीप अकेला - सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय'](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/yah-deep-akela-ageya-the-best-explanation-stanza-wise-is-here/): https://youtu.be/GXVzNBv7Wuw इच्छित बिंदु पर क्लिक करें।  कविता परिचय कविता परिचय यह कविता हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ द्वारा रचित है। इस कविता में कवि एक अकेले, स्नेह से भरे दीपक के माध्यम से व्यक्ति की महत्ता और उसके सामाजिक दायित्व को दर्शाते हैं। कवि का संदेश है कि व्यक्ति (दीप) भले ही अपनी विशिष्टता, गर्व और आत्मविश्वास (मदमाता) से परिपूर्ण हो, लेकिन उसकी सार्थकता और पूर्णता समाज (पंक्ति) से जुड़ने में ही है। यह दीप अकेला कविता का केंद्रीय भाव यह है कि व्यक्ति अपनी मौलिकता और सामर्थ्य में चाहे कितना भी महान क्यों न हो, […] - [एक वृक्ष की हत्या - कुँवर नारायण](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/ek-vriksh-ki-hatya-kunvar-narayan-the-best-explanation-stanza-wise-is-here/): https://youtu.be/uuvV6CNmIII इच्छित बिंदु पर क्लिक करें।  कवि परिचय कुँवर नारायण – कवि परिचय जन्म : 19 सितंबर, सन् 1927 (उत्तर प्रदेश) प्रमुख रचनाएँ : चक्रव्यूह (1956), परिवेशःहम तुम, अपने सामने, कोई दूसरा नहीं, इन दिनों (काव्य संग्रह); आत्मजयी (प्रबंध काव्य); आकारों के आस—पास (कहानी संग्रह); आज और आज से पहले (समीक्षा); मेरे साक्षात्कार (सामान्य) प्रमुख पुरस्कार : साहित्य अकादेमी पुरस्कार, कुमारन आशान पुरस्कार, व्यास सम्मान, प्रेमचंद पुरस्कार, लोहिया सम्मान, कबीर सम्मान, ज्ञानपीठ पुरस्कार गर्द से ढँकी हर पुरानी किताब खोलने की बात कहने वाले कुँवर नारायण ने सन् 1950 के आस—पास काव्य—लेखन की शुरूआत की। उन्होंने कविता के अलावा चिंतनपरक […] - [एक अजीब-सी मुश्किल - कुँवर नारायण](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/ek-azeeb-si-mushkil-kunvar-narayan-the-best-explanation-stanza-wise-is-here/): https://youtu.be/9tkgSdPBK14 इच्छित बिंदु पर क्लिक करें।  कवि परिचय कुँवर नारायण – कवि परिचय जन्म : 19 सितंबर, सन् 1927 (उत्तर प्रदेश) प्रमुख रचनाएँ : चक्रव्यूह (1956), परिवेशःहम तुम, अपने सामने, कोई दूसरा नहीं, इन दिनों (काव्य संग्रह); आत्मजयी (प्रबंध काव्य); आकारों के आस—पास (कहानी संग्रह); आज और आज से पहले (समीक्षा); मेरे साक्षात्कार (सामान्य) प्रमुख पुरस्कार : साहित्य अकादेमी पुरस्कार, कुमारन आशान पुरस्कार, व्यास सम्मान, प्रेमचंद पुरस्कार, लोहिया सम्मान, कबीर सम्मान, ज्ञानपीठ पुरस्कार गर्द से ढँकी हर पुरानी किताब खोलने की बात कहने वाले कुँवर नारायण ने सन् 1950 के आस—पास काव्य—लेखन की शुरूआत की। उन्होंने कविता के अलावा चिंतनपरक […] - [संध्या सुंदरी - सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/sandhya-sundari-kavita-sooryakant-tripathi-nirala-stanzawise-vyakhya/): https://youtu.be/iBPD7QGEWJs इच्छित बिंदु पर क्लिक करें।  कवि परिचय जन्म  :  सन् 1899, महिषादल, (बंगाल के मेदिनीपुर ज़िले में) पारिवारिक गाँव-गढ़ाकोला, (उन्नाव, उत्तर प्रदेश) प्रमुख रचनाएँ  :  अनामिका, परिमल, गीतिका, बेला, नए पत्ते, अणिमा, तुलसीदास, कुकुरमुत्ता (कविता संग्रह); चतुरी चमार, प्रभावती, बिल्लेसुर बकरिहा, चोटी की पकड़, काले कारनामे (गघ); आठ खंडों में ‘निराला रचनावली’ प्रकाशित। समन्वय, मतवाला पत्रिका का संपादन। निधन  :  सन् 1961, (इलाहाबाद में) कविता को नया स्वर देने वाले निराला छायावाद के ऐसे कवि हैं जो एक ओर कबीर की परंपरा से जुड़ते हैं तो दूसरी ओर समकालीन कवियों के प्रेरणा स्रोत भी हैं। उनका यह विस्तृत काव्य-संसार […] - [दुलाईवाली - राजेंद्र बाला घोष - बंग महिला](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/dulaiwali-rajendra-bala-ghosh-bang-mahila/): https://youtu.be/WbzphyRJSU0 इच्छित बिंदु पर क्लिक करें।  राजेंद्र बाला घोष – बंग महिला – लेखिका परिचय बीसवीं सदी की प्रमुख एवं प्रथम महिला लेखिका राजेन्द्र बाला घोष ‘बंग महिला’ का हिंदी कहानी में प्रमुख योगदान है। इनकी रचनाएँ कहानी, निबन्ध, उपालम्भ, आलोचना आदि विविध विषयों पर है। बंगला की प्रमुख रचनाओं का अनुवाद भी इन्होंने किया है। नारी शिक्षा और चरित्र निर्माण जैसे- सामाजिक विषय पर लेखनी चलाकर हिंदी जगत को श्री सम्पन्न कर दिया है। सन् 1904 ई. से सन् 1917 ई. तक हिंदी की प्रमुख पत्रिकाओं में कभी एक प्रवासिनी बंग महिला तथा कभी बंग महिला के नाम से […] - [सुखमय जीवन - चंद्रधर शर्मा गुलेरी](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/sukhamay-jeevan-by-chandradhar-sharma-guleri-kahani-ka-sampoorn-adhyyan/): https://youtu.be/D8Na-OrfFmA इच्छित बिंदु पर क्लिक करें।  लेखक परिचय चंद्रधर शर्मा गुलेरी का जन्म 7 जुलाई 1883 राजस्थान की वर्तमान राजधानी जयपुर में हुआ था। उनके पिता पंडित शिवराम शास्त्री मूलतः हिमाचल प्रदेश के गुलेर गाँव के निवासी थे। गुलेरी जी की एक रचना, वह भी छोटी विधा-कहानी लिखकर साहित्य जगत में अमर हो जानेवाले साहित्यकार हैं। ‘उसने कहा था’ कहानी के रचनाकार के रूप में गुलेरी जी हिंदी कथा साहित्य में अनिवार्य रूप से स्थान प्राप्त करते आए हैं। उन्होंने केवल तीन कहानियाँ लिखीं (1) सुखमय जीवन, (2) बुद्धू का काँटा, (3) उसने कहा था। गुलेरी जी अपने युग के […] - [इंद्रजाल - जयशंकर प्रसाद](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/indrajaal-by-jayshankar-prasad-kahani-ka-sampoorn-adhyyan/): https://youtu.be/IcFNXcCk23U इच्छित बिंदु पर क्लिक करें।  लेखक परिचय जयशंकर प्रसाद का जन्म 30 जनवरी, 1889 ई को बनारस में हुआ था। उनके पूर्वज कानपुर के रहनेवाले थे जिन्होंने व्यवसाय को ध्यान में रखकर बनारस में रहने का निर्णय लिया था। जयशंकर प्रसाद की औपचारिक शिक्षा केवल छठी-सातवीं कक्षा तक बनारस के क्वींस कॉलेज में हुई थी। केवल 48 साल की उम्र में 15 नवम्बर, 1937 ई को प्रसाद जी की मृत्यु हो गई थी। उन्होंने अल्पायु के बावजूद विपुल साहित्य रचा था। उनकी रचनाओं की सूची इस प्रकार है। काव्य-कृतियाँ : चित्राधार (1918/1928), कानन कुसुम (1913/1929), प्रेमपथिक (ब्रजभाषा- 1909), प्रेमपथिक (खड़ी […] - [मेरा पहला प्रेम पत्र .....](https://avinashsolutions.com/meri-rachnayen/prem-patra-the-best-one/): प्रिय सुमन सुमन नाम से तुम्हें आपको पत्र लिखने के तीन महत्त्वपूर्ण कारण हैं। पहला मेरा प्रेम प्रस्ताव यदि अपनी परिणति तक नहीं पहुँच पाए तो इस पत्र की वजह से तुम्हें आपको कोई दिक्कत न हो। दूसरा, यह कि इतने दिनों के दौरान मैंने यह गौर किया है कि तुम्हारा आपका मन बहुत सुंदर है और सुंदर मन के लिए ‘सुमन’ शब्द का प्रयोग किया जाता है। तीसरा और अंतिम कारण यह है कि मुझे तुम आप सुमन अर्थात् फूल की तरह ही सुंदर लगती हैं। एक और बात जो आपको विचित्र लग सकती है वह यह है कि […] - [पानी की प्रार्थना - केदारनाथ सिंह](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/paani-kii-prarathana-kedarnath-singh-the-best-explanation-stanza-wise-is-here/): https://youtu.be/ZyBxg8JQ204 इच्छित बिंदु पर क्लिक करें।  कवि परिचय केदारनाथ सिंह – कवि परिचय केदारनाथ सिंह (1934-2018) हिंदी के एक प्रमुख समकालीन कवि, लेखक और आलोचक थे, जिनका जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के चकिया गाँव में हुआ था; उन्होंने बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी से स्नातकोत्तर और पीएच. डी. की, जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर रहे, और ‘अकाल में सारस’ के लिए ज्ञानपीठ व साहित्य अकादमी पुरस्कारों सहित कई सम्मान प्राप्त किए; उनकी कविताएँ ग्रामीण जीवन, प्रकृति और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी हैं, जिनमें ‘बाघ’, ‘यहाँ से देखो’, ‘उत्तर कबीर और अन्य कविताएँ’ प्रमुख हैं, और वे अपनी सरल, बिंब-प्रधान भाषा […] - [मेरा मेरा कहने को....](https://avinashsolutions.com/meri-rachnayen/mera-mera-kahane-ko-a-heart-touching-poem-on-father-son-relation/): मेरा मेरा कहने को तो बस तू ही है मेरे जीने की वजह तो बस तू ही है मेरी चाहत बस इतनी, है दुआ इतनी-सी तू खुशी से रहे, तू फुले फले तेरी खुशी भी तो मेरी खुशी ही तो है। मेरा मेरा कहने को तो बस तू ही है।  मैं जो पा न सका, वो तुझको मिले जहाँ जा न सका, हो तेरे कदमों तले तू आगे बढ़े, बढ़ता ही रहे तेरी दुनिया में खुशियों के फूल खिले मेरी खुशी बस इतनी लगाऊँ तुझको गले मेरी दुनिया में बस तू ही तो है।  मेरा मेरा कहने को तो बस […] - [कौए की व्यथा](https://avinashsolutions.com/meri-rachnayen/%e0%a4%95%e0%a5%8c%e0%a4%8f-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%a5%e0%a4%be/): सुनो, सुनो एक कथा सुनो प्यारे बच्चों एक कथा सुनो सुनो, सुनो एक कथा सुनो काले कौए की व्यथा सुनो सुनो, सुनो एक कथा सुनो कौआ बोला मैं हूँ काला मुझको नहीं किसी ने पाला बोली मेरी है कुछ ऐसी जिसने सुना उसी ने टाला मेरा जीवन है दुखों से भरा सबने किया है इसे और गहरा कौआ ये सब बोल रहा था दुख दिल के वो खोल रहा था सब बैठे पंछी उसे सुन रहे थे मन ही मन कुछ बुन रहे थे कौए की सुन अब तोता बोला आखिर उसने सच ही तो खोला   अरे कोए! तू […] - [स्वागत गीत](https://avinashsolutions.com/meri-rachnayen/welcome-song-in-hindi-for-school-guest/): चन्दन-सी शुचि भानु–सी वीचि हृदय में मंगल कामना लेकर आए हैं देवगण पहने मनुज-सा बाना पावन पद-ध्वनि लाए नव रागिनी है जगा रही है चेतना जन-जन मधुरित हो उठे फैली है ऐसी स्पंदना हम हस्त-वदन   करते हैं नमन इस अलौकिक रूप का जिसके अभिलाषी हम सभी जो हैं स्वरूप देव का मुख में ज्योति वाणी में प्रीति अंतर में कोमल भावना होंवे सुखी सब जीवगण इतनी-सी हमारी याचना। नभ में गूँजे जग में पूजे जयघोष सदा हो आपका आशीष देके हमको अपना पूरी करो मनोकामना। अविनाश रंजन गुप्ता   - [मानवश्रेष्ठ एपीजे कलाम](https://avinashsolutions.com/meri-rachnayen/the-best-poem-on-apj/): सुनो बच्चो न करो नादानी चलो सुनाए तुम्हें कहानी सुनो बच्चो न करो नादानी चलो सुनाए तुम्हें कहानी सुनो सुनाए तुम्हें कहानी इक ऐसे इंसान की जिनको जानें, जिनको पूजे मिट्टी हिंदुस्तान की जन्मे थे वे आम बनके नाम उनका कलाम था धीरे-धीरे बन गए खास क्योंकि ….. लक्ष्य उनके पास था।   विपदाओं में थे मुसकाते दुख से थे न वे कतराते समझे ….. विपदाओं में थे मुसकाते दुख से थे न वे कतराते हल मिले न जबतक उनको हल मिले न जबतक उनको यत्न लगन से करते जाते अपने कर्मों से ही वे देश का गौरव मान बढ़ाते। […] - [मेरा कर्तव्य](https://avinashsolutions.com/meri-rachnayen/acche-insaan-ke-upar-ek-kavita-avinash-ranjan-gupta/): मेरा प्रथम कर्तव्य है – सींचू अपने परिवार को उत्तम विचारों से मानवीय व्यवहारों से समन्वित आचारों से ऐक्य भावों के प्रकारों से मेरा द्वितीय कर्तव्य है – बचाऊँ अपने परिवार को क्षुधा के प्रहारों से मानसिक विकारों से अश्लीलता के दुष्प्रचारों से संकीर्ण विचारों से मेरा तृतीय कर्तव्य है – संपूर्ण मानवता के प्रति अखिल ब्रह्मांड के प्रति कि सत्कर्मों में लिप्त रहूँ काम मोह से निर्लिप्त रहूँ रहूँ जगत में मैं कुछ ऐसे सब कर्तव्यों का हो निष्पादन अमर व्यक्तित्व का हो आच्छादन।   अविनाश रंजन गुप्ता - [अपना बचपन जी लो](https://avinashsolutions.com/meri-rachnayen/apna-bachapan-jee-lo-kvita/): आओ जी लें अपना बचपन जी लें जी लेंअपना बचपन आओ जी लें अपना बचपन फूलों की खुशहाली में पत्तों की हरियाली में देखो-देखो अपना बचपन आओ जी लें अपना बचपन जी लें जी लें अपना बचपन देखो उड़ते पंछी को रंग-बिरंगी तितली को कितने अच्छे लगते हैं सखा ये सच्चे लगते हैं इनसे मिलकर रहना सीखें जी लें जी लें बचपन जी लें आओ अपना बचपन जी लें जी लें जी लें अपना बचपन देखो बहती नदियों को गिरि से गिरते झरने को सागर की तरंगों को उठती – गिरती लहरों को इनमें गति ही गति भरी है खुद […] - [पशु-पक्षी](https://avinashsolutions.com/meri-rachnayen/hindi-rhymes-on-pashu-by-avinash-ranjan-gupta/): काले हाथी काले भालू शोर बहुत मचाते हैं। उजली बिल्ली उजले कुत्ते करतब हमें दिखाते हैं। काले कौए काँ काँ करके हमको बहुत सताते हैं उजले कबूतर गुटर गूँ का  गीत हमें सुनाते हैं   उजला काला दोनों जिसमें वे ज़ेब्रा कहलाते हैं सीधे-सादे होते हैं ये जंगल में घास खाते हैं उजले काले की जोड़ी में पैंग्विन भी आते हैं बर्फीले इलाकों में ही ये जीवन बिताते हैं।    अविनाश रंजन गुप्ता - [हाथी](https://avinashsolutions.com/meri-rachnayen/hindi-rhymes-on-elephant-hathi-by-avinash-ranjan-gupta/): खंभे जैसे पैर हैं इसके कान सूप के जैसे हैं। सूँड़ है इसकी लंबी मोटी आँखें छोटी-छोटी हैं काले रंग का होता है ये कद भी इसका ऊँचा है भारी कितना होगा ये क्या कभी किसी ने सोचा है मीठे गन्ने खाता है ये सूँड़ से पानी पीता है मस्त चाल में चलता है ये शान से जीवन जीता है चिंघाड़े जब गुस्से से ये सब देख इसे डर जाते हैं   वन के राजा बब्बर शेर भी गुफा में अपनी छुप जाते हैं ऐसे ताकतवर के साथी भी ताकतवर होते हैं ऐसे ताकतवर तो केवल जंगल के हाथी होते […] - [जीवन – सरल व्याख्या](https://avinashsolutions.com/meri-rachnayen/jeevan-par-sacchi-heart-touching-poem-by-avinash-ranjan-gupta/): निशिदिन गति करे सब अंत को इसका सबको भान नहीं है मति में कुमति के ही कारण धन लिप्सा में लिप्त रहे हैं अधम कर्म से सिक्त रहे हैं नरोचित गुण से रिक्त रहे हैं अनुभवों से वे तिक्त रहे हैं श्रेष्ठ कर्मों से च्युत रहे हैं उनकी दशा का यही है कारण उन्हें, कर्म-मर्म का ज्ञान नहीं है। धन का ध्येय हो केवल इतना उदर पोषण और आरोग्य रहना अतुलित धन जो कभी भी आए संग अपने अलक्ष्मी भी लाए जो इस तथ्य को जान न पाए अंत काल केवल पछिताए सुन लो वचन ध्यान से सारे जीवों का […] - [संसार की श्रेष्ठ संपत्ति](https://avinashsolutions.com/meri-rachnayen/ped-par-kavita-heart-touching-poem-by-avinash-ranjan-gupta/): धरा को धारण जिसने किया है, जिसने धरा में जीवन दिया है, जिसने सबका पुण्य किया है, जिससे धरा में बसी दुनिया है, नाम उसी का वृक्ष हमने दिया है.. नाम उसी का वृक्ष हमने दिया है। इसको ही कहे हम धरा का गहना, इसके बिना नहीं संभव जीना, सब जीवों की रक्षा करे ये, सब जीवों को सुंदर लगे ये, इसने हरित आभूषण है पहना…   इसने हरित आभूषण है पहना।    छाया में इसके मिलती तृप्ति, ये हरते हैं सारी विपत्ति, उदर पोषण करे सब जीवों का… उदर पोषण करे सब जीवों का… ईश्वर की है यह अनुपम […] - [प्रेम और परीक्षा](https://avinashsolutions.com/meri-rachnayen/short-stoey-heart-touching-poem-by-avinash-ranjan-gupta/): “ध्यान से सुनिए जो मैं कह रहा हूँ। भुवनेश्वर में 2400 स्केवेयर फीट ज़मीन, पीएफ़ में 21 लाख रुपए और एलआईसी में आठ लाख चालीस हज़ार का सम एस्श्योर्ड, ये सारी संपत्ति पूजा की ही होगी, अगर मुझे कुछ भी हो जाए तो पूजा की दूसरी शादी ज़रूर करवाइएगा।“ रात की निस्तब्धता और भय मिश्रित गंभीर आवाज़ में अस्पताल के बेड से अविनाश ने फोन पर अपने साले से ये सारी बातें कहीं।    बात कुछ ऐसी थी कि अविनाश को सिवियर नोज़ ब्लीडिंग के कारण पहली बार अस्पताल में एडमिट होना पड़ा। पिछले 06 दिनों से अस्पताल रहने पर […] - [सच्चाई](https://avinashsolutions.com/meri-rachnayen/sacchai-hindi-short-poem-by-avinash-ranjan-gupta/): सच्चाई फल में होती है – ऐसा कई लोग मानते हैं सच्चाई फूल में होती है – ऐसा कई से कुछ कम लोग मानते हैं सच्चाई पत्तों में होती है – ऐसा कुछ लोग मानते हैं सच्चाई डालियों में होती है – ऐसा कुछ से कुछ कम लोग मानते हैं सच्चाई तने में होती है – ऐसा भी कुछ लोग मान ही लेते हैं सच्चाई जड़ में होती है – ऐसा बहुत कम लोग मानते हैं पर मुट्ठी भर लोग यह मानते हैं कि सच्चाई बीज के संघर्ष में है- जड़ों की गहराई में है जलवायु में है इस तरह […] - [एक तमन्ना थी और है .....](https://avinashsolutions.com/meri-rachnayen/%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%a5%e0%a5%80-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a5%88/): एक तमन्ना थी एक आरज़ू थी   एक ही चाहत थी की तेरी कुर्बत में मेरी सारी ज़िंदगी गुजरे अब एक दूसरी तमन्ना है दूसरी आरज़ू है दूसरी चाहत है कि तू क्या तेरा साया भी मेरे पास से न गुजरे इसकी वजह जान लीजिए साहब मेरी पहली तमन्ना ने मुझे निकम्मा बना दिया। इसी जिंदगी में दोज़ख दिखा दिया मेरी कमजोरी को ताकत बनाकर और भी कमजोर बना दिया और अपने अंतिम लफ्जों में ये कहकर – कि तुम बदल गए मुझसे दामन छुड़ा लिया। अविनाश रंजन गुप्ता - ['कुरुक्षेत्र' रामधारी सिंह 'दिनकर'](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/kurukshetra-ramdhari-singh-dinkar-kii-rachana-ka-best-explanation/): https://youtu.be/0YV-3Xm6vm0 इच्छित बिंदु पर क्लिक करें।  लेखक परिचय लेखक परिचय दिनकर जी का जन्म 23 सितंबर 1908 को बिहार के बेगूसराय जिले के सिमरिया गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम रवि सिंह तथा माता का नाम मनरूप देवी था। दिनकर की प्राथमिक शिक्षा गाँव से पूरी हुई। वे हाई स्कूल की परीक्षा मोकामाघाट से उत्तीर्ण हुए। उसके बाद वे पटना चले आए और पटना कॉलेज से इतिहास विषय में बी.ए. ऑनर्स की परीक्षा पास की। उन्होंने कई तरह की सरकारी और प्राइवेट नौकरी की। वे कुलपति के पद पर भी रहे और सांसद भी। दिनकर में राजनीतिक चेतना […] - ['दाज्यू' शेखर जोशी](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/dajyu-paath-ka-vistrit-adhyyan-by-shekhar-joshibest-explanation/): https://youtu.be/XZu-daH0SN4 दाज्यू चौक से निकल कर बायीं ओर जो बड़े साइनबोर्डवाला छोटा कैफे है, वहीं जगदीशबाबू ने उसे पहली बार देखा था। गोरा चिट्टा रंग, नीली शफ्फ़ाफ़ आँखें, सुनहरे बाल और चाल में एक अनोखी मस्ती – पर शिथिलता नहीं। कमल के पत्ते पर फिसलती हुई पानी की बूँद की सी फुर्ती। आँखों की चंचलता देखकर उसकी उम्र का अनुमान केवल नौ-दस वर्ष ही लगाया जा सकता था और शायद यही उम्र उसकी रही होगी। अधजली सिगरेट का एक लम्बा कश खींचते हुए जब जगदीशबाबू ने कैफे में प्रवेश किया तो वह एक मेज पर से प्लेटें उठा रहा था […] - ['पत्नी' जैनेन्द्र कुमार](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/patni-paath-ka-vistrit-adhyyan-by-jainendra-kumar-best-explanation/): https://youtu.be/iYePxDGDBU0 पत्नी जैनेंद्र कुमार शहर के एक ओर एक तिरस्कृत मकान। दूसरा तल्ला। वहाँ चौके में एक स्त्री अँगीठी सामने लिए बैठी है। अँगीठी की आग राख हुई जा रही है। वह जाने क्या सोच रही है। उसकी अवस्था बीस-बाईस के लगभग होगी। देह से कुछ दुबली है और संभ्रांत कुल की मालूम होती है। एकाएक अँगीठी में राख होती हुई आग की ओर स्त्री का ध्यान गया। घुटनों पर हाथ देकर वह उठी। उठकर कुछ कोयले लार्इ। कोयले अँगीठी में डालकर फिर किनारे ऐसे बैठ गई, मानो याद करना चाहती है कि ‘अब क्या करूँ?’ घर में और कोई […] - ['पथ की पहचान' हरिवंश राय बच्चन](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/path-ki-pahchaan-by-harivansh-rai-bacchan-the-best-explanation/): https://youtu.be/74nn-Sc2qxg पथ की पहचान पूर्व चलने के बटोही, बाट की पहचान कर ले पुस्तकों में है नहीं छापी गई इसकी कहानी,हाल इसका ज्ञात होता है न औरों की ज़बानी,अनगिनत राही गए इस राह से, उनका पता क्या,पर गए कुछ लोग इस पर छोड़ पैरों की निशानी,यह निशानी मूक होकर भी बहुत कुछ बोलती है,खोल इसका अर्थ, पंथी, पंथ का अनुमान कर ले।पूर्व चलने के बटोही, बाट की पहचान कर ले। है अनिश्चित किस जगह पर सरित, गिरि, गह्वर मिलेंगे,है अनिश्चित किस जगह पर बाग वन सुंदर मिलेंगे,किस जगह यात्रा ख़तम हो जाएगी, यह भी अनिश्चित,है अनिश्चित कब सुमन, कब कंटकों […] - [धार्मिक क्रांति के प्रतीक- भगवान्‌ परशुराम](https://avinashsolutions.com/mythological-stories/parshuram-koun-the-all-about-parshuram/): परशुराम उन दिनों शिवजी से शिक्षा प्राप्त कर रहे थे। अपने शिष्यों की मनोभूमि परखने के लिए शिवजी समय-समय पर उनकी परीक्षा लिया करते थे। एक दिन गुरु ने कुछ अनैतिक काम करके छात्रों की प्रतिक्रिया जाननी चाही। अन्य छात्र तो संकोच में दब गए पर परशुराम से न रहा गया। वे गुरु के विरुद्ध लड़ने को खड़े हो गए और साधारण समझाने-बुझाने से काम न चला तो फरसे का प्रहार कर डाला। चोट गहरी लगी। शिवजी का सिर फट गया। पर उन्होंने बुरा न माना। वरन्‌ संतोष व्यक्त करते हुए गुरुकुल के समस्त छात्रों को संबोधित करते हुए कहा- […] - ["संविधान निर्माता – बाबासाहेब आंबेडकर" के संघर्षमयी जीवन पर एक शानदार नाटक](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/the-best-short-play-on-the-life-of-bharat-ratna-babasahebambedkar/): https://youtu.be/wi7jJsrrErc   “संविधान निर्माता – बाबासाहेब आंबेडकर” पात्र परिचय – नरेटर (वाचक) – जो पूरे नाटक को वर्णन करेगा भीमराव रामजी आंबेडकर (बाबासाहेब) – नायक रामजी सकपाल – बाबासाहेब के पिता भीमाबाई – बाबासाहेब की माता गुरुजी – स्कूल के शिक्षक सहपाठी – स्कूल के कुछ बच्चे ब्रिटिश अधिकारी – लंदन में पढ़ाई के दौरान डॉ. आंबेडकर के समर्थक समाज के विरोधी लोग संविधान सभा के सदस्य   प्रस्तावना यह कहानी है एक ऐसे युग पुरुष की, जिसने समाज में फैली भेदभाव की बेड़ियों को तोड़कर भारत के भविष्य की नींव रखी। यह कहानी है एक बच्चे की, जो प्यासा […] - ['भगवान के डाकिए' कविता का संपूर्ण अध्ययन, रामधारी सिंह 'दिनकर'](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/bhagwaan-ke-dakie-by-ramdhari-singh-dinkar-the-best-explanation/): https://youtu.be/F_0g8pCCBcs भगवान के डाकिए पक्षी और बादल, ये भगवान के डाकिए हैं, जो एक महादेश से दूसरे महादेश को जाते हैं। हम तो समझ नहीं पाते हैं मगर उनकी लाई चिट्टियाँ पेड़, पौधे, पानी और पहाड़ बाँचते हैं। हम तो केवल यह आँकते हैं कि एक देश की धरती दूसरे देश को सुगंध भेजती है। और वह सौरभ हवा में तैरते हुए पक्षियों की पाँखों पर तिरता है। और एक देश का भाप दूसरे देश में पानी बनकर गिरता है। रामधारी सिंह ‘दिनकर’ कवि परिचय दिनकर जी का जन्म 23 सितंबर 1908 को बिहार के बेगूसराय जिले के सिमरिया गाँव […] - ['हिमालय' कविता का संपूर्ण अध्ययन, रामधारी सिंह 'दिनकर'](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/himalaya-by-ramdhari-singh-dinkar-the-best-explanation/): https://youtu.be/qcKu_yoZxo4 हिमालय मेरे नगपति! मेरे विशाल!   साकार, दिव्य, गौरव विराट्!   पौरुष के पुंजीभूत ज्वाल! मेरी जननी के हिम-किरीट!   मेरे भारत के दिव्य भाल! मेरे नगपति! मेरे विशाल!   युग-युग अजेय, निर्बन्ध, मुक्त, युग-युग गर्वोन्नत, नित महान निस्सीम व्योम में तान रहा युग से किस महिमा का वितान? कैसी अखंड यह चिर-समाधि? यतिवर! कैसा यह अमर ध्यान? तू महाशून्य में खोज रहा? किस जटिल समस्या का निदान? उलझन का कैसा विषम जाल? मेरे नगपति! मेरे विशाल!   ओ मौन तपस्या-लीन यती!   पल भर को तो कर दृगुन्मेष!   रे! ज्वालाओं से दग्ध विकल, है तड़प रहा पद […] - ['चंद्रगहना से लौटती बेर' केदारनाथ अग्रवाल](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/chandragahana-se-loutati-ber-by-kedarnath-agrawal-the-best-explanation/): https://youtu.be/aUSu5SmdDSI चंद्रगहना से लौटती बेर देख आया चंद्रगहना।   देखता हूँ दृश्य अब मैं मेंड़ पर इस खेत की बैठा अकेला। एक बीते के बराबर यह हरा ठिंगना चना, बाँधे मुरैठा शीश पर छोटे गुलाबी फूल का, सज कर खड़ा है।  पास ही मिलकर उगी है बीच में अलसी हठीली देह की पतली, कमर की है लचीली, नील फूले फूल को सिर पर चढ़ा कर कह रही है, ‘जो छुए यह दूँ हृदय का दान उसको।’ और सरसों की न पूछो हो गयी सबसे सयानी, हाथ पीले कर लिए हैं, ब्याह – मंडप में पधारीय फाग गाता मास फागुन आ […] - ['घन गरजे जन गरजे' केदारनाथ अग्रवाल](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/ghan-jan-by-kedarnath-agrawal-the-best-explanation/): https://youtu.be/1dnCp0nXBIU घन–जन घन गरजे जन गरजे बन्दी सागर को लख कातर एक रोष से घन गरजे जन गरजे क्षत-विक्षत लख हिमगिरि अन्तर एक रोष से घन गरजे जन गरजे क्षिति की छाती को लख जर्जर एक शोध से घन गरजे जन गरजे देख नाश का ताण्डव बर्बर एक बोध से घन गरजे जन गरजे कवि परिचय   केदारनाथ अग्रवाल का जन्म 1911 में बाँदा जिले के कमासिन नामक गाँव में हुआ था इनकी पढ़ाई-लिखाई इलाहाबाद और कानपुर में हुई थी। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बी.ए. करने के बाद इन्होंने एल.एल.बी. की पढ़ाई डी.ए.वी. कॉलेज, कानपुर से की। वकालत को उन्होंने अपना […] - ['धूप' केदारनाथ अग्रवाल](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/dhoop-by-kedarnath-agrawal-the-best-explanation/): https://youtu.be/vo2LoeeozSc धूप धूप चमकती है चाँदी की साड़ी पहने मैके में आयी बेटी की तरह मगन है फूली सरसों की छाती से लिपट गयी है जैसे दो हमजोली सखियाँ गले मिली हैं भैया की बाँहों से छूटी भौजाई-सी लहँगे को लहराती लचती हवा चली है सारंगी बजती है खेतों की गोदी में दल के दल पक्षी उड़ते हैं मीठे स्वर के अनावरण यह प्राकृत छवि की अमर भारती रंग-बिरंगी पंखुरियों की खोल चेतना सौरभ से मँह – मँह महकाती है दिगंत को मानव मन को भर देती है दिव्य दीप्ति से शिव के नंदी – सा नदियों में पानी पीता […] - ['अन्वेषण' पंडित रामनरेश त्रिपाठी](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/anveshan-by-ramnaresh-tripathi-the-best-explanation/): https://youtu.be/Z7_Y_bGCI1Q अन्वेषण मैं ढूँढता तुझे था जब कुंज और वन में, तू खोजता मुझे था तब दीन के वतन में, तू आह बन किसी की मुझको पुकारता था। मैं था तुझे बुलाता संगीत में, भजन में। मेरे लिए खड़ा था दुखियों के द्वारा पर तू, मैं बाट जोहता था तेरी किसी चमन में। बन कर किसी के आँसू मेरे लिए बहा तू, मैं देखता तुझे था माशूक के बदन में। दुख से रूला-रूलाकर तुने मुझे चिताया, मैं मस्त हो रहा था तब हाय! अंजुमन में। बाजे बजा-बजाकर मैं था तुझे रिझाता, तब तू लगा हुआ था पतितों के संगठन में। […] - ['माँझी न बजाओ बंशी' केदारनाथ अग्रवाल](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/manjhi-na-bajao-vanshi-by-kedarnath-agrawal-the-best-explanation/): https://youtu.be/irWm2yO__uo माँझी न बजाओ बंशी माँझी ! न बजाओ बंशी मेरा मन डोलता मेरा मन डोलता है जैसे जल डोलता जल का जहाज जैसे पल-पल डोलता माँझी! न बजाओ बंशी मेरा प्रन टूटता मेरा प्रन टूटता है जैसे तृन टूटता तृन का निवास जैसे बन-बन टूटता माँझी! न बजाओ बंशी मेरा तन झूमता मेरा तन झूमता है तेरा तन झूमता मेरा तन तेरा तन एक बन झूमता   कवि परिचय   केदारनाथ अग्रवाल का जन्म 1911 में बाँदा जिले के कमासिन नामक गाँव में हुआ था इनकी पढ़ाई-लिखाई इलाहाबाद और कानपुर में हुई थी। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बी.ए. करने के […] - [साकेत– अष्टम सर्ग – व्याख्या सहित, मैथिलीशरण गुप्त](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/saaket-ka-ashtam-sarg-by-maithisharan-gupt-the-best-explanation/): https://youtu.be/soIV3W_u6t4 ‘साकेत‘ के चयनित अंश अष्टम सर्ग निज सौध सदन में उटज पिता ने छाया, मेरी कुटिया में राज-भवन मन भाया। सम्राट स्वयं प्राणेश, सचिव देवर हैं, देते आकर आशीष हमें मुनिवर हैं। धन तुच्छ यहाँ,-यद्यपि असंख्य आकर हैं, पानी पीते मृग-सिंह एक तट पर हैं। सीता रानी को यहाँ लाभ ही लाया, मेरी कुटिया में राज-भवन मन भाया। क्या सुन्दर लता-वितान तना है मेरा, पुंजाकृति गुंजित कुंज घना है मेरा। जल निर्मल, पवन पराग-सना है मेरा, गढ़ चित्रकूट दृढ़-दिव्य बना है मेरा। प्रहरी निर्झर, परिखा प्रवाह की काया, मेरी कुटिया में राज-भवन मन भाया। औरों के हाथों यहाँ नहीं […] - [यशोधरा – चयनित अंश – व्याख्या सहित, मैथिलीशरण गुप्त](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/yashodhara-by-maithisharan-gupt-the-best-explanation/): https://youtu.be/ezU8nu4Ekdc यशोधरा – चयनित अंश सिद्धि हेतु स्वामी गए, यह गौरव की बात, पर चोरी-चोरी गए, यही बड़ा व्याघात, सखि, वे मुझसे कह कर जाते, कह, तो क्या मुझको वे अपनी पथ-बाधा ही पाते? मुझको बहुत उन्होंने माना, फिर भी क्या पूरा पहचाना? मैंने मुख्य उसी को जाना, जो वे मन में लाते। सखि, वे मुझसे कह कर जाते। स्वयं सुसज्जित करके क्षण में, प्रियतम को, प्राणों के पण में, हमीं भेज देती हैं रण में- क्षात्र धर्म के नाते। सखि, वे मुझसे कह कर जाते। हुआ न यह भी भाग्य अभागा, किस पर विफल गर्व अब जागा? जिसने अपनाया […] - ['पंथ होने दो अपरिचित' महादेवी वर्मा](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/panth-hone-do-aprichit-by-mahadevi-verma-the-best-explanation/): https://youtu.be/uGzXiPTmSHA पंथ होने दो अपरिचित पंथ होने दो अपरिचित प्राण रहने दो अकेला ! घेर ले छाया अमा बन, आज कज्जल-अश्रुओं में रिमझिम ले यह घिरा घन, और होंगे नयन सूखे, तिल बुझे औ’ पलक रूखे, आर्द्र चितवन में यहाँ शत विद्युतों में दीप खेला! अन्य होंगे चरण हारे, और हैं जो लौटते, दे शूल को संकल्प सारे, दुखव्रती निर्माण उन्मद, यह अमरता नापते पद, बाँध देंगे अंक-संसृति से तिमिर में स्वर्ण बेला ! दूसरी होगी कहानी, शून्य में जिसके मिटे स्वर, धूलि में खोई निशानी, आज जिस पर प्रलय विस्मित, मैं लगती चल रही नित, मोतियों की हाट औ […] - ['सब बुझे दीपक जला लूँ' महादेवी वर्मा](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/sab-bujhe-deepak-jala-loon-by-mahadevi-verma-the-best-explanation/): https://youtu.be/3DVmFWzTG50 सब बुझे दीपक जला लूँ सब बुझे दीपक जला लूँ घिर रहा तम आज दीपक-रागिनी अपनी जगा लूँ! क्षितिज कारा तोड़ कर अब गा उठी उन्मत्त आँधी, अब घटाओं में न रुकती लास-तन्मय तड़ित् बाँधी, धूलि की इस वीण पर मैं तार हर तृण का मिला लूँ! भीत तारक मूँदते दृग भ्रांत मारुत पथ न पाता, छोड़ उल्का अंक नभ में ध्वंस आता हरहराता, उँगलियों की ओट में सुकुमार सब सपने बचा लूँ! लय बनी मृदु वर्तिका हर स्वर जला बन लौ सजीली, फैलती आलोक-सी झंकार मेरी स्नेह गीली, इस मरण के पर्व को मैं आज दीपावली बना लूँ! […] - ['चिर सजग आँखें उनींदी' महादेवी वर्मा](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/chir-sajag-aankhen-unendi-by-mahadevi-verma-the-best-explanation/): https://youtu.be/E3c6Wq3iqUI चिर सजग आँखें उनींदी चिर सजग आँखें उनींदी आज कैसा व्यस्त बाना! जाग तुझको दूर जाना! अचल हिमगिरि के हृदय में आज चाहे कम्प हो ले, या प्रलय के आँसुओं में मौन अलसित व्योम रो ले, आज पी आलोक को डोले तिमिर की घोर छाया, जागकर विद्युत-शिखाओं में निठुर तूफान बोले! पर तुझे है नाश-पथ पर चिह्न अपने छोड़ आना! जाग तुझको दूर जाना! बाँध लेंगे क्या तुझे यह मोम के बंधन सजीले? पंथ की बाधा बनेंगे तितलियों के पर रँगीले? विश्व का क्रंदन भुला देगी मधुप की मधुर गुनगुन, क्या डुबा देंगे तुझे यह फूल के दल ओस-गीले? […] - [‘र’ के विभिन्न रूप](https://avinashsolutions.com/hindi-vyalaran/r-vyanjan-varn-ke-vibhinn-roop-the-best-explanation/): https://youtu.be/QnbJSwEuxG0 ‘र’ के विभिन्न रूप ‘र’ एक व्यंजन वर्ण है। उच्चारण की दृष्टि से यह लुंठित व्यंजन ध्वनि है। हिंदी भाषा में ‘र’ के विभिन्न रूपों का प्रयोग होता है। कहीं पर ‘र’ का प्रयोग स्वर रहित होता है तो कहीं पर स्वर सहित। जिसमें ‘अ’ की ध्वनि हो वह  स्वर सहित (क, च, ट, त, प) जिसमें ‘अ’ की ध्वनि न हो वह  स्वर रहित (क्, च्, ट्, त्, प्) ‘र’ के विभिन्न रूप – र, रा, रु, रू, र्र, क्र, ट्र, ह्र ‘र’ का सामान्य रूप ‘र’ का सामान्य रूप ‘र’ रमन, दरवाजा, दीवार ‘र’ के सामान्य रूप […] - [सघोष (Voice/Voiced) और अघोष Voiceless/Devoiced व्यंजन](https://avinashsolutions.com/hindi-vyalaran/aghosha-and-saghosha-voice-voiced-and-voiceless-devoiceddhwaniyan-the-best-explanation/): https://youtu.be/xz-RxI-dQ3s सघोष (Voice/Voiced) और अघोष Voiceless/Devoiced व्यंजन      श्वास नलिका के ऊपरी भाग में ध्वनि उत्पन्न करने वाला प्रधान अवयव होता है जिसे ध्वनि यंत्र या स्वरयंत्र कहते हैं। इसे आसानी से समझने के लिए कुछ पुरुषों के गले में जो उभरी घाँटी दिखाई देता है जिसे अंग्रेज़ी में Adam apple कहते हैं यही स्वरयंत्र  कहलाता है। इस स्वर-यंत्र में पतली झिल्ली के बने दो लचीले पर्दे (Vocal Chord) होते हैं। साँस लेते समय या बोलते समय हवा इसी से होकर बाहर-भीतर आती जाती है। इन स्वर तंत्रियों की मदद से हवा को अपने अंदर रोककर हम हमारी शक्ति और […] - [अल्पप्राण Un-aspirate और महाप्राण Aspirate Dhwaniya](https://avinashsolutions.com/hindi-vyalaran/alppran-aur-mahapran-dhwaniyan-un-aspirate-and-aspirate/): https://youtu.be/blcJZEuyqT8 अल्पप्राण Un-aspirate और महाप्राण Aspirate श्वास (प्राण/वायु) की मात्रा के आधार पर वर्ण-भेद उच्चारण में वायुप्रक्षेप (मुख से निकलने वाली हवा) की दृष्टि से व्यंजनों के दो भेद हैं- (1) अल्पप्राण (2) महाप्राण अल्पप्राण (अल्पप्राण को अप्राण भी कहते हैं।) अल्प अर्थात् कम या थोड़ा प्राण अर्थात् वायु अल्पप्राण अर्थात् कम वायु (1) अल्पप्राण :-जिन व्यंजन वर्णों के उच्चारण में श्वास मुख से अल्प मात्रा में निकले और जिनमें  ’ह’ कार-जैसी ध्वनि नहीं होती, उन्हें अल्पप्राण कहते हैं। सरल शब्दों में- जिन वर्णों के उच्चारण में वायु की मात्रा कम होती है, वे अल्पप्राण कहलाते हैं। प्रत्येक वर्ग का पहला, […] - ['मैं नीर भरी दुख की बदली' महादेवी वर्मा](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/main-neer-bhari-dukh-ki-badali-by-mahadevi-verma-the-best-explanation/): https://youtu.be/4hqRxW7Yrbg मैं नीर भरी दुख की बदली मैं नीर भरी दुख की बदली! स्पंदन में चिर निस्पंद बसा, क्रंदन में आहत विश्व हँसा,  नयनों में दीपक से जलते पलकों में निर्झरिणी मचली! मेरा पग पग संगीत भरा, श्वासों से स्वप्न – पराग झरा, नभ के नव रंग बुनते दुकूल, छाया में मलय-बयार पली! मैं क्षितिज – भृकुटि पर घिर धूमिल, चिंता का भार बनी अविरल, रज-कण पर जल-कण हो बरसी नवजीवन – अंकुर बन निकली! पथ को न मलिन करता आना, पद-चिह्न न दे जाता जाना, सुधि मेरे आगम की जग में सुख की सिहरन हो अंत खिली विस्तृत नभ […] - ['यह मंदिर का दीप' महादेवी वर्मा](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/yah-mandir-ka-deep-by-mahadevi-verma-the-best-explanation/): https://youtu.be/1yswfr93WvI यह मंदिर का दीप यह मंदिर का दीप इसे नीरव जलने दो! रजत शंख-घड़ियाल स्वर्ण वंशी-वीणा-स्वर, गए आरती वेला को शत-शत लय से भर, जब था कल कंठों का मेला, विहँसे उपल तिमिर था खेला, अब मंदिर में इष्ट अकेला, इसे अजिर का शून्य गलाने को गलने दो! चरणों से चिह्नित अलिंद की भूमि सुनहली, प्रणत शिरों के अंक लिए चन्दन की दहली, झरे सुमन बिखरे अक्षत सित, धूप-अर्घ्य नैवेद्य अपरिमित तम में सब होंगे अंतर्हित सबकी अर्चित कथा इसी लौ में पलने दो! पल के मनके फेर पुजारी विश्व सो गया, प्रतिध्वनि का इतिहास प्रस्तरों बीच खो गया […] - [अमावट](https://avinashsolutions.com/meri-rachnayen/amawat-hindi-short-story-by-avinash-ranjan-gupta/): किसी कारण से घर के मुख्य सदस्यों को गाँव जाना था। शायद गाँव में कुछ बात हो गई थी। तय यह हुआ कि छह सदस्यों के परिवार में माता-पिता और इकलौती बहन ही जाएँगे और शेष तीन भाई घर पर ही रहेंगे। ऐसे में घर के सबसे छोटे बेटे को रोना आ गया। कारण यह नहीं था कि वह माँ-पिता से अलग हो रहा है। कारण यह था कि वे लोग घूमने जा रहे हैं। बच्चे का मन कि वह भी घूमने जाए। आखिर वह तो केवल सात साल का है, परेशान भी नहीं करता फिर उसे क्यों छोड़ दिया […] - [बंदूक का वज़न](https://avinashsolutions.com/meri-rachnayen/banduk-ka-vajan-hidni-short-story/): एक परिवार के सबसे छोटे बच्चे को किसी आत्मीयजन ने उपहारस्वरूप एक पटाखे वाली बंदूक दी थी। उस बंदूक में तीन खासियत थी पहली तो यह कि वह मजबूत थी, दूसरी यह कि उस जैसी बंदूक मोहल्ले में किसी के पास न थी जिस कारण से बच्चा उससे अपनी श्रेष्ठता जाहिर करता था और तीसरा यह कि वह उपहार की वस्तु थी जो उसे इस बात का अहसास दिलाती थी कि वह भी किसी की नज़र में अहमियत रखता है। दीपावली के समय में तो उसने रील पटाखे के प्रयोग से उस बंदूक का भरपूर आनंद उठाया पर दीपावली के […] - [अठन्नी का रुपया](https://avinashsolutions.com/meri-rachnayen/avinash-ranjan-gupta-athanni-aur-rupya-short-story/): एक आठ साल के बच्चे को अगर सबकुछ भी उपलब्ध करवा दिया जाए तो उत्सुकता के कारण ही सही पर वह कुछ न कुछ शरारत ज़रूर करेगा। इसके विपरीत अगर एक ऐसा बच्चा जो बहुत सारी चीजों से वंचित रहा हो उसके शरारत करने की सूरतें पहले वाले बच्चे से कहीं अधिक होंगी। ऐसा ही कुछ हुआ 1993 में। एक परिवार में माँ ने पूजास्थान पर चढ़ावे के रूप में एक रुपया अर्पित किया था। बच्चे ने किसनु की दुकान पर पोपिंस चॉकलेट देख रखी थी। उसका बाल मन पोपिंस चॉकलेट चखने के लिए मचल गया। हालाँकि उसने अपने पास […] - [शर्बत का गिलास](https://avinashsolutions.com/meri-rachnayen/sharbat-ka-gilas-by-avinash-ranjan-gupta/): घटना लगभग 1993 की … रामनवमी का जुलूस निकला हुआ था। सभी जुलूस में लठैतों और करतब दिखाने वाले को देखकर सम्मोहित हो रहे थे। वहीं पर कमेटी की तरफ़ से नि:शुल्क शर्बत वितरण का भी प्रबंध था। वहाँ भी लोगों की काफी भीड़ लगी हुई थी। उसी भीड़ में सात साल का एक बच्चा अपनी किस्मत आजमाने