Ticket – Album (Kahani) – NCERT Class IX R3 Reva Hindi Book, The Best Solutions, Sundara Ramaswamy

टिकट – अलबम

अब राजप्पा को कोई नहीं पूछता। आजकल सब के सब नागराजन को घेरे रहते। “नागराजन घमंडी हो गया है”, राजप्पा सारे लड़कों में कहता फिरता। पर लड़के भला कहाँ उसकी बातों पर ध्यान देते! नागराजन के मामा जी ने सिंगापुर से एक अलबम भिजवाया था। वह लड़कों को दिखाया करता। सुबह पहली घंटी के बजने तक सभी लड़के नागराजन को घेरकर अलबम देखा करते। आधी छुट्टी के वक्त भी उसके आस-पास लड़कों का जमघट लगा रहता। कई लोग टोलियों में उसके घर तक हो आए। नागराजन शांतिपूर्वक सभी को अपना अलबम दिखाता, पर किसी को हाथ नहीं लगाने देता। अलबम को गोद में रख लेता और एक-एक पन्ना पलटता, लड़के बस देखकर खुश होते।

और तो और कक्षा की लड़कियाँ भी उस अलबम को देखने के लिए उत्सुक थीं। पार्वती लड़कियों की अगुवा बनी और अलबम माँगने आई। लड़कियों में वही तेज-तर्रार मानी जाती थी। नागराजन ने कवर चढ़ाकर अलबम उसे दिया। शाम तक लड़कियाँ अलबम देखती रहीं फिर उसे वापस कर दिया।

अब राजप्पा के अलबम को कोई पूछने वाला नहीं था। वाकई उसकी शान अब घट गई थी। राजप्पा के अलबम की, लड़कों में काफी तारीफ रही थी। मधुमक्खी की तरह उसने एक-एक करके टिकट जमा किए थे। उसे तो बस एक यही धुन सवार थी। सुबह आठ बजे वह घर से निकल पड़ता। टिकट जमा करने वाले सारे लड़कों के चक्कर लगाता। दो ऑस्ट्रेलिया के टिकटों के बदले एक फिनलैंड का टिकट लेता। दो पाकिस्तान के बदले एक रूस का। बस शाम, जैसे ही घर लौटता, बस्ता कोने में पटककर अम्मा से चबेना लेकर निकर की जेब में भर लेता और खड़े-खड़े कॉफी पीकर निकल जाता। चार मील दूर अपने दोस्त के घर से कनाडा का टिकट लेने पगडंडियों में होकर भागता। स्कूल भर में उसका अलबम सबसे बड़ा था। सरपंच के लड़के ने उसके अलबम को पच्चीस रुपए में खरीदना चाहा था, पर राजप्पा नहीं माना। ‘घमंडी कहीं का’, राजप्पा बड़बड़ाया था। फिर उसने पलटकर तीखा जवाब दिया।

पर अब? कोई उसके अलबम की बात तक नहीं करता। और तो और अब सब उसके अलबम की तुलना नागराजन के अलबम से करने लगे हैं। सब कहते हैं राजप्पा का अलबम फिसड्डी है।

पर राजप्पा ने नागराजन के अलबम को देखने की इच्छा कभी नहीं प्रकट की। लेकिन जब दूसरे लड़के उसे देख रहे होते तो वह नीची आँखों से देख लेता। सचमुच नागराजन का अलबम बेहद प्यारा था। पर राजप्पा के पास जितने टिकट थे, उतने नागराजन के अलबम में नहीं थे। पर खुद उसका अलबम ही कितना प्यारा था। उसे छू लेना ही कोई बड़ी बात थी। इस तरह का अलबम यहाँ थोड़ी मिलेगा। अलबम के पहले पृष्ठ पर मोती जैसे अक्षरों में उसके मामा ने लिख भेजा था

ए. एम. नागराजन

‘इस अलबम को चुराने वाला बेशर्म है। ऊपर लिखे नाम को कभी देखा है? यह अलबम मेरा है। जब तक घास हरी है और कमल लाल, सूरज जब तक पूर्व से उगे और पश्चिम में छिपे, उस अनंत काल तक के लिए यह अलबम मेरा है, रहेगा।’

