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अरविंद गुप्ता – लेखक परिचय

अरविंद गुप्ता भारत में विज्ञान को लोकप्रिय बनाने और शैक्षिक खिलौने बनाने के लिए मशहूर हैं। वे लेखन व अनुवाद भी करते हैं। उनकी लोकप्रिय वेबसाइट arvindguptatoys.com पर खिलौनों और पुस्तकों का विशाल भंडार है। अपने काम के लिए उन्हें कई पुरस्कार मिल चुके हैं, जिनमें बच्चों में विज्ञान के प्रचार-प्रसार के लिए भारत सरकार का पहला राष्ट्रीय पुरस्कार (1988) शामिल है।

सी. वी. रमन – पाठ परिचय

डॉ. सी. वी. रमन के संक्षिप्त जीवनवृत्त में आप देखेंगे कि सीमित संसाधनों में भी महानतम कार्य किए जा सकते हैं। अपने आसपास घटने वाली घटनाओं के प्रति जिज्ञासा व उनका गहराई से अवलोकन, विश्लेषण करना वैज्ञानिकता की आवश्यक शर्त है।

सी. वी. रमन

आज वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं में अंधाधुंध पूँजी निवेश और परिष्कृत उपकरणों का बोलबाला है, परंतु हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि प्रयोगशाला में सबसे महँगा और कीमती उपकरण आज भी मनुष्य का दिमाग है। इस बात की सच्चाई का प्रमाण हमें सी. वी. रमन के जीवन से मिलता है। वे अकेले ऐसे वैज्ञानिक हैं जिन्हें भारत में विज्ञान के क्षेत्र में किए गए शोधकार्य के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। जिन अल्प विकसित उपकरणों का उन्होंने अपने शोध में उपयोग किया उनकी कीमत 200 रुपए से भी कम थी।

इस विलक्षण वैज्ञानिक का जन्म 7 नवंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली नगर में हुआ। उनके पिता भौतिक विज्ञान और गणित के व्याख्याता थे। रमन को बचपन से ही विभिन्न विषयों की पुस्तकें पढ़ने को मिलीं। उन्हें अपने पिता से संगीत का प्रेम भी मिला, जिसकी प्रकृति पर उन्होंने बाद में बुनियादी शोध किया।

रमन की प्रारंभिक शिक्षा विशाखापट्टनम में हुई। उन दिनों आयु की पाबंदी न होने के कारण उन्होंने 11 वर्ष की उम्र में ही हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी। 1902 में रमन ने प्रेसिडेंसी कॉलेज में दाखिला लिया और भौतिकी विज्ञान में प्रथम स्थान तथा स्वर्ण पदक के साथ 1904 में बी. ए. पास किया। 1907 में एम. ए. की परीक्षा में वे सर्वश्रेष्ठ छात्र घोषित किए गए। रमन का कद छोटा था, जिसने उनके लिए अनेक मुश्किलें खड़ी कीं। अक्सर उनके शिक्षक पूछते, “क्या तुम सच में इस कक्षा के छात्र हो?” महाविद्यालय की पढ़ाई समाप्त होने के बाद रमन को उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने की सलाह दी गई परंतु मद्रास में सिविल सर्जन ने जब उनकी जाँच की तो उन्हें लगा कि रमन का छोटा शरीर इंग्लैण्ड का कड़क मौसम बर्दाश्त नहीं कर पाएगा। भारत में रहकर काम करने के लिए रमन सारी जिंदगी उस डॉक्टर के ऋणी रहे।

रमन ने भौतिक विज्ञान में एम. ए. किया। उन दिनों विज्ञान पढ़ने वालों के लिए बहुत कम नौकरियाँ थीं। अन्य विकल्प खुले न होने के कारण रमन को कलकत्ता में वित्त विभाग में शासकीय नौकरी करनी पड़ी।

वित्त विभाग में नौकरी करते हुए भी भौतिकी में रमन की रुचि लगातार बनी रही। उन्होंने घर में ही एक छोटी प्रयोगशाला बनाई और वहीं प्रयोग करने लगे। एक दिन काम से लौटते समय उन्हें एक साइनबोर्ड दिखाई दिया जिस पर इंडियन एसोसिएशन फॉर कल्टिवेशन आफ साइंस (Indian Association for Cultivation of Science) लिखा था। कहा जाता है कि रमन चलती ट्राम से कूदकर वहाँ पहुँचे जहाँ उनका स्वागत अमृतलाल सरकार ने किया। इनके पिता महेन्द्रलाल सरकार ने भारतीय विज्ञान का प्रसार करने के लिए 1876 में इस संस्था की स्थापना की थी। अब रमन शाम को अपने दफ्तर से लौटकर वहाँ की प्रयोगशाला में काम करने लगे। जल्द ही वे उच्च कोटि के वैज्ञानिक शोधपत्र लिखने लगे जिनकी ओर विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित हुआ।

1917 में कलकत्ता विश्वविद्यालय के उपकुलपति आशुतोष मुखर्जी ने रमन को विश्वविद्यालय में भौतिक विज्ञान की तारकनाथ पालित चेयर स्वीकार करने का निमंत्रण दिया। रमन फूले नहीं समाए। वित्त विभाग के बहीखातों से बरी होकर अब वे अपने प्रिय विषय पर शोध करने के लिए मुक्त थे।

1921 में एक सम्मेलन में भाग लेने के लिए रमन विदेश गए। उनकी यह समुद्री यात्रा भौतिक विज्ञान के लिए बहुत लाभदायक सिद्ध हुई। वे समुद्र के गहरे नीले पानी को निहारते रहते। सागर का पानी नीला क्यों दिखता है? क्या पानी आसमान के प्रतिबिंब के कारण नीला दिखता है? क्या कोई और कारण है? रमन को एहसास हुआ कि सागर का नीलापन पानी और सूर्य के प्रकाश के अंतर्संबंध के कारण है। इस तरह जब जहाज के अन्य मुसाफिर ताश और बिंगो के खेलों में मस्त थे, तब रमन वहाँ एक जेबी वर्णक्रममापी से प्रयोगों में मगन थे और उन्होंने अलग माध्यमों में प्रकाश के प्रकीर्णन पर एक शोधपत्र लिख डाला।