पहुँचा। सभी भीड़ से शर्बत लेकर ऐसे निकल रहे थे मानो बहुत बड़ी जीत हासिल कर ली हो। ऐसे दृश्य को देखकर बालक का बालमन उदास हो गया। मानो उसे अपनी हार का अंदाजा पहले ही लग गया हो। बहुत देर खड़े […] - [About Avinash](https://avinashsolutions.com/hindi-thoughts/all-about-avinash/): अविनाश रंजन गुप्ता हिंदी भाषा के एक समर्पित शिक्षक हैं, जो हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। अपने दोनों वैबसाइट्स और यूट्यूब चैनल पर ये हिंदी भाषा से जुड़े तमाम तरह की अध्ययन सामग्रियाँ उपलब्ध कराते रहते हैं, जिनमें मुख्य रूप से – डीएवी सोल्युशंस एनसीईआरटी सोल्युशंस स्टेट बोर्ड सोल्युशंस व्याकरण भाषा विज्ञान पाठ से जुड़े वीडियोज़ स्वरचित कविताएँ स्वरचित कहानियाँ आदर्श प्रश्नपत्र सहायक सामग्रियाँ हिंदी टाइपिंग टूल्स अन्य सामग्रियाँ जुड़ने के स्रोत onlinehindi.in avinashsolutions.com Avinash Ranjan Gupta/YouTube ‘Avinash Ranjan Gupta’ Facebook +918895728786 Mobile @avinashranjangupta instagram.com - ['ले चल वहाँ भुलावा देकर' जयशंकर प्रसाद की रचना](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/le-chal-mujhe-bhulawa-dekar-by-jayshankar-prasad/): https://youtu.be/5EthsiiwbLA ले चल वहाँ भुलावा देकर ले चल वहाँ भुलावा देकर, मेरे नाविक धीरे-धीरे। जिस निर्जन में सागर लहरी, अम्बर के कानों में गहरी- निश्छल प्रेम-कथा कहती हो, तज कोलाहल की अवनी रे। जहाँ साँझ-सी जीवन छाया, ढीले अपनी कोमल काया, नील नयन से ढुलकाती हो, ताराओं की पाँति घनी रे। जिस गंभीर मधुर छाया में- विश्व चित्रपट चल माया में- विभुता विभु-सी पड़े दिखाई दुख-सुख वाली, सत्य बनी रे। श्रम विश्राम क्षितिज वेला से- जहाँ सृजन करते मेला से- अमर जागरण उषा नयन से- बिखराती हो ज्योति घनी रे। कविता परिचय प्रस्तुत कविता या गीत ‘लहर’ (1935 ई.) काव्य-संग्रह […] - [कर गयी प्लावित तन-मन सारा (झरना) जयशंकर प्रसाद की रचना](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/kar-gayi-plawit-tan-man-saara-by-jayshankar-prasad-ka-sampoorn-adhyyan/): https://youtu.be/BEG0qkJsPpg कर गयी प्लावित तन-मन सारा (झरना) मधुर है स्रोत मधुर है लहरी न है उत्पात, छटा है छहरी मनोहर झरना कठिन गिरि कहाँ विदारित करना बात कुछ छिपी हुई है गहरी मधुर है स्रोत मधुर है लहरी कल्पनातीत काल की घटना हृदय को लगी अचानक रटना देखकर झरना प्रथम वर्षा से इसका भरना स्मरण ही रहा शैल का कटना कल्पनातीत काल की घटना कर गई प्लावित तन-मन सारा एक दिन तव अपांग की धारा हृदय से झरना बह चला, जैसे – गजल ढरना प्रणय बन्या ने किया पसारा कर गई प्लावित तन-मन सारा प्रेम की पवित्र परछाईं में लालसा […] - [सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविता 'भिक्षुक' का संपूर्ण अध्ययन](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/bhikshuk-by-sooryakant-tripathi-niralathe-best-explanation/): https://youtu.be/I-Cl8frELAs भिक्षुक वह आता- दो टूक कलेजे के करता पछताता पथ पर आता। पेट-पीठ दोनों मिलकर हैं एक, चल रहा लकुटिया टेक, मुट्ठी भर दाने को भूख मिटाने को मुँह फटी पुरानी झोली का फैलाता- दो टूक कलेजे के करता पछताता पथ पर आता। साथ में दो बच्चे भी हैं सदा हाथ फैलाये, बायें से वे मलते हुए पेट को चलते, और दाहिना दया-दृष्टि पाने की ओर बढ़ाये। भूख से सूख ओंठ जब जाते दाता-भाग्य विधाता से क्या पाते? घूँट आँसुओं के पीकर रह जाते। चाट रहे जूठी पत्तल वे सभी सड़क पर खड़े हुए, और झपट लेने को उनसे […] - [महाकवि नागार्जुन की कविता 'सिंदूर तिलकित भाल' कविता का सम्पूर्ण अध्ययन](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/sindoor-tilakit-bhaal-by-nagarjun-the-best-explanation/): https://youtu.be/SawJWATDtM4 सिंदूर तिलकित भाल घोर निर्जन में परिस्थिति ने दिया है डाल! याद आता तुम्हारा सिंदूर तिलकित भाल! कौन है वह व्यक्ति जिसको चाहिए न समाज? कौन है वह जिसको नहीं पड़ता दूसरे से काज? चाहिए किसको नहीं सहयोग? चाहिए किसको नहीं सहवास? कौन चाहेगा कि उसका शून्य में टकराय यह उच्छ्वास? हो गया हूँ मैं नहीं पाषाण जिसको डाल दे कोई कहीं भी करेगा वह कभी कुछ न विरोध करेगा वह कुछ नहीं अनुरोध वेदना ही नहीं उसके पास फिर उठेगा कहाँ से निःश्वास मैं न साधारण, सचेतन जंतु यहाँ हाँ ना – किन्तु और परन्तु यहाँ हर्ष-विषाद–चिंता-क्रोध यहाँ […] - [सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविता 'तोड़ती पत्थर' का संपूर्ण अध्ययन](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/todati-patthar-by-sooryakant-tripathi-niralathe-best-explanation-with-pictorial-explanation/): https://youtu.be/jqU4hKtkKN8 तोड़ती पत्थर वह तोड़ती पत्थर; देखा उसे मैंने इलाहाबाद के पथ पर- वह तोड़ती पत्थर।   कोई न छायादार पेड़ वह जिसके तले बैठी हुई स्वीकार; श्याम तन, भर बँधा यौवन, नत नयन, प्रिय कर्मरत मन, गुरु हथौड़ा हाथ, करती बार-बार प्रहार- सामने तरु-मालिका अट्टालिका प्राकार।   चढ़ रही थी धूप; गर्मियों के दिन दिवा का तमतमाता रूप उठी झुलसती हुई लू, रुई ज्यों जलती हुई भू गर्द चिनगीं छा गयीं, प्रायः हुई दुपहर वह तोड़ती पत्थर। देखते देखा मुझे तो एक बार उस भवन की ओर देखा, छिन्नतार; देखकर कोई नहीं, देखा मुझे उस दृष्टि से जो मार […] - [नागार्जुन की कविता 'अकाल और उसके बाद' का संपूर्ण अध्ययन](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/nagarjun-kii-kavita-akaal-aur-uske-baad-ka-sampoorna-adhyyan-aur-saransh-the-best-one/): https://youtu.be/D6hbTjlNM9I अकाल और उसके बाद कई दिनों तक चूल्हा रोया, चक्की रही उदास कई दिनों तक कानी कुतिया सोई उनके पास कई दिनों तक लगी भीत पर छिपकलियों की गश्त कई दिनों तक चूहों की भी हालत रही शिकस्त दाने आए घर के अंदर कई दिनों के बाद धुआँ उठा आँगन के ऊपर कई दिनों के बाद चमक उठीं घर भर की आँखें कई दिनों के बाद कौए ने खुजलाईं पाँखें कई दिनों के बाद कविता परिचय — अकाल और उसके बाद ‘अकाल और उसके बाद’ शीर्षक कविता ‘सतरंगे पंखोंवाली’ 1959 काव्य-संग्रह में संगृहीत है। इस कविता का प्रसंग अकाल […] - [नागार्जुन की कविता 'कालिदास' का संपूर्ण अध्ययन](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/nagarjun-ki-kavita-kalidas-ka-saaransh-the-best-one/): https://youtu.be/YylJA0FrioA कालिदास कालिदास सच-सच बतलाना ! इंदुमती के मृत्युशोक से अज रोया या तुम रोए थे कालिदास सच-सच बतलाना ! शिवजी की तीसरी आँख से निकली हुई महाज्वाला में घृतमिश्रित सूखी समिधा – सम कामदेव जब भस्म हो गया रति का क्रंदन सुन आँसू से तुमने ही तो दृग धोए थे? कालिदास सच-सच बतलाना रति रोई या तुम रोए थे? वर्षा ऋतु की स्निग्ध भूमिका प्रथम दिवस आषाढ़ मास का देख गगन में श्याम घन-घटा विधुर यक्ष का मन जब उचटा खड़े-खड़े तब हाथ जोड़कर चित्रकूट के सुभग शिखर पर उस बेचारे ने भेजा था जिनके ही द्वारा संदेशा उन […] - [सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविता 'बादल राग' का सम्पूर्ण अध्ययन](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/baadal-raag-kavita-by-sumitranandan-pant-ka-vishesh-adhyyan/): बादल राग तिरती है समीर-सागर पर अस्थिर सुख पर दुख की छाया – जग के दग्ध हृदय पर निर्दय विप्लव की प्लावित माया – यह तेरी रण-तरी भरी आकांक्षाओं से, घन, भेरी-गर्जन से सजग सुप्त अंकुर उर में पृथ्वी के, आशाओं से नवजीवन की, ऊँचा कर सिर, ताक रहे हैं, ऐ विप्लव के बादल! फिर-फिर बार-बार गर्जन वर्षण है मूसलधार, हृदय थाम लेता संसार, सुन-सुन घोर वज्र-हुंकार। अशनि-पात से शापित उन्नत शत-शत वीर, क्षत-विक्षत हत अचल-शरीर, गगन-स्पर्शी स्पर्द्धा धीर। हँसते हैं छोटे पौधे लघुभार – शस्य अपार, हिल-हिल खिल-खिल, हाथ हिलाते, तुझे बुलाते, विप्लव-रव से छोटे ही हैं शोभा पाते। […] - ['ग्रंथि'  सुमित्रानंदन पंत की श्रेष्ठ रचना का अध्ययन](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/granthi-sumitranandan-pant-kii-shreshth-rachana-ka-adhyyan/): ‘ग्रंथि’ – कविता परिचय पंत जी की प्रारंभिक रचनाएँ हैं – ‘ग्रंथि’, ‘वीणा’ और ‘पल्लव’। परंतु ‘ग्रंथि’, ‘उच्छ्वास’ और ‘आँसू’ एक ही प्रेम-काव्य के तीन खंड समझे जाएँगे। ‘ग्रंथि’ में इस खंड-काव्य की कथावस्तु मिलेगी, ‘उच्छ्वास’ और ‘आँसू’ में प्रेम के दुखांत होने पर भावुकताप्रधान प्रलाप। इन तीनों रचनाओं का ऐतिहासिक महत्त्व भी है। अब तक व्यक्तिगत रूप से दुख-सुख, मिलन-वियोग की कहानी हिंदी में किसी भी कवि ने नहीं लिखी थी। बाद में ‘मिलन’ और ‘पथिक’ जैसे प्रेम-काव्य सामने आए। प्रेम का भावुकता-प्रधान रोमांटिक रूप इन्हीं तीन कविताओं द्वारा पहली बार हिंदी में उपस्थित हुआ और पाठक उसमें बह […] - [जाहिल से ज़हीन](https://avinashsolutions.com/meri-rachnayen/foolishness-to-wisdom-the-poem-in-hindi/): चोरी सबने की थी, लेकिन मेरी चोरी पकड़ी गई। सबकी चोरी की सजा इक मुझको ही दी गई। चोरी क्या कलंक थी, जो माथे से चिपक गई, मेरे रोने-धोने-पछताने से भी यह तनिक न कम हुई। फिर एक दिन …… निर्णय लिया खुद से  कि अपनी नई पहचान बनानी है, हेय से ध्येय तक श्रेष्ठ, अपनी छवि बनानी है। इस हेतु में मैं लीन हो गया, अबसे यही मेरा दीन हो गया। पुस्तकें मैंने पढ़ लीं इतनी धीरे-धीरे मैं प्रवीण हो गया। सत्संगति की चढ़ी जो रंगत बदली सोच और बदली पंगत धीरे-धीरे ही सही मगर ये जीवन बिलकुल नवीन […] - [सुमित्रानंदन की कविता 'यह धरती कितना देती है!' का सम्पूर्ण अध्ययन](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/yah-dharti-kitna-deti-hai-kavita-ka-sampoorn-adhyyan/): कविता परिचय — यह धरती कितना देती है ! इस कविता की रचना सन् 1954 में हुई थी। यह कविता पंत जी की उन रचनाओं का प्रतिनिधित्व करती है जिनमें कवि ने अनुभूतियों की तीव्रता और सूक्ष्मता को सहज और सरल ढंग से प्रस्तुत किया है। इसे इनकी काव्य संग्रह ‘वाणी’ में संकलित किया गया है, जिसमें कवि छायावादी काल्पनिक जगत् की अपेक्षा जीवन की स्वाभाविकता को महत्त्व देने लगे हैं।’ यह धरती कितना देती है  में कवि ने एक साधारण-सी घटना के आधार पर जीवन की समस्याओं के साथ मानवीय व्यवहार का भी प्रतिपादन किया है। जो व्यक्ति केवल […] - [‘सदाचार का तावीज’ हरिशंकर परसाई जी की रचना का सम्पूर्ण अध्ययन](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/harishankar-parsai-ki-sadachar-ka-tabeej-sampoorn-adhyyan/): मूल भाव सचिव वैद गुरु तीनि जो, प्रिय बोलहिं भयु आस। राज, धर्म, तन तीनि कर, होइ बेगिही नास॥ पाठ परिचय ‘सदाचार का तावीज’ व्यंग्य पाठ में हरिशंकर परसाई जी ने भ्रष्टाचार के कारण तथा निवारण के उपायों को व्यंग्यात्मक शैली में प्रस्तुत किया है। इस व्यंग्य के माध्यम से लेखक स्पष्ट करते हैं कि किसी को सदाचारी तभी बनाया जा सकता है जब भ्रष्टाचार के मौके खत्म हों। रिश्वतखोरी या भ्रष्टाचार तब तक समाप्त नहीं होगा, जब तक कि सभी कर्मचारियों को संतोषजनक वेतन नहीं मिल जाता, आर्थिक सुरक्षा नहीं मिल जाती। परसाई जी ने मानव मन की स्वाभाविकता […] - [स्वयं से शपथ](https://avinashsolutions.com/meri-rachnayen/the-way-of-success-in-life-hindi-poem/): कुछ भी अप्राप्य नहीं जगत में इसे तुम आत्मसात कर जाओ अपने सपने को पूरा करने बस जज़्बातों से भर जाओ।   क्यों है ज़रूरी ये जीवन में खुद से पूछो खुद से बात करो उत्तर मिलेगा तुम्हें तुमसे ही फिर विजयपथ पर बढ़ते जाओ। रुको न क्षण भर सुस्ताने को अपनी मुश्किलें बतलाने को मिलेंगे लोग कुछ भटकाने को कान-ध्यान न देना उनपर क्षणभर बस अपने मन की सुनते जाओ।     दिया विधाता ने यह जीवन तुम उसका सम्मान करो अपने जीवन को उन्नत कर विधाता का ऋण चुका जाओ।   जो खुश रख सको विधाता को तो पूजा-पाठ […] - [सुमित्रानंदन की कविता 'पल्लव' का सम्पूर्ण अध्ययन](https://avinashsolutions.com/hindi-sahitya/sumitranandan-pant-ki-kavita-ka-sampoorn-adhhyan-with-saar/): पाठ परिचय ‘पल्लव’ आपने एक तीर से दो निशान की उक्ति तो सुनी होगी लेकिन एक तीर से तीन निशान कैसे साधा जाता है यह हमें सुमित्रानंदन पंत की कविता पल्लव से ज्ञात होगा। अपनी इस कविता के माध्यम से कवि पहले तो कविता में वर्णित ‘पल्लव’ अर्थात् नए पत्ते के विकास के बारे में बता रहे हैं और इसके साथ स्वत: ही उनके काव्य संग्रह ‘पल्लव’ के विकसित होने का वर्णन तथा छायावाद की उत्तरोत्तर प्रगति के बारे में भी ज्ञात हो रहा है। इस तरीके से ‘पल्लव’ कविता ने एक तीर से तीन निशान साधा है। ‘पल्लव’ से […] - [सही जीवन जीने की कला](https://avinashsolutions.com/meri-rachnayen/ways-of-peaceful-life-in-the-foram-of-poem/): क्या तुमने कभी सोचा है, की तुम्हारा जीवन कैसा हो? बड़ा महत्त्वपूर्ण प्रश्न है यह, इसी पर ही टिकी हुई है, जीने की चाह,   और जीवन की राह। यही प्रश्न बनाता है- आदमी को संगीन इसका उत्तर बनाता है- जीवन को रंगीन   जो नहीं करता है इस पर विचार – उसका जीवन बनता है ‘गमगीन’ तो चलिए विचार करते हैं- इस महत्त्वपूर्ण प्रश्न पर; जो हमसे जुड़ा है, केवल और केवल हमसे ही जुड़ा है। इसलिए मैं केवल मेरे बारे में ही कहूँगा और दूसरों तथा दूसरों की सोच से दूर रहूँगा- कि मूलभूत आवश्यकताओं के अतिरिक्त हैं […] - [तुम्हारे पास तुम्हारा है।](https://avinashsolutions.com/meri-rachnayen/the-best-poem-on-the-right-way-of-thinking-in-hindi/): तुम्हारे पास तुम्हारा है। मेरे पास मेरा है। तुम्हें तुम्हारा प्रिय है। मुझे मेरा पसंद है। तुम अपने के गुण गाओगे, मैं अपने को श्रेष्ठ मानूँगा।   ये मुमकिन है कि मुझे तुम्हारा और तुम्हें मेरा अच्छा लगे, शायद यही सच्चा भी लगे, फिर भी तुम्हारा तुम्हारा ही होगा और मेरा मेरा ही होगा,   गर मेरा ज़्यादा अच्छा हुआ तो या तो तुम जलोगे, या करोगे, अपने वाले को बेहतर बनाने का प्रयास मैं भी शायद यही करूँगा तुम्हारी स्थिति में, गर तुमने मेरे बेहतर को कमतर करने की ख़्वाहिशें की, और ऐसा न हुआ जो होना भी नहीं […] - [हम चाहे न चाहे](https://avinashsolutions.com/meri-rachnayen/the-good-memories-of-loved-ones-the-best-poem/): हम चाहे न चाहे क्या फरक पड़ता है दिल पर यादों का उसकी असर रहता है आगे बढ़ने की कोशिश हम जब भी करे   आगे बढ़ने की कोशिश हम जब भी करे   उसको खो देने का दिल को डर लगता है दिल तो मासूम है ये समझता नहीं जो चले जाते हैं वो चले जाते हैं आएँगे वो कभी ऐसी झूठी उम्मीदों का दिल तो बस घर बनता है। हम चाहे न चाहे क्या फरक पड़ता है दिल पर यादों का उसकी असर रहता है हमने माना है होंगी उसकी मजबूरियाँ कहती है मुझसे उसकी ये खामोशियाँ गमे […] - [तू कुछ ऐसा सोच](https://avinashsolutions.com/meri-rachnayen/ek-kavita-mere-jeevan-par-the-best-poem/): न भूत की सोच न भविष्य की सोच तू सोच उस दृश्य की   जिसकी कल्पना लाती है आँखों में चमक चेहरे पर खुशी होंठों पर हँसी जिससे दूर होती है गमी वह दृश्य चाहे लक्ष्य हो उद्देश्य हो ध्येय हो या विधेय हो पर अंतिम साँस तक अपरिमेय हो इसीलिए तू खुद की कर अपनी इच्छा से जी अपनी इच्छा से मर और ये भी शपथ कर छोड़ दे करनी चिंता उनकी तू नहीं मानता अहमियत जिनकी कि मरने के बाद भी जो तारीख बन गए हैं लोग उनकी शोहरत पर भी तोहमत लगाते हैं लोग नजाने ऐसा करने […] - [प्रचलित मुहावरे](https://avinashsolutions.com/hindi-vyalaran/hindi-bhasha-ke-kuch-prachalit-muhavare/): मुहावरे  1. अपना उल्लू सीधा करना – स्वार्थ सिद्ध करना 2. अपनी खिचड़ी अलग पकाना – सबसे अलग रहना 3. अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना – अपनी प्रशंसा स्वयं करना  4. अपने पाँव पर कुल्हाड़ी मारना – स्वयं को हाँनि पहुँचाना   5. अपने पैरों पर खड़े होना – आत्मनिर्भर होना 6. अक्ल पर पत्थर पड़ना – बुद्धि भ्रष्ट होना 7. अक्ल के पीछे लट्ठ लेकर फिरना – मूर्खता प्रदर्शित करना  8. अँगूठा दिखाना – कोई वस्तु देने या काम करने से इनकार करना 9. अँधे की लकड़ी होना – एकमात्र सहारा 10. अच्छे दिन आना – भाग्य खुलना 11. अंग-अंग […] - [Hindi Vyakaran Vakya Ka Sampoorn Adhyyan वाक्य का संपूर्ण अध्ययन अभ्यास कार्य के साथ](https://avinashsolutions.com/hindi-vyalaran/ncert-hindi-course-a-and-b-vaakya-rachnantaran-ka-sampoorn-adhyyan/): वाक्य की परिभाषा वह शब्द समूह जिससे वक्ता/लेखक की पूरी बात श्रोता या पाठक को समझ में आ जाए, ‘वाक्य’ कहलाता है। इसे ऐसे भी कहा जा सकता है कि सार्थक शब्दों का वह व्यवस्थित समूह जिससे अपेक्षित अर्थ प्रकट हो, वाक्य कहलाता है। जैसे- रमा साइकिल चला रही है।   बच्चे खेलने के लिए मैदान जा रहे हैं। वाक्य के भेद वाक्य के भेद- रचना के आधार पर रचना के आधार पर वाक्य के तीन भेद होते है- (i) सरल वाक्य या साधारण वाक्य या सामान्य वाक्य (Simple Sentence) (ii) संयुक्त वाक्य (Compound Sentence) (iii) मिश्रित वाक्य (Complex Sentence) […] - [Samaas Ka Sampoorna Adhyyan समास का संपूर्ण अध्ययन](https://avinashsolutions.com/hindi-vyalaran/samaas-ka-sampoorna-adhyyan-the-best-material-of-samaas/): समास (Compound) दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से जो नया शब्द बनता है, उसे समास कहते हैं। इस मेल की प्रक्रिया में बीच की विभक्तियों, शब्दों, या तथा (‘और’) आदि अव्ययों का लोप हो जाता है, जैसे ‘जल  की धारा’ का सामासिक पद होगा ‘जलधारा’। विशेष द्रष्टव्य – यहाँ ‘जल’ पूर्व पद है और ‘धारा’ उत्तर पद दोनों के मिलने पर समस्त पद (जलधारा) बनता है और बड़े रूप (जल की धारा) को समास विग्रह कहते हैं। दो पदों में कभी पहला पद प्रधान और कभी दूसरा पद प्रधान होता है। कभी दोनों पद प्रधान होते हैं। […] - [मुंशी प्रेमचंद और उनका ऐतिहासिक प्रतिबंधित दस्तावेज़ : सोज़े वतन](https://avinashsolutions.com/sahityik-nibandh/premchand-kii-soje-vatan-kyon-ban-hui-usmen-ky-a-likha-hai-kab-ban-hui/): स्वाधीनता और देश–प्रेम को मुंशी जी ने अपने साहित्य में सर्वोच्च स्थान प्रदान किया है। ‘सोज़े वतन’ में संगृहीत ‘दुनिया का सबसे अनमोल रत्न’ शीर्षक अपनी बहुचर्चित कहानी में उन्होंने लिखा है-“खून का वह आखिरी कतरा जो वतन की हिफाजत में गिरे, दुनिया की सबसे अनमोल चीज है।“ कथा शिल्पी मुंशी प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई, 1880 को बनारस जिले के लमही गाँव में हुआ था। उनके पिता मुंशी अजायबलाल ने प्रेमचंद का नाम बचपन में धनपतराय रखा था। घर में प्यार से सभी लोग नवाबराय कहते थे। उनकी प्रारम्भिक शिक्षा गोरखपुर व बनारस में हुई थी। वह सन् 1902 […] - [जवाहरलाल नेहरू](https://avinashsolutions.com/personalities/jawaharlal-neharu-ke-baare-me-sabkuch-jaane-in-hindi-the-best-nibandh/): संकेत बिंदु-(1) आधुनिक भारत के निर्माता (2) नेहरू जी का जन्म और बाल्यकाल (3) स्वदेश वापसी और स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय योगदान (4) भारत-विभाजन और नेहरू जी प्रथम प्रधानमंत्री (5) उपसंहार। “अगर मेरे बाद कुछ लोग मेरे बारे में सोचें तो मैं चाहूँगा कि वे कहें-वह एक ऐसा आदमी था, जो अपने पूरे दिल व दिमाग से हिंदुस्तानियों से मुहब्बत करता था और हिंदुस्तानी भी उसकी खामियों को भुलाकर उससे बेहद, अज़हद मुहब्बत करते थे।”