लड़कों ने इसे अपने अलबम में उतार लिया। लड़कियों ने झट कापियों और किताबों में टीप लिया।

“तुम लोग यह नकल क्यों करते हो? नकलची कहीं के”, राजप्पा ने लड़कों को घुड़की दी। सब चुप रहे पर कृष्णन से नहीं रहा गया।

“जा, जा। जलता है, ईर्ष्यालु कहीं का।”

“मैं काहे को जलूँ? मेरा अलबम उसके अलबम से कहीं बड़ा है।” राजप्पा ने शान बघारी। “अरे, उसके पास जो टिकटें हैं, वह हैं कहीं तेरे पास? सब क्यों? बस एक इंडोनेशिया का टिकट दिखा दो। अरे, पानी भरोगे, हाँ।” कृष्णन ने छेड़ा।

“पर मेरे पास जो टिकट है, वह कहाँ है उसके पास?” राजप्पा ने फिर ललकारा। “उसके पास जो टिकट है, वही दिखा दो।” कृष्णन भी कम नहीं था।

“ठीक है, दस रुपए की शर्त। मेरे वाले टिकट दिखा दो।”

“तुम्हारा अलबम कूड़ा है।” कृष्णन चीखा, “हाँ, हाँ कूड़ा।” लड़के जैसे कोरस गाने लगे। राजप्पा को लगा, अपने अलबम के बारे में बातें करना फालतू है। उसने कितनी मेहनत और लगन से टिकट बटोरे हैं। सिंगापुर से आए इस एक पार्सल ने नागराजन को एक ही दिन में मशहूर कर दिया। पर दोनों में कितना अंतर है! ये लड़के क्या समझेंगे!

राजप्पा मन-ही-मन कुढ़ रहा था। स्कूल जाना अब खलने लगा था और लड़कों के सामने जाने में शर्म आने लगी। आमतौर पर शनिवार और रविवार को टिकट की खोज में लगा रहता, परंतु अब घर-घुसा हो गया था। दिन में कई बार अलबम को पलटता रहता। रात को लेट जाता। सहसा जाने क्या सोचकर उठता, ट्रंक खोलकर अलबम निकालता और एक बार पूरा देख जाता। उसे अलबम से चिढ़ होने लगी थी। उसे लगा, अलबम वाकई कूड़ा हो गया है।

उस दिन शाम उसने जैसे तय कर लिया था, वह नागराजन के घर गया। अब कोई कितना अपमान सहे! नागराजन के हाथ अचानक एक अलबम लगा है, बस यही ना। वह क्या जाने टिकट कैसे जमा किए जाते हैं। एक-एक टिकट की क्या कीमत होती है, वह भला क्या समझे ! सोचता होगा टिकट जितना बड़ा होगा, वह उतना ही कीमती होगा। या फिर सोचता होगा, बड़े देश का टिकट कीमती होगा। वह भला क्या समझे!

उसके पास जितने भी फालतू टिकट हैं, उन्हें टरका कर, उससे अच्छे टिकट झाड़ लेगा। कितनों को तो उसने यूँ ही उल्लू बनाया है। कितनी चालबाजी करनी पड़ती है। नागराजन भला किस खेत की मूली है?

राजप्पा नागराजन के घर पहुँचकर ऊपर गया। चूँकि वह अक्सर आया-जाया करता था, सो किसी ने नहीं टोका। ऊपर पहुँचकर वह नागराजन की मेज के पास पड़ी कुर्सी पर बैठ गया। कुछ देर बाद नागराजन की बहन कामाक्षी ऊपर आई।

“भैया शहर गया है। अरे हाँ, तुमने भैया का अलबम देखा?” उसने पूछा।

“हूँ”, राजप्पा को हाँ कहने में हेकड़ी हो रही थी।

“बहुत सुंदर अलबम है ना? सुना है स्कूल भर में किसी के भी पास इतना बड़ा अलबम नहीं है।”

“तुमसे किसने कहा?”