भारत लौटने के बाद रमन ने इस विषय पर गंभीरता से शोध शुरू किया। उन्होंने प्रकाश की किरणों को भिन्न-भिन्न द्रवों से गुजारा और उनके प्रभाव का अध्ययन किया। अंततः 1928 में उन्होंने सिद्ध किया कि जब किसी एक रंग का प्रकाश किसी द्रव से गुजरता है तो प्रकाश के कण और द्रव के परमाणु एक दूसरे पर क्रिया करते हैं और प्रकाश को बिखेर देते हैं। बाहर निकलने वाली प्रकाश किरण का रंग आने वाली किरण से भिन्न होता है। बाहर निकलने वाली यह किरण आने वाली किरण की तुलना में ऊँचे और नीचे दोनों स्तरों की ऊर्जा की ओर मुड़ती है। यही वह सुप्रसिद्ध ‘रमन प्रभाव’ है जिस पर आगे चलकर रमन को नोबेल पुरस्कार मिला। उनकी खोज से विश्व स्तर पर वैज्ञानिक शोध में तेजी आई। इससे अलग पदार्थों की संरचना के अध्ययन में बहुत मदद मिली।

इस बुनियादी शोध के बाद रमन पर सम्मानों की झड़ी लग गई। अरनेस्ट रदरफोर्ड ने ‘रमन प्रभाव की खोज की घोषणा रॉयल सोसाइटी में की, जिसके बाद ब्रिटिश सरकार ने रमन को नाइटहुड (Knighthood) के सम्मान से नवाजा। 10 दिसम्बर 1930 को उन्हें दुनिया के सर्वोच्च पुरस्कार नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। विज्ञान के लिए नोबेल पुरस्कार पाने वाले रमन पहले एशियाई और पहले अश्वेत व्यक्ति थे। उनसे पहले रवीन्द्रनाथ ठाकुर को साहित्य के क्षेत्र में यह सम्मान मिला था। रमन के बाद उनके भांजे सुब्रह्मण्यम चन्द्रशेखर को लगभग पचास वर्ष बाद 1983 में नोबेल पुरस्कार मिला।

सदियों तक विदेशी ताकतों द्वारा शासन किए जाने के बाद इस अंतर्राष्ट्रीय गौरव से भारतीय वैज्ञानिक समाज का आत्मसम्मान बुलंद हुआ। एक भारतीय वैज्ञानिक को, जिसने सारा शोध भारत में ही रहकर किया हो, दुनिया का सबसे बड़ा सम्मान मिलना सच में बहुत गर्व की बात थी।

जुलाई 1933 में रमन को टाटा विज्ञान संस्थान (वर्तमान में भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलोर) का प्रथम भारतीय निदेशक नियुक्त किया गया। अगले 15 वर्ष रमन ने इस संस्था में गुजारे और इस दौरान उन्होंने यहाँ विश्व स्तर का भौतिक विज्ञान विभाग स्थापित किया। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर के अनेक वैज्ञानिकों को प्रेरणा और प्रशिक्षण दिया। उन्होंने क्ष-किरण विवर्तन (X-Ray Diffraction) और अपने प्रिय विषय प्रकाश एवं पदार्थ के बीच अंतर्संबंधों पर काम शुरु किया।

रमन की विज्ञान के प्रचार प्रसार में गहरी रुचि थी। वे एक ओजस्वी वक्ता थे और उन्होंने विज्ञान के भिन्न-भिन्न विषयों पर अनेक भाषण दिए। उन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में काम करने के आनंद तथा समाज के उत्थान में उसकी मुख्य भूमिका पर बल दिया। अपने लोकप्रिय व्याख्यानों में वे गूढ़ विषयों को सरल और अत्यंत रोचक रुप में प्रस्तुत करते थे, जिसे वे ‘प्रदर्शन’ कहते थे। वे दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देते थे। अपने व्याख्यान में वे अक्सर कोई जीवंत वैज्ञानिक प्रयोग करके दिखाते थे। उनका व्याख्यान “आसमान नीला क्यों होता है?” आज भी वैज्ञानिक भावना को संप्रेषित करने और उसकी पद्धति की एक अनूठी मिसाल है। रूखे तथ्यों या सूत्रों को रटकर सीखने के विषय के रूप में प्रस्तुत न करके, वे विज्ञान को चरणबद्ध प्रश्नों की एक श्रृंखला के रुप में पेश करते थे। इस तरह से वे सुव्यवस्थित तार्किकता के माध्यम से प्रकृति की कार्यप्रणाली को समझाते थे।

वे भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के संस्थापक सदस्य थेI

रमन ने वाद्ययंत्रों के ध्वनि विज्ञान (Acoustics) पर भी काम किया। अध्यारोपण गतियों के आधार पर धनुष – डोर से बजने वाले वाद्ययंत्रों के तिर्यक कंपन (Transverse Vibration of Bowed Strings on the Basic of Superposition Velocities) का सिद्धांत भी उन्होंने विकसित किया। भारतीय तालवाद्य तबला और मृदंगम् की ध्वनि के समस्वरीय स्वभाव पर शोध करने वाले वे प्रथम व्यक्ति थे। 1943 में उन्होंने एक कम्पनी शुरू की जिसका नाम था ‘ त्रावणकोर केमिकल एंड मेन्यूफैक्चरिंग कम्पनी लिमिटेड।’

1948 में सेवानिवृत्ति से पहले रमन ने बैंगलोर में खुद अपने शोध संस्थान रमन शोध संस्थान (Raman Research Institute) की स्थापना की। इस संस्थान की विशेषता यह थी कि उसकी स्थापना के लिए सारी पूँजी व्यक्तिगत दाताओं से आई। उन्होंने 1970 तक अपना वैज्ञानिक शोधकार्य जारी रखा। हमेशा की तरह रमन शोध संस्थान में उन्होंने 2 अक्टूबर 1970 को महात्मा गाँधी मेमोरियल व्याख्यान दिया। इसके बाद वे बीमार पड़ गए और 21 नवंबर को उनका देहांत हो गया।

 

सी. वी. रमन का सारांश

सी. वी. रमन एक महान भारतीय वैज्ञानिक थे, जिनका जन्म 7 नवंबर 1888 को तिरुचिरापल्ली में हुआ। उन्होंने साधारण उपकरणों से ‘रमन प्रभाव’ की खोज की, जिसके लिए 1930 में उन्हें भौतिकी में नोबेल पुरस्कार मिला। वे भारत के पहले ऐसे वैज्ञानिक थे जिन्होंने देश में रहकर शोध किया। बचपन से प्रतिभाशाली, उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में काम किया, भारतीय विज्ञान संस्थान बैंगलोर के निदेशक बने, और रमन शोध संस्थान की स्थापना की। उन्होंने प्रकाश प्रकीर्णन, संगीत ध्वनि और अन्य क्षेत्रों में योगदान दिया। विज्ञान प्रचार में सक्रिय, वे ओजस्वी वक्ता थे। 21 नवंबर 1970 को उनका निधन हुआ। उनके जीवन से सिद्ध होता है कि दिमाग सबसे महत्त्वपूर्ण उपकरण है।