-जवाहरलाल नेहरू पंडित जी के शब्दों को थोड़ा-सा बदलकर यदि यह कहें कि वे मानवमात्र से मुहब्बत करते थे, तो अतिश्योक्ति न होगी। उनके निधन पर […] - [स्वामी दयानंद](https://avinashsolutions.com/personalities/swami-dayananda-saraswati-ke-baare-me-sabkuch-jaane/): संकेत बिंदु-(1) स्वामी दयानंद का जन्म (2) मूलशंकर से दयानंद सरस्वती (3) लोगों को सच्चे वैदिक धर्म का ज्ञान कराया (4) षडयंत्र द्वारा स्वामी की हत्या (5) उपसंहार। भारत में जब-जब भी धर्म और समाज में विकृति आई है, जन-जीवन अवनति के गर्त की ओर चला है, सामाजिक प्रथाओं एवं परंपराओं पर कुठाराघात हुआ है, तब-तब ही इस पुण्य भू पर कोई-न-कोई दिव्य विभूति अवतरित हुई है, जिसने सुप्त भारतीयों को जगाया है। उनको कर्त्तव्य का बोध कराया है। 11वीं शताब्दी में भारत में व्याप्त अज्ञानान्धकार को दूर करने का सर्वाधिक श्रेय स्वामी दयानंद को प्राप्त है। महर्षि दयानंद का […] - [महाराणा प्रताप](https://avinashsolutions.com/personalities/maharana-pratap-ke-baare-me-sabkuch-jaane/): संकेत बिंदु-(1) स्वाभिमानी और स्वतंत्रता का पुजारी (2) बचपन से ही देश-भक्त और वीरता (3) हल्दीघाटी युद्ध का प्रसंग (4) शक्ति सिंह का देश-निवार्सन (5) उपसंहार। अपने जीवन को मातृभूमि की स्वतंत्रता रूपी बलिवेदी पर सहर्ष निछावर करने वाले भारतीय सपूतों में महाराणा प्रताप का नाम अग्रगण्य है। अकबर के शासनकाल में जब अनेक हिंदू राजा-महाराजा मुगलों की अधीनता स्वीकार कर चुके थे, तब अकेले प्रताप ही ऐसे ओजस्वी एवं स्वाभिमानी राणा थे, जो जीवन की अंतिम साँस तक जन्मभूमि चित्तौड़ की स्वाधीनता के लिए जूझते रहे। अकबर उनकी वीरता का लोहा मानता था। महाराणा प्रताप के प्रति श्रद्धा व्यक्त […] - [गुरुनानक देव](https://avinashsolutions.com/personalities/guru-nanak-dev-ke-baare-me-sabkuch-jaane/): संकेत बिंदु-(1) नानक जी का जन्म तथा बचपन (2) नानक जी का खरा सौदा (3) नानक जी का गृहत्याग और धर्मोपदेश (4) गुरुनानक जी की शिक्षाएँ (5) उपसंहार। भारत की पवित्र भूमि पर समय-समय पर अनेक महापुरुष उत्पन्न हुए, जिन्होंने लोगों को धर्म का बोध कराया, ईश्वर-प्राप्ति का सच्चा मार्ग बताया। इन महापुरुषों में गुरु नानकदेव का नाम सदा स्मरणीय रहेगा। नानक जी का जन्म संवत् 1526 में कार्तिक पूर्णिमा को तलवंडी नामक ग्राम में हुआ। तलवंडी का वर्तमान नाम ‘ननकाना साहब’ है। इनके पिता का नाम कालुचंद पटवारी और माता का नाम तृप्ता था। इनकी रुचि बचपन से हा […] ## Pages - [Class VIII, Amrai, Do Panchhi (Poem) - Rabindranath Tagore, ICSE Board, The Best Solutions](https://avinashsolutions.com/class-viii-amrai-do-panchhi-poem-rabindranath-tagore-icse-board-the-best-solutions/): कुछ करके सीखिए कुछ करके सीखिए नीचे देश के स्वतंत्रता सेनानियों के चित्र दिए गए हैं, इंटरनेट की सहायता से उनके नाम और उनके प्रसिद्ध नारे लिखिए- लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक “स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा। नेताजी सुभाष चंद्र बोस “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा!” दो पंछी – सारांश दो पंछी – सारांश रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता ‘दो पंछी’ स्वतंत्रता और परतंत्रता के बीच के द्वंद्व को बड़ी ही सुंदरता से दर्शाती है। छंद 1 – दो अलग संसारों का मिलन सोने के पिंजरे में था पिंजरे का पंछी, और वन का […] - [Class VIII, Amrai, Insaan Se Do Kadam Aage: Robot (Article) - Dr. Vinod Gupta, ICSE Board, The Best Solutions](https://avinashsolutions.com/class-viii-amrai-insaan-se-do-kadam-aage-robot-article-dr-vinod-gupta-icse-board/): कुछ करके सीखिए कुछ करके सीखिए दुनिया का पहला रोबोट कौन है? इंटरनेट से जानकारी प्राप्त करके कक्षा में बताइए। उत्तर – दुनिया का पहला ‘डिजिटल और प्रोग्राम करने योग्य’ रोबोट ‘यूनिमेट’ (Unimate) था। निर्माण – इसका आविष्कार जॉर्ज डेवोल ने 1954 में किया था। उपयोग – इसे 1961 में जनरल मोटर्स के असेंबली लाइन में काम पर लगाया गया था। इसका मुख्य काम गर्म लोहे के टुकड़ों को उठाना और उन्हें साँचों में रखना था। प्राचीन इतिहास – यदि हम प्राचीन कथाओं या यांत्रिक खिलौनों की बात करें, तो 12वीं सदी में अल-जजारी ने पानी से चलने वाले स्वचालित […] - [Class VIII, Amrai, Desh Aur Samaj Mein Sajhedari: Wadia Samuh (Article) - Dr. Ramji Tiwari, ICSE Board, The Best Solutions](https://avinashsolutions.com/class-viii-amrai-desh-aur-samaj-mein-sajhedari-wadia-samuh-article-dr-ramji-tiwari-icse-board/): कुछ करके सीखिए कुछ करके सीखिए कुछ विशेषण शब्दों से भाववाचक संज्ञा बनाइए- कुशल – कुशलता शिष्ट – शिष्टता विद्वान – विद्वता विस्तृत – विस्तार दिए गए शब्दों के एक से अधिक अर्थ बताइए- योग – जोड़, साधना भेंट – मुलाक़ात, उपहार हल – समाधान, खेत जोतने का यंत्र     ‘देश और समाज में साझेदारी – वाडिया समूह’ – सारांश ‘देश और समाज में साझेदारी – वाडिया समूह‘ – सारांश डॉ. रामजी तिवारी द्वारा लिखित लेख ‘देश और समाज में साझेदारी – वाडिया समूह’ भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित औद्योगिक घरानों में से एक, ‘वाडिया समूह’ के गौरवशाली […] - [Class VIII, Amrai, Ajanta Ki Gufaen (Article) , ICSE Board, The Best Solutions](https://avinashsolutions.com/class-viii-amrai-ajanta-ki-gufaen-article-icse-board-the-best-solutions/): कुछ करके सीखिए कुछ करके सीखिए चार मुख्य प्राचीन सभ्यताएँ कौन-सी हैं? बताइए। चार मुख्य प्राचीन सभ्यताएँ ये सभ्यताएँ मुख्य रूप से नदियों के किनारे विकसित हुई थीं: मेसोपोटामिया की सभ्यता (Mesopotamia) मिस्र की सभ्यता (Ancient Egypt) सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization) चीन की प्राचीन सभ्यता (Ancient China)   गौतम बुद्ध का वास्तविक नाम क्या था? गौतम बुद्ध का वास्तविक नाम सिद्धार्थ था। ज्ञान प्राप्त करने के बाद वे ‘बुद्ध’ कहलाए। बौद्ध धर्म का मूलमंत्र क्या है? बताइए। बौद्ध धर्म का सबसे प्रमुख मूलमंत्र ‘त्रिशरण’ माना जाता है, जिसे अनुयायी श्रद्धापूर्वक दोहराते हैं: बुद्धं शरणं गच्छामि। (मैं बुद्ध की […] - [Class VIII, Amrai, Pashchimi Odisha Ki Mother Teresa: Parvati Giri (Biography) - Varsha Saxena, ICSE Board, The Best Solutions](https://avinashsolutions.com/class-viii-amrai-pashchimi-odisha-ki-mother-teresa-parvati-giri-biography/): कुछ करके सीखिए कुछ करके सीखिए ‘हमें देश के लिए कुछ करना होगा’ इस पंक्ति के आधार पर तुक मिलाते हुए चार पंक्तियों की रचना कीजिए और कक्षा में सुनाइए। हमें देश के लिए कुछ करना होगा, संकल्पों की मशालों को भरना होगा। मिटाकर मन से स्वार्थ और लोभ को, अब अपने देशहित हेतु लड़ना होगा। पश्चिमी ओड़िशा की मदर टेरेसा  – पार्वती गिरी – पाठ का सारांश   पश्चिमी ओड़िशा की मदर टेरेसा  – पार्वती गिरी – पाठ का सारांश   वर्षा सक्सेना द्वारा लिखित लेख ‘पश्चिमी ओड़िशा की मदर टेरेसा  – पार्वती गिरी’ एक ऐसी महान वीरांगना की […] - [Class VIII, Amrai, Sir William Jones Ne Sanskrit Kaise Seekhi (Inspirational Incident) - Mahavir Prasad Dwivedi, ICSE Board, The Best Solutions](https://avinashsolutions.com/class-viii-amrai-sir-william-jones-ne-sanskrit-kaise-seekhi/): कुछ करके सीखिए कुछ करके सीखिए संस्कृत में एक श्लोक कक्षा में सुनाइए। संस्कृत श्लोक “विद्या ददाति विनयं, विनयाद् याति पात्रताम्। पात्रत्वात् धनमाप्नोति, धनाद् धर्मं ततः सुखम्॥” अर्थ – विद्या विनम्रता प्रदान करती है, विनम्रता से योग्यता आती है, योग्यता से धन प्राप्त होता है, धन से धर्म के कार्य होते हैं और अंततः सुख की प्राप्ति होती है। संस्कृत भाषा के जनक का नाम बताइए। संस्कृत व्याकरण को व्यवस्थित और वैज्ञानिक रूप देने वाले महान ऋषि महर्षि पाणिनि को संस्कृत भाषा का जनक माना जाता है। उनकी रचना ‘अष्टाध्यायी’ विश्व प्रसिद्ध है। संसार का सबसे प्राचीन ग्रंथ कौन-सा है? […] - [Class VIII, Amrai, Kundaliyan (Verse) - Giridhar, ICSE Board, The Best Solutions](https://avinashsolutions.com/class-viii-amrai-kundaliyan-verse-giridhar-icse-board-the-best-solutions/): कुछ करके सीखिए कुछ करके सीखिए दिए गए चित्रों से संबंधित दोहे कक्षा में सुनाइए- डाल पर रहिमन ओछी डाल पर, बैठि न कीजै मोद। हल्की झोंक बयार की, डारत है झकझोर॥ माला पर माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर। कर का मनका डारि दे, मन का मनका फेर॥   कुंडलियों की व्याख्या कुंडलियों की व्याख्या 01 बिना विचारे जो करै, सो पाछे पछिताय। काम बिगारे आपनो, जग में होत हँसाय॥ जग में होत हँसाय, चित्त में चैन न पावै। खान पान सनमान, राग रंग मनहिं न भावै॥ कह ‘गिरिधर कविराय’ दुख कछु टरत न टारे। खटकत […] - [Class VIII, Amrai, Haathon Ka Mulya (One-act Play) - Dr. Ramkumar Varma, ICSE Board, The Best Solutions](https://avinashsolutions.com/class-viii-amrai-haathon-ka-mulya-dr-ramkumar-varma-icse-board-the-best-solutions/): कुछ करके सीखिए कुछ करके सीखिए नाम लिखिए- भारतीय श्वेत क्रांति के जनक – डॉ. वर्गीज कुरियन (Dr. Verghese Kurien) भारतीय हरित क्रांति के जनक – एम. एस. स्वामीनाथन (M. S. Swaminathan) विज्ञान के जनक – गैलीलियो गैलीली (Galileo Galilei) कंप्यूटर के जनक – चार्ल्स बैबेज (Charles Babbage) संस्कृत के जनक – महर्षि पाणिनि (Maharishi Panini) हाथों का मूल्य – सारांश हाथों का मूल्य – सारांश डॉ. रामकुमार वर्मा द्वारा लिखित एकांकी ‘हाथों का मूल्य’ स्वावलंबन, श्रम के महत्त्व और शिक्षित बेरोज़गारी की समस्या पर आधारित एक प्रेरणादायक नाटक है। यह समाज में व्याप्त उस मानसिकता पर चोट करता है […] - [Class VIII, Amrai, Gorky Institute (Story) - Vishnu Prabhakar, ICSE Board, The Best Solutions](https://avinashsolutions.com/class-viii-amrai-gorky-institute-story-vishnu-prabhakar-icse-board/): कुछ करके सीखिए कुछ करके सीखिए नीचे दी गई रचनाओं के रचनाकारों के नाम बताइए- गीतांजलि – रवींद्रनाथ टैगोर जिंदगीनामा – कृष्णा सोबती जंगलीबूटी – फणीश्वरनाथ रेणु गोदान – मुंशी प्रेमचंद बिखरे मोती – सुभद्रा कुमारी चौहान राष्ट्रकवि मैथलीशरण गुप्त की दो प्रसिद्ध रचनाओं के नाम लिखिए- साकेत भारत-भारती   गोर्की इंस्टिट्यूट – सारांश गोर्की इंस्टिट्यूट – सारांश विष्णु प्रभाकर द्वारा रचित यह यात्रा-वृत्तांत मास्को स्थित ‘गोर्की इंस्टिट्यूट’ महान रूसी साहित्यकार मैक्सिम गोर्की का निवास स्थान, की यात्रा का जीवंत वर्णन है। लेखक ने इस संस्मरण में गोर्की के व्यक्तित्व, उनकी सादगी और भारत के प्रति उनके अनजाने जुड़ाव को […] - [Class VIII, Amrai, Jaiv Vividhta (Article) - Kusum Agrawal, ICSE Board, The Best Solutions](https://avinashsolutions.com/class-viii-amrai-jaiv-vividhta-article-kusum-agrawal-icse-board/): कुछ करके सीखिए कुछ करके सीखिए भारत में जीवों की विलुप्त हो रही पाँच प्रजातियाँ बताइए- भारत की पाँच अत्यंत संकटग्रस्त (Endangered) प्रजातियाँ निम्नलिखित हैं – एशियाई शेर (Asiatic Lion) बंगाल टाइगर (Bengal Tiger) हिम तेंदुआ (Snow Leopard) एक सींग वाला गैंडा (One-horned Rhinoceros) कश्मीरी हिरण / हंगुल (Kashmiri Stag)   जैव विविधता – सारांश जैव विविधता – सारांश कुसुम अग्रवाल द्वारा लिखित पाठ ‘जैव विविधता’ (Biodiversity) भारत की प्राकृतिक संपदा, उसके महत्त्व और संरक्षण की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है। यह पाठ हमें बताता है कि पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व एक जटिल जाल की तरह है, जिसमें हर […] - [Class VIII, Amrai, Main Hoon Chittorgarh (Autobiography) - Dr. Naval Kishore Dubey, ICSE Board, The Best Solutions](https://avinashsolutions.com/class-viii-amrai-main-hoon-chittorgarh-autobiography-dr-naval-kishore-dubey/): कुछ करके सीखिए कुछ करके सीखिए विश्व प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर किस देश में है? विश्व प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर दक्षिण एशियाई देश नेपाल की राजधानी काठमांडू में स्थित है। यह भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल है। भारत के पाँच प्रसिद्ध किलों के नाम बताइए- भारत के पाँच प्रसिद्ध किलों के नाम निम्नलिखित हैं: लाल किला (Red Fort) — दिल्ली चित्तौड़गढ़ किला (Chittorgarh Fort) — राजस्थान ग्वालियर किला (Gwalior Fort) — मध्य प्रदेश मेहरानगढ़ किला (Mehrangarh Fort) — जोधपुर, राजस्थान आमेर का किला (Amer Fort) — जयपुर, राजस्थान   मैं हूँ चित्तौड़ – सारांश मैं हूँ चित्तौड़ – […] - [Class VIII, Amrai, Gaate Ho Taru (Poem) - Makhanlal Chaturvedi, ICSE Board, The Best Solutions](https://avinashsolutions.com/class-viii-amrai-gaate-ho-taru-poem-makhanlal-chaturvedi-icse-board/): कुछ करके सीखिए कुछ करके सीखिए कविता पूरी कीजिए- पेड़ लगाओ, पेड़ लगाओ, हरा-भरा धरा को बनाओ। फल, छाया ये हमको देते, दूर प्रदूषण को ये करते। हम भी पेड़ लगाएँगे, प्यारी धरा को बचाएँगे। गाते हो तरु – सप्रसंग व्याख्या गाते हो तरु – सप्रसंग व्याख्या पंडित माखनलाल चतुर्वेदी द्वारा रचित यह कविता ‘चिर सुगंध तरु’ के माध्यम से धैर्य, परोपकार और समभाव का संदेश देती है। प्रथम पद सह सह कर ऋतुओं की मारें हर क्षण हरषाना चिर सुगंध तरु, गाते हो, कितना जाग्रत गाना! भावार्थ – कवि कहते हैं कि हे वृक्ष! तुम ग्रीष्म, वर्षा और शीत […] - [Class VIII, Amrai, Daawat Ki Adaawat (Satire) - Annapurnanand Varma, ICSE Board, The Best Solutions](https://avinashsolutions.com/class-viii-amrai-daawat-ki-adaawat-satire-annapurnanand-varma-icse-board/): कुछ करके सीखिए कुछ करके सीखिए शब्द सीढ़ी बनाइए- दोस्त – तीन – नल – लगाम – मशहूर  दावत – तसवीर – रमेश – शलगम – मर्जी दावत की अदावत – सारांश दावत की अदावत – सारांश अन्नपूर्णानंद वर्मा द्वारा रचित कहानी ‘दावत की अदावत’ एक हास्य प्रधान कहानी है, जो मित्रों के बीच होने वाली शरारतों और ‘जैसे को तैसा’ (Tit for Tat) के सिद्धांत पर आधारित है। लेखक की दुर्दशा और मित्रों का धोखा कहानी की शुरुआत लेखक की एक कठिन यात्रा से होती है। लेखक के मित्रों मुरारी, मुरली और माधो ने उन्हें एक बाग में दावत […] - [Class VIII, Amrai, Assam Ki Shaan: Dr. Bhupen Hazarika (Biography) , ICSE Board, The Best Solutions](https://avinashsolutions.com/class-viii-amrai-assam-ki-shaan-dr-bhupen-hazarika-biography-icse-board-the-best-solutions/): कुछ करके सीखिए कुछ करके सीखिए इन नाटकों के रचनाकार के चित्र नाम सहित बॉक्स चिपकाइए- महाभोज – मन्नू भंडारी अँधेर नगरी – भारतेंदु हरिश्चंद्र असम की शान  – डॉ. भूपेन हजारिका – सारांश असम की शान  – डॉ. भूपेन हजारिका – सारांश प्रस्तावना – एक बहुमुखी व्यक्तित्व डॉ. भूपेन हजारिका दक्षिण एशिया के एक महान सांस्कृतिक दूत और विलक्षण कलाकार थे। वे केवल एक गायक ही नहीं, बल्कि एक कवि, संगीतकार, पत्रकार और बेहतरीन फिल्म निर्माता भी थे। उन्होंने अपनी कला और संगीत के माध्यम से न केवल असम को, बल्कि पूरे देश को मानवतावाद का संदेश दिया। उनके […] - [Class VIII, Amrai, Kya Kare Meenu (Story) - Usha Mahajan, ICSE Board, The Best Solutions](https://avinashsolutions.com/class-viii-amrai-kya-kare-meenu-story-usha-mahajan-icse-board-the-best-solutions/): कुछ करके सीखिए कुछ करके सीखिए भारतीय महिलाओं ने विभिन्न क्षेत्रों में अपना और देश का नाम रोशन किया है। ये किन क्षेत्रों से संबंधित हैं, बताइए- कार्यक्षेत्र – पहली महिला बचेंद्री पाल पर्वतारोहण (Mountaineering) के क्षेत्र से संबंधित हैं, जबकि दूसरी महिला किरण बेदी प्रशासनिक सेवा (IPS) और लोक सेवा के क्षेत्र से संबंधित हैं। ऐतिहासिक उपलब्धि – बचेंद्री पाल माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुँचने वाली पहली भारतीय महिला हैं, जिन्होंने 1984 में यह गौरव हासिल किया। प्रथम महिला अधिकारी – किरण बेदी भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में शामिल होने वाली भारत की पहली महिला अधिकारी हैं, जिन्होंने […] - [Class VIII, Amrai, Himalaya Aur Hum (Poem) - Gopal Singh 'Nepali', ICSE Board, The Best Solutions,](https://avinashsolutions.com/class-viii-amrai-himalaya-aur-hum-poem-gopal-singh-nepali/): कुछ करके सीखिए कुछ करके सीखिए चित्र को पहचानकर इसकी उपयोगिता बताइए- पवन चक्कियों (Windmills) की उपयोगिता – पवन चक्कियाँ हवा की ऊर्जा से बिजली बनाती हैं। यह ऊर्जा का स्वच्छ और नवीकरणीय स्रोत है। इससे प्रदूषण नहीं होता, इसलिए पर्यावरण सुरक्षित रहता है। ग्रामीण और दूर-दराज़ क्षेत्रों में बिजली पहुँचाने में मदद मिलती है। यह जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता को कम करती है। हिमालय और हम – सप्रसंग व्याख्या हिमालय और हम – सप्रसंग व्याख्या प्रसिद्ध कवि गोपाल सिंह ‘नेपाली’ द्वारा रचित कविता ‘हिमालय और हम’ राष्ट्रप्रेम और गौरव की भावना से ओत-प्रोत है। इस कविता में कवि ने […] - [Amrai Class VIII](https://avinashsolutions.com/amrai-class-viii-the-best-solutions-of-all-the-chapters/): 1,हिमालय और हम (कविता) – गोपाल सिंह ‘नेपाली’,Class VIII, Amrai, Himalaya Aur Hum (Poem) – Gopal Singh ‘Nepali’, ICSE Board, The Best Solutions, 2,क्या करे मीनू (कहानी) – उषा महाजन, Class VIII, Amrai, Kya Kare Meenu (Story) – Usha Mahajan, ICSE Board, The Best Solutions 3,असम की शान: डॉ. भूपेन हजारिका (जीवनी), Class VIII, Amrai, Assam Ki Shaan: Dr. Bhupen Hazarika (Biography) , ICSE Board, The Best Solutions 4,दावत की अदावत (हास्य-व्यंग्य) – अन्नपूर्णानंद वर्मा, Class VIII, Amrai, Daawat Ki Adaawat (Satire) – Annapurnanand Varma, ICSE Board, The Best Solutions 5,गाते हो तरु (कविता) – माखनलाल चतुर्वेदी, Class VIII, Amrai, […] - [6. ICSE, Class, IX and X, Ekanki Sanchay, Chapter - Deepdan, Dr. Ramkumar Varma, The Best Solutions,  दीपदान, डॉ० रामकुमार वर्मा](https://avinashsolutions.com/6-icse-class-ix-and-x-ekanki-sanchay-chapter-deepdan-dr-ramkumar-varma-the-best-solutions/): डॉ० रामकुमार वर्मा – एकांकीकार का परिचय