“भैया ने।”

वह कुढ़ गया।

“बड़े से क्या मतलब हुआ? आकार में बड़ा हुआ तो अलबम बड़ा हो गया?” उसकी चिड़चिड़ाहट साफ थी।

कामाक्षी कुछ देर तक वहीं रही। फिर नीचे चली गई। राजप्पा मेज पर बिखरी किताबों को टटोलने लगा। अचानक उसका हाथ दराज के ताले से टकरा गया। उसने ताले को खींचकर देखा। बंद था, क्यों न उसे खोलकर देख लिया जाए। मेज पर से उसने चाबी ढूँढ़ निकाली।

सीढ़ियों के पास जाकर उसने एक बार झाँककर देखा। फिर जल्दी में दराज खोली। अलबम ऊपर ही रखा हुआ था। पहला पृष्ठ खोला। उन वाक्यों को उसने दुबारा पढ़ा। उसका दिल तेजी से धड़कने लगा। अलबम को झट कमीज के नीचे खोंस लिया और दराज बंद कर दिया। सीढ़ियाँ उतरकर घर की ओर भागा।

घर जाकर सीधा पुस्तक की अलमारी के पास गया और पीछे की ओर अलबम छिपा दिया। उसने बाहर आकर झाँका। पूरा शरीर जैसे जलने लगा था। गला सूख रहा था और चेहरा तमतमाने लगा था।

रात आठ बजे अपू आया। हाथ-पाँव हिलाकर उसने पूरी बात कह सुनाई।

“सुना तुमने, नागराजन का अलबम खो गया। हम दोनों शहर गए हुए थे। लौटकर देखा तो अलबम गायब!”

राजप्पा चुप रहा। उसने अपू को किसी तरह टाला। उसके जाते ही उसने झट कमरे का दरवाजा भेड़ लिया और अलमारी के पीछे से अलबम निकालकर देखा। उसे फिर छिपा दिया। डर था कहीं कोई देख न ले।

रात में खाना नहीं खाया। पेट जैसे भरा हुआ था। सारा घर चिंतित हो गया। उसका चेहरा भयानक हो गया था।

रात, उसने सोने की कोशिश की पर नींद नहीं आई। अलबम सिरहाने तकिए के नीचे रखकर सो गया।

सुबह अपू दुबारा आया। राजप्पा तब भी बिस्तर पर बैठा था। अपू सुबह नागराजन के घर होकर आया था। “कल तुम उसके घर गए थे?” अपू ने पूछा।

राजप्पा की साँस जैसे ऊपर की ऊपर और नीचे की नीचे रह गई। फिर सिर हिला दिया। वह जिस तरह चाहे सोच ले।

“कामाक्षी ने कहा था कि हमारे जाने के बाद खाली तुम वहाँ आए थे।” अपू बोला। राजप्पा को समझते देर नहीं लगी कि अब सब उस पर शक करने लगे हैं।

“कल रात से नागराजन लगातार रोए जा रहा है। उसके पापा शायद पुलिस को खबर दें।” अपू ने फिर कहा।

राजप्पा फिर भी चुप रहा।

“उसके पापा डी.एस.पी. के दफ्तर में ही तो काम करते हैं। बस वह पलक झपक दें और पुलिस की फौज हाजिर।” अपू जैसे आग में घी डाल रहा था। यह तो भला हुआ कि अपू का भाई उसे ढूँढ़ता हुआ आ गया और अपू चलता बना।

राजप्पा के पापा दफ्तर चले गए थे। बाहर का किवाड़ बंद था। राजप्पा अभी तक बिस्तर पर बैठा हुआ था। आधा घंटा गुजर गया और वह उसी तरह बैठा रहा।

तभी बाहर की साँकल खटकी।

‘पुलिस’, राजप्पा बुदबुदाया।

भीतर साँकल लगी थी। दरवाजा खटकने की आवाज तेज हो गई। राजप्पा ने तकिए के नीचे से अलबम उठाया और ऊपर भागा। अलमारी के पीछे छिपा दे? नहीं। पुलिस ने अगर तलाशी ली तो पकड़ा जाएगा। अलबम को कमीज के नीचे छिपाकर वह नीचे आ गया। बाहर का दरवाजा अब भी बज रहा था।