शब्दार्थ

परिष्कृत – शुद्ध

प्रकीर्णन – प्रकाश का सीधी रेखा से विचलन

ट्राम – एक छोटी रेलगाड़ी जिसकी पटरियाँ सड़क पर होती हैं

अध्यारोपण – एक के ऊपर दूसरे पदार्थ को बिठाने की क्रिया

बिंगो – अंकों व कार्ड से खेले जाने वाला एक खेल

वर्णक्रममापी – एक भौतिकीय उपकरण जो प्रकाश किरण को सात रंगों में विभक्त करता है।

हिंदी शब्द

हिंदी अर्थ

अंग्रेजी अर्थ (English Meaning)

अंधाधुंध

बिना सोचे-समझे

Indiscriminate

परिष्कृत

उन्नत या विकसित

Sophisticated

विलक्षण

असाधारण या अनोखा

Extraordinary

व्याख्याता

व्याख्या करने वाला या शिक्षक

Lecturer

पाबंदी

प्रतिबंध या बंधन

Restriction

उत्तीर्ण

पास होना

Passed

स्वर्ण पदक

सोने का पदक

Gold Medal

उपकुलपति

विश्वविद्यालय के उप-कुलपति

Vice-Chancellor

निमंत्रण

आमंत्रण या बुलावा

Invitation

प्रकीर्णन

बिखरना या फैलना

Scattering

सिद्ध

प्रमाणित या साबित

Proved

क्रिया

कार्य या प्रतिक्रिया

Reaction

विवर्तन

विक्षेपण या झुकाव

Diffraction

ओजस्वी

जोशपूर्ण या तेजस्वी

Eloquent

गूढ़

गहन या गंभीर

Profound

रोचक

रुचिकर या दिलचस्प

Interesting

प्रदर्शन

दिखावा या प्रस्तुति

Demonstration

मंत्रमुग्ध

सम्मोहित या मोहित

Mesmerized

चरणबद्ध

क्रमबद्ध या चरणों में

Step-by-step

तार्किकता

तर्कसंगतता

Logic

अध्यारोपण

आरोपण या लगाना

Superposition

तिर्यक

तिरछा या आड़ा

Transverse

समस्वरीय

सामंजस्यपूर्ण ध्वनि

Harmonic

देहांत

मृत्यु या शरीर का अंत

Demise

 

पाठ से

  1. प्रयोगशाला का सबसे महँगा और कीमती उपकरण मनुष्य के दिमाग को क्यों कहा गया है?

उत्तर – प्रयोगशाला का सबसे महँगा और कीमती उपकरण मनुष्य के दिमाग को इसलिए कहा गया है क्योंकि किसी भी वैज्ञानिक शोध का आधार मनुष्य का दिमाग ही होता है। यदि दिमाग में जिज्ञासा और वैज्ञानिक सोच न हो तो महँगे उपकरण भी व्यर्थ हैं, जैसा कि सी. वी. रमन ने साबित किया जिन्होंने 200 रुपए से भी कम कीमत वाले उपकरणों से वह खोज कर दी, जिसके लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार मिला।

  1. वह कौन सी घटना थी जिसके कारण रमन ने सारी जिंदगी भारत में रहकर ही शोधकार्य किया?

उत्तर – जब रमन ने महाविद्यालय की पढ़ाई समाप्त की, तो उन्हें उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने की सलाह दी गई, परंतु मद्रास में सिविल सर्जन ने उनकी जाँच के बाद कहा कि रमन का छोटा शरीर इंग्लैण्ड का कड़क मौसम बर्दाश्त नहीं कर पाएगा। इसी घटना के कारण उन्हें भारत में ही रहना पड़ा और उन्होंने सारी जिंदगी यहीं रहकर शोधकार्य किया।

  1. रमन प्रभाव क्या है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – ‘रमन प्रभाव’ के अनुसार, जब किसी एक रंग का प्रकाश किसी द्रव से होकर गुजरता है, तो उस प्रकाश के कण और द्रव के परमाणु एक-दूसरे से क्रिया करते हैं, जिससे प्रकाश बिखर जाता है। इस प्रक्रिया में बाहर निकलने वाली प्रकाश किरण का रंग, आने वाली किरण के रंग से भिन्न (कम या अधिक ऊर्जा वाला) होता है। प्रकाश के रंग में होने वाले इसी बदलाव को ‘रमन प्रभाव’ कहते हैं।

  1. एक वैज्ञानिक होते हुए भी रमन को वित्त विभाग की नौकरी क्यों करनी पड़ी? इस नौकरी में रहते हुए भी उनका मन कहाँ लगा रहा?

उत्तर – एक वैज्ञानिक होते हुए भी रमन को वित्त विभाग की नौकरी इसलिए करनी पड़ी क्योंकि उन दिनों विज्ञान पढ़ने वालों के लिए बहुत कम नौकरियाँ उपलब्ध थीं और उनके पास कोई अन्य विकल्प खुला नहीं था। इस नौकरी में रहते हुए भी उनका मन भौतिकी (विज्ञान) में ही लगा रहा और वे अपने घर तथा ‘इंडियन एसोसिएशन फॉर कल्टिवेशन आफ साइंस’ की प्रयोगशाला में प्रयोग करते रहे।

  1. रमन की व्याख्यात्मक शैली की विशेषता क्या थी?

उत्तर – रमन की व्याख्यात्मक शैली की विशेषता यह थी कि वे अत्यंत गूढ़ और कठिन वैज्ञानिक विषयों को भी सरल और रोचक ढंग से प्रस्तुत करते थे। वे अपने व्याख्यान में जीवंत वैज्ञानिक प्रयोग करके दिखाते थे और विज्ञान को रूखे तथ्यों के बजाय चरणबद्ध प्रश्नों की एक श्रृंखला के रूप में पेश करते थे, जिससे दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते थे।

  1. अपने पिता का रमन के स्वभाव व रुचि पर कैसा प्रभाव पड़ा?

उत्तर – रमन के पिता भौतिक विज्ञान और गणित के व्याख्याता थे, जिसके कारण रमन को बचपन से ही विभिन्न विषयों की पुस्तकें पढ़ने को मिलीं और उनकी रुचि विज्ञान में जागी। इसके अतिरिक्त, उन्हें अपने पिता से संगीत का प्रेम भी मिला, जिसकी ध्वनि पर उन्होंने बाद में महत्त्वपूर्ण शोध भी किया।

  1. रमन की समुद्र यात्रा भौतिक विज्ञान के लिए लाभदायक सिद्ध हुई। ऐसा क्यों कहा गया है?