डॉ० रामकुमार वर्मा – एकांकीकार का परिचय डॉ॰ रामकुमार वर्मा का जन्म 15 सितंबर, सन् 1905 को मध्य प्रदेश के सागर ज़िले में हुआ था। इनकी प्रारंभिक शिक्षा सागर में तथा उच्च शिक्षा प्रयाग विश्वविद्यालय में हुई। नागपुर विश्वविद्यालय से इन्होंने पी एच०डी० की उपाधि प्राप्त की। वर्मा जी प्रयाग विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के अध्यक्ष भी रहे। सन् 1963 में भारत सरकार से इन्हें पद्म भूषण की उपाधि से अलंकृत किया। छात्रावस्था से ही ये रंगमंच से जुड़ गए थे इसलिए इनके नाटकों तथा एकांकियों में अभिनेयता का गुण प्रचुर मात्रा में […] - [ICSE, Class, IX and X, Ekanki Sanchay, Chapter - Mahabharat Ki Ek Saanjh, Bharat Bhushan Agarwal, The Best Solutions,   महाभारत की एक साँझ, भारत भूषण अग्रवाल](https://avinashsolutions.com/5-icse-class-ix-and-x-ekanki-sanchay-chapter-mahabharat-ki-ek-saanjh-bharat-bhushan-agarwal/): भारत भूषण अग्रवाल – एकांकीकार का परिचय भारत भूषण अग्रवाल – एकांकीकार का परिचय भारत भूषण अग्रवाल बहुमुखी प्रतिभा के धनी साहित्यकार थे। इनका जन्म सन् 1910 में और मृत्यु सन् 1975 में हुई। मुख्य रूप से ये कवि थे। इन्होंने नाटक, एकांकी, उपन्यास, निबंध, आलोचना आदि सभी क्षेत्रों में रचनाएँ कीं। भारत भूषण जी की भाषा-शैली अत्यंत प्रभावशाली तथा सरस है। ये विषय- वस्तु को अनूठे तथा सर्वथा नवीन ढंग से प्रस्तुत करने में सिद्धहस्त हैं। एकांकी का कथानक एकांकी का कथानक डॉ. रामकुमार वर्मा द्वारा रचित एकांकी ‘महाभारत की एक साँझ’ महाभारत युद्ध के अंतिम दिन की घटनाओं […] - [ICSE, Class, IX and X, Ekanki Sanchay, Chapter - Sukhi Dali, Upendranath 'Ashk', The Best Solutions,   सूखी डाली, उपेंद्रनाथ 'अश्क'](https://avinashsolutions.com/4-icse-class-ix-and-x-ekanki-sanchay-chapter-sukhi-dali-upendranath-ashk-the-best-solutions/): उपेन्द्रनाथ अश्क – लेखक परिचय उपेन्द्रनाथ अश्क – लेखक परिचय (सन् 1910-1996) हिंदी साहित्य को आधुनिक भावबोध से जोड़ने वाले रचनाकारों में उपेन्द्रनाथ अश्क का विशिष्ट स्थान है। इनका जन्म 14 दिसंबर, 1910 ई. को जालंधर में हुआ। ये एक सफल कहानीकार व उपन्यासकार ही नहीं, एक प्रतिभाशाली एकांकीकार भी हैं। यूँ तो इनके एकांकियों की विषयवस्तु जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से ली गई है परंतु ‘पारिवारिक जीवन’ इनका मुख्य क्षेत्र है। अभिनेयता के प्रति अश्क जी काफी सजग रहे हैं, इसी उद्देश्य से उन्होंने लंबे ‘रंग-निर्देश भी दिए हैं, इसीलिए इनके प्रायः सभी एकांकी सफलतापूर्वक मंच पर खेले जा […] - [ICSE, Class, IX and X, Ekanki Sanchay, Chapter - Matribhumi Ka Maan, Harikrishna ‘Premi’, The Best Solutions,   मातृभूमि का मान, हरिकृष्ण ‘प्रेमी’](https://avinashsolutions.com/3-icse-class-ix-and-x-ekanki-sanchay-chapter-matribhumi-ka-maan-harikrishna-premi-the-best-solutions/): हरिकृष्ण ‘प्रेमी’ – एकांकीकार का परिचय हरिकृष्ण ‘प्रेमी’ – एकांकीकार का परिचय श्री हरिकृष्ण ‘प्रेमी’ का जन्म मध्य प्रदेश के गुना शहर में सन् 1908 में हुआ। इन्होंने अपने साहित्यिक जीवन की शुरुआत एक पत्रकार के रूप में की। प्रेमी जी एक लोकप्रिय और सफल नाटककार हैं। आप के प्रसिद्ध नाटक हैं- ‘बंधन’, ‘छाया’,’ममता’,‘पाताल विजय’, ‘रक्षा बंधन’, ‘शिवासाधना’, ‘प्रतिशोध’, ‘आहुति’, ‘विषपान’ आदि। प्रेमी जी के एकांकियों में – ‘बेड़ियाँ’, ‘बादलों के पार’, ‘वाणी मंदिर’, ‘नया समाज’, ‘मातृभूमि का मान’, ‘निष्ठुर न्याय’ आदि। इनके नाटक सामाजिक, ऐतिहासिक तथा पौराणिक हैं। इन्होंने अपनी रचनाओं में मानवीय प्रेम, देशभक्ति, राष्ट्रीयता, वीरता, साहस, पराक्रम […] - [ICSE, Class, IX and X, Ekanki Sanchay, Chapter - Bahu Ki Vida, Vinod Rastogi, The Best Solutions,  बहू की विदा, विनोद रस्तोगी](https://avinashsolutions.com/2-icse-class-ix-and-x-ekanki-sanchay-chapter-bahu-ki-vida-vinod-rastogi-the-best-solutions/): विनोद रस्तोगी – एकांकीकार का परिचय विनोद रस्तोगी – एकांकीकार का परिचय विनोद रस्तोगी का जन्म सन् 1923 में उत्तर प्रदेश के फ़र्रूख़ाबाद जिले के शमसाबाद नामक गाँव में हुआ। आपकी आरंभिक शिक्षा फ़र्रुखाबाद में तथा स्नातक स्तर की शिक्षा कानपुर में हुई। हिंदी विषय में एम. ए. के बाद रस्तोगी जी आकाशवाणी के इलाहाबाद केंद्र में नाट्य निर्देशक के पद पर कार्य करने लगे। आपने नाट्य- साहित्य के क्षेत्र में प्रवेश किया। अब तक आपके आठ उपन्यास तथा दो कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। आपकी अनेक रचनाएँ पुरस्कृत की जा चुकी हैं। ‘नए हाथ’, ‘आज़ादी के बाद’, ‘बर्फ़ […] - [ICSE, Class, IX and X, Ekanki Sanchay, Chapter - Sanskar Aur Bhavna, Vishnu Prabhakar, The Best Solutions,  संस्कार और भावना, विष्णु प्रभाकर](https://avinashsolutions.com/1-icse-class-ix-and-x-ekanki-sanchay-chapter-sanskar-aur-bhavna-vishnu-prabhakar-the-best-solutions/): विष्णु प्रभाकर – एकांकीकार का परिचय विष्णु प्रभाकर – एकांकीकार का परिचय श्री विष्णु प्रभाकर का जन्म उत्तर प्रदेश में 21 जून, सन् 1912 में हुआ। आपने प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करके स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की। कुछ समय तक इन्होंने पंजाब सरकार के कृषि विभाग में कार्य किया, पर बाद में ये नौकरी छोड़कर लेखन-कार्य में संलग्न हो गए। श्री विष्णु प्रभाकर बहुमुखी प्रतिभासंपन्न साहित्यकार थे। इन्होंने साहित्य की अनेक विधाओं; जैसे – कहानी, उपन्यास, नाटक, एकांकी आदि पर अपनी लेखनी चलाई। 11 अप्रैल, सन् 2009 को इनका देहांत हो गया। प्रभाकर जी की सभी रचनाओं में मानवतावादी दृष्टिकोण मुखरित […] - [ICSE, Class, IX and X, Sahitya Sagar, Chapter - Matri Mandir Ki Or, Subhadra Kumari Chauhan, मातृ मंदिर की ओर, सुभद्रा कुमारी चौहान](https://avinashsolutions.com/icse-class-ix-and-x-sahitya-sagar-chapter-matri-mandir-ki-ore-subhadra-kumari-chauhan/): कवयित्री परिचय – सुभद्रा कुमारी चौहान सुभद्रा कुमारी चौहान सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म सन् 1904 में प्रयाग (इलाहाबाद) में हुआ। इनकी कविताओं तथा कहानियों पर देशभक्ति की भावना की गहरी छाप है। ये मध्य प्रदेश की विधान सभा (असेंबली) की सदस्या भी रहीं। सन् 1947 में मोटर दुर्घटना में इनका देहांत हो गया। इनकी ‘खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी’ कविता उत्तर भारत के घर-घर में गाई जाती है। अपनी कहानियों में इन्होंने गरीब, पीड़ित, शोषित जनता के प्रति गहरी सहानुभूति प्रकट की है। इनकी कहानियाँ सीधी-सादी हैं, उनमें घटनाओं या विचारों का टेढ़ा-मेढ़ा, तोड़-मोड़ नहीं है, […] - [ICSE, Class, IX and X, Sahitya Sagar, Chapter - Chalna Humara Kaam Hai, Shivmangal Singh 'Suman', चलना हमारा काम है, शिवमंगल सिंह 'सुमन'](https://avinashsolutions.com/icse-class-ix-and-x-sahitya-sagar-chapter-chalna-humara-kaam-hai-shivmangal-singh-suman/): कवि परिचय – सर्वेश्वर दयाल सक्सेना शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ श्री शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ का जन्म उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के झगरपुर नामक गाँव में 14 अगस्त, सन् 1915 में हुआ। ‘सुमन’ जी हाई स्कूल के अध्यापक के पद से लेकर, हिंदी के प्राध्यापक, महाविद्यालय के प्राचार्य तथा विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के उपकुलपति पद कार्यरत रहे। ये कुछ समय तक नेपाल में भारतीय दूतावास के सांस्कृतिक सचिव भी रहे। इन्होंने साधारण शोषित मानव की पीड़ा और निराशा को अपनी रचनाओं में स्थान दिया है। दूसरी ओर एकांत क्षणों की कोमल तथा मधुर अनुभूतियों को भी अपने गीतों में स्थान दिया है। […] - [ICSE, Class, IX and X, Sahitya Sagar, Chapter - Bhikshuk, Suryakant Tripathi 'Nirala', भिक्षुक, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'](https://avinashsolutions.com/icse-class-ix-and-x-sahitya-sagar-chapter-bhikshuk-suryakant-tripathi-nirala/): कवि परिचय -सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जन्म सन् 1897 ई० में बंगाल के मेदिनीपुर जिले में हुआ। इन्होंने बाँग्ला, अंग्रेजी, संस्कृत और हिंदी हाई स्कूल की कक्षा तक आते-आते सीख ली। निराला जी का पारिवारिक जीवन कष्टमय रहा। सन् 1916 में इन्होंने ‘जूही की कली’ की रचना की। 1922 में रामकृष्णमिशन के पत्र ‘समन्वय’ का संपादन किया और 1923-24 में ‘मतवाला’ का संपादन किया। तीन वर्ष बाद ये लखनऊ आ गए और ‘गंगा पुस्तक माला’ का संपादन करने लगे। ये स्वभाव से विद्रोही तथा निर्भीक थे। ये बहुत स्पष्टवादी थे। निराला जी बहुमुखी […] - [ICSE, Class, IX and X, Sahitya Sagar, Chapter - Vinay Ke Pad, Tulsidas, विनय के पद, तुलसीदास](https://avinashsolutions.com/icse-class-ix-and-x-sahitya-sagar-chapter-vinay-ke-pad-tulsidas/): कवि परिचय – तुलसीदास तुलसीदास गोस्वामी तुलसीदास जी भक्तिकाल की सगुण धारा के मुख्य प्रर्वत्तक माने जाते हैं। अधिकांश विद्वान मानते हैं कि इनका जन्म उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले के राजापुर नामक गाँव में सन् 1532 में हुआ था। गुरु नरहरिदास इनके गुरु थे, जिन्होंने इन्हें वेद, पुराण तथा अन्य शास्त्रों का अध्ययन करवाया। इनकी मृत्यु सन् 1623 में हुई। तुलसीदास राम के अनन्य भक्त थे। संवत् 1631 में इन्होंने ‘रामचरितमानस’ की रचना प्रारंभ की। इसके अतिरिक्त ‘दोहावली’, ‘गीतावली’, ‘कवितावली’, ‘विनयपत्रिका’, ‘जानकी मंगल’, ‘पार्वती मंगल’, ‘वैराग्य संदीपनी’, ’बरवै रामायण’, ‘हनुमान बाहुक’ आदि इनके प्रमुख ग्रंथ हैं। तुलसीदास जी की भाषा […] - [ICSE, Class, IX and X, Sahitya Sagar, Chapter - Sur Ke Pad, Surdas, सूर के पद, सूरदास](https://avinashsolutions.com/icse-class-ix-and-x-sahitya-sagar-chapter-sur-ke-pad-surdas/): कवि परिचय -सूरदास सूरदास हिंदी की कृष्ण भक्ति शाखा के कवियों में सूरदास का नाम सर्वोपरि है। सूरदास का जन्म सन् 1478 में मथुरा के निकट सनकता या रेणुका क्षेत्र में माना जाता है। सूरदास महाप्रभु वल्लभाचार्य के शिष्य थे। इनका निधन पारसौली में सन् 1583 में माना जाता है। कुछ लोगों का मानना है कि सूरदास जन्मांध थे। सूरदास के तीन ग्रंथों-‘सूरसागर’, ‘साहित्य लहरी’ और ‘सूर सारावली’ में सूरसागर सर्वाधिक प्रसिद्ध है जिसका आधार ‘श्रीमद्भावगत’ है। सूरदास ने अपनी रचनाओं में कृष्ण की विविध लीलाओं का वर्णन किया है। सूरदास वात्सल्य रस के सम्राट माने जाते हैं। सूरदास ने […] - [ICSE, Class, IX and X, Sahitya Sagar, Chapter - Megh Aaye, Sarveshwar Dayal Saxena, मेघ आए, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना](https://avinashsolutions.com/icse-class-ix-and-x-sahitya-sagar-chapter-megh-aaye-sarveshwar-dayal-saxena/): कवि परिचय – सर्वेश्वर दयाल सक्सेना सर्वेश्वर दयाल सक्सेना नयी कविता के विख्यात कवि श्री सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का जन्म उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में 15 सितंबर 1927 ई. को हुआ। सन् 1965 में इन्होंने ‘दिनमान’ साप्ताहिक पत्रिका के उपसंपादक के पद पर कार्य किया। इसके बाद इन्हें बच्चों की प्रसिद्ध एवं लोकप्रिय मासिक पत्रिका ‘पराग’ के संपादन की जिम्मेदारी मिली, जिसका अत्यंत सफलतापूर्वक वहन किया। सन् 1983 में इनका आकस्मिक निधन हो गया, जो साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति थी। इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं – ‘काठ की घंटियाँ’, ‘बाँस का पुल’, ‘गर्म हवाएँ’, ‘एक सूनी नाव’, ‘कुआवो नदी’, […] - [ICSE, Class, IX and X, Sahitya Sagar, Chapter - Wah Janmabhoomi Meri, Sohanlal Dwivedi, वह जन्मभूमि मेरी, सोहनलाल द्विवेदी](https://avinashsolutions.com/icse-class-ix-and-x-sahitya-sagar-chapter-wah-janmabhoomi-meri-sohanlal-dwivedi/): कवि परिचय – सोहनलाल द्विवेदी सोहनलाल द्विवेदी श्री सोहनलाल द्विवेदी का जन्म सन् 1905 में उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के एक गाँव में एक संपन्न परिवार में हुआ। 1938 से 1942 तक ये दैनिक राष्ट्रीय पत्र ‘अधिकार’ का लखनऊ से संपादन करते रहे। ‘भैरवी’, ‘सेवाग्राम’, ‘जय भारत जय’ आदि में इनकी कविताएँ संकलित हैं। ‘कुणाल’ ऐतिहासिक आधार पर लिखा गया एक प्रबंध काव्य है। ‘वासवदत्ता’ और ‘विषपान’ भी इनके प्रसिद्ध आख्यान काव्य है।   द्विवेदी जी ने बालोपयोगी कविताएँ भी लिखी हैं। ‘दूध बताशा’, ‘बालभारती’, ‘बाँसुरी और झरना’, ‘बच्चों के बापू’, ‘शिशु भारती’, ‘हँसो- हँसाओ ́, ‘चाचा नेहरू’ इनके बालोपयोगी […] - [ICSE, Class, IX and X, Sahitya Sagar, Chapter - Swarg Bana Sakte Hain, Ramdhari Singh 'Dinkar', स्वर्ग बना सकते हैं, रामधारी सिंह 'दिनकर'](https://avinashsolutions.com/icse-class-ix-and-x-sahitya-sagar-chapter-swarg-bana-sakte-hain-ramdhari-singh-dinkar/): कवि परिचय – रामधारी सिंह ‘दिनकर’ रामधारी सिंह ‘दिनकर’ श्री रामधारी सिंह दिनकर का जन्म 30 सिंतबर 1908 को बिहार के मुंगेर जिले में सिमरिया गाँव में एक कृषक परिवार में हुआ। मैट्रिक की परीक्षा में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने पर इन्हें ‘भूदेव स्वर्णपदक’ मिला। सन् 1950 में ये एक स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हिंदी विभाग के अध्यक्ष बने। ये राज्य सभा के सदस्य भी रहे। भारत सरकार ने इन्हें ‘पद्म भूषण’ से अलंकृत किया। 24 अप्रैल 1974 को इनका निधन हो गया। दिनकर जी ने गद्य तथा पद्य दोनों प्रकार की रचनाएँ लिखीं। इनके काव्य ‘उर्वशी’ पर इन्हें ‘भारतीय ज्ञानपीठ’ पुरस्कार […] - [ICSE, Class, IX and X, Sahitya Sagar, Chapter - Giridhar Ki Kundaliyan, Giridhar Kaviray, गिरिधर की कुंडलियाँ, गिरिधर कविराय](https://avinashsolutions.com/icse-class-ix-and-x-sahitya-sagar-chapter-giridhar-ki-kundaliyan-giridhar-kaviray/): कवि परिचय – गिरिधर कविराय कवि परिचय – गिरिधर कविराय गिरिधर कविराय के जीवन के बारे में अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। श्री शिव सिंह ने उनका जन्म संवत् 1770 दिया है। उनका कविता – काल संवत् 1800 के उपरांत ही माना जा सकता है। गिरिधर कवि ने नीति, वैराग्य और अध्यात्म को ही अपनी कविता का विषय बनाया है। जीवन के व्यावहारिक पक्ष का इनके काव्य में प्रभावशाली वर्णन मिलता है जिसकी पैठ जनमानस में बहुत गहरी है। इसीलिए इनकी नीति-संबंधी कुंडलियाँ जनमानस में बहुत लोकप्रिय हैं। इस लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण है बिल्कुल सरल, सहज, व्यावहारिक तथा सीधी-सादी […] - [ICSE, Class, IX and X, Sahitya Sagar, Chapter - Sakhi, Kabirdas, साखी, कबीरदास](https://avinashsolutions.com/icse-class-ix-and-x-sahitya-sagar-chapter-sakhi-kabirdas/): कवि परिचय – कबीरदास कवि परिचय – कबीरदास हिंदी के संत कवियों में कबीरदास का सर्वोच्च स्थान है। कबीर हिंदी की संत काव्यधारा की ज्ञानाश्रयी निर्गुण शाखा के प्रमुख कवि हैं। इनका जन्म संवत् 1455 (सन् 1398) को माना जाता है। इनकी मृत्यु के विषय में भी विवाद है, किंतु अधिकतर विद्वानों ने इसे सन् 1495 माना है। कबीर ने प्रसिद्ध वैष्णव संत स्वामी रामानंद से दीक्षा ली। कुछ लोग इन्हें सूफी संत शेख तकी का शिष्य भी मानते हैं। कबीर पढ़े-लिखे नहीं थे। उनके पदों और साखियों में एक समाज- सुधारक का निर्भीक स्वर सुनाई पड़ता है। कबीर निर्गुण तथा निराकार […] - [ICSE, Class, IX and X, Sahitya Sagar, Chapter - Do Kalakar, Mannu Bhandari, दो कलाकार, मन्नू भंडारी](https://avinashsolutions.com/icse-class-ix-and-x-sahitya-sagar-chapter-do-kalakar-mannu-bhandari/): मन्नू भंडारी – लेखिका परिचय मन्नू भंडारी – लेखिका परिचय (सन् 1931-2021) मन्नू भंडारी नई कहानी की एक प्रसिद्ध लेखिका हैं। आपके उपन्यास और कहानियाँ मानवीय भावनाओं को स्पर्श करते हैं। आपका जन्म 3 अप्रैल 1931 में भानपुर मध्यप्रदेश में हुआ। आपकी विद्यालय स्तर की शिक्षा अजमेर में हुई जबकि स्नातक स्तर की परीक्षा आपने कलकत्ता विश्वविद्यालय से 1949 में उत्तीर्ण की। आपका विवाह हिंदी के प्रसिद्ध कथाकार श्री राजेन्द्र यादव से हुआ आपने अपने पति श्री राजेन्द्र यादव के साथ मिलकर एक ‘इंच मुस्कान’ की रचना की! आपकी प्रसिद्ध रचनाओं में ‘आपका बंटी’ और ‘महाभोज’ ने बहुत ख्याति प्राप्त […] - [ICSE, Class, IX and X, Sahitya Sagar, Chapter - Bheden Aur Bhediye, Harishankar Parsai, भेड़ें और भेड़िए, हरिशंकर परसाई](https://avinashsolutions.com/icse-class-ix-and-x-sahitya-sagar-chapter-bheden-aur-bhediye-harishankar-parsai/): लेखक परिचय  – हरिशंकर परसाई लेखक परिचय  – हरिशंकर परसाई हिंदी साहित्य में हास्य-व्यंग्य विधा को नया रूप और नया आयाम देने वाले हरिशंकर परसाई जी का जन्म 22 अगस्त 1924 ई. को मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले के जमानी गाँव में हुआ था। गाँव से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे नागपुर चले आये थे। मात्र अठारह वर्ष की उम्र में हरिशंकर परसाई ने ‘जंगल विभाग’ में नौकरी की। पिता की बीमारी के कारण परिवार की आजीविका के लिए इन्हें नौकरी करनी पड़ी। नागपुर विश्वविद्यालय से हिंदी में एम. ए. करने के बाद उन्होंने अनेक स्थानों पर अध्यापन कार्य […] - [ICSE, Class, IX and X, Sahitya Sagar, Chapter – Bheed Me Khoya Aadmi, Leeladhar Sharma Parwateeya, भीड़ में खोया आदमी, लीलाधर शर्मा पर्वतीय](https://avinashsolutions.com/icse-class-ix-and-x-sahitya-sagar-chapter-bheed-me-khoya-aadmi-leeladhar-sharma-parwateeya/): लेखक परिचय – लीलाधर शर्मा पर्वतीय लेखक परिचय – लीलाधर शर्मा पर्वतीय लीलाधर शर्मा पर्वतीय का जन्म 1 जनवरी 1919 को अल्मोड़ा, उत्तर प्रदेश के किसान परिवार में हुआ। विद्यार्थी जीवन में प्रेमचंद के उपन्यासों को पढ़कर कांग्रेस के सक्रिय सदस्य बन गए। अतः बीच-बीच में जेल – यात्राओं के कारण नियमित अध्ययन खंडित होता रहा। बाद में काशी विद्यापीठ वाराणसी से उन्होंने शास्त्री परीक्षा उत्तीर्ण की। द्वितीय विश्व युद्ध के आरंभ होते ही उनको पुनः गिरफ्तार कर लिया गया। वहाँ जेल में भी उन्होंने अपना अध्ययनक्रम बनाएँ रखा। स्वाधीन भारत में उन्होंने विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं का संपादन कर पत्रकारिता के […] - [ICSE, Class, IX and X, Sahitya Sagar, Chapter - Sandeh, Jaishankar Prasad, संदेह, जयशंकर प्रसाद](https://avinashsolutions.com/icse-class-ix-and-x-sahitya-sagar-chapter-sandeh-jaishankar-prasad/): लेखक परिचय – जयशंकर प्रसाद लेखक परिचय – जयशंकर प्रसाद श्री जयशंकर प्रसाद का जन्म काशी के एक प्रतिष्ठित वैश्य परिवार में सन् 1889 को हुआ। घर पर ही इन्होंने अंग्रेज़ी, संस्कृत, हिंदी, उर्दू तथा फ़ारसी भाषाओं का गहन अध्ययन किया। 