“कौन है? अरे दरवाजा क्यों नहीं खोलता?” अम्मा भीतर से चिल्लाईं। थोड़ी देर और हुई तो अम्मा खुद ही उठकर चली आएँगी।

राजप्पा पिछवाड़े की ओर भागा। जल्दी से बाथरूम में घुसकर दरवाजा बंद कर लिया। अम्मा ने अँगीठी पर गर्म पानी की देगची चढ़ा रखी थी। उसने अलबम को अँगीठी में डाल दिया। अलबम जलने लगा। कितने प्यारे टिकट थे। राजप्पा की आँखों में आँसू आ गए।

तभी अम्मा की आवाज आई, “जल्दी से आ तो नहाकर नागराजन तुझे ढूँढ़ता हुआ आया है।” राजप्पा ने निकर उतार दी और गीला तौलिया लपेटकर बाहर आ गया। कपड़े बदलकर वह ऊपर गया। नागराजन कुर्सी पर बैठा हुआ था। उसे देखते ही बोला, “मेरा अलबम खो गया है यार।” उसका चेहरा उतरा हुआ था। काफी रोकर आया था शायद।

“कहाँ रखा था तुमने?” राजप्पा ने पूछा।

“शायद दराज में। शहर से लौटा तो गायबा”

नागराजन की आँखों में आँसू आ गए। राजप्पा से चेहरा बचाकर उसने आँखें पोंछ लीं। “रो मत यार।” राजप्पा ने उसे पुचकारा। वह फफक-फफक कर रो दिया।

राजप्पा झट नीचे उतरकर गया। एक मिनट में वह ऊपर नागराजन के सामने था। उसके हाथ में उसका अपना अलबम था।

“लो यह रहा मेरा अलबम। अब इसे तुम रख लो। ऐसे क्यों देख रहे हो। मजाक नहीं कर रहा। सच कहता हूँ, इसे अब तुम रख लो।”

“बहला रहे हो यार।”

नागराजन को जैसे यकीन नहीं आया।

“नहीं यार। सचमुच तुमको दे रहा हूँ। रख लो।” राजप्पा भला अपना अलबम उसे दे दे! कैसा चमत्कार है! नागराजन को अब भी यकीन नहीं आ रहा था। पर राजप्पा अपनी बात बार-बार दोहरा रहा था। उसका गला भर आया था।

“ठीक है, मैं इसे रख लेता हूँ। पर तुम क्या करोगे?”

“मुझे नहीं चाहिए।”

“क्यों, तुम्हें एक भी टिकट नहीं चाहिए?”

“नहीं।”

“पर तुम कैसे रहोगे बगैर किसी टिकट के?”

“रोता क्यों है यार!”

“ले, इस अलबम को तू ही रख ले। इतनी मेहनत की है तूने।” नागराजन बोला। “नहीं, तुम रख लो। लेकर चले जाओ। जाओ, चले जाओ यहाँ से।” वह चीखा और फूट-फूटकर रो दिया।

नागराजन की समझ में कुछ नहीं आया। वह अलबम लेकर नीचे उतर गया।

कमीज से आँखें पोंछता हुआ राजप्पा भी नीचे उत्तर आया। दोनों साथ-साथ दरवाजे तक आए।

“बहुत-बहुत धन्यवाद। मैं घर चलूँ?” नागराजन सीढ़ियाँ उतरने लगा।

“सुनो राजू”, राजप्पा ने पुकारा। नागराजन ने उसे पलटकर देखा। “अलबम दे दो। मैं आज रात जी भरकर इसे देखना चाहता हूँ। कल सुबह तुम्हें दे जाऊँगा।”

“ठीक है।” नागराजन ने उसे अलबम लौटा दी और चला गया।

राजप्पा ऊपर आया। उसने दरवाजा बंद कर लिया और अलबम को छाती से लगाकर फूट-फूटकर रो दिया।

– सुंदरा रामस्वामी (तमिल से अनुवाद  – सुमति अय्यर)

टिकट-अलबम – शब्दार्थ

शब्द (Word)

हिंदी अर्थ (Meaning in Hindi)

अंग्रेजी अर्थ (Meaning in English)

