मनुष्य सामाजिक प्राणी है। वह अकेला नहीं रह सकता। उसे परिवार, मित्र, दुकानदार, डॉक्टर आदि सभी की...
Latest articles
नए दशमिक सिक्के व नाप-तोल
: 15 : नए दशमिक सिक्के व नाप-तोल अज्ञात काल से भारत में रुपये, आने, पाई आदि सिक्कों ; तोला, माशा...
भूदान यज्ञ
18 अप्रैल, 1951 का दिन था, जब द्वितीय महायुद्ध के प्रथम सत्याग्रही आचार्य विनोबा भावे ने अपने भूदान...
द्वितीय पंचवर्षीय योजना
प्रथम पंचवर्षीय योजना के निर्माण के समय ही यह स्पष्ट कर दिया गया था कि आर्थिक विकास के लिए यह तो...
भारत की औद्योगिक नीति
किसी देश की औद्योगिक नीति वहाँ की परिस्थिति से, आवश्यकताओं और आर्थिक व राजनैतिक विचारधाराओं से...
बेकारी की विकट पहेली
करीब सात-आठ वर्ष पूर्व जब आचार्य विनोबा भावे प्रथम योजना आयोग के सदस्यों से मिले थे, तब उन्होंने...
जमींदारी उन्मूलन
“जमींदारी गाड़ी के पाँचवें पहिये के समान है— अर्थात् केवल निरर्थक ही नहीं, बस अड़ंगा लगाने...
नागरिक के अधिकार व कर्त्तव्य
मानव एक सामाजिक प्राणी है। मानव और समाज का पारस्परिक संबंध अत्यंत प्राचीन काल से चला आ रहा है।...
प्रथम पंचवर्षीय योजना
किसी समय पंचवर्षीय योजना का शब्द सर्वथा अपरिचित व नया रहा होगा, किंतु आज तो इस शब्द को सभी जानते...
भारत का महान् उज्ज्वल भविष्य
एक प्राचीन उक्ति है कि देवता भी भारत में जन्म लेने के लिए तरसते थे। वस्तुतः हमारी भारत-भूमि इतनी...
राज्यों का पुनर्गठन
स्वाधीनता प्राप्ति से पहले हमारे देश की तीन बड़ी राजनैतिक समस्याएँ थीं। पहली और सबसे बड़ी समस्या यह...
स्वतंत्र भारत के दस वर्ष (1957)
एक विद्वान का कथन है कि “देश की उन्नति उस समय रुक जाती है जबकि वह पराधीनता के पाश में जकड़...