1937 में 48 वर्ष की अल्पायु में इनका निधन हो गया। बचपन से ही इन्हें कविता के प्रति गहरा अनुराग था। प्रारंभ में इन्होंने, ब्रज भाषा में काव्य-रचना की, पर बाद में खड़ी बोली को अपनाया। प्रसाद जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। कविता के अतिरिक्त इन्होंने नाटक, उपन्यास, कहानियाँ भी लिखी हैं। ‘अजातशत्रु’, ‘चंद्रगुप्त’, ‘धुवस्वामिनी’ – इनके प्रसिद्ध […] - [ICSE, Class, IX and X, Sahitya Sagar, Chapter - Bade Ghar Ki Beti, Premchand, बड़े घर की बेटी, प्रेमचंद](https://avinashsolutions.com/icse-class-ix-and-x-sahitya-sagar-chapter-bade-ghar-ki-beti-premchand/): लेखक परिचय – प्रेमचंद लेखक परिचय – प्रेमचंद हिंदी के उपन्यास सम्राट् के नाम से विख्यात मुंशी प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई, 1880 को वाराणसी के पास लमही नामक गाँव में हुआ। इनका वास्तविक नाम धनपतराय था। इनका बचपन आर्थिक संकटों में बीता। पिता की मृत्यु के बाद इन्हें प्राइमरी विद्यालय में शिक्षक की नौकरी करनी पड़ी। नौकरी करते-करते इन्होंने बी. ए. की परीक्षा उत्तीर्ण की तथा अध्यापक से सबडिप्टी इंस्पैक्टर ऑफ स्कूल्स के पद पर भी पहुँचे। बाद में इन्होंने नौकरी छोड़ दी और स्वतंत्र रूप से साहित्य सृजन में जुट गए। प्रेमचंद ने हिंदी को अनेक उत्कृष्ट उपन्यास […] - [ICSE, Class, IX and X, Sahitya Sagar, Chapter - Apna-Apna Bhagya, Jainendra Kumar, अपना-अपना भाग्य, जैनेंद्र कुमार](https://avinashsolutions.com/icse-class-ix-and-x-sahitya-sagar-chapter-apna-apna-bhagya-jainendra-kumar/): लेखक परिचय –  जैनेंद्र कुमार लेखक परिचय – जैनेंद्र कुमार श्री जैनेंद्र कुमार का जन्म अलीगढ़ जिले में कोड़ियागंज नामक कस्बे में सन् 1905 में हुआ। जैनेंद्र की रचनाओं पर गांधीवाद का बहुत प्रभाव पड़ा। ये अहिंसावादी और दार्शनिक थे। मुख्य रूप से तो ये कहानीकार थे, पर इन्होंने निबंध, उपन्यास और संस्मरण भी लिखे हैं। ‘सुनीता’, ‘सुखदा’, ‘मुक्तिबोध’ इनके प्रसिद्ध उपन्यास, ‘साहित्य का श्रेय और प्रेय’, ‘मंथन’ – प्रसिद्ध निबंध संग्रह तथा ‘फाँसी’, ‘जय संधि’, ‘वातायन’, ‘नीलम देश की राजकन्या’, ‘एक रात’, ‘दो चिड़ियाँ’, ‘पाजेब’ इनके प्रसिद्ध कहानी संग्रह हैं। इनकी कहानियों में कहानी कला को नया आयाम मिला है, […] - [ICSE, Class, IX and X, Sahitya Sagar, Chapter - Netaji Ka Chashma, Swayam Prakash, नेता जी का चश्मा, स्वयं प्रकाश](https://avinashsolutions.com/icse-class-ix-and-x-sahitya-sagar-chapter-netaji-ka-chashma-swayam-prakash/): लेखक परिचय – स्वयं प्रकाश लेखक परिचय – स्वयं प्रकाश स्वयं प्रकाश का जन्म 20 जनवरी 1947 को मध्य प्रदेश के इंदौर नामक शहर में हुआ। आजकल आप भोपाल में रहकर साहित्य-सृजन कर रहे हैं तथा ‘वसुधा’ पत्रिका के संपादन से जुड़े हैं। स्वयं प्रकाश जी एक सशक्त उपन्यासकार तथा कहानीकार हैं। अब तक उनके तेरह कहानी संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। इनमें सूरज कब निकलेगा’, ‘आएँगे अच्छे दिन भी’ तथा ‘आदमी जात का आदमी’ बहुचर्चित हैं। इनकी कहानियों का अनुवाद रूसी भाषा में भी हुआ है। उनके विनय और ईंधन उपन्यास भी अत्यंत लोकप्रिय हैं। ‘हमसफ़रनामा’ इनके रेखाचित्रों का संकलन […] - [ICSE, Class, IX and X, Sahitya Sagar, Chapter - Mahayagya Ka Puraskar, Yashpal, महायज्ञ का पुरस्कार, यशपाल](https://avinashsolutions.com/icse-class-ix-and-x-sahitya-sagar-chapter-mahayagya-ka-puraskar-yashpal/): लेखक परिचय – यशपाल लेखक परिचय – यशपाल स्वातंत्र्य संग्राम में क्रांति सेनानी रहे यशपाल हिंदी साहित्य के भी यशस्वी कथाकार और निबंधकार हैं। इनका जन्म 3 दिसंबर 1903 ई. में फिरोजपुर छावनी में हुआ था। विद्यार्थी जीवन से ही इनका परिचय क्रांतिकारी दल से हो गया था। इन्होंने ‘विप्लव’ नामक पत्र निकाला तथा साहित्य-सृजन में जुट गए। 26 दिसंबर 1976 को इनका निधन हो गया। उन दिनों की लिखी कहानियों का प्रथम संग्रह ‘पिंजरे की उड़ान’ नाम से प्रकाशित हुआ। इनके अन्य प्रमुख कहानी संग्रह हैं ‘ज्ञानदान’, ‘अभिशप्त’, ‘तर्क का तूफान’, ‘भस्मावृत चिनगारी’, ‘वो दुनिया’. ‘फूलों का कुर्ता’, ‘धर्मयुद्ध’, ‘उत्तराधिकारी’ […] - [ICSE, Class, IX and X, Sahitya Sagar, Chapter - Kaki, Siyaramsharan Gupt, काकी, सियारामशरण गुप्त](https://avinashsolutions.com/icse-class-ix-and-x-sahitya-sagar-chapter-kaki-siyaramsharan-gupt/): लेखक परिचय – सियारामशरण गुप्त लेखक परिचय – सियारामशरण गुप्त सियारामशरण गुप्त का जन्म झाँसी के निकट चिरगाँव में सन् 1895 में हुआ। आप राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के अग्रज थे। प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद इन्होंने घर पर ही गुजराती, अंग्रेजी और हिंदी, भाषा सीखी। गुप्त जी विश्वप्रेम, विश्वशांति, सत्य और अहिंसा-से आजीवन प्रभावित रहे। इनके साहित्य में दरिद्रता, कुरीतियों के विरुद्ध आक्रोश जैसे भावों की बहुलता है। गुप्त जी को दीर्घकालीन साहित्य सेवाओं के लिए सन् 1962 में ‘सरस्वती हीरक जयंती’ के अवसर पर सम्मानित किया गया। इन्हें ‘नागरी प्रचारिणी’ सभा वाराणसी द्वारा ‘सुधाकर पदक से भी विभूषित […] - [ICSE, Class, IX and X, Sahitya Sagar, Chapter - Baat Athanni Ki, Sudarshan, The Best Solutions, बात अठन्नी की, सुदर्शन](https://avinashsolutions.com/icse-class-ix-and-x-sahitya-sagar-chapter-baat-athanni-ki-sudarshan/): लेखक परिचय – सुदर्शन लेखक परिचय – सुदर्शन सुदर्शन जी का वास्तविक नाम बदरीनाथ था। इनका जन्म सियालकोट (वर्तमान पाकिस्तान) में सन् 1895 में हुआ था। इन्होंने उर्दू में प्रकाशित होने वाले दैनिक पत्र ‘आर्य–गजट’ के संपादक के रूप में कार्य किया। मुंबई में 16 दिसंबर 1967 को इनका निधन हो गया। इनका दृष्टिकोण सुधारवादी था। इनकी पहली कहानी ‘हार की जीत’ थी, जो सन् 1920 में ‘सरस्वती’ में प्रकाशित हुई थी। ‘पुष्पलता’, ‘सुप्रभात’, ‘सुदर्शन सुधा’, ‘पनघट’ इनके प्रसिद्ध कहानी संग्रह तथा ‘परिवर्तन’, ‘भागवंती’, ‘राजकुमार सागर’ प्रसिद्ध उपन्यास हैं। सुदर्शन की भाषा सहज, स्वाभाविक, प्रभावी तथा मुहावरेदार है। सुदर्शन को […] - [ICSE Sahitya Sagar/Ekanki IX, X](https://avinashsolutions.com/icse-sahitya-sagar-class-ix-and-x-the-best-one-all-chapters/): ICSE, Class, IX and X, Sahitya Sagar, Chapter – Baat Athanni Ki, Sudarshan, The Best Solutions, बात अठन्नी की, सुदर्शन ICSE, Class, IX and X, Sahitya Sagar, Chapter – Kaki, Siyaramsharan Gupt, काकी, सियारामशरण गुप्त ICSE, Class, IX and X, Sahitya Sagar, Chapter – Mahayagya Ka Puraskar, Yashpal, महायज्ञ का पुरस्कार, यशपाल ICSE, Class, IX and X, Sahitya Sagar, Chapter – Netaji Ka Chashma, Swayam Prakash, नेता जी का चश्मा, स्वयं प्रकाश ICSE, Class, IX and X, Sahitya Sagar, Chapter – Apna-Apna Bhagya, Jainendra Kumar, अपना-अपना भाग्य, जैनेंद्र कुमार ICSE, Class, IX and X, Sahitya Sagar, Chapter – Bade Ghar […] - [Prayojanmulak Hindi](https://avinashsolutions.com/prayojanmulak-hindi-hindi-anuvaad-sampreshanatmak-hindi/): संप्रेषण की अवधारणा सफल संप्रेषण के सिद्धांत संप्रेषण का प्रयोजन  संप्रेषण की प्रक्रिया  संप्रेषण के प्रकार                                                                                                                                                                         […] - [Benjy Ka Bada Din (Kahani) - Nilima Sinha, Bhasha Mani, Class VI, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/18-benjy-ka-bada-din-kahani-nilima-sinha-bhasha-mani-class-vi-the-best-solution/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश नीलिमा सिन्हा द्वारा लिखित कहानी ‘बेंजी का बड़ा दिन’ क्रिसमस के त्योहार की पृष्ठभूमि पर आधारित है। यह कहानी एक बालक की ईमानदारी, कठिन परिश्रम और उसकी निस्वार्थ सेवा भावना को दर्शाती है। बेंजी की इच्छा और सीमित साधन बेंजी अपनी छोटी बहनों सैमी और रुथ के लिए क्रिसमस का एक सुंदर पेड़ खरीदना चाहता था। उसने पूरे सप्ताह एक ढाबे पर कड़ी मेहनत करके 28 रुपये जमा किए थे। जब वह मिस्टर अब्राहम की दुकान पर गया, तो उसे पता चला कि उसके पसंद किए गए पेड़ की कीमत 35 रुपये है। 7 […] - [Os (Kavita) - Sohanlal Dwivedi, Bhasha Mani, Class VI, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/17-os-kavita-sohanlal-dwivedi-bhasha-mani-class-vi-the-best-solution/): पाठ का सारांश कविता का सारांश सोहनलाल द्विवेदी द्वारा रचित कविता ‘ओस’ प्रकृति के सुंदर और मोहक रूप का वर्णन करती है। प्रथम पद (First Stanza) हरी घास पर बिखेर दी हैं, किसने मोती की लड़ियाँ? कौन रात में गूँथ गया है, ये उज्ज्व‘ हीरों की कड़ियाँ? व्याख्या – कवि सुबह-सवेरे घास पर पड़ी ओस की बूँदों को देखकर आश्चर्यचकित हैं। वे पूछते हैं कि हरी घास पर ये मोती की मालाएँ किसने बिखेर दी हैं? ओस की बूँदें सूरज की हल्की रोशनी में ऐसी चमक रही हैं जैसे किसी ने रात के अँधेरे में हीरों की कड़ियाँ पिरो दी […] - [Rana Haara Nahi (Kahani) - Kiran Tamuli, Bhasha Mani, Class VI, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/16-rana-haara-nahi-kahani-kiran-tamuli-bhasha-mani-class-vi-the-best-solution/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश किरण तामुली द्वारा लिखित कहानी ‘राणा हारा नहीं’ एक ऐसे बालक की प्रेरक गाथा है, जिसने शारीरिक अक्षमता (दिव्यांगता) को अपनी हिम्मत और जुनून के आगे झुकने पर मजबूर कर दिया। जीवन की एक नई और कठिन शुरुआत राणा एक मेधावी क्रिकेट खिलाड़ी था, लेकिन पिछले साल हुए भीषण बुखार और पोलियो के कारण उसकी दाहिनी टाँग बेकार हो गई। सालभर बाद जब वह बैसाखियों के सहारे स्कूल पहुँचा, तो वह अपने पुराने दिनों को याद कर दुखी था। कक्षा के नए मॉनीटर राजीव ने उसे ‘सचिन तेंदुलकर’ कहकर पुकारा और दोनों में गहरी […] - ['Rasraj' Pandit Jasraj (Jeevani) - Sankalit, Bhasha Mani, Class VI, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/15-bus-ki-yatra-hasya-vyangya-harishankar-parsai-bhasha-mani/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश हरिशंकर परसाई द्वारा लिखित ‘बस की यात्रा’ हिंदी साहित्य का एक प्रसिद्ध व्यंग्य (Satire) है। इसमें लेखक ने एक अत्यंत पुरानी और जर्जर बस की यात्रा का बड़े ही मजाकिया और चुटीले अंदाज़ में वर्णन किया है। यात्रा का निर्णय और बस की स्थिति लेखक और उनके चार मित्रों ने पन्ना से सतना जाने के लिए शाम चार बजे की बस पकड़ने का फैसला किया। अनुभवी लोगों ने इस बस से सफर न करने की सलाह दी थी, लेकिन लेखक को सुबह काम पर पहुँचना था। जब लेखक ने बस को देखा, तो उसकी […] - [Kusang Ka Jwar (Nibandh) - Dr. Rajendra Prasad Sharma, Bhasha Mani, Class VI, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/14-kusang-ka-jwar-nibandh-dr-rajendra-prasad-sharma-bhasha-mani-class-vi/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश पाठ ‘कुसंग का ज्वर’ कुसंगति अर्थात् बुरी संगत के विनाशकारी प्रभावों को विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से समझाने वाला एक शिक्षाप्रद पाठ है। कुसंगति की परिभाषा – लेखक के अनुसार कुसंगति एक भयंकर बुखार की तरह है, जो न केवल शरीर को बल्कि मनुष्य की बुद्धि और विवेक को भी नष्ट कर देती है। समुद्र और रावण का उदाहरण – अपार शक्ति और मर्यादा वाला समुद्र भी कुसंगति के प्रभाव से नहीं बच पाया। समुद्र की मर्यादा तब भंग हुई और उसकी छाती पर सेतु अर्थात् पुल बनाया गया, जब उसके पड़ोस में रावण […] - [Gulliver Ki Yatraein (Kahani) - Jonathan Swift, Bhasha Mani, Class VI, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/13-gulliver-ki-yatraein-kahani-jonathan-swift-bhasha-mani-class-vi-the-best-solution/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश जोनाथन स्विफ्ट द्वारा लिखित ‘गुलीवर की यात्राएँ’ (Gulliver’s Travels) का यह अंश लेमुएल गुलीवर की लिलिपुट नामक एक अनोखे देश की रोमांचक यात्रा का वर्णन करता है। लिलिपुट आगमन और बंदी बनाना – जहाज़ के तूफान में फँसने के बाद गुलीवर तैरकर एक अज्ञात किनारे पर पहुँचा और थककर सो गया। जब उसकी नींद खुली, तो उसने खुद को सैकड़ों पतले धागों जो लिलिपुट वासियों के लिए रस्से थे, से बँधा हुआ पाया। उसने देखा कि उसकी छाती पर केवल छह इंच लंबे इंसान खड़े हैं। लिलिपुट वासियों ने उस पर तीरों की वर्षा […] - [Rahim Ke Dohe (Kavita) - Rahim, Bhasha Mani, Class VI, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/12-rahim-ke-dohe-kavita-rahim-bhasha-mani-class-vi-the-best-solution/): दोहों की व्याख्या दोहों की व्याख्या अब्दुर्रहीम खानखाना (रहीम) के ये दोहे जीवन के गहरे सत्यों को बहुत ही सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाते हैं। 1. याचना और दानशीलता दोहा – रहिमन वे नर मर चुके, जे कहुँ माँगन जाहिं। उनते पहले वे मुए, जिन मुख निकसत नाहिं॥ व्याख्या – रहीम जी कहते हैं कि वे मनुष्य मरे हुए के समान हैं जो दूसरों के पास कुछ माँगने जाते हैं। लेकिन उनसे भी पहले वे लोग मृत समान हैं, जो समर्थ होने के बावजूद माँगने वाले को देने से मना कर देते हैं अर्थात् जिनके मुख से ‘नहीं’ निकलता […] - ['Rasraj' Pandit Jasraj (Jeevani) - Sankalit, Bhasha Mani, Class VI, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/11-rasraj-pandit-jasraj-jeevani-sankalit-bhasha-mani-class-vi-the-best-solution/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश पाठ ‘रसराज’ पंडित जसराज भारतीय शास्त्रीय संगीत के एक प्रकाश स्तंभ के जीवन और उनकी संगीत साधना की गौरवगाथा है। इस पाठ का सारांश निम्नलिखित है: परिचय और विरासत: पंडित जसराज भारतीय शास्त्रीय संगीत के ख्यातिप्राप्त गायक थे, जिनका संबंध मेवाती घराने से था। उनका जन्म 1930 में हिसार (हरियाणा) के एक प्रतिष्ठित संगीतज्ञ परिवार में हुआ था। उनके पिता पंडित मोतीराम जी स्वयं एक विशिष्ट संगीतज्ञ थे। संगीत के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण जैसे सर्वोच्च सम्मानों से नवाजा गया। तबले से गायकी तक का सफर: […] - [Hare-Bhare Dost (Lekh) - Akhilesh Shrivastava 'Chaman', Bhasha Mani, Class VI, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/10-hare-bhare-dost-lekh-akhilesh-shrivastava-chaman-bhasha-mani-class-vi-the-best-solution/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश अखिलेश श्रीवास्तव ‘चमन’ द्वारा लिखित पाठ ‘हरे-भरे दोस्त’ नई पीढ़ी को पेड़ों की उपयोगिता और उनके जीवन चक्र से परिचित कराने वाली एक ज्ञानवर्धक कहानी है। सिन्हा अंकल का आगमन – इलाहाबाद (प्रयागराज) में रहने वाले दो भाई, विराज और जतिन, अपने पापा के दोस्त सिन्हा अंकल के आने से बहुत खुश हैं। सिन्हा अंकल दिल्ली में कृषि वैज्ञानिक हैं और बच्चों को रोचक व ज्ञानवर्धक बातें बताते हैं। पार्क की घटना – रविवार की सुबह टहलते समय जतिन ने पार्क में एक गुड़हल के फूल को पाने के लिए उसकी पूरी टहनी ही […] - [Haar Ko Peeche Chhodkar Aage Badho (Sansmaran) - A. P. J. Abdul Kalam, Bhasha Mani, Class VI, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/9-haar-ko-peeche-chhodkar-aage-badho-sansmaran-a-p-j-abdul-kalam/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वारा रचित यह पाठ ‘हार को पीछे छोड़कर आगे बढ़ो’ जीवन में असफलता से न घबराने और एक अच्छे नेतृत्व (Leadership) के गुणों पर आधारित है। कलाम का अनुभव और इसरो का कार्यकाल: डॉ. कलाम बताते हैं कि इसरो (ISRO) में काम करते हुए उन्होंने सीखा कि सफलता को सहजता से स्वीकार करना और हार से न घबराना एक अच्छे लीडर के लिए बहुत आवश्यक है। जो हार को स्वीकार कर आगे बढ़ता है, वही असली जीत का सुख पाता है। 1979 की असफलता: 1979 में एस.एल.वी.