जमघट

लोगों की भीड़, इकट्ठा होना

Crowd / Gathering

तेज-तर्रार

बहुत चालाक और हाज़िरजवाब

Sharp / Smart

अगुवा

नेता, आगे चलने वाला

Leader / Pioneer

चबेना

भुने हुए चने या अनाज जो चबाकर खाए जाते हैं

Roasted snacks (like gram/peanuts)

पगडंडियों

खेतों या जंगलों के बीच का पतला रास्ता

Narrow path / Trail

फिसड्डी

पीछे रहने वाला, बेकार

Laggard / Useless / Inferior

टीप लेना

नकल कर लेना (लिख लेना)

To copy / To jot down

घुड़की

डाँट, धमकी

Threat / Reprimand

शान बघारना

अपनी तारीफ खुद करना, डींग मारना

To boast / To show off

कुढ़ना

मन ही मन ईर्ष्या या दुख से जलना

To fret / To feel jealous and resentful

घर-घुसा

हमेशा घर में ही घुसा रहने वाला

Stay-at-home / Recluse

हेकड़ी

अकड़, घमंड

Arrogance / Bossiness

खोंस लेना

कपड़े में छिपाकर अटका लेना

To tuck in

तमतमाना

गुस्से या डर से चेहरा लाल हो जाना

To flush (with anger or fear)

साँकल

कुंडी, दरवाजे की चेन

Chain / Door latch

पिछवाड़े

घर के पीछे का हिस्सा

Backyard

देगची

पानी गर्म करने या खाना पकाने का बर्तन

Cauldron / Cooking pot

पुचकारना

प्यार से समझाना, सांत्वना देना

To comfort / To soothe

टिकट-अलबम – महत्त्वपूर्ण सीख

ईर्ष्या का दुष्परिणाम – हमें दूसरों की सफलता या वस्तुओं से ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए। ईर्ष्या व्यक्ति के मन को अशांत कर देती है और उसे गलत काम करने के लिए उकसाती है, जिसका परिणाम केवल दुख और पछतावा होता है।

परिश्रम और लगन का महत्त्व – राजप्पा ने अपना अलबम अपनी कड़ी मेहनत, लगन और मीलों पैदल चलकर बनाया था, जबकि नागराजन को अलबम मुफ्त में मिल गया था। कहानी सिखाती है कि स्वयं की मेहनत से बनाई गई चीज़ का महत्त्व हमेशा अधिक होता है।

चोरी और झूठ से डर व मानसिक तनाव – राजप्पा ने अलबम तो चुरा लिया, लेकिन चोरी के कारण वह इतना डर गया कि उसका खाना-पीना और नींद सब हराम हो गई। गलत काम करने से इंसान हमेशा डरा हुआ और मानसिक तनाव में रहता है।

पश्चात्ताप और प्रायश्चित – अपनी गलती का अहसास होने पर राजप्पा ने अपनी सबसे प्रिय वस्तु टिकट-अलबम नागराजन को देकर अपनी गलती का प्रायश्चित किया। यह सिखाता है कि अगर गलती हो जाए, तो उसे सुधारने का प्रयास करना चाहिए।

भावनात्मक लगाव – राजप्पा का अलबम को जलते देख रोना और अंत में अपना अलबम नागराजन को देते समय छाती से लगाकर रोना, यह दर्शाता है कि जिस चीज़ के लिए हम मेहनत करते हैं, उससे हमारा गहरा भावनात्मक लगाव हो जाता है।

बातचीत के लिए

  1. पाठ में बच्चे किस वस्तु को संगृहीत करने में रुचि रखते हैं?

उत्तर – पाठ में बच्चे विभिन्न देशों के ‘डाक टिकट’ संगृहीत करने में रुचि रखते हैं।

  1. राजप्पा और नागराजन की तरह क्या आप लोग भी किसी वस्तु का संग्रह करते हैं?

उत्तर – हाँ, मैं अलग-अलग तरह के सुंदर पेन, पुराने सिक्के और कुछ बच्चे रंग-बिरंगे कंचे इकट्ठा करने का शौक रखते हैं।

  1. आपको राजप्पा और नागराजन में से किसका अलबम अच्छा लगा और क्यों?

