Author - हिंदीभाषा

Prerak Prasang

पटाचारा का दुख

श्रावस्ती के नगरसेठ की पुत्री थी। किशोरवय होने पर वह अपने घरेलू नौकर के प्रेम में पड़ गई। जब उसके...

Prerak Prasang

गाँधी जी का रुमाल

हरिजन प्रवास के समय एक बार गाँधी जी का रुमाल काम की भीड़ में पिछले पड़ाव पर छूट गया। शायद किसी ने...

Prerak Prasang

दिल न टूट

बाबा फरीद एक उच्च कोटि के फकीर हो गए हैं। उनके लिए एक बुढ़िया जलेबी का प्रसाद ले गई। बाबा उस दिन...

Prerak Prasang

शिक्षा का महत्व

एक बार महाराष्ट्र के विख्यात संत गाडगे जी महाराज कहीं जा रहे थे। रास्ते में उन्होंने देखा कि एक...

Prerak Prasang

सत्शिष्य

भगवान बुद्ध ने एक बार घोषणा की कि “अब महानिर्वाण का समय नजदीक आ रहा है। धर्मसंघ के जो सेनापति हैं...

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