उत्तर – रमन की समुद्र यात्रा भौतिक विज्ञान के लिए लाभदायक इसलिए सिद्ध हुई क्योंकि इसी यात्रा के दौरान उन्होंने समुद्र के गहरे नीले पानी को देखा और इस प्रश्न का उत्तर खोजना शुरू किया कि ‘सागर का पानी नीला क्यों दिखता है?’ इसी जिज्ञासा के परिणामस्वरूप उन्होंने प्रकाश के प्रकीर्णन (बिखराव) पर शोधपत्र लिखा, जो आगे चलकर उनकी ‘रमन प्रभाव’ नामक महान खोज का आधार बना।

  1. अपने पिता से मिले संगीत प्रेम के आधार पर रमन ने क्या शोध किया और कौन-सा सिद्धांत विकसित किया?

उत्तर – अपने पिता से मिले संगीत प्रेम के आधार पर रमन ने वाद्ययंत्रों के ध्वनि विज्ञान (Acoustics) पर काम किया। वे भारतीय तालवाद्यों जैसे तबला और मृदंगम् की ध्वनि के समस्वरीय स्वभाव पर शोध करने वाले पहले व्यक्ति थे। साथ ही, उन्होंने ‘धनुष-डोर से बजने वाले वाद्ययंत्रों के तिर्यक कंपन’ का सिद्धांत भी विकसित किया।

 

पाठ से आगे

  1. निम्नलिखित दोनों घटनाएँ रमन के व्यक्तित्व की किन विशेषताओं को प्रकट करती हैं?

घटना एक- “जब जहाज पर अन्य मुसाफिर ताश और बिंगो के खेलों में मस्त थे, तब रमन प्रयोगों में मगन थे।”

उत्तर – घटना एक- “जब जहाज पर अन्य मुसाफिर ताश और बिंगो के खेलों में मस्त थे, तब रमन प्रयोगों में मगन थे।” उत्तर – यह घटना उनके वैज्ञानिक स्वभाव, गहरी जिज्ञासा और अपने काम के प्रति अत्यधिक समर्पण को दर्शाती है। वे मनोरंजन के बजाय खाली समय का उपयोग भी अपने वैज्ञानिक प्रयोगों और चिंतन में लगाते थे।

घटना दो – “इंडियन एसोसिएशन फॉर कल्टिवेशन ऑफ साइंस का साइन बोर्ड देखकर रमन चलती ट्राम से कूदकर वहाँ पहुँच गए।”

उत्तर – घटना दो – “इंडियन एसोसिएशन फॉर कल्टिवेशन ऑफ साइंस का साइन बोर्ड देखकर रमन चलती ट्राम से कूदकर वहाँ पहुँच गए।” उत्तर – यह घटना विज्ञान के प्रति उनके गहरे जुनून, लगन और तत्परता को दर्शाती है। वे विज्ञान से जुड़े किसी भी अवसर को तुरंत पकड़ लेते थे और उसके लिए जोखिम उठाने को भी तैयार थे।

  1. सी. वी. रमन छोटे कद के थे, और इससे उन्हें कई मुश्किलों का सामना भी करना पड़ा, लेकिन यह उनकी सफलता में बाधक नहीं बना। क्या आप मानते हैं कि किसी प्रकार की शारीरिक चुनौती आगे बढ़ने में बाधक नहीं होती है। तर्क सहित अपनी बात रखिए।

उत्तर – हाँ, मैं यह मानता हूँ कि शारीरिक चुनौती किसी व्यक्ति के आगे बढ़ने में बाधक नहीं होती है। सी. वी. रमन का छोटा कद उनकी सफलता को नहीं रोक पाया क्योंकि उनकी असली ताकत उनकी मानसिक शक्ति, प्रतिभा और दृढ़ इच्छाशक्ति थी। यदि व्यक्ति के पास प्रतिभा, लगन और आत्मविश्वास हो, तो वह किसी भी शारीरिक कमी को पार कर सफलता प्राप्त कर सकता है, जैसा कि हमने कई अन्य महान हस्तियों के जीवन में भी देखा है।

  1. वित्त विभाग में नौकरी करते हुए भी सी. वी. रमन विज्ञान के शोध पर कार्य करते रहे, जबकि आजकल ज्यादातर लोग अपनी रुचि के कार्यक्षेत्र में न जाकर केवल अच्छी नौकरी की ओर भागते हैं। इस संबंध में आपके क्या विचार हैं?

उत्तर – मेरे विचार में, सी. वी. रमन का जीवन यह प्रेरणा देता है कि व्यक्ति को अपनी आजीविका (नौकरी) और अपनी रुचि (Passion) के बीच संतुलन बनाना चाहिए। आजकल लोग आर्थिक सुरक्षा के लिए अच्छी नौकरियों को प्राथमिकता देते हैं, जो एक हद तक आवश्यक भी है, लेकिन रमन ने यह सिद्ध किया कि नौकरी करते हुए भी अपने असली जुनून को जीवित रखा जा सकता है। जो लोग केवल नौकरी के पीछे भागते हैं, वे शायद धन कमा लें, लेकिन सच्ची संतुष्टि और बड़ी उपलब्धि अक्सर अपनी रुचि के काम को करने से ही मिलती है।

  1. कुछ ऐसे भारतीय वैज्ञानिकों के बारे में बताइए जिन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में बड़ा योगदान दिया है।

उत्तर – सी. वी. रमन के अतिरिक्त, विज्ञान के क्षेत्र में बड़ा योगदान देने वाले कुछ अन्य प्रमुख भारतीय वैज्ञानिक हैं – होमी जहाँगीर भाभा (भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक), जगदीश चंद्र बोस (पौधों में संवेदनशीलता का पता लगाया), सत्येन्द्र नाथ बोस (बोस-आइंस्टाइन सांख्यिकी), और ए. पी. जे. अब्दुल कलाम (मिसाइल प्रौद्योगिकी में योगदान के लिए ‘मिसाइल मैन’ कहा गया)।

  1. रमन की विज्ञान के प्रचार-प्रसार में गहरी रुचि थी। आपकी किस क्षेत्र में सबसे ज्यादा रुचि है, और उसके विकास में आप क्या योगदान दे सकते हैं?