उत्तर – मुझे राजप्पा का अलबम ज्यादा अच्छा लगा क्योंकि उसने वह अलबम अपनी कड़ी मेहनत और लगन से एक-एक टिकट खोजकर बनाया था, जबकि नागराजन को वह बना-बनाया मिल गया था।

  1. जब आप अपनी प्रिय वस्तु किसी को देते हैं तो कैसा अनुभव करते हैं?

उत्तर – जब हम अपनी कोई प्रिय वस्तु किसी को देते हैं, तो हमें थोड़ी उदासी और दुख होता है, लेकिन अगर वह किसी अच्छे दोस्त की खुशी के लिए दी जाए, तो मन को संतोष भी मिलता है।

 

मेरी समझ से

नीचे दिए गए प्रश्नों का सबसे उपयुक्त उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा () बनाइए।

  1. राजप्पा को किसका शौक था?

(क) चित्रकारी करने का

(ख) क्रिकेट खेलने का

(ग) कहानी लिखने का

(घ) डाक टिकटें जमा करने का

उत्तर – (घ) डाक टिकटें जमा करने का

  1. नागराजन का अलबम किस कारण प्रसिद्ध था?

(क) वह रंग-बिरंगा था।

(ख) उसमें दुर्लभ टिकटें थीं।

(ग) वह बहुत बड़ा था।

(घ) वह नया था।

उत्तर – (ख) उसमें दुर्लभ टिकटें थीं।

  1. ‘टिकट – अलबम’ पाठ में राजप्पा को कौन-सी धुन सवार थी?

(क) कक्षा में प्रथम स्थान लाने की

(ख) टिकट इकट्ठा करने की

(ग) नए दोस्त बनाने की

(घ) संगीत सीखने की

उत्तर – (ख) टिकट इकट्ठा करने की

  1. राजप्पा नागराजन का अलबम क्यों नहीं देखना चाहता था?

(क) ईर्ष्यावश

(ख) लोभवश

(ग) संकोचवश

(घ) क्रोधवश

उत्तर – (क) ईर्ष्यावश

  1. लेखक ने राजप्पा की तुलना मधुमक्खी के छत्ते से क्यों की?

(क) वह सबसे बहुत मीठा बोलता था।

(ख) उसका स्वभाव डंक मारने जैसा था।

(ग) उसे शहद खाना बहुत पसंद था।

(घ) उसने बहुत परिश्रम से एक-एक टिकट एकत्र किया था।

उत्तर – (घ) उसने बहुत परिश्रम से एक-एक टिकट एकत्र किया था।

 

सोचिए और लिखिए

  1. राजप्पा के स्वभाव में अचानक क्या परिवर्तन आया?

उत्तर – जब से नागराजन का नया अलबम आया, लड़कों ने राजप्पा को पूछना बंद कर दिया। इससे राजप्पा चिड़चिड़ा, ईर्ष्यालु और हमेशा घर में घुसा रहने वाला हो गया।

  1. राजप्पा ने नागराजन का अलबम क्यों चुराया?

उत्तर – राजप्पा नागराजन के अलबम की लोकप्रियता से जलने लगा था। वह अपने अलबम का अपमान सह नहीं पाया, इसलिए जलन और गुस्से में उसने अलबम चुरा लिया।

  1. राजप्पा और नागराजन दोनों के टिकट इकट्ठा करने के तरीकों में क्या अंतर था? आप किसे सही मानते हैं?

उत्तर – राजप्पा ने मीलों पैदल चलकर, कड़ी मेहनत से एक-एक टिकट इकट्ठा किया था। जबकि नागराजन के मामा ने उसे सिंगापुर से बना-बनाया अलबम भेज दिया था। मैं राजप्पा के तरीके को सही मानता हूँ क्योंकि स्वयं की मेहनत से बनाई गई चीज़ का महत्त्व ज्यादा होता है।

  1. यदि अपू राजप्पा को पुलिस आने की बात न बताता तो राजप्पा क्या कदम उठा सकता था?

