Meri Rachnayen

उद्यम करो उद्यम….

Udyam sabhi sukhon Ki Janani

छात्र चाहे कक्षा में आए

सदा-सदा प्रथम

शिक्षक ने फिर दी सलाह

उद्यम करो उद्यम!

युवा चाहे माया आए

विपुल अधिक अधिकतम

अभिभावकों ने दी सलाह

उद्यम करो उद्यम!

रोगी चाहे नीरोगी काया

स्वास्थ्य हो उसका उत्तम

चिकित्सकों ने दी सलाह

उद्यम करो उद्यम!

दंपति चाहे कटे विपत्ति

बनें संबंध मधुरतम

शुभचिंतकों ने दी सलाह

उद्यम करो उद्यम!

सब सुख संभव इस उद्यम से

सभी गुण फीके इस शीर्ष क्रम से

मानव साफल्य की यह है कुंजी

मानव साकल्य की यह है पूँजी

दुआ, दया और भाग्य-सौभाग्य

उद्यम से पहले न आए।  

उद्यम सभी सुखों की जननी

कहती यही है माता अवनि

अविनाश रंजन गुप्ता

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