उत्तर – मेरी रुचि कंप्यूटर विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में है। मैं इस क्षेत्र में अपनी शिक्षा और कौशल का विकास करके ऐसे सॉफ्टवेयर या एप्लिकेशन बनाना चाहूँगा जो ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद कर सकें, ताकि तकनीक का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँच सके।

भाषा के बारे में

  1. जब हम किसी के बीते हुए कल के बारे में वर्णन करते हैं, तो सामान्यतः वाक्यों में भूतकालिक क्रियाओं, सहायक क्रियाओं का प्रयोग करते हैं। उदाहरण के लिए- रमन का कद छोटा था। रमन की विज्ञान के प्रचार-प्रसार में गहरी रुचि थी।आदि।

अब आप अपने बचपन के किसी साथी या अध्यापक के बारे में लिखिए, जो अब आपके साथ नहीं हैं। देखिए कि उनके बारे में लिखते समय आप किस प्रकार की क्रियाओं, सहायक क्रियाओं का इस्तेमाल करते हैं।

उत्तर – मेरे प्राथमिक विद्यालय में एक अध्यापक श्रीमान शर्मा जी थे। वे हमें गणित पढ़ाते थे। उनका स्वभाव बहुत ही सरल और स्नेही था। वे हमेशा कक्षा में मुस्कुराते हुए प्रवेश करते थे और कभी किसी छात्र पर गुस्सा नहीं होते थे। यदि कोई सवाल हमें समझ नहीं आता था, तो वे उसे बार-बार समझाते थे। वे कहते थे कि गणित एक खेल है। उनकी यही बात हमें बहुत प्रेरित करती थी। आज वे हमारे साथ नहीं हैं, लेकिन उनकी सिखाई बातें मुझे हमेशा याद रहती हैं।

  1. (क) महाशब्द का प्रयोग एक उपसर्ग के रूप में किया जाता हैं, जैसे महाराज, महाविद्यालय, महासागर आदि ऐसे अन्य शब्दों की सूची बनाइए।

उत्तर – ‘महा’ उपसर्ग से बने अन्य शब्द निम्नलिखित हैं – महात्मा, महादेव, महापुरुष, महारानी, महाकाव्य, महाद्वीप, महामानव, महामंत्री, महासागर, महाराज, महाविद्यालय।

(ख) इस तरह से सोचिए-

राजशब्द का अर्थ है- शासन पर जब इसमें महाउपसर्ग जुड़ता है तो प्राप्त शब्द महाराजका अर्थ एक ऐसा व्यक्ति जो उस पूरे शासन को चलाता है अर्थात् राजा। इसी तरह अपने बनाए गए शब्दों को देखिए और चर्चा कीजिए कि महाके जुड़ने से क्या-क्या बदलाव होते हैं।

उत्तर – ‘महा’ उपसर्ग का अर्थ होता है ‘महान’ या ‘बड़ा’। जब यह किसी शब्द के आगे जुड़ता है, तो यह उस शब्द के अर्थ को और अधिक विशाल, श्रेष्ठ या महत्त्वपूर्ण बना देता है।

उदाहरण 1 – ‘राज’ (शासन) + ‘महा’ = ‘महाराज’ (महान राजा)।

उदाहरण 2 – ‘त्मा’ (आत्मा) + ‘महा’ = ‘महात्मा’ (महान आत्मा वाला व्यक्ति)।

उदाहरण 3 – ‘द्वीप’ (भूमि का हिस्सा) + ‘महा’ = ‘महाद्वीप’ (बहुत बड़ा द्वीप या भू-भाग)। इस प्रकार ‘महा’ उपसर्ग शब्द को एक उच्च स्तर प्रदान करता है।

 

योग्यता विस्तार

  1. नोबेल पुरस्कारक्या है? इसकी विस्तृत जानकारी पुस्तकालय से खोजकर लाइये और कक्षा में चर्चा कीजिए।

उत्तर – नोबेल पुरस्कार विश्व का सबसे प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय सम्मान है। इसकी स्थापना स्वीडन के प्रसिद्ध वैज्ञानिक और डाइनामाइट के आविष्कारक अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत के आधार पर वर्ष 1901 में की गई थी। यह पुरस्कार प्रतिवर्ष उन व्यक्तियों या संस्थाओं को दिया जाता है जिन्होंने भौतिकी, रसायन विज्ञान, चिकित्सा, साहित्य और शांति के क्षेत्र में मानव जाति के लिए सबसे उत्कृष्ट योगदान दिया हो। बाद में, 1968 में, स्वीडन के केंद्रीय बैंक द्वारा अर्थशास्त्र के क्षेत्र में भी नोबेल पुरस्कार की स्थापना की गई।

  1. अब तक किन-किन भारतीयों को नोबेल पुरस्कार मिल चुका है। इन्हें कब व किस क्षेत्र में योगदान के लिए यह पुरस्कार मिला है? पुस्तकालय से जानकारी जुटाइए।

उत्तर – उत्तर – अब तक नोबेल पुरस्कार पाने वाले प्रमुख भारतीय (या भारतीय मूल के व्यक्ति) निम्नलिखित हैं –

रवीन्द्रनाथ ठाकुर – साहित्य (1913) – उन्हें उनकी कृति ‘गीतांजलि’ के लिए यह सम्मान मिला।

सी. वी. रमन – भौतिकी (1930) – उन्हें ‘रमन प्रभाव’ की खोज के लिए यह पुरस्कार मिला।

हर गोबिंद खुराना – चिकित्सा (1968) – (भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक) आनुवंशिक कोड की व्याख्या के लिए।

मदर टेरेसा – शांति (1979) – (अल्बानियाई मूल की भारतीय नागरिक) मानवता की सेवा के लिए।

सुब्रह्मण्यम चन्द्रशेखर – भौतिकी (1983) – (भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक) तारों की संरचना और विकास पर उनके शोध के लिए।

अमर्त्य सेन – अर्थशास्त्र (1998) – कल्याणकारी अर्थशास्त्र में उनके योगदान के लिए।

वेंकटरामन रामकृष्णन – रसायन विज्ञान (2009) – (भारतीय मूल के ब्रिटिश-अमेरिकी नागरिक) राइबोसोम की संरचना और कार्यप्रणाली के अध्ययन के लिए।

कैलाश सत्यार्थी – शांति (2014) – बच्चों के अधिकारों के लिए उनके संघर्ष हेतु (मलाला यूसुफजई के साथ संयुक्त रूप से)।

अभिजीत बनर्जी – अर्थशास्त्र (2019) – (भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक) वैश्विक गरीबी उन्मूलन पर उनके प्रयोगात्मक दृष्टिकोण के लिए।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

सी. वी. रमन का जन्म कब और कहाँ हुआ था?

a) 7 नवंबर 1888, विशाखापट्टनम

b) 7 नवंबर 1888, तिरुचिरापल्ली

c) 21 नवंबर 1970, बैंगलोर

d) 10 दिसंबर 1930, कलकत्ता

उत्तर – b) 7 नवंबर 1888, तिरुचिरापल्ली 

 

रमन के पिता का पेशा क्या था?

a) डॉक्टर

b) भौतिक विज्ञान और गणित के व्याख्याता

c) वकील

d) व्यापारी

उत्तर – b) भौतिक विज्ञान और गणित के व्याख्याता 

 