उत्तर – अगर अपू पुलिस का डर न दिखाता, तो शायद राजप्पा डरता नहीं और अलबम को अँगीठी में जलाकर नष्ट नहीं करता। वह उसे कहीं छिपाए रखता या शायद बाद में चुपचाप वापस रख आता।

  1. कहानी के अंत में राजप्पा ने अपना अलबम नागराजन को क्यों दे दिया? क्या उसका यह कदम सही था?

उत्तर – अलबम चुराने और उसे जलाने के बाद राजप्पा को बहुत पछतावा हो रहा था। अपने गलती का प्रायश्चित करने के लिए उसने अपना अलबम नागराजन को दे दिया। हाँ, अपनी गलती सुधारने के लिए उसका यह कदम सही था।

 

भाषा की ओर

संज्ञा और सर्वनाम

  1. रेखांकित शब्द कहानी में किसके लिए प्रयोग किए गए हैं? पहचानकर लिखिए-

पर अब? कोई उसके अलबम की बात तक नहीं करता। -> (राजप्पा के लिए)

हम दोनों शहर गए हुए थे। -> (नागराजन और उसकी बहन कामाक्षी/या अपू के लिए – कहानी के प्रसंगानुसार अपू और नागराजन)

अरे हाँ, तुमने भैया का अलबम देखा? उसने पूछा। -> (राजप्पा के लिए) (कामाक्षी के लिए)

वह अलबम लेकर नीचे उतर गया। -> (नागराजन के लिए)

ठीक है, मैं इसे रख लेता हूँ। पर तुम क्या करोगे? -> (राजप्पा के लिए)

 

मुहावरे कहानी से

  1. नीचे दिए गए मुहावरों का प्रयोग कहानी में किया गया है। कहानी में इन्हें खोजकर इनका प्रयोग समझिए। अब इनका अर्थ लिखकर वाक्यों में प्रयोग कीजिए—

मुहावरा           अर्थ             वाक्य प्रयोग

दिल पिघलना (दया आना) – भिखारी की हालत देखकर मेरा दिल पिघल गया।

भनक पड़ना (पहले ही पता चल जाना/सुनाई देना) – चोरों को पुलिस के आने की भनक पड़ गई थी।

फूट-फूटकर रोना (बहुत ज़ोर से रोना) – खिलौना टूटने पर बच्चा फूट-फूटकर रोने लगा।

गला भर आना (दुख या भावुकता से आवाज़ रुकना) – बेटे को विदेश जाते देख माँ का गला भर आया।

आग में घी डालना (क्रोध या झगड़े को और बढ़ाना) – दो दोस्तों की लड़ाई में रोहन ने पुरानी बातें कहकर आग में घी डालने का काम किया।

चेहरा उतरना (उदास होना) – परीक्षा में कम अंक आने पर राजू का चेहरा उतर गया।

शान बघारना (डींग मारना/दिखावा करना) – नया फोन आते ही मोहित सबके सामने शान बघारने लगा।

 

  1. कहानी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इनमें विशेषण शब्दों को पहचानकर उन्हें रेखांकित कीजिए—

नागराजन घमंडी हो गया है।

लड़कियों में वही तेज-तर्रार मानी जाती थी।

बहुत सुंदर अलबम है ना?

अम्मा ने अँगीठी पर गर्म पानी की देगची चढ़ा रखी थी।

राजप्पा का चेहरा भयानक हो गया था।

 

एक से अनेक

नागराजन अलबम को गोद में रख लेता और एक-एक पन्ना पलटता, लड़के बस देखकर खुश होते।

  1. जब एक हो तो ‘लड़का’ शब्द का प्रयोग किया जाता है और अनेक हों तो ‘लड़के’। नीचे दिए गए एकवचन शब्दों के बहुवचन रूप लिखिए-

एकवचन    बहुवचन

लड़का – लड़के

लड़की – लड़कियाँ

टिकट – टिकटें (या टिकटों)

पगडंडी – पगडंडियाँ

किताब – किताबें

सीढ़ी – सीढ़ियाँ

 

बात पर बल देना

  1. कहानी के इन वाक्यों में नीचे दिए गए शब्दों का प्रयोग करते हुए रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए और वाक्य में इनके प्रभाव को समझिए-

(तो तक भी ही)