-3 (SLV-3) के लांच […] - [Kayantaran (Kahani) - Jayanandan, Bhasha Mani, Class VI, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/8-kayantaran-kahani-jayanandan-bhasha-mani-class-vi-the-best-solution/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश जयनंदन द्वारा लिखित कहानी ‘कायांतरण’ अर्थात् हृदय परिवर्तन एक बालक की निश्छल बालवृत्ति और उसकी दयालुता की मार्मिक कथा है, जो एक अपराधी के भीतर की मानवता को जगा देती है। आधी रात का सन्नाटा और श्लेष की सतर्कता – आठ वर्षीय श्लेष आधी रात को अपने बीमार पिता के सिरहाने बैठा उनकी देखभाल कर रहा था। उसके पिता को आठ दिनों के बाद नींद आई थी। तभी उसे बरामदे से आहट मिली। श्लेष ने देखा कि एक आदमी काँच लगी चारदीवारी फाँदकर अंदर आने की कोशिश कर रहा है और उसके पैरों से […] - [Football Match Mama Ji Ke Sang (Hasya Katha) - Ira Saxena, Bhasha Mani, Class VI, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/7-football-match-mama-ji-ke-sang-hasya-katha-ira-saxena-bhasha-mani-class-vi-the-best-solution/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश इरा सक्सेना द्वारा लिखित कहानी ‘फ़ुटबॉल मैच – मामा जी के संग’ एक हास्यपूर्ण और मनोरंजक कहानी है, जिसमें मामा जी की एक छोटी-सी गलती पूरे फ़ुटबॉल मैच का रुख बदल देती है। मैच की शुरुआत और उत्साह – गौरव और संजू अपने मामा जी के साथ स्टेडियम में खतौली और शहर की टीम के बीच फुटबॉल मैच देखने जाते हैं। मैच बहुत रोमांचक था और दोनों टीमें दो-दो गोल की बराबरी पर थीं। खेल के अंतिम आधे घंटे में शहर की टीम खतौली पर हावी होने लगी थी। छाते का रोमांचक हस्तक्षेप – […] - [6.Chand Ne Maa Se Kaha (Kavita) - Sankalit, Bhasha Mani, Class VI, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/6-chand-ne-maa-se-kaha-kavita-sankalit-bhasha-mani-class-vi-the-best-solution/): पाठ की व्याख्या पाठ की व्याख्या यह कविता चाँद और उसकी माँ के बीच एक काल्पनिक संवाद है, जिसमें चाँद विज्ञान की प्रगति और मनुष्यों द्वारा उसके रहस्यों को उजागर करने से दुखी है। प्रथम पद्य सककर बोला चाँद “अरे माता, तू इतनी भोली। दुनियावालों के समान क्या तेरी मति भी डोली? घटता-बढ़ता नहीं कभी मैं वैसा ही रहता हूँ, केवल भ्रमवश दुनिया को घटता-बढ़ता लगता हूँ। व्याख्या: चाँद अपनी माँ से कहता है कि तुम दुनिया वालों की तरह इतनी भोली क्यों हो? क्या तुम्हारी बुद्धि भी दुनिया वालों की तरह भटक गई है? वह स्पष्ट करता है कि […] - [Nagrota Ka Jaanbaaz (Veer Gatha) - Maj. Gen. Shiv Kumar Jaswal, Bhasha Mani, Class VI, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/5-nagrota-ka-jaanbaaz-veer-gatha-maj-gen-shiv-kumar-jaswal-bhasha-mani/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश यह लेख शहीद मेजर अक्षय गिरीश की शहादत और उनकी वीरता को समर्पित है। उनकी माँ, श्रीमती मेघना गिरीश, ने अपने पुत्र के जीवन और नगरौटा आतंकी हमले के दौरान उनके बलिदान की गौरवगाथा साझा की है। नगरौटा का आतंकी हमला – 29 नवंबर 2016 को जम्मू-कश्मीर के नगरौटा कैंट पर ‘जैशे मुहम्मद’ नामक आतंकवादी संगठन ने हमला किया था। उस समय मेजर अक्षय गिरीश ‘क्विक रिस्पॉन्स टीम’ (QRT) का नेतृत्व कर रहे थे। वीरता और शहादत – मेजर अक्षय और उनकी टीम ने कैंटोनमेंट में रह रहे परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के […] - [Kaam Ya Aaram (Lekh) - Shrimannarayan, Bhasha Mani, Class VI, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/4-kaam-ya-aaram-lekh-shrimannarayan-bhasha-mani-class-vi-the-best-solution/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश श्रीमन्नारायण द्वारा लिखित लेख ‘काम या आराम’ श्रम (hard work) की महत्ता और समय के सदुपयोग पर प्रकाश डालता है। लेखक का मानना है कि जीवन का असली स्वाद मेहनत में है, केवल आराम में नहीं। गांधीजी और श्रम का विचार – लेख का आरंभ गांधीजी के एक प्रसंग से होता है। वर्धा में गांधीजी ने समझाया कि प्रत्येक व्यक्ति को आजीविका के लिए दिन में कम से कम आठ घंटे परिश्रम करना चाहिए। जब एक सज्जन ने केवल चार घंटे काम करने और बाकी समय फुर्सत में बिताने की बात कही, तो गांधीजी […] - [Swami Ki Dadi (Kahani) - R. K. Narayan, Bhasha Mani, Class VI, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/3-swami-ki-dadi-kahani-r-k-narayan-bhasha-mani-class-vi-the-best-solution/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश आर. के. नारायण द्वारा लिखित ‘स्वामी की दादी’ मालगुडी की पृष्ठभूमि पर आधारित एक मर्मस्पर्शी कहानी है, जो एक पोते स्वामीनाथन और उसकी दादी के बीच के सहज प्रेम, नोक-झोंक और पीढ़ीगत अंतराल (Generation Gap) को दर्शाती है। कहानी का सारांश दादी की पुकार और स्वामी की बेरुखी स्वामीनाथन क्रिकेट का शौकीन बालक है। एक शाम जब वह स्कूल से लौटकर खेलने जाने की जल्दी में था, तो उसकी दादी ने उसे नींबू लाने के लिए बुलाया। दादी ने उसे लालच भी दिया और समय की पाबंदी की शर्त भी रखी, लेकिन खेल के […] - [Janmadin Ke Bahane (Kahani) - Neelam Rakesh, Bhasha Mani, Class VI, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/2-janmadin-ke-bahane-kahani-neelam-rakesh-bhasha-mani-class-vi-the-best-solution/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश यह कहानी नीलम राकेश द्वारा लिखित है, जो हमें सिखाती है कि दूसरों की मदद करने और खुशियाँ बाँटने में जो आनंद है, वह केवल स्वयं के मनोरंजन में नहीं है। जन्मदिन की समस्या और योजना: अर्पिता और अर्चना जुड़वाँ बहनें हैं। उनका जन्मदिन जून में आता है, जब स्कूल की छुट्टियाँ होती हैं और उनकी सहेलियाँ शहर से बाहर चली जाती हैं। इस बात से वे चिंतित थीं। उनकी मम्मी ने उन्हें प्रेरित किया कि वे इस बार का जन्मदिन कुछ इस तरह मनाएँ जो यादगार बन जाए। बहनों ने पिकनिक, फिल्म, होटल […] - [Itne Unche Utho (Kavita) - Dwarika Prasad Maheshwari, Bhasha Mani, Class VI, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/1-itne-unche-utho-kavita-dwarika-prasad-maheshwari-bhasha-mani/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी द्वारा रचित कविता ‘इतने ऊँचे उठो’ नई पीढ़ी को संकीर्णताओं से ऊपर उठकर एक सुंदर और समतावादी समाज बनाने का संदेश देती है। प्रथम पद्य इतने ऊँचे उठो कि जितना उठा गगन है। देखो इस सारी दुनिया को एक दृष्टि से, सिंचित करो धरा, समता की भाव-वृष्टि से, जाति भेद की, धर्म-वेश की, काले-गोरे रंग-द्वेष की, ज्वालाओं से जलते जग में, इतने शीतल बहो कि जितना मलय पवन है। व्याख्या – कवि बच्चों को प्रेरित करते हुए कहते हैं कि तुम्हें अपने विचारों में आकाश की तरह ऊँचा उठना चाहिए। जिस […] - [Rakhi Ka Mulya (Ekanki) - Harikrishna 'Premi', Bhasha Mani, Class VII, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/18-rakhi-ka-mulya-ekanki-harikrishna-premi-bhasha-mani-class-vii-the-best-solution/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश यह एकांकी प्रसिद्ध नाटककार हरिकृष्ण ‘प्रेमी’ द्वारा लिखित है। यह ऐतिहासिक प्रसंग मध्यकालीन भारत में हिंदू-मुस्लिम एकता और राखी के पवित्र बंधन के महत्त्व को दर्शाता है। मेवाड़ पर संकट – चित्तौड़ पर गुजरात के सुल्तान बहादुरशाह ने आक्रमण कर दिया है। मेवाड़ की सेना संख्या में कम है और शत्रुओं के पास आधुनिक तोपखाना है। रानी कर्णावती चिंतित हैं क्योंकि उनके पति महाराणा संग्राम सिंह अब इस दुनिया में नहीं हैं। युद्ध में राजपूत वीरता से लड़ रहे हैं, लेकिन जीतना असंभव लग रहा है। राखी का अनूठा विचार – रानी कर्णावती अपनी […] - [Rotiyan (Videshi Kahani) - V. Dmitriev, Bhasha Mani, Class VII, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/17-rotiyan-videshi-kahani-v-dmitriev-bhasha-mani-class-vii-the-best-solution/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश यह कहानी रूसी लेखक वी. दिमित्रिएव द्वारा रचित है, जो मातृ-प्रेम और साहस की एक मर्मस्पर्शी गाथा है। माँ के प्रति प्रेम और संकल्प – सर्दी के दिनों में स्कूल की मेट्रन अन्ना मिखाइलोवना ने एक दावत का आयोजन किया, जहाँ गरमा-गरम रोटियाँ बन रही थीं। स्कूल का एक गरीब विद्यार्थी माल्यूइश अपनी मेट्रन की मदद करने वहाँ पहुँचा था। ताज़ी रोटियाँ देखकर उसे अपनी माँ का ख्याल आया, जिन्हें गरम रोटियाँ बहुत पसंद थीं लेकिन गरीबी के कारण उन्होंने बहुत दिनों से ताज़ी रोटी नहीं खाई थी। माँ के प्रति अगाध प्रेम के […] - [Natak Mein Natak (Hasya Katha) - Mangal Saxena, Bhasha Mani, Class VII, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/16-natak-mein-natak-hasya-katha-mangal-saxena-bhasha-mani-class-vii-the-best-solution/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश यह कहानी मंगल सक्सेना द्वारा लिखित है, जो यह सिखाती है कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य और तुरत-बुद्धि (Presence of Mind) का उपयोग करके कैसे बिगड़े हुए काम को सँभाला जा सकता है। अधूरी तैयारी और मजबूरी – राकेश के मोहल्ले के बच्चों ने एक नाटक खेलने की योजना बनाई। राकेश स्वयं कुशल निर्देशक था, लेकिन फुटबॉल खेलते समय हाथ में चोट लगने के कारण वह अभिनय नहीं कर पा रहा था। नाटक में अभिनय करने वाले उसके तीन मित्र—मोहन (चित्रकार), सोहन (शायर) और श्याम (संगीतकार)—बिल्कुल नए और अनाड़ी थे। राकेश को उनकी योग्यता […] - [Sur Ke Pad (Kavita) - Surdas, Bhasha Mani, Class VII, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/15-sur-ke-pad-kavita-surdas-bhasha-mani-class-vii-the-best-solution/): पाठ का सारांश प्रथम पद की व्याख्या मैया कबहिं बढ़ेगी चोटी? किती बेर मोहि दूध पियत भई, यह अजहूँ है छोटी। तू तो कहति बल की बेनी ज्यों, हवैहै लाँबी मोटी। काढ़त, गुहत, न्हवावत जैहे, नागिन सी भुइँ लोटी। काचो दूध पियावत पचि-पचि देत न माखन रोटी। सूरदास त्रिभुवन मन मोहन, हरि-हलधर की जोटी॥ प्रसंग: इस पद में बालक कृष्ण अपनी माता यशोदा से शिकायत कर रहे हैं कि बहुत दूध पीने के बाद भी उनकी चोटी अर्थात् बाल बढ़ क्यों नहीं रहे हैं। व्याख्या: बालक कृष्ण मैया यशोदा से पूछते हैं कि माँ, मेरी यह चोटी कब बढ़ेगी? मुझे […] - ["Chhoti Suvidha, Badi Asuvidha (Kahani) - Narendra Kohli", Bhasha Mani, Class VII, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/14-chhoti-suvidha-badi-asuvidha-kahani-narendra-kohli-bhasha-mani-class-vii/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश यह पाठ नरेंद्र कोहली द्वारा लिखित है, जो सड़क सुरक्षा के नियमों और जीवन में अनुशासन के महत्त्व को एक पारिवारिक घटना के माध्यम से समझाता है। बच्चों की अधीरता और बड़ों का अनुशासन – कहानी की शुरुआत लेखक (एक बालक) की बेचैनी से होती है। उसे अपने मित्र प्रियांक के घर जाना है, लेकिन उसके पापा अपने दफ्तर के काम और कागज़ों में व्यस्त हैं। बालक को लगता है कि बड़े लोग अपनी बात मनवाने के लिए बहुत सारे ‘तर्क’ (Logic) देते हैं, जबकि बच्चों के पास केवल ‘हठ’ (Zid) होती है। ड्राइविंग […] - ["Bharat Maa Ke Laal, Tune Kar Diya Kamaal (Jeevani) - Betu Kansal", Bhasha Mani, Class VII, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/13-bharat-maa-ke-laal-tune-kar-diya-kamaal-jeevani-betu-kansal-bhasha-mani-class/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश यह पाठ टोक्यो ओलंपिक में भारत के लिए ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने वाले ‘गोल्डन बॉय’ नीरज चोपड़ा के प्रेरणादायक सफर पर आधारित है। ऐतिहासिक उपलब्धि – नीरज चोपड़ा ने टोक्यो ओलंपिक (2020) की भालाफेंक (Javelin Throw) प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर एक सदी से भी अधिक का इंतज़ार खत्म किया। एथलेटिक्स में भारत का यह पहला स्वर्ण पदक है। इस जीत ने पूरे देश को उत्सव में डुबो दिया। बचपन और मोटापे की चुनौती – नीरज का जन्म 24 दिसंबर 1997 को हरियाणा के पानीपत जिले के ‘खंडरा’ गाँव में एक किसान परिवार में […] - [Ghar Ki Wapasi (Kahani) - Rabindranath Tagore, Bhasha Mani, Class VII, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/12-ghar-ki-wapasi-kahani-rabindranath-tagore-bhasha-mani-class-vii-the-best-solution/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित कहानी ‘घर की वापसी’ एक अत्यंत भावुक कहानी है जो बाल मनोविज्ञान और अपनों से बिछड़ने के दर्द को दर्शाती है। गाँव का निडर नेता – कहानी का मुख्य पात्र पाठक चक्रवर्ती अपने गाँव के लड़कों का नेता है। वह बहुत चंचल और शरारती है। एक दिन वह अपने साथियों के साथ मिलकर नदी किनारे पड़े एक भारी लट्ठे को लुढ़काने का खेल खेलता है। उसका छोटा भाई मक्खन विरोध स्वरूप उस लट्ठे पर बैठ जाता है। पाठक के आदेश पर लड़के लट्ठे को मक्खन सहित लुढ़का देते हैं, जिससे […] - [10. Atithi Devo Bhava (Kahani) - Devendra Varma, Bhasha Mani, Class VII, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/10-atithi-devo-bhava-kahani-devendra-varma-bhasha-mani-class-vii-the-best-solution/): पाठ का सारांश पाठ का सार यह व्यंग्यपूर्ण पाठ ‘अतिथि देवो भव’ लेखक देवेंद्र वर्मा द्वारा लिखित है। इसमें आधुनिक जीवन की व्यस्तता, आर्थिक कठिनाइयों और बदलती जीवनशैली के बीच ‘अतिथि सत्कार’ की परंपरा की चुनौतियों को बड़ी ही रोचकता और कटाक्ष के साथ प्रस्तुत किया गया है। प्राचीन परंपरा और आधुनिक समय – लेखक बचपन से सुनते आए हैं कि ‘अतिथि देवो भव’ अर्थात् अतिथि देवता के समान होता है। पुराणों में भी अतिथि सत्कार की बहुत महिमा है। लेकिन लेखक का मानना है कि पुराने समय में यातायात के साधन कम थे, अन्न की प्रचुरता थी और लोगों […] - [Toofanon Ki Ore (Kavita) - Shiv Mangal Singh 'Suman', Bhasha Mani, Class VII, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/11-toofanon-ki-ore-kavita-shiv-mangal-singh-suman-bhasha-mani-class-vii/): पाठ का सारांश पाठ का सार शिव मंगल सिंह ‘सुमन’ जी द्वारा रचित कविता ‘तूफ़ानों की ओर’ एक अत्यंत प्रेरणादायक रचना है। इसमें कवि ने नाविक के माध्यम से मनुष्य को जीवन की चुनौतियों और संघर्षों का निडर होकर सामना करने का संदेश दिया है। प्रथम पद्यांश – तूफ़ानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार। आज सिंधु ने विष उगला है, लहरों का यौवन मचला है, आज हृदय में और सिंधु में साथ उठा है ज्वार। तूफ़ानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार। प्रसंग – प्रस्तुत पंक्तियों में कवि नाविक (मनुष्य) को चुनौतियों का सामना करने के लिए […] - [Raja (Kahani) - Sudarshan, Bhasha Mani, Class VII, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/9-raja-kahani-sudarshan-bhasha-mani-class-vii-the-best-solution/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश यह हृदयस्पर्शी कहानी सुदर्शन द्वारा लिखित है, जिसमें महाराजा रणजीत सिंह की महानता और प्रजा-प्रेम का सजीव चित्रण किया गया है। कहानी एक सौ वर्षीय वृद्ध धोबी की जुबानी सुनाई गई है। सौ साल का गवाह – लेखक एक वृद्ध धोबी से मिलता है जो अपनी उम्र पूरे 100 साल बताता है। धोबी ने अपनी आँखों से सिक्ख साम्राज्य का वह दौर देखा था जब महाराजा रणजीत सिंह का शासन था। वह महाराजा को राजा के रूप में नहीं, बल्कि एक दयालु साधु के रूप में याद करता है। भीषण अकाल का प्रकोप – […] - [Lauh Ayask Ki Khadanon Se (Diary) - Late Shri V. K. Mahajan, Bhasha Mani, Class VII, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/8-lauh-ayask-ki-khadanon-se-diary-late-shri-v-k-mahajan-bhasha-mani-class-vii-the-best-solution/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश यह पाठ ‘लौह अयस्क की खदानों से’ ईशान नामक एक बालक की डायरी के रूप में लिखा गया है। इसमें छत्तीसगढ़ के किरंदूल (बैलाडिला) क्षेत्र की लौह अयस्क खदानों, वहाँ की प्राकृतिक सुंदरता और जनजातीय जीवन का सजीव वर्णन है। यात्रा का आरंभ – मुंबई में रहने वाला ईशान छुट्टियों में अपने फूफा नाना और बुआ नानी से मिलने किरंदूल जाता है। रायपुर हवाई अड्डे से कार द्वारा किरंदूल जाते समय वह पहली बार घने जंगलों, सर्पाकार सड़कों और शुद्ध हवा का अनुभव करता है। रास्ते में वह सागवन, महुआ और तेंदूपत्ता जैसे पेड़ों […] - [Subhadra Kumari Chauhan (Sansmaran) - Mahadevi Varma, Bhasha Mani, Class VII, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/7-subhadra-kumari-chauhan-sansmaran-mahadevi-varma-bhasha-mani-class-vii-the-best-solution/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश यह संस्मरण प्रसिद्ध लेखिका महादेवी वर्मा द्वारा अपनी मित्र और महान कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान की याद में लिखा गया है। इसमें सुभद्रा जी के व्यक्तित्व, सादगी, साहस और उनके साथ बिताए गए मधुर क्षणों का वर्णन है। प्रथम परिचय और कविता की चोरी – महादेवी और सुभद्रा जी की मित्रता प्रयाग के ‘क्रास्थवेट गर्ल्स कॉलेज’ में हुई थी। सुभद्रा जी महादेवी से दो कक्षा सीनियर थीं। जब उन्हें पता चला कि महादेवी छिपकर कविताएँ लिखती हैं, तो उन्होंने जबरदस्ती महादेवी की गणित की कॉपी ढूँढ निकाली और पूरे हॉस्टल में उनकी कविता का […] - [6,Saaye (Kahani) - Himanshu Joshi, Bhasha Mani, Class VII, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/6saaye-kahani-himanshu-joshi-bhasha-mani-class-vii-the-best-solution/): पाठ का सारांश पाठ का सार हिमांशु जोशी द्वारा लिखित कहानी ‘साए’ मित्रता, त्याग और नैतिक कर्तव्य की एक अत्यंत मर्मस्पर्शी कहानी है। यह कहानी दिखाती है कि एक सच्चा मित्र मृत्यु के बाद भी अपने मित्र के परिवार का ‘साया’ बनकर उनकी रक्षा कर सकता है। संकट और दुखद समाचार – कहानी की शुरुआत एक गरीब परिवार के संकट से होती है। पिता अफ्रीका के नैरोबी में नौकरी करने गए हैं, लेकिन लंबे समय तक उनका कोई पत्र नहीं आता। अंत में एक पत्र आता है जिसमें उनके गंभीर रूप से बीमार होने और ऑपरेशन की सूचना होती है। […] - [Phir Kya Hoga Uske Baad (Kavita) - Balkrishna Rao, Bhasha Mani, Class VII, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/5-phir-kya-hoga-uske-baad-kavita-balkrishna-rao/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश प्रथम पद (First Stanza) फिर क्या होगा उसके बाद? ‘उत्सुक‘ होकर शिशु ने पूछा, “माँ, क्या होगा उसके बाद?” रवि‘ से उज्ज्वल‘, शशि‘ से सुंदर, नव किसलय दल से कोमलतर, वधू तुम्हारी घर आएगी, उस विवाह उत्सव के बाद। सारांश – कविता की शुरुआत एक छोटे बालक की उत्सुकता से होती है। वह अपनी माँ से जीवन के भविष्य के बारे में पूछता है। माँ उसे सुखद भविष्य का सपना दिखाते हुए कहती है कि जब तुम बड़े हो जाओगे, तो तुम्हारा विवाह होगा। वह वधू कैसी होगी? वह सूर्य जैसी तेजस्विनी, चंद्रमा जैसी […] - [Saragarhi Ka Yuddh (Shaurya Gatha) - Maj. Gen. Shivkumar Jaswal, Bhasha Mani, Class VII, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/saragarhi-ka-yuddh-shaurya-gatha-maj-gen-shivkumar-jaswal-bhasha-mani/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश यह पाठ ‘सारागढ़ी का युद्ध’ भारतीय सैन्य इतिहास की एक ऐसी गौरवशाली गाथा है, जो साहस, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान की पराकाष्ठा को दर्शाती है। युद्ध की पृष्ठभूमि यह युद्ध 12 सितंबर 1897 को उत्तर-पश्चिम फ्रंटियर जो अब पाकिस्तान का तिराह क्षेत्र है उसमें लड़ा गया था। ब्रिटिश शासन के दौरान ‘सारागढ़ी’ एक संचार पोस्ट थी, जहाँ 36वीं सिख रेजीमेंट (वर्तमान में चौथी सिख) के केवल 21 जवान तैनात थे। इनके सामने 10,000 से 14,000 अफ़रीदी और ओराकज़ई कबीले के हमलावर थे। विषम परिस्थितियाँ और नेतृत्व टुकड़ी के कमांडर हवलदार ईशर सिंह ने दूरबीन से […] - [Chandan Ke Ped (Kahani) - Indira Ananthakrishnan, Bhasha Mani, Class VII, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/3-chandan-ke-ped-kahani-indira-ananthakrishnan-bhasha-mani-class-vii-the-best-solution/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश यह कहानी इंदिरा अनंतकृष्णन द्वारा लिखित एक प्रेरणादायक संस्मरण है, जो एक नेत्रहीन लड़की ‘सुनंदा’ के साहस और सूझबूझ को दर्शाती है। कहानी का सारांश भयानक दुर्घटना और अंधकार – सुनंदा अपने माता-पिता के साथ पूर्वी घाट की पहाड़ियों पर रहती थी। जब वह 13 वर्ष की हुई, तो एक भयानक भूस्खलन (Landslide) हुआ। इस दुर्घटना में उसके माता-पिता और उनकी बकरियाँ खत्म हो गईं। सुनंदा की आँखों में गहरी चोट लगी और उसने अपनी आँखों की रोशनी खो दी। उसका वफादार कुत्ता ‘गूगु’ ही उसके पास बचा था। नया जीवन और रावगुरु का […] - [Kissa Barsati Taal Ka (Paryavaran Lekh) - Ruskin Bond, Bhasha Mani, Class VII, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/2-kissa-barsati-taal-ka-paryavaran-lekh-ruskin-bond-bhasha-mani-class-vii/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश यह पाठ रस्किन बांड द्वारा लिखित एक संस्मरण है, जो प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और बचपन की मासूम मित्रता को दर्शाता है। ताल की निराली दुनिया लेखक को पहले लगता था कि उनके घर के पीछे वाले बरसाती तालाब (ताल) में केवल कीचड़ और भैंसें ही होती हैं। परंतु उनके दादा जी ने उन्हें उस ताल के भीतर छिपे प्रकृति के अद्भुत संसार से परिचित करवाया। दादा जी के साथ बैठकर लेखक ने काई के बीच से झाँकते मेढकों, उनके मधुर ‘वर्क-वर्क’ राग और पानी में हलचल करते हज़ारों नन्हे मेढकों को देखा। रामू […] - [1. Armaan (Kavita) - Ramnaresh Tripathi,Bhasha Mani, Class VII, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/1-armaan-kavita-ramnaresh-tripathi-bhasha-mani-class-vii-the-best-solution/): पाठ का सारांश पाठ की व्याख्या रामनेरश त्रिपाठी जी द्वारा रचित कविता ‘अरमान’ देशभक्ति और समाज सेवा की भावना से ओतप्रोत है। इस कविता में बच्चों के माध्यम से देश के प्रति उनके संकल्पों और सपनों अर्थात् अरमानों को दर्शाया गया है। प्रथम पद्यांश (नाम अमर करने का संकल्प) है शौक यही अरमान यही, हम कुछ करके दिखलाएँगे। मरने वाली दुनिया में हम, अमरों में नाम लिखाएँगे। व्याख्या – कवि कहते हैं कि बच्चों का यही शौक और यही सबसे बड़ी इच्छा (अरमान) है कि वे अपने जीवन में कुछ महान कार्य करके दिखाएँ। यह दुनिया नश्वर है (यहाँ सबको […] - [Vishwasghat (Ekanki) - Sankalit, Bhasha Mani, Class VIII, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/18-vishwasghat-ekanki-sankalit-bhasha-mani-class-viii-the-best-solution/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश यह एकांकी ‘विश्वासघात’ स्वाभिमान, देशभक्ति और नैतिकता की एक सशक्त कहानी है। यह हमें सिखाती है कि सत्ता के लालच में किया गया विश्वासघात अंततः अपमान और पतन का कारण बनता है। 