रमन ने हाईस्कूल की परीक्षा कितनी उम्र में उत्तीर्ण की?

a) 15 वर्ष

b) 11 वर्ष

c) 18 वर्ष

d) 13 वर्ष

उत्तर – b) 11 वर्ष 

 

रमन को उच्च शिक्षा के लिए विदेश न जाने की सलाह क्यों दी गई?

a) धन की कमी के कारण

b) छोटे कद और कमजोर स्वास्थ्य के कारण

c) परिवार की जिम्मेदारी के कारण

d) सरकारी नौकरी के कारण

उत्तर – b) छोटे कद और कमजोर स्वास्थ्य के कारण 

 

रमन ने अपनी पहली नौकरी कहाँ की?

a) कलकत्ता विश्वविद्यालय में

b) वित्त विभाग में

c) भारतीय विज्ञान संस्थान में

d) रमन शोध संस्थान में

उत्तर – b) वित्त विभाग में 

 

इंडियन एसोसिएशन फॉर कल्टिवेशन आफ साइंस की स्थापना किसने की?

a) अमृतलाल सरकार

b) महेन्द्रलाल सरकार

c) आशुतोष मुखर्जी

d) अरनेस्ट रदरफोर्ड

उत्तर – b) महेन्द्रलाल सरकार 

 

1917 में रमन को कलकत्ता विश्वविद्यालय में कौन-सी चेयर मिली?

a) तारकनाथ पालित चेयर

b) रॉयल सोसाइटी चेयर

c) नोबेल चेयर

d) टाटा चेयर

उत्तर – a) तारकनाथ पालित चेयर 

 

रमन की समुद्री यात्रा के दौरान उन्होंने किस विषय पर विचार किया?

a) संगीत की ध्वनि

b) समुद्र के पानी का नीला रंग

c) क्ष-किरण विवर्तन

d) वाद्ययंत्रों का कंपन

उत्तर – b) समुद्र के पानी का नीला रंग 

 

रमन प्रभावकी खोज कब हुई?

a) 1921

b) 1928

c) 1930

d) 1933

उत्तर – b) 1928 

 

रमन को नोबेल पुरस्कार कब मिला?

a) 1928

b) 1930

c) 1983

d) 1970

उत्तर – b) 1930 

 

रमन पहले एशियाई थे जिन्हें नोबेल पुरस्कार मिला किस क्षेत्र में?

a) साहित्य

b) विज्ञान

c) शांति

d) अर्थशास्त्र

उत्तर – b) विज्ञान 

 

रमन को ब्रिटिश सरकार ने किस सम्मान से नवाजा?

a) नाइटहुड

b) स्वर्ण पदक

c) पद्म भूषण

d) भारत रत्न

उत्तर – a) नाइटहुड 

 

1933 में रमन को किस संस्थान का निदेशक बनाया गया?

a) कलकत्ता विश्वविद्यालय

b) टाटा विज्ञान संस्थान (भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलोर)

c) रमन शोध संस्थान

d) इंडियन एसोसिएशन फॉर कल्टिवेशन आफ साइंस

उत्तर – b) टाटा विज्ञान संस्थान (भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलोर) 

 

रमन ने किस विषय पर लोकप्रिय व्याख्यान दिया?

a) आसमान नीला क्यों होता है?

b) संगीत की उत्पत्ति

c) गणित के सूत्र

d) रसायन शास्त्र

उत्तर – a) आसमान नीला क्यों होता है? 

 

रमन भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के क्या थे?

a) संस्थापक सदस्य

b) अध्यक्ष

c) सचिव

d) सदस्य

उत्तर – a) संस्थापक सदस्य 

 

रमन ने किस वाद्ययंत्र की ध्वनि पर शोध किया?

a) तबला और मृदंगम्

b) गिटार

c) पियानो

d) ड्रम

उत्तर – a) तबला और मृदंगम् 

 

रमन ने 1943 में कौन-सी कंपनी शुरू की?

a) ट्रावणकोर केमिकल एंड मैन्युफैक्चरिंग कंपनी लिमिटेड

b) टाटा इंडस्ट्रीज

c) रिलायंस

d) हिंदुस्तान लीवर

उत्तर – a) ट्रावणकोर केमिकल एंड मैन्युफैक्चरिंग कंपनी लिमिटेड 

 

रमन शोध संस्थान की स्थापना कब हुई?

a) 1933

b) 1948

c) 1970

d) 1921

उत्तर – b) 1948 

 

रमन का निधन कब हुआ?

a) 2 अक्टूबर 1970

b) 21 नवंबर 1970

c) 7 नवंबर 1888

d) 10 दिसंबर 1930

उत्तर – b) 21 नवंबर 1970 

 

रमन के शोध में उपयोग किए गए उपकरणों की कीमत कितनी थी?

a) 200 रुपए से कम

b) 1000 रुपए

c) 5000 रुपए

d) 100 रुपए

उत्तर – a) 200 रुपए से कम 

 

अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

  1. प्रश्न – सी. वी. रमन का पूरा नाम क्या था?
    उत्तर – सी. वी. रमन का पूरा नाम चंद्रशेखर वेंकटरामन था।
  2. प्रश्न – सी. वी. रमन का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
    उत्तर – सी. वी. रमन का जन्म 7 नवंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली नगर में हुआ था।
  3. प्रश्न – रमन के पिता का पेशा क्या था?
    उत्तर – रमन के पिता भौतिक विज्ञान और गणित के व्याख्याता थे।
  4. प्रश्न – रमन को संगीत का प्रेम किससे मिला?
    उत्तर – रमन को संगीत का प्रेम अपने पिता से मिला था।
  5. प्रश्न – रमन ने हाईस्कूल की परीक्षा किस उम्र में पास की?
    उत्तर – रमन ने 11 वर्ष की उम्र में ही हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी।
  6. प्रश्न – रमन ने किस कॉलेज में प्रवेश लिया था?
    उत्तर – रमन ने प्रेसिडेंसी कॉलेज में प्रवेश लिया था।
  7. प्रश्न – रमन ने किस विषय में बी. ए. किया और क्या प्राप्त किया?
    उत्तर – रमन ने भौतिकी में बी. ए. किया और प्रथम स्थान के साथ स्वर्ण पदक प्राप्त किया।
  8. प्रश्न – रमन को विदेश न भेजने का कारण क्या था?
    उत्तर – डॉक्टर को लगा कि रमन का छोटा शरीर इंग्लैंड के ठंडे मौसम को सहन नहीं कर पाएगा, इसलिए उन्हें विदेश नहीं भेजा गया।
  9. प्रश्न – रमन ने एम. ए. किस विषय में किया?
    उत्तर – रमन ने भौतिक विज्ञान में एम. ए. किया।
  10. प्रश्न – रमन ने प्रारंभिक नौकरी कहाँ की थी?
    उत्तर – रमन ने प्रारंभिक नौकरी कलकत्ता के वित्त विभाग में की थी।
  11. प्रश्न – रमन ने अपनी प्रयोगशाला कहाँ बनाई थी?
    उत्तर – रमन ने अपने घर में ही एक छोटी प्रयोगशाला बनाई थी।
  12. प्रश्न – रमन को कौन-सी संस्था का साइनबोर्ड देखकर प्रेरणा मिली?
    उत्तर – उन्हें “इंडियन एसोसिएशन फॉर कल्टिवेशन ऑफ साइंस” का साइनबोर्ड देखकर प्रेरणा मिली।
  13. प्रश्न – इस संस्था की स्थापना किसने की थी?
    उत्तर – इस संस्था की स्थापना महेन्द्रलाल सरकार ने की थी।
  14. प्रश्न – रमन को कलकत्ता विश्वविद्यालय में कौन-सी चेयर की पेशकश की गई थी?
    उत्तर – रमन को तारकनाथ पालित चेयर की पेशकश की गई थी।
  15. प्रश्न – रमन ने समुद्र के पानी के नीलेपन पर क्या सोचा?
    उत्तर – उन्होंने सोचा कि सागर का नीलापन पानी और सूर्य के प्रकाश के अंतर्संबंध के कारण होता है।
  16. प्रश्न – रमन ने जहाज पर रहते हुए कौन-सा उपकरण प्रयोग किया था?
    उत्तर – रमन ने जहाज पर रहते हुए एक जेबी वर्णक्रममापी (Pocket Spectroscope) का प्रयोग किया था।
  17. प्रश्न – रमन प्रभाव क्या है?
    उत्तर – रमन प्रभाव वह प्रक्रिया है जिसमें प्रकाश किसी द्रव से गुजरते समय परमाणुओं से टकराकर अपना रंग और ऊर्जा बदल लेता है।
  18. प्रश्न – रमन ने ‘रमन प्रभाव’ की खोज कब की?
    उत्तर – रमन ने ‘रमन प्रभाव’ की खोज 1928 में की थी।
  19. प्रश्न – ‘रमन प्रभाव’ की घोषणा किसने की थी?
    उत्तर – ‘रमन प्रभाव’ की घोषणा प्रसिद्ध वैज्ञानिक अरनेस्ट रदरफोर्ड ने रॉयल सोसाइटी में की थी।
  20. प्रश्न – रमन को नोबेल पुरस्कार कब मिला?
    उत्तर – रमन को 10 दिसम्बर 1930 को नोबेल पुरस्कार मिला।
  21. प्रश्न – रमन किस क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले एशियाई थे?
    उत्तर – रमन भौतिकी के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले एशियाई और पहले अश्वेत व्यक्ति थे।
  22. प्रश्न – रमन के बाद उनके भांजे को कब नोबेल पुरस्कार मिला?
    उत्तर – रमन के भांजे सुब्रह्मण्यम चन्द्रशेखर को 1983 में नोबेल पुरस्कार मिला।
  23. प्रश्न – रमन को टाटा विज्ञान संस्थान में कब नियुक्त किया गया?
    उत्तर – रमन को जुलाई 1933 में टाटा विज्ञान संस्थान का निदेशक नियुक्त किया गया।
  24. प्रश्न – रमन ने किन विषयों पर आगे शोध किया?
    उत्तर – रमन ने क्ष-किरण विवर्तन और प्रकाश एवं पदार्थ के अंतर्संबंधों पर शोध किया।
  25. प्रश्न – रमन अपने व्याख्यानों को क्या कहा करते थे?
    उत्तर – रमन अपने व्याख्यानों को ‘प्रदर्शन’ कहा करते थे।
  26. प्रश्न – रमन का प्रसिद्ध व्याख्यान कौन-सा था?
    उत्तर – रमन का प्रसिद्ध व्याख्यान “आसमान नीला क्यों होता है?” था।
  27. प्रश्न – रमन किस अकादमी के संस्थापक सदस्य थे?
    उत्तर – रमन भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के संस्थापक सदस्य थे।
  28. प्रश्न – उन्होंने वाद्ययंत्रों के किस पहलू पर शोध किया?
    उत्तर – उन्होंने वाद्ययंत्रों के ध्वनि विज्ञान (Acoustics) पर शोध किया।
  29. प्रश्न – रमन ने अपना शोध संस्थान कब और कहाँ स्थापित किया?
    उत्तर – रमन ने 1948 में बैंगलोर में ‘रमन शोध संस्थान’ की स्थापना की।
  30. प्रश्न – सी. वी. रमन का निधन कब हुआ?
    उत्तर – सी. वी. रमन का निधन 21 नवंबर 1970 को हुआ।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

  1. प्रश्न – सी. वी. रमन के बचपन और शिक्षा के बारे में बताइए।

उत्तर – रमन का जन्म 1888 में तिरुचिरापल्ली में हुआ। उनके पिता व्याख्याता थे, जिससे उन्हें पुस्तकें और संगीत का प्रेम मिला। उन्होंने 11 वर्ष में हाईस्कूल पास किया, प्रेसिडेंसी कॉलेज से बी.ए. और एम.ए. में प्रथम स्थान प्राप्त किया। छोटे कद के कारण शिक्षक अक्सर संदेह करते थे।

  1. प्रश्न – रमन की सरकारी नौकरी और विज्ञान में रुचि कैसे बनी रही?

उत्तर – एम.ए. के बाद नौकरियों की कमी से रमन वित्त विभाग में कलकत्ता में काम करने लगे। घर में प्रयोगशाला बनाई और इंडियन एसोसिएशन फॉर कल्टिवेशन आफ साइंस में शाम को शोध किया। अमृतलाल सरकार से मिलकर उच्च शोधपत्र लिखे, जिससे विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित हुआ।

  1. प्रश्न – रमन को कलकत्ता विश्वविद्यालय में कैसे नियुक्ति मिली?

उत्तर – 1917 में उपकुलपति आशुतोष मुखर्जी ने रमन को तारकनाथ पालित चेयर के लिए आमंत्रित किया। वे खुशी से सहमत हुए और वित्त विभाग छोड़कर पूर्णकालिक शोध शुरू किया। इससे उन्हें भौतिकी में स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर मिला।

  1. प्रश्न – रमन की समुद्री यात्रा का वैज्ञानिक महत्त्व क्या था?