आधी छुट्टी के वक्त भी उसके आस-पास लड़कों का जमघट लगा रहता।

कामाक्षी कुछ देर तक वहीं रही।

उसका अलबम तो (या भी) कितना प्यारा था।

जैसे ही वह घर लौटता, बस्ता कोने में पटककर निकल जाता।

 

शब्दों की बात

थोड़ी देर और हुई तो अम्मा खुद ही उठकर चली आएँगी।

(क) मैं अपनी माँ को मम्मी या माँ कहकर बुलाता हूँ।

(ख) अन्य भाषाओं में – अम्मी (उर्दू), आई (मराठी/कोंकणी), मदर/मॉम (अंग्रेजी), अम्मा (दक्षिण भारतीय भाषाएँ)।

सृजन

विद्यालय में आयोजित की जाने वाली दोहा गायन प्रतियोगिता के लिए विद्यार्थियों को आमंत्रित करते हुए एक सूचना पत्र तैयार कीजिए।

सृजन (सूचना लेखन)

डीएवी पब्लिक स्कूल, बोलानी

सूचना

दोहा गायन प्रतियोगिता का आयोजन

दिनांक – 10 अगस्त, 2026

सभी विद्यार्थियों को सूचित किया जाता है कि विद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा 20 अगस्त 2026 को विद्यालय के सभागार में एक ‘दोहा गायन प्रतियोगिता’ का आयोजन किया जा रहा है। जो विद्यार्थी इस प्रतियोगिता में भाग लेना चाहते हैं, वे अपना नाम 15 अगस्त तक अपने कक्षा अध्यापक को लिखवा दें। सांस्कृतिक सचिव

अविनाश रंजन गुप्ता

पाठ से आगे

राजप्पा ने ईर्ष्या में आकर नागराजन का अलबम चुरा लिया था। आपके विचार से ईर्ष्या मनुष्य को किस ओर ले जाती है? इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए?

उत्तर – ईर्ष्या मनुष्य को मानसिक पतन, चोरी, झूठ और अपराध की ओर ले जाती है। इससे बचने के लिए हमें अपनी चीजों से संतुष्ट रहना चाहिए और दूसरों की सफलता पर जलने के बजाय उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।

“पछतावा ही सबसे बड़ा प्रायश्चित है।” राजप्पा के संदर्भ में इस कथन पर कक्षा में चर्चा कीजिए।

उत्तर – राजप्पा ने ईर्ष्या में चोरी की, लेकिन जब उसे अपनी गलती का गहरा पछतावा हुआ, तो उसने अपनी सबसे प्यारी चीज़ अपना अलबम देकर प्रायश्चित किया। सच्चा पछतावा इंसान को अंदर से शुद्ध कर देता है।

यदि आप राजप्पा के स्थान पर होते और नागराजन का अलबम देखकर आपको ईर्ष्या होती तो आप अपनी इस भावना पर कैसे काबू पाते?

उत्तर – मैं नागराजन के अलबम की तारीफ करता, उससे दोस्ती करता और अपने अलबम को और बेहतर बनाने के लिए मेहनत करता, न कि उससे जलन रखता।

इस कहानी को कक्षा में नाटक के रूप में प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर – छात्र इसे अपने स्तर पर पूरा करें।

अगर कक्षा के विद्यार्थी नागराजन के अलबम के आते ही उसकी ओर न चले जाते तो भी क्या वही स्थिति होती? चर्चा कीजिए।

उत्तर – तो राजप्पा के मन में उपेक्षा और ईर्ष्या की भावना पैदा ही नहीं होती। वह सामान्य रहता और शायद कभी नागराजन का अलबम चुराने की गलती नहीं करता।

 

खोजबीन

नीचे दी गई एनसीईआरटी की आधिकारिक यू-ट्यूब इंटरनेट कड़ियों (लिंक्स) का प्रयोग करके आप इस पाठ के बारे में और अधिक जान समझ सकते हैं-

पाठ का ऑडियो लिंक

https://www.youtube.com/watch?v=Xj4MaUwqnQI

“कंचा’ कहानी का ऑडियो लिंक

https://www.youtube.com/watch?v=zoZTyuYuJAk

 

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