1. नवाब वाजिद अली और मीर खाँ की हताशा नवाब वाजिद अली कई महीनों से रामगढ़ के छोटे से किले को जीतने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन सफल नहीं हो पा रहे थे। उनके सेनापति मीर खाँ ने बताया कि रामगढ़ के राजपूत ‘नायाब हीरे’ हैं, जो अपनी आन पर मिटना जानते हैं। नवाब ने झुंझलाकर किसी भी खुफिया तरीके या […] - [Giridhar Ki Kundaliyan (Madhyakaleen Kavita) - Giridhar Kaviray, Bhasha Mani, Class VIII, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/17-giridhar-ki-kundaliyan-madhyakaleen-kavita-giridhar-kaviray-bhasha-mani/): पाठ का सारांश पाठ की व्याख्या कवि गिरधर की कुंडलियाँ व्यवहारिक ज्ञान और नीतिपरक शिक्षाओं का भंडार हैं। ‘कुंडलिया’ छंद की विशेषता यह है कि यह जिस शब्द से शुरू होता है, उसी पर समाप्त होता है। (1) गुणों का महत्त्व (Importance of Virtues) गुन के गाहक सहस नर, बिनु गुन लहै न कोय। जैसे कागा कोकिला, शब्द सुने सब कोय॥ शब्द सुने सब कोय, कोकिला सबै सुहावन। दोऊ को इक रंग, काग सब भए अपावन॥ कह गिरधर कविराय, सुनो हो ठाकुर मन के। बिनु गुन लहै न कोय, सहस नर गाहक गुन के॥ व्याख्या – कवि कहते हैं कि […] - [Mitra Ho To Aisa (Pauranik Katha) - Dr. Kamal Satyarthi, Bhasha Mani, Class VIII, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/16-mitra-ho-to-aisa-pauranik-katha-dr-kamal-satyarthi-bhasha-mani-class-viii-the-best-solution/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश यह पाठ महाभारत के उस प्रसंग पर आधारित है जहाँ श्रीकृष्ण और कर्ण के बीच संवाद होता है। यह कहानी सच्ची मित्रता, वफादारी और नैतिकता के द्वंद्व को दर्शाती है। श्रीकृष्ण का शांति-प्रस्ताव और कर्ण से भेंट दुर्योधन की सभा में शांति का प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद श्रीकृष्ण विक्षुब्ध होकर निकलते हैं। रास्ते में उन्हें कर्ण मिलते हैं। श्रीकृष्ण सोचते हैं कि यदि कर्ण पांडवों के पक्ष में आ जाएँ, तो विनाशकारी युद्ध टल सकता है। वे कर्ण को अपने रथ पर बिठाते हैं और उनसे भावपूर्ण संवाद शुरू करते हैं। जन्म का […] - [Vijayanagar Samrajya Ke Avshesh: Hampi (Lekh) - Alok Kumar Govil, Bhasha Mani, Class VIII, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/15-vijayanagar-samrajya-ke-avshesh-hampi-lekh-alok-kumar-govil-bhasha-mani/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश यह पाठ कर्नाटक में स्थित ऐतिहासिक स्थल ‘हंपी’ और मध्यकालीन विजयनगर साम्राज्य के वैभवशाली इतिहास पर आधारित है। परिचय और ऐतिहासिक महत्त्व हंपी, मध्यकालीन हिंदू साम्राज्य विजयनगर की राजधानी था। कर्नाटक के बेल्लारी जिले में स्थित यह नगर अपनी अतुलनीय वास्तुकला और समृद्धि के लिए प्रसिद्ध था। इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को देखते हुए यूनेस्को (UNESCO) ने इसे ‘विश्व विरासत स्थल’ घोषित किया है। माना जाता है कि अपने स्वर्ण काल में हंपी रोम जैसे शहर से भी अधिक समृद्ध था। पौराणिक संदर्भ हंपी का इतिहास सतयुग से जुड़ा है। इसे पार्वती जी […] - [Mushkil Nahi Hai Kuch Bhi Agar Thaan Lijiye (Patkatha Rupantar) - Nitesh Tiwari, Bhasha Mani, Class VIII, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/14-mushkil-nahi-hai-kuch-bhi-agar-thaan-lijiye-patkatha-rupantar-nitesh-tiwari-bhasha-mani-class-viii-the-best-solution/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश यह पाठ फिल्म ‘दंगल’ का कथा रूपांतरण है, जो प्रसिद्ध भारतीय पहलवान महावीर सिंह फोगाट और उनकी बेटियों, विशेषकर गीता फोगाट के संघर्ष और सफलता की वास्तविक कहानी पर आधारित है। यहाँ कहानी का सारांश दिया गया है – सपने का नया रूप हरियाणा के बलाली गाँव के पहलवान महावीर फोगाट का सपना था कि उनका बेटा देश के लिए कुश्ती में स्वर्ण पदक जीते। लेकिन जब उनके घर चार बेटियों ने जन्म लिया, तो उन्हें लगा कि उनका सपना अधूरा रह जाएगा। एक दिन जब उनकी बेटियों, गीता और बबीता ने पड़ोस के […] - [George W. J. Sarkar (Anudit Kahani) - Anudit Kahani, Bhasha Mani, Class VIII, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/13-george-w-j-sarkar-anudit-kahani-anudit-kahani-bhasha-mani-class-viii-the-best-solution/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश डब्ल्यू. जे. सरकार द्वारा रचित कहानी ‘जॉर्ज’ प्रकृति, वन्य-जीवों और बढ़ते शहरीकरण के बीच के संघर्ष को एक धामिन साँप (मूषक सर्प) के माध्यम से दर्शाती है। जॉर्ज का परिचय और पहला आगमन लेखिका कोलकाता के एक शांत इलाके में रहती हैं, जिसके पास एक घना जंगल (वनप्रांत) है। ‘जॉर्ज’ एक दो मीटर लंबा भूरा मूषक सर्प (धामिन) है। एक प्यारी सुबह, जब लेखिका अपने बगीचे में थी, अचानक एक चूहा और उसके पीछे एक भारी पिंड (जॉर्ज) खजूर के पेड़ से धड़ाम से नीचे गिरे। वह जॉर्ज का पहला नाटकीय आगमन था। जॉर्ज […] - [Jinke Naammaatra Se Hota Hai Josh Ka Sanchar (Jeevani) - Sankalit, Bhasha Mani, Class VIII, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/12-jinke-naammaatra-se-hota-hai-josh-ka-sanchar-jeevani-sankalit-bhasha-mani-class-viii-the-best-solution/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश नेता जी सुभाष चंद्र बोस के जीवन और उनके महान कार्यों पर आधारित पाठ ‘जिनके नाममात्र से होता है जोश का संचार’ का सारांश नीचे दिया गया है – जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को ओडिसा के कटक शहर में हुआ था। उनके पिता जानकीनाथ बोस एक प्रसिद्ध वकील थे और माता प्रभावती जी एक कुलीन परिवार से थीं। सुभाष बाबू मेधावी छात्र थे और उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से बी.ए. ऑनर्स की परीक्षा उत्तीर्ण की। देशभक्ति की भावना इतनी प्रबल थी कि उन्होंने अंग्रेजों की प्रतिष्ठित आई.सी.एस. […] - [Sagar-Lahrein (Kavita) - Thakur Gopal Sharan Singh, Bhasha Mani, Class VIII, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/sagar-lahrein-kavita-thakur-gopal-sharan-singh-bhasha-mani-class-viii-the-best-solution/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश ठाकुर गोपालशरण सिंह द्वारा रचित कविता ‘सागर-लहरें’ प्रकृति के सुंदर और जीवंत रूप का वर्णन करती है। कवि ने लहरों का मानवीकरण (Personification) करते हुए उन्हें ‘जल-कन्याओं’ के रूप में चित्रित किया है। प्रथम छंद (First Stanza) सागर के उर पर नाच-नाच करती हैं लहरें मधुर – गान! जगती के मन को खींच-खींच, निज छवि के रस से सींच-सींच, जल-कन्याएँ भोली अजान, सागर के उर पर नाच-नाच, करती हैं लहरें मधुर गान! व्याख्या: कवि कहते हैं कि सागर के हृदय पर लहरें निरंतर नाच रही हैं और उनके टकराने से उत्पन्न होने वाली आवाज़ […] - [Ikkeesveen Sadi Ka Chor (Vigyan Katha) - Dr. Deshbandhu 'Shahjahanpuri', Bhasha Mani, Class VIII, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/10-ikkeesveen-sadi-ka-chor-vigyan-katha-dr-deshbandhu-shahjahanpuri-bhasha-mani-class-viii/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश यह विज्ञान कथा (Science Fiction) “इक्कीसवीं सदी का चोर” भविष्य की तकनीक और उसके दुरुपयोग पर आधारित है। इसका सारांश निम्नलिखित है – शरद के घर में रहस्यमयी चोरियाँ भविष्य की इस दुनिया में सारा काम रोबोट करते हैं। शरद के घर में भी रोबोट ही पहरेदारी और अन्य काम करते थे, फिर भी पिछले कई दिनों से कीमती सामान गायब हो रहा था। शरद को समझ नहीं आ रहा था कि चोरी कौन कर रहा है, क्योंकि कोई नौकर भी नहीं था और रोबोट-नियंत्रक (Robot Controller) भी दिन में ठीक काम कर रहा […] - [Badla To Maine Bhi Liya Tha (Sansmaran) - Sankalit, Bhasha Mani, Class VIII, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/9-badla-to-maine-bhi-liya-tha-sansmaran-sankalit-bhasha-mani-class-viii-the-best-solution/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश यह संस्मरण हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के जीवन की कुछ प्रेरक घटनाओं पर आधारित है। इसका सारांश निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है- बदला लेने का अनोखा तरीका पाठ का शीर्षक “बदला तो मैंने भी लिया था” ध्यानचंद के खेल कौशल और नैतिक बल को दर्शाता है। 1933 के एक मैच के दौरान विपक्षी खिलाड़ी ने गुस्से में आकर ध्यानचंद के सिर पर हॉकी मार दी। घायल होने के बावजूद, उन्होंने मैदान पर लौटकर उस खिलाड़ी से कहा कि वे इसका बदला लेंगे। ध्यानचंद ने उसे मारकर नहीं, बल्कि 6 गोल […] - [Keval Kuda Kachra (Sansmaranatmak Lekh) - Rajmohan Gandhi, Bhasha Mani, Class VIII, The Best Solution,](https://avinashsolutions.com/8-keval-kuda-kachra-sansmaranatmak-lekh-rajmohan-gandhi-bhasha-mani-class-viii-the-best-solution/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश राजमोहन गांधी द्वारा लिखित लेख “केवल कूड़ा-कचरा” आधुनिक जीवनशैली, बढ़ते बाज़ारवाद और उससे उत्पन्न कचरे की समस्या पर एक गंभीर प्रहार है। इस लेख का संक्षिप्त सार निम्नलिखित है – अतीत और वर्तमान की तुलना लेखक अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि पहले मध्यम वर्गीय घरों में कचरा न के बराबर होता था। सामान कागज़ के लिफ़ाफ़ों या कपड़े की थैलियों में आता था, जिन्हें दोबारा इस्तेमाल कर लिया जाता था। रसोई में कचरे के लिए एक छोटा-सा टीन का डिब्बा होता था, जिसमें केवल सब्ज़ियों के छिलके होते […] - [Gulli Danda (Kahani) - Premchand, Bhasha Mani, Class VIII, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/7-gulli-danda-kahani-premchand-bhasha-mani-class-viii-the-best-solution/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश मुंशी प्रेमचंद द्वारा रचित कहानी ‘गुल्ली-डंडा’ बचपन की मासूमियत और बड़े होने पर आए सामाजिक व पद के बदलावों का मार्मिक चित्रण करती है। यहाँ कहानी का सारांश दिया गया है – बचपन की यादें और गया की श्रेष्ठता कहानी का लेखक बचपन में अपने कस्बे में गुल्ली-डंडा खेला करता था। वह गुल्ली-डंडे को ‘सब खेलों का राजा’ मानता है क्योंकि इसमें किसी महँगे सामान की ज़रूरत नहीं होती। उसके हमजोलियों में ‘गया’ नाम का एक लड़का था, जो गुल्ली-डंडे का चैंपियन था। वह जाति और आर्थिक स्थिति में लेखक से छोटा था, लेकिन […] - [Swarg Bana Sakte Hain (Kavita) - Ramdhari Singh 'Dinkar', Bhasha Mani, Class VIII, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/6-swarg-bana-sakte-hain-kavita-ramdhari-singh-dinkar-bhasha-mani-class-viii-the-best-solution/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ द्वारा रचित कविता ‘स्वर्ग बना सकते हैं’ उनके प्रसिद्ध महाकाव्य ‘कुरुक्षेत्र’ का अंश है। इसमें भीष्म पितामह युधिष्ठिर को शांति और समानता का संदेश दे रहे हैं। प्रथम पद्यांश (First Stanza) धर्मराज यह भूमि किसी की नहीं, क्रीत है दासी, हैं जन्मना – समान परस्पर इसके सभी निवासी। सबको मुक्त प्रकाश चाहिए, सबको मुक्त समीरण, बाधा रहित विकास, मुक्त आशंकाओं से जीवन। भावार्थ – भीष्म पितामह धर्मराज युधिष्ठिर को समझाते हुए कहते हैं कि यह धरती किसी की खरीदी हुई दासी नहीं है। यहाँ रहने वाले सभी मनुष्य जन्म से […] - [Teesri Ladki (Kahani) - Surekha Panandiker, Bhasha Mani, Class VIII, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/5-teesri-ladki-kahani-surekha-panandiker-bhasha-mani-class-viii-the-best-solution/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश ‘तीसरी लड़की’ सुरेखा पाणंदीकर द्वारा लिखित एक अत्यंत प्रेरणादायक कहानी है। यह कहानी भारतीय समाज में व्याप्त लैंगिक भेदभाव (Gender Discrimination) और एक लड़की के संघर्ष व सफलता को दर्शाती है। घर में भेदभाव का माहौल कहानी की मुख्य पात्र निशा अपने माता-पिता की तीसरी बेटी है। उसके घर में उसके छोटे भाई बबलू को ‘कुलदीपक’ मानकर उसे हर सुविधा (जैसे नाश्ते में ब्रेड और महँगे अंग्रेजी स्कूल की शिक्षा) दी जाती है, जबकि निशा को रात की बची रोटियाँ खानी पड़ती हैं और घर के काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। […] - [Kaun Shrestha (Shaurya Gatha) - Based on Ravindra Jadeja's Instagram Post, Bhasha Mani, Class VIII, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/4-kaun-shrestha-shaurya-gatha-based-on-ravindra-jadejas-instagram-post-bhasha-mani-class-viii-the-best-solution/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश ‘कौन श्रेष्ठ है’ कहानी एक महत्त्वपूर्ण जीवन-दर्शन प्रस्तुत करती है जो हमें व्यावसायिक सफलता और राष्ट्रीय सेवा के बीच के अंतर को समझाती है। यह कहानी हमें सिखाती है कि सुख-सुविधाओं वाला जीवन और सरहदों पर तैनात सैनिक का जीवन दोनों ही चुनौतियों से भरे हैं, लेकिन सैनिक का त्याग और शौर्य सर्वोपरि है। 1. अस्पताल की वह मुलाकात कहानी की शुरुआत एक अस्पताल के प्रतीक्षालय (Waiting room) से होती है, जहाँ लेखिका कोरोना वैक्सीन लगवाने गई हैं। वहाँ उनके सामने दो युवक बैठे हैं। एक युवक सूट पहने लैपटॉप पर काम कर रहा […] - [Channana (Rekhachitram) - Sankalit, Bhasha Mani, Class VIII, The Best Solution,](https://avinashsolutions.com/3-channana-rekhachitram-sankalit-bhasha-mani-class-viii-the-best-solution/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश ‘चणना’ कहानी राजस्थान की पृष्ठभूमि पर आधारित एक मर्मस्पर्शी कथा है, जो एक आदिवासी किसान के अदम्य साहस, स्वाभिमान और अपनी मिट्टी के प्रति गहरे प्रेम को दर्शाती है। 1. चणना का व्यक्तित्व और सूखा चणना राजस्थान के एक छोटे से आदिवासी गाँव का निवासी है। वह शारीरिक रूप से गठा हुआ और मज़बूत है, लेकिन उसका असली बल उसका आशावादी स्वभाव है। राजस्थान में पिछले तीन-चार वर्षों से भयंकर सूखा पड़ा था, जिसके कारण गाँव के अधिकांश लोग पलायन कर चुके थे। लेकिन चणना उन गिने-चुने लोगों में से था जो अपनी धरती […] - [Hamare Padosi (Anudit Kahani) - Dr. Devika Rangachari, Bhasha Mani, Class VIII, The Best Solution](https://avinashsolutions.com/hamare-padosi-anudit-kahani-dr-devika-rangachari-bhasha-mani-class-viii-the-best-solution/): पाठ का सारांश पाठ का सारांश ‘हमारे पड़ोसी’ कहानी डॉ. देविका रंगाचारी द्वारा लिखित एक बहुत ही रोचक और शिक्षाप्रद कहानी है। यह कहानी बच्चों के मन में शिक्षकों के प्रति डर और बाद में विकसित होने वाले मधुर संबंधों को दर्शाती है। कहानी की शुरुआत और भय का माहौल कहानी की शुरुआत दो जुड़वाँ भाई-बहन, रवि और लेखिका से होती है। वे अपने बगल वाले खाली मकान में खेलते थे, जिसे वे ‘भूतहा’ मानते थे। एक दिन उस मकान में नए किरायेदार रहने आए। बच्चों को तब गहरा झटका लगा जब उन्हें पता चला कि उनके नए पड़ोसी और […] - [Chalna Hamara Kaam Hai (Kavita) - Shiv Mangal Singh 'Suman', Bhasha Mani, Class VIII, The Best Solution,](https://avinashsolutions.com/chalna-hamara-kaam-hai-kavita-shiv-mangal-singh-suman-bhasha-mani-class-viii-the-best-solution/): कविता का सारांश कविता का सारांश पद 1 – लक्ष्य प्राप्ति तक अविराम गति गति प्रबल पैरों में भरी, फिर क्यों रहूँ दर-दर खड़ा? जब आज मेरे सामने, है रास्ता इतना पड़ा। जब तक न मंज़िल पा सकूँ, तब तक मुझे न विराम है। चलना हमारा काम है।   व्याख्या – कवि कहते हैं कि जब ईश्वर ने हमारे पैरों में आगे बढ़ने की असीम शक्ति दी है, तो हमें रुकना नहीं चाहिए। हमारे सामने संभावनाओं का अनंत रास्ता खुला है। कवि का संकल्प है कि जब तक वह अपने अंतिम लक्ष्य (मंजिल) तक नहीं पहुँच जाते, तब तक वे […] - [Bhasha Mani, Class VI, The best Solution](https://avinashsolutions.com/bhasha-mani-class-vi-solutions-bhasa-mani-solutions/): 1. Itne Unche Utho (Kavita) – Dwarika Prasad Maheshwari, Bhasha Mani, Class VI, The Best Solution, इतने ऊँचे उठो (कविता) – द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी 2. Janmadin Ke Bahane (Kahani) – Neelam Rakesh, Bhasha Mani, Class VI, The Best Solution, जन्मदिन के बहाने (कहानी) – नीलम राकेश 3. Swami Ki Dadi (Kahani) – R. K. Narayan, Bhasha Mani, Class VI, The Best Solution, स्वामी की दादी (कहानी) – आर. के. नारायण 4. Kaam Ya Aaram (Lekh) – Shrimannarayan, Bhasha Mani, Class VI, The Best Solution, काम या आराम (लेख) – श्रीमन्नारायण 5. Nagrota Ka Jaanbaaz (Veer Gatha) – Maj. Gen. Shiv […] [comment]: # (Generated by Hostinger Tools Plugin)