उत्तर – 1921 में सम्मेलन के लिए विदेश जाते समय रमन ने समुद्र के नीले रंग पर विचार किया। उन्होंने जेबी वर्णक्रममापी से प्रयोग किए और प्रकाश प्रकीर्णन पर शोधपत्र लिखा। यह यात्रा ‘रमन प्रभाव’ की दिशा में महत्त्वपूर्ण साबित हुई।

 

  1. प्रश्न – रमन प्रभावक्या है और इसका महत्त्व क्या है?

उत्तर – रमन प्रभाव में एक रंग का प्रकाश द्रव से गुजरते समय बिखरता है, जिससे निकलने वाली किरण का रंग और ऊर्जा बदल जाती है। 1928 में खोजा गया, इससे पदार्थों की संरचना अध्ययन में मदद मिली और वैश्विक शोध में तेजी आई।

  1. प्रश्न – रमन को मिले सम्मानों का वर्णन कीजिए।

उत्तर – 1930 में नोबेल पुरस्कार मिला, वे पहले एशियाई और अश्वेत विज्ञान नोबेल विजेता थे। ब्रिटिश सरकार ने नाइटहुड दिया। रदरफोर्ड ने रॉयल सोसाइटी में घोषणा की। इससे भारतीय वैज्ञानिकों का आत्मसम्मान बढ़ा।

  1. प्रश्न – भारतीय विज्ञान संस्थान में रमन का योगदान क्या था?

उत्तर – 1933 में निदेशक बनकर 15 वर्ष तक काम किया। विश्व स्तर का भौतिक विज्ञान विभाग स्थापित किया, वैज्ञानिकों को प्रशिक्षित किया। क्ष-किरण विवर्तन और प्रकाश-पदार्थ संबंध पर शोध किया, संस्थान को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुँचाया।

  1. प्रश्न – रमन के व्याख्यानों की विशेषता क्या थी?

उत्तर – वे ओजस्वी वक्ता थे, गूढ़ विषयों को सरल और रोचक बनाते थे। जीवंत प्रयोग दिखाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध करते थे। विज्ञान को चरणबद्ध प्रश्नों की श्रृंखला के रूप में पेश कर तार्किकता सिखाते थे, जैसे “आसमान नीला क्यों?”

  1. प्रश्न – रमन ने संगीत और वाद्ययंत्रों पर क्या शोध किया?

उत्तर – उन्होंने वाद्ययंत्रों की ध्वनि विज्ञान पर काम किया। अध्यारोपण गतियों पर आधारित तिर्यक कंपन का सिद्धांत विकसित किया। तबला और मृदंगम् की समस्वरीय ध्वनि पर प्रथम शोध किया, संगीत को वैज्ञानिक दृष्टि से समझाया।

  1. प्रश्न – रमन शोध संस्थान की स्थापना और उनके अंतिम दिन कैसे थे?

उत्तर – 1948 में सेवानिवृत्ति से पहले बैंगलोर में स्थापित किया, पूँजी दाताओं से आई। 1970 तक शोध जारी रखा। 2 अक्टूबर को गांधी मेमोरियल व्याख्यान दिया, फिर बीमार पड़े और 21 नवंबर को देहांत हुआ।

 

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

  1. प्रश्न – सी. वी. रमन के जीवन से हमें क्या सीख मिलती है, विशेषकर वैज्ञानिक उपकरणों के संदर्भ में?

उत्तर – रमन के जीवन से सिद्ध होता है कि वैज्ञानिक सफलता के लिए महंगे उपकरण जरूरी नहीं, बल्कि मानव दिमाग सबसे कीमती है। उन्होंने 200 रुपए से कम के साधारण उपकरणों से ‘रमन प्रभाव’ खोजा, जो नोबेल पुरस्कार दिलाया। आज की पूँजी-केंद्रित प्रयोगशालाओं में यह याद दिलाता है कि रचनात्मकता और जिज्ञासा से अल्प संसाधनों में भी महान शोध संभव है, जो भारतीय वैज्ञानिकों को प्रेरित करता है।

  1. प्रश्न – रमन की शिक्षा और करियर की शुरुआत में आई चुनौतियों का वर्णन कीजिए।

उत्तर – रमन ने 11 वर्ष में हाईस्कूल पास किया, प्रेसिडेंसी कॉलेज से बी.ए. और एम.ए. में स्वर्ण पदक जीता। छोटे कद के कारण शिक्षक संदेह करते थे। विदेश शिक्षा के लिए स्वास्थ्य जांच में असफल हुए, लेकिन भारत रहकर आभारी रहे। विज्ञान नौकरियों की कमी से वित्त विभाग में काम किया, फिर भी घरेलू प्रयोगशाला और एसोसिएशन में शोध जारी रखा, जो उनकी दृढ़ता दिखाता है।

  1. प्रश्न – रमन प्रभावकी खोज प्रक्रिया और उसके वैश्विक प्रभाव को समझाइए।

उत्तर – समुद्री यात्रा में समुद्र के नीले रंग से प्रेरित होकर रमन ने प्रकाश प्रकीर्णन पर शोध शुरू किया। 1928 में सिद्ध किया कि प्रकाश द्रव से गुजरते समय बिखरता है, रंग और ऊर्जा बदलती है। इससे पदार्थ संरचना अध्ययन में क्रांति आई, वैश्विक शोध तेज हुआ। नोबेल पुरस्कार ने भारत को गौरव दिया, एशियाई वैज्ञानिकों को प्रेरणा मिली और विज्ञान में नए द्वार खुले।

  1. प्रश्न – रमन के विज्ञान प्रचार और व्याख्यानों की भूमिका क्या थी?

उत्तर – रमन विज्ञान प्रचार में गहरी रुचि रखते थे, ओजस्वी वक्ता के रूप में गूढ़ विषयों को सरल बनाते थे। जीवंत प्रयोगों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करते, विज्ञान को चरणबद्ध प्रश्नों की श्रृंखला के रूप में पेश कर तार्किकता सिखाते। “आसमान नीला क्यों?” जैसे व्याख्यान वैज्ञानिक पद्धति की मिसाल हैं। इससे समाज में विज्ञान का उत्थान हुआ और युवाओं को प्रेरित किया।

  1. प्रश्न – रमन के बाद के करियर और योगदान का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

उत्तर – 1933 में भारतीय विज्ञान संस्थान के निदेशक बने, भौतिक विभाग स्थापित किया, वैज्ञानिकों को प्रशिक्षित किया। क्ष-किरण विवर्तन और प्रकाश-पदार्थ पर शोध किया। वाद्ययंत्र ध्वनि पर सिद्धांत विकसित किया, 1943 में कंपनी शुरू की। 1948 में रमन शोध संस्थान स्थापित किया, 1970 तक शोध जारी रखा। राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के संस्थापक थे, उनके योगदान से भारतीय विज्ञान मजबूत